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सोना-चांदी अब आम आदमी की पहुंच से कोसों दूर: $5390 के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुँचा गोल्ड, ईरान पर हमले के बाद भारत के हर बड़े शहर में मची खलबली!

नई दिल्ली: वैश्विक राजनीति और युद्ध की विभीषिका ने आज भारतीय सराफा बाजार की तस्वीर पूरी तरह बदलकर रख दी है। इजराइल, अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी सीधी जंग ने न केवल मिडिल ईस्ट को बारूद के ढेर पर खड़ा कर दिया है, बल्कि इसका सीधा और घातक असर सोने-चांदी की कीमतों पर भी पड़ा है। 2 मार्च की सुबह जब देश उठा, तो सोने की कीमतें आसमान छू रही थीं। राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,73,240 प्रति 10 ग्राम के अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुँच गई, जिसने निवेशकों और आम खरीदारों के होश उड़ा दिए हैं।

बाजार में इस अभूतपूर्व तेजी का मुख्य कारण 28 फरवरी को इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ किया गया हवाई हमला और उसके जवाब में ईरान की भीषण मिसाइल कार्रवाई को माना जा रहा है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबरों के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है। इस अनिश्चितता के माहौल में दुनिया भर के निवेशकों ने शेयर बाजार से अपना पैसा निकालकर सोने जैसे ‘सुरक्षित ठिकाने’ (Safe Haven) की ओर रुख कर लिया है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 2 प्रतिशत से ज्यादा की उछाल के साथ $5,390 प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर ट्रेड कर रहा है।

भारत के महानगरों की बात करें तो मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, पुणे और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों में 22 कैरेट सोने का भाव ₹1,58,660 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया, जबकि 24 कैरेट की कीमत ₹1,73,090 तक जा पहुँची है। सिर्फ एक हफ्ते के भीतर सोना लगभग ₹9,430 प्रति 10 ग्राम महंगा हो चुका है। लेकिन सबसे ज्यादा चौंकाने वाली खबर चांदी की कीमतों से आई है। आज सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत में एक ही दिन में ₹35,000 प्रति किलोग्राम की ऐतिहासिक तेजी दर्ज की गई, जिससे दिल्ली में एक किलोग्राम चांदी का भाव ₹3,30,000 के अविश्वसनीय आंकड़े को छू गया।

MCX (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर भी 24 कैरेट सोने का वायदा भाव 3.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ खुला, जो बाजार की घबराहट को साफ दर्शाता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान और इजराइल के बीच तनाव कम नहीं हुआ और यह युद्ध एक क्षेत्रीय महायुद्ध में तब्दील हुआ, तो आने वाले दिनों में सोने और चांदी की चमक और भी तीखी होगी। मौजूदा हालात को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग ने कीमती धातुओं को अब आम आदमी की पहुंच से बहुत दूर कर दिया है।

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