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इकोनॉमी को डिमांड का बूस्ट, FY2027 में भारत की वृद्धि दर अनुमान से ऊपर जा सकती है


नई दिल्ली। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टैनली ने अपनी ताजा रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर आशावाद जताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, उच्च आवृत्ति वाले आर्थिक संकेतक मजबूत बने हुए हैं, जो यह संकेत देते हैं कि घरेलू मांग में लगातार सुधार हो रहा है। ऐसे माहौल में वित्त वर्ष 2027 के लिए 6.5 प्रतिशत की अनुमानित वृद्धि दर में ऊपर की ओर संशोधन संभव है। रिपोर्ट में कहा गया है कि व्यापक आर्थिक स्थिरता-जैसे नियंत्रित मुद्रास्फीति, संतुलित राजकोषीय स्थिति और निवेश में सुधार-नीतिगत समर्थन के साथ विकास को गति दे सकती है। यानी ग्रोथ की कहानी सिर्फ उम्मीदों पर नहीं, ठोस आंकड़ों पर टिकी है।

बाहरी मांग और निर्यात में सुधार की उम्मीद

मॉर्गन स्टैनली ने बाहरी मोर्चे पर भी सकारात्मक संकेत देखे हैं। खासकर वस्तु निर्यात (मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट) में सुधार की संभावना जताई गई है। हालिया महीनों में वैश्विक शुल्क दरों में कमी आई है, जो पहले 50 प्रतिशत तक पहुंच गई थीं। इसके अलावा भारत द्वारा कई मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) सफलतापूर्वक पूरे किए जाने से निर्यात के नए अवसर खुल सकते हैं। यह संकेत देता है कि भारत की ग्रोथ अब केवल घरेलू खपत पर निर्भर नहीं रहेगी, बल्कि वैश्विक मांग से भी सहारा मिलेगा।

नई जीडीपी सीरीज से अधिक सटीक तस्वीर


सरकार ने जीडीपी गणना का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है। संशोधित आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में वास्तविक जीडीपी और सकल मूल्य वर्धन (GVA) दोनों 7.8 प्रतिशत रहे। पूरे वित्त वर्ष 2026 के लिए वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत आंकी गई है, जो पुराने आधार वर्ष के अनुमान 7.4 प्रतिशत से अधिक है।

नए आधार वर्ष के तहत असंगठित क्षेत्र, डिजिटल इकोनॉमी, जीएसटी संग्रह, ई-वाहन आंकड़े और सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली (PFMS) जैसे नए डेटा स्रोतों को शामिल किया गया है। दोहरी अपस्फीति जैसी उन्नत पद्धतियों और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुधारों से अब वृद्धि दर का अनुमान अधिक सटीक माना जा रहा है।

आगे क्या संकेत?


मॉर्गन स्टैनली का मानना है कि यदि मौजूदा नीति समर्थन और मांग का रुझान बना रहता है, तो भारत उभरती अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज बढ़ने वालों में शामिल रह सकता है। घरेलू खपत, निजी निवेश और निर्यात-तीनों का संतुलित योगदान भारत को वित्त वर्ष 2027 में अनुमान से बेहतर प्रदर्शन की दिशा में ले जा सकता है।

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