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GWALIOR CONSUMER FORUM: महंगा हनीमून पैकेज पड़ा भारी: सेवा में कमी पर कंपनी को 2 लाख लौटाने के निर्देश

CONSUMER FORUM ACTION

HIGHLIGHTS:

  • ग्वालियर उपभोक्ता फोरम का ट्रैवल कंपनी के खिलाफ बड़ा फैसला

  • न्यूजीलैंड हनीमून पैकेज के लिए दिए थे 8.70 लाख रुपये

  • यात्रा से 8 घंटे पहले वीजा न मिलने की दी गई जानकारी

  • न्यूजीलैंड की जगह बाली भेजा गया, होटल व्यवस्था पर उठे सवाल

  • सेवा में कमी मानते हुए कंपनी को 2 लाख रुपये लौटाने का आदेश

 

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GWALIOR CONSUMER FORUM: मध्यप्रदेश। ग्वालियर में हनीमून पैकेज से जुड़े एक मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने ट्रैवल कंपनी के खिलाफ फैसला सुनाया है। बता दें कि आयोग ने अदेश दिए हैं कि कंपनी उपभोक्ता को 2 लाख रुपये लौटाएगी। आयोग ने माना कि सेवाओं में कमी के कारण उपभोक्ता को परेशानी का सामना करना पड़ा।

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न्यूजीलैंड हनीमून पैकेज के लिए दिए थे 8.70 लाख रुपये

ग्वालियर निवासी विक्रमजीत सिंह ने थ्रीलोफिलिया ट्रैवल्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि शादी के बाद न्यूजीलैंड में हनीमून मनाने के लिए कंपनी से 8.70 लाख रुपये का पैकेज लिया था और इस पैकेज में वीजा और यात्रा की पूरी व्यवस्था शामिल थी।

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यात्रा से कुछ घंटे पहले मिली वीजा न मिलने की सूचना

शिकायतकर्ता के अनुसार उनकी पत्नी का वीजा जारी हो गया था, लेकिन उनका वीजा नहीं मिल पाया। कंपनी ने इसकी जानकारी यात्रा की निर्धारित तारीख से करीब आठ घंटे पहले दी। इसके बाद कंपनी ने न्यूजीलैंड की जगह इंडोनेशिया के बाली जाने का विकल्प दिया।

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बाली में होटल और सुविधाओं पर उठे सवाल

दरअसल बाली पहुंचने के बाद दंपती कंपनी की व्यवस्था से संतुष्ट नहीं थे। जिसके बाद शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कंपनी द्वारा उपलब्ध कराया गया होटल और अन्य सुविधाएं निम्न स्तर की थीं। इसके कारण उन्हें अतिरिक्त खर्च कर अलग आवास की व्यवस्था करनी पड़ी।

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आयोग ने कंपनी को दिया आदेश

ट्रैवल कंपनी ने आयोग के सामने तर्क दिया कि वीजा जारी करना दूतावास का अधिकार होता है और इसमें कंपनी की कोई भूमिका नहीं होती। साथ ही कंपनी ने यह भी कहा कि कई बुकिंग रद्द होने के कारण केवल 1.40 लाख रुपये ही वापस किए जा सकते थे।

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हालांकि दोनों पक्षों के तर्क और दस्तावेजों की जांच के बाद आयोग ने माना कि वीजा न मिलना कंपनी की सीधी जिम्मेदारी नहीं है। लेकिन सेवाओं में कमी रही है। इसी आधार पर आयोग ने कंपनी को शिकायतकर्ता को 2 लाख रुपये लौटाने का आदेश दिया।

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