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छोले-कुलचे की रेहड़ी से टीम इंडिया तक: जालंधर के अर्जुन राजपूत का अंडर-19 टीम में चयन, मेहनत ने बदली तकदीर


नई दिल्ली। कहते हैं कि सपनों की कोई आर्थिक सीमा नहीं होती। यदि इरादे मजबूत हों, मेहनत सच्ची हो और परिवार का साथ मिले, तो साधारण परिस्थितियों से निकलकर भी असाधारण उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। पंजाब के जालंधर निवासी अर्जुन राजपूत की कहानी इसी जज्बे और संघर्ष की मिसाल बनकर सामने आई है। छोले-कुलचे की रेहड़ी लगाने वाले एक मेहनतकश पिता के बेटे अर्जुन ने भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम में चयनित होकर अपने परिवार, शहर और प्रदेश का नाम रोशन कर दिया है।

जालंधर के राम नगर इलाके में रहने वाले अर्जुन राजपूत का चयन भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम में हुआ है। अगले महीने 4 जुलाई को टीम श्रीलंका दौरे के लिए रवाना होगी, जहां अर्जुन पहली बार भारत की नीली जर्सी पहनकर मैदान में उतरेंगे। यह पल न केवल उनके लिए बल्कि उनके पूरे परिवार के लिए गर्व और खुशी का अवसर है।

अर्जुन एक प्रतिभाशाली ऑलराउंडर हैं। वह बाएं हाथ के बल्लेबाज होने के साथ-साथ दाएं हाथ के ऑफ स्पिन गेंदबाज भी हैं। क्रिकेट के प्रति उनका जुनून बचपन से ही दिखाई देने लगा था। उन्होंने महज आठ-नौ वर्ष की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। उन्होंने अपनी क्रिकेट यात्रा की शुरुआत हरभजन सिंह क्रिकेट अकादमी से की, जहां उन्हें कोच विक्रम सिद्धू का मार्गदर्शन मिला।

अंडर-19 टीम में चयन के बाद अर्जुन ने अपनी खुशी साझा करते हुए कहा कि यह उनके जीवन का बेहद खास क्षण है। उन्होंने कहा कि देश का प्रतिनिधित्व करना हर खिलाड़ी का सपना होता है और वह श्रीलंका दौरे पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश करेंगे। अर्जुन ने भरोसा जताया कि टीम पूरे दमखम के साथ खेलेगी और ट्रॉफी जीतकर भारत लौटने का प्रयास करेगी।

उन्होंने अपने माता-पिता के संघर्ष और त्याग को याद करते हुए कहा कि उनके पिता ने उनके सपनों को पूरा करने के लिए वर्षों तक कड़ी मेहनत की है। अर्जुन के अनुसार, उनके पिता डीएवी कॉलेज के बाहर छोले-कुलचे की रेहड़ी लगाते हैं और उन्होंने कभी भी बेटे की क्रिकेट यात्रा में आर्थिक कठिनाइयों को आड़े नहीं आने दिया। अर्जुन ने भावुक होकर कहा कि अब उनकी जिम्मेदारी है कि वह अपने पिता के सपनों को पूरा करें और उन्हें गर्व महसूस कराएं।

पिता होती राम के लिए यह उपलब्धि किसी सपने के सच होने से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि अर्जुन बचपन से ही क्रिकेट के प्रति समर्पित रहा है और दिन-रात मेहनत करता रहा। जब उन्हें बेटे के भारतीय अंडर-19 टीम में चयन की खबर मिली, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वहीं अर्जुन की मां नन्ही देवी ने कहा कि यह पूरे परिवार के लिए बेहद भावुक और गर्व का पल है।

अर्जुन की बहन किरण राजपूत ने भी कहा कि भाई ने वर्षों तक लगातार मेहनत की और कभी हार नहीं मानी। अब उसकी मेहनत का फल पूरे देश के सामने है। परिवार का सपना था कि अर्जुन भारतीय टीम की नीली जर्सी पहने और अब वह सपना साकार हो चुका है।

अर्जुन राजपूत की यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उनकी कहानी यह साबित करती है कि मेहनत, समर्पण और आत्मविश्वास के सामने आर्थिक कठिनाइयां भी छोटी पड़ जाती हैं।

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