दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि यह पदयात्रा पूरी तरह गैर-राजनीतिक होगी। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान कांग्रेस का प्रचार नहीं किया जाएगा और वे स्वयं फेसबुक एक्स सहित किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग नहीं करेंगे। उनका कहना है कि यह अभियान केवल पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग के लिए होगा ताकि श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखा जा सके।
पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने भी राम मंदिर निर्माण के लिए 1 लाख 11 हजार रुपए का योगदान दिया था। उनके पास आज भी चंदे की रसीद और चेक की प्रति सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि देशभर के करोड़ों लोगों ने भगवान राम के प्रति आस्था के साथ दान दिया था इसलिए यह जानना उनका अधिकार है कि उस धन का उपयोग किस प्रकार किया गया।
उन्होंने घोषणा की कि 5 या 6 जुलाई को वरिष्ठ अधिवक्ताओं से चर्चा करने के बाद अयोध्या जाकर अदालत में याचिका दायर करेंगे। उनके अनुसार अदालत से अनुरोध किया जाएगा कि राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे का पूरा वित्तीय विवरण सार्वजनिक कराया जाए। यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि उनकी पदयात्रा में उन सभी लोगों का स्वागत होगा जिन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग दिया है। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल या विचारधारा से जुड़े लोग यदि चंदे की पारदर्शिता चाहते हैं तो वे इस यात्रा में शामिल हो सकते हैं। यात्रा के दौरान वे अपनी दान रसीद और चेक की प्रतियां भी साथ लेकर चलेंगे ताकि यह संदेश दिया जा सके कि दानदाताओं को अपने योगदान का हिसाब मांगने का पूरा अधिकार है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े कुछ ट्रस्टों की आर्थिक पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उज्जैन के महाकाल मंदिर क्षेत्र में ट्रस्ट द्वारा विकसित गेस्ट हाउस और होटल परियोजना की भी जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि किसी भी धार्मिक ट्रस्ट को जनता से चंदा मिलता है तो उसकी आय और खर्च का विवरण सार्वजनिक होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि अदालत में वित्तीय अनियमितता साबित होती है तो वे अपना दान वापस लेकर किसी मान्यता प्राप्त धार्मिक पीठ या शंकराचार्य के न्यास को दान कर देंगे। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि अपने घर के बाहर एक तख्ती लगाएंगे जिस पर लिखा होगा कि चंदा चोरों का प्रवेश निषिद्ध है। दिग्विजय सिंह के इस ऐलान के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज होने की संभावना है।