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आस्था के आगे मौसम भी बेबस: सुमेरपुर में 45 डिग्री गर्मी के बीच चल रही 41 दिनों की अग्नि तपस्या, श्रद्धा में डूबे भक्त



नई दिल्ली। पाली जिले के सुमेरपुर में इन दिनों आस्था और साधना का एक अनोखा दृश्य देखने को मिल रहा है, जहां बाल योगी गुलाब नाथ जी महाराज भीषण गर्मी और धधकती अग्नि धूणी के बीच 41 दिनों की दिव्य अग्नि तपस्या कर रहे हैं। तपते मौसम में जब तापमान 45 डिग्री तक पहुंच रहा है, तब भी संत अपनी साधना में पूरी तरह लीन हैं। इस तपस्या को लोक कल्याण, गौ-सेवा और धर्म रक्षा के उद्देश्य से किया जा रहा एक विशेष अनुष्ठान बताया जा रहा है।

चारों ओर जलती अग्नि धूणी और बीच में शांत मुद्रा में बैठे बाल योगी का यह दृश्य हर किसी को हैरान कर रहा है। यह साधना न केवल कठिन मानी जा रही है, बल्कि इसे आध्यात्मिक शक्ति और आत्मसंयम का अद्भुत उदाहरण भी माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह दिव्य तपस्या लगातार 41 दिनों तक बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी।

लोक कल्याण और धर्म रक्षा के लिए साधना
इस अग्नि तपस्या का मुख्य उद्देश्य गौ माता की सेवा, सनातन धर्म की रक्षा और समाज में सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना बताया जा रहा है। साधक के अनुयायियों का मानना है कि यह तपस्या केवल व्यक्तिगत साधना नहीं बल्कि पूरे विश्व के कल्याण के लिए की जा रही है। अग्नि के बीच बैठकर की जा रही यह साधना लोगों के बीच गहरी आस्था का केंद्र बन गई है।

सात परिक्रमा के लिए उमड़ रहे श्रद्धालु
इस पावन स्थल पर दूर-दूर से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पहुंच रही है। भक्तजन अग्नि धूणी के चारों ओर सात परिक्रमा (फेरे) लगाकर अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना कर रहे हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, इस पवित्र स्थान पर परिक्रमा करने से जीवन के दुख-दर्द, मानसिक तनाव और कष्टों से मुक्ति मिलती है।

भीषण गर्मी और तपती जमीन के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हो रहा है। लोग आस्था के इस संगम को देखने और उसमें शामिल होने के लिए लगातार सुमेरपुर पहुंच रहे हैं।

आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना क्षेत्र
जिस स्थान पर यह तपस्या चल रही है, वह श्री डूंगलाई मामाधणी उज्जेनी वीर मंदिर क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जो पहले से ही श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था का केंद्र माना जाता है। अब इस 41 दिनों की अग्नि साधना के कारण इस पूरे परिसर की आध्यात्मिक ऊर्जा और महत्व और भी बढ़ गया है।

भक्तों का कहना है कि यहां आने वाला हर व्यक्ति एक अलग ही शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करता है। यही वजह है कि यह स्थान अब केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है।

आस्था और साधना का अनोखा संगम
45 डिग्री की झुलसा देने वाली गर्मी में भी साधक की अडिग तपस्या और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था इस स्थान को विशेष बना रही है। यह दृश्य आस्था, विश्वास और समर्पण का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करता है, जो हर किसी को प्रभावित कर रहा है। सुमेरपुर की यह अग्नि तपस्या आज पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग इसे एक दिव्य और अलौकिक अनुभव के रूप में देख रहे हैं।

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