Chambalkichugli.com

गलवान के बाद पहली बड़ी राहत, सरकार ने चार चीनी कंपनियों को सरकारी टेंडर में दी एंट्री, जानिए वजह


नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच वर्ष 2020 के गलवान संघर्ष के बाद सुरक्षा कारणों से चीनी कंपनियों पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के बीच केंद्र सरकार ने पावर सेक्टर को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने भारत में उत्पादन कर रही चार चीनी बिजली उपकरण निर्माता कंपनियों को सरकारी बिजली परियोजनाओं के टेंडर में भाग लेने की विशेष अनुमति दे दी है। यह छूट केवल दो वर्षों के लिए दी गई है और सरकार ने स्पष्ट किया है कि इसे भविष्य में अन्य कंपनियों के लिए मिसाल नहीं माना जाएगा। इस फैसले को देश की ऊर्जा सुरक्षा और बिजली क्षेत्र की जरूरतों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार टीबीईए एनर्जी नानजिंग इलेक्ट्रिक इंडिया न्यू नॉर्थईस्ट इलेक्ट्रिक इंडिया और ताईकाई इलेक्ट्रिक इंडिया को सार्वजनिक खरीद नियमों के कुछ प्रावधानों से राहत दी गई है। सामान्य तौर पर भारत से जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों की कंपनियों को सरकारी टेंडर में भाग लेने से पहले संबंधित भारतीय प्राधिकरण से अनिवार्य पंजीकरण और सुरक्षा मंजूरी लेनी होती है। इन चार कंपनियों को फिलहाल इस प्रक्रिया से सीमित अवधि के लिए छूट प्रदान की गई है।

सरकार का कहना है कि यह फैसला बिजली क्षेत्र की महत्वपूर्ण परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के उद्देश्य से लिया गया है। केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने इस वर्ष जनवरी में वित्त मंत्रालय से सिफारिश की थी कि भारत में निर्माण इकाइयां स्थापित कर चुकी कुछ कंपनियों को विशेष अनुमति दी जाए ताकि ट्रांसमिशन और बिजली ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं में देरी न हो। इसके बाद वित्त मंत्रालय ने दो वर्षों के लिए यह विशेष छूट मंजूर की।

इन चारों कंपनियों की भूमिका भारतीय बिजली क्षेत्र में महत्वपूर्ण मानी जाती है। ये कंपनियां ट्रांसफार्मर हाई वोल्टेज स्विच गियर गैस इंसुलेटेड स्विच गियर और ट्रांसमिशन लाइनों में इस्तेमाल होने वाले अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों का निर्माण भारत में करती हैं। इनमें से न्यू नॉर्थईस्ट इलेक्ट्रिक इंडिया देश की कई प्रमुख ट्रांसमिशन परियोजनाओं पर काम कर रही है जबकि अन्य कंपनियां भी बिजली वितरण और ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार में अहम योगदान दे रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन उपकरणों के बिना कई बड़ी बिजली परियोजनाएं समय पर पूरी करना मुश्किल हो सकता है।

वर्ष 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुए हिंसक संघर्ष के बाद केंद्र सरकार ने चीनी कंपनियों के लिए कई सख्त नियम लागू किए थे। इसके तहत सरकारी खरीद में भाग लेने वाली कंपनियों के लिए विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय से सुरक्षा और राजनीतिक मंजूरी अनिवार्य कर दी गई थी। इसके अलावा प्रेस नोट तीन के माध्यम से चीन सहित भारत की सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले निवेश के लिए भी सरकार की पूर्व अनुमति आवश्यक कर दी गई थी। इन कदमों का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक क्षेत्रों में विदेशी प्रभाव को नियंत्रित करना था।

हालांकि बिजली क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों और तकनीकी विशेषज्ञता की कमी ने सरकार को सीमित दायरे में व्यावहारिक निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय बिजली उद्योग ने भी चीनी तकनीशियनों के लिए वीजा प्रक्रिया में राहत की मांग की थी क्योंकि कई परियोजनाएं विशेषज्ञों की कमी के कारण प्रभावित हो रही थीं। सरकार का मानना है कि घरेलू विनिर्माण इकाइयों के माध्यम से काम कर रही इन कंपनियों को सीमित अवधि की छूट देने से बिजली क्षेत्र की परियोजनाओं में तेजी आएगी और देश के ऊर्जा ढांचे को मजबूती मिलेगी। साथ ही सुरक्षा संबंधी निगरानी और अन्य सरकारी शर्तें पहले की तरह लागू रहेंगी ताकि राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता न हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular News