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89 की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए धर्मेंद्र, अब सात समंदर पार मिला बड़ा सम्मान; हेमा मालिनी ने पहली बार साझा किया पूरे परिवार का दर्द।


नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी विरासत और यादें आज भी करोड़ों दिलों में जिंदा हैं। 24 नवंबर 2025 को 89 वर्ष की आयु में उनके निधन ने पूरे देश को शोक में डुबो दिया था। हाल ही में लंदन में आयोजित 79वें BAFTA अवॉर्ड्स के ‘इन मेमोरियम’ सेगमेंट में जब उन्हें श्रद्धांजलि दी गई तो यह न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि पूरे भारत के लिए गौरव का क्षण बन गया। धर्मेंद्र इस साल इस प्रतिष्ठित मंच पर सम्मानित होने वाले एकमात्र भारतीय कलाकार थे। इस भावुक मौके पर उनकी पत्नी और ‘ड्रीम गर्ल’ हेमा मालिनी ने पहली बार विस्तार से अपनी भावनाएं व्यक्त कीं और उन अफवाहों पर भी विराम लगाया जो लंबे समय से देओल परिवार के रिश्तों को लेकर उड़ रही थीं।

हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत के दौरान हेमा मालिनी काफी भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र सिर्फ एक अभिनेता नहीं बल्कि एक प्रेरणा थे जिनके प्रशंसक दुनिया के हर कोने में मौजूद हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि धर्मेंद्र के बिना जीवन की कल्पना करना मुश्किल है और कई बार वह उन्हें याद कर रो पड़ती हैं। हेमा ने बताया कि धर्मेंद्र को उन्हें और उनकी बेटियों को डांस करते देखना बेहद पसंद था और वह हमेशा उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से फिट रहने के लिए प्रोत्साहित करते थे। उनके घर के स्टाफ से लेकर हर सहयोगी आज भी ‘साहब’ की कमी महसूस करता है जो इस बात का प्रमाण है कि वह एक बेहतरीन इंसान भी थे।

सबसे महत्वपूर्ण बात हेमा मालिनी ने परिवार के बीच कथित ‘अनबन’ को लेकर कही। पिछले कुछ समय से यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि हेमा और उनकी बेटियों ईशा-अहाना के संबंध सनी देओल बॉबी देओल और प्रकाश कौर के परिवार से ठीक नहीं हैं। लेकिन हाल ही में ‘बॉर्डर 2’ की स्क्रीनिंग पर जब पूरा परिवार साथ दिखा तो तस्वीर बदल गई। हेमा ने स्पष्ट शब्दों में कहा “पापा के लिए सब करेंगे चाहे ये बच्चे हों या वो सब धरम जी को बहुत प्यार करते थे। हमारे बीच कोई नेगेटिविटी नहीं है।उन्होंने आगे कहा कि वे अपने पारिवारिक पलों को सार्वजनिक करना पसंद नहीं करते इसका मतलब यह नहीं कि वे अलग हैं। हेमा के अनुसार धर्मेंद्र प्यार और उन मूल्यों का स्रोत थे जिन्होंने पूरे परिवार को एक सूत्र में पिरोए रखा है। आज भले ही वह शारीरिक रूप से मौजूद न हों लेकिन उनकी दी हुई सीख और संस्कार ही इस कमी को पूरा करने की ताकत दे रहे हैं।

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