यह आंकड़ा खुद इनकी पैरेंट कंपनी Meta ने स्वीकार किया है… हालांकि कंपनी इस गिरावट के पीछे वैश्विक हालात को जिम्मेदार ठहरा रही है… Meta का दावा है कि ईरान में इंटरनेट शटडाउन और रूस में सोशल प्लेटफॉर्म्स पर सख्त नियमों के चलते यूजर्स की संख्या अचानक कम हुई है…
लेकिन यूजर्स की नाराजगी कुछ और ही इशारा कर रही है… बड़ी संख्या में लोग अब इन प्लेटफॉर्म्स के अनुभव से परेशान हो चुके हैं… सबसे बड़ा आरोप ‘खराब फीड’ पर है… यूजर्स का कहना है कि अब उनके फीड में दोस्तों और परिवार की पोस्ट कम और विज्ञापन, रील्स और अनजान अकाउंट्स के सुझाव ज्यादा दिखाई देते हैं…
पहले जहां फेसबुक और इंस्टाग्राम लोगों को जोड़ने का जरिया थे, वहीं अब ये प्लेटफॉर्म्स एल्गोरिदम के बोझ तले दबते नजर आ रहे हैं… बार-बार रिपीट होने वाले वीडियो, स्पॉन्सर्ड पोस्ट और जबरन दिखाया जाने वाला कंटेंट यूजर्स को प्लेटफॉर्म से दूर कर रहा है…
इस गिरावट से घबराई Meta अब डैमेज कंट्रोल मोड में आ गई है… कंपनी अपने कंटेंट रिकमेंडेशन सिस्टम में बड़े बदलाव करने जा रही है… खासतौर पर ओरिजिनल कंटेंट को बढ़ावा दिया जाएगा और कॉपी या रीपोस्ट करने वाले अकाउंट्स की पहुंच सीमित की जाएगी…
Meta का मानना है कि इससे प्लेटफॉर्म पर क्वालिटी कंटेंट बढ़ेगा और यूजर्स का भरोसा दोबारा जीता जा सकेगा… लेकिन चुनौती आसान नहीं है, क्योंकि आज के यूजर्स ज्यादा ऑथेंटिक, कम विज्ञापन वाले और बेहतर एक्सपीरियंस देने वाले प्लेटफॉर्म्स की तलाश में हैं…
कुल मिलाकर, Facebook और Instagram के यूजर्स में आई यह गिरावट सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि बदलते डिजिटल ट्रेंड का बड़ा संकेत है… अगर Meta समय रहते सुधार नहीं करता, तो यह गिरावट आगे और भी गहरी हो सकती है…