Chambalkichugli.com

स्व से सृष्टि तक मंगल ही हमारा संकल्प, सेवा ही हमारा परम धर्म: मुख्यमंत्री डॉ. यादव


भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव गुरुवार को राजस्थान के भीलवाड़ा में आयोजित सनातन मंगल महोत्सव, संत समागम एवं दीक्षा महोत्सव में शामिल हुए। यह कार्यक्रम हरिशेवा उदासीन आश्रम में महामण्डलेश्वर स्वामी हंसरामजी महाराज की उपस्थिति में संपन्न हुआ, जहां मुख्यमंत्री ने संतों, विद्वतजनों और श्रद्धालुओं को एकजुट कर भारतीय संस्कृति के मूल्यों पर आधारित संदेश दिया।

भीलवाड़ा में स्व से सृष्टि तक मंगल ही हमारा संकल्प, सेवा ही हमारा परम धर्म के मूल मंत्र के साथ डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति ही वह महान संस्कृति है, जो सबके मंगल की कामना करती है। उनका कहना था कि वसुधैव कुटुंबकम् के सिद्धांत से प्रेरणा लेकर हमें केवल मानव नहीं, पृथ्वी के सभी प्राणियों, पेड़ पौधों और समस्त सृष्टि के कल्याण के लिए जीना चाहिए। यही जीवन का उच्चतम लक्ष्य एवं परम सेवा धर्म है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी संस्कृति की जड़ें सेवा, समर्पण, विश्व बंधुत्व और सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय जैसी परोपकारी भावनाओं में निहित हैं। वे बोले कि जीवमात्र की सेवा ही श्रीहरि की सेवा है और सम्पूर्ण मानवता की सेवा धर्म है। उन्होंने यह भी बताया कि रा से राजस्थान और म से मध्यप्रदेश मिलकर राम की महिमा को आगे बढ़ा रहे हैं।

डॉ. यादव ने संतों की समाज में भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि संतों के उपदेश नैतिक मूल्यों, करुणा, सद्भाव और समरसता को बढ़ावा देते हैं। पूज्य हंसरामजी महाराज ने धर्म, भक्ति, सेवा, सत्य तथा अहिंसा को जीवन में जीने का संदेश दिया है और हजारों असहायों को आश्रम के माध्यम से सहारा दिया है।

कार्यक्रम में तीन युवा संतों ईशानराम जी महाराज, केशवराम जी महाराज और सुमज्ञराम जी महाराज को दीक्षा दी गई, जिनका मुख्यमंत्री ने माल्यार्पण कर अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ में देश विदेश के सभी साधु संतों का स्वागत किया जाएगा और उनकी आशीष रूपी ऊर्जा से देश को आगे बढ़ाने का आग्रह किया है।

राजस्थान सरकार के सहकारिता राज्यमंत्री गौतम कुमार दक ने भी मुख्यमंत्री का सम्मान किया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सामाजिक समरसता और धार्मिक पुनरुद्धार पर जोर दिया कार्यक्रम में सांसद दामोदर अग्रवाल, साधु संत, महामंडलेश्वर, मंडलेश्वर, महंत और बड़ी संख्या में धर्म श्रद्धालु मौजूद रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *