कश्मीर डायस्पोरा कोएलिशन के अध्यक्ष डॉ. मुबीन शाह ने पीओके की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान प्रशासन ने लोगों की आवाज सुनने के बजाय दमन का रास्ता अपनाया है, जिससे क्षेत्र में असंतोष और बढ़ा है। उनका कहना है कि पीओके में हो रही घटनाओं ने नियंत्रण रेखा के दोनों ओर रहने वाले कश्मीरियों को झकझोर दिया है।
डॉ. शाह ने कहा कि कश्मीरी समाज के लिए यह क्षेत्र केवल एक भूभाग नहीं, बल्कि ऐतिहासिक, सामाजिक और राजनीतिक महत्व रखता है। ऐसे में वहां आम नागरिकों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई ने लोगों के मन में गहरी नाराजगी पैदा की है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि स्थानीय लोगों की समस्याओं और मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो स्थिति और अधिक जटिल हो सकती है।
पीओके में चल रहे आंदोलन को जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी का समर्थन प्राप्त है। इस आंदोलन के समर्थन में कई प्रवासी कश्मीरी संगठनों ने पाकिस्तान सरकार के सामने 12 सूत्रीय मांग पत्र भी रखा है। इसमें प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग रोकने, गिरफ्तार लोगों की जानकारी सार्वजनिक करने और हिंसा तथा मौतों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग शामिल है। संगठनों का कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता जरूरी है तथा नागरिकों की आवाज को दबाने के बजाय संवाद के माध्यम से समाधान तलाशा जाना चाहिए।
कश्मीर डायस्पोरा कोएलिशन, जो दुनिया के कई देशों में सक्रिय कश्मीरी संगठनों का संयुक्त मंच है, ने भी इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की बात कही है। संगठन का मानना है कि पीओके में मानवाधिकारों और नागरिक स्वतंत्रताओं से जुड़े सवालों की अनदेखी नहीं की जा सकती। उन्होंने मांग की है कि घटनाओं की स्वतंत्र और विश्वसनीय जांच कराई जाए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और यदि किसी स्तर पर अधिकारों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जा सके।
विश्लेषकों का मानना है कि पीओके में उभर रहा यह असंतोष केवल स्थानीय आर्थिक समस्याओं तक सीमित नहीं रह गया है। यह प्रशासनिक नीतियों, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और नागरिक अधिकारों से जुड़े व्यापक मुद्दों का रूप लेता दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में पाकिस्तान सरकार इस स्थिति से कैसे निपटती है, इस पर क्षेत्र की राजनीतिक दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।