इस बदलाव से जिले के किसान नाराज हैं और वे खुलकर इसका विरोध कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि अधिकांश के पास अभी तक फार्मर आईडी नहीं बनी है, जिसके कारण वे खाद बुक करने से वंचित रह जा रहे हैं। उनका आरोप है कि बिना तैयारी के इस व्यवस्था को लागू कर दिया गया, जिससे खेती के सीजन में उन्हें भारी संकट झेलना पड़ रहा है।
खरीफ फसलों की बुवाई का समय नजदीक होने से किसानों की चिंता और बढ़ गई है। किसान अपनी पुरानी उपज बेचकर खेतों की तैयारी कर चुके हैं और अब मानसून की बारिश का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में खाद की तत्काल आवश्यकता होगी, लेकिन नई प्रणाली ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
किसानों का कहना है कि उनके खसरे आधार से लिंक नहीं हैं और कई खातों की केवाईसी भी पूरी नहीं हो पाई है। उनका तर्क है कि पहले सभी किसानों को फार्मर आईडी उपलब्ध कराई जानी चाहिए थी, उसके बाद ही इस तरह की ऑनलाइन व्यवस्था लागू की जानी चाहिए थी।
जिले में करीब 1 लाख 45 हजार किसानों में से केवल 13,445 किसानों ने ही अब तक फार्मर आईडी बनवाई है, जिससे साफ है कि बड़ी संख्या में किसान अभी भी सिस्टम से बाहर हैं। इसके अलावा, तकनीकी समस्याएं भी लगातार सामने आ रही हैं। कई बार सर्वर डाउन होने के कारण ऑनलाइन बुकिंग नहीं हो पा रही, जिससे किसान पर्ची जनरेट नहीं कर पा रहे हैं।
किसानों की एक और समस्या यह है कि पर्ची जनरेट होने के बाद भी कई बार सोसायटियों में खाद उपलब्ध नहीं होता। निर्धारित समय में खाद न मिलने पर पर्ची स्वतः समाप्त हो जाती है, जिससे किसानों को दोबारा प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
हालांकि प्रशासन का कहना है कि यह व्यवस्था खाद की कालाबाजारी रोकने और पारदर्शिता लाने के लिए लागू की गई है। डीडीए अशोक उपाध्याय के अनुसार, किसान अब घर बैठे खाद बुक कर सकते हैं और लाइन में लगने की जरूरत नहीं होगी। उन्होंने बताया कि गांव-गांव में फार्मर आईडी बनाने के लिए शिविर लगाए जा रहे हैं ताकि अधिक से अधिक किसान इस व्यवस्था से जुड़ सकें।