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GWALIOR FAMOUS TEMPLE: अधूरी प्रतिमा और चमत्कारिक इतिहास; जानें पहाड़ा वाली माता मंदिर की कहानी, नवरात्री में लगी लंबी कतारें

PADHAY MATA MANDIR

HIGHLIGHTS:

  • मंदिर लगभग 350 साल पुराना है।

  • दिनभर में चार बार भोग और आरती की परंपरा।

  • नवरात्र में भक्तों की भारी भीड़।

  • प्रतिमा अधूरी अवस्था में स्थापित है।

  • औरंगजेब भी मंदिर को खंडित नहीं कर सका।

PADHAY MATA MANDIR
PADHAY MATA MANDIR

GWALIOR FAMOUS TEMPLE: मध्यप्रदेश। ग्वालियर के नई सड़क क्षेत्र में स्थित पाढ़ाय माता मंदिर, जिसे स्थानीय लोग पहाड़ा वाली माता मंदिर के नाम से जानते हैं, शहरवासियों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। लगभग 350 साल पुराना यह मंदिर मां बघेश्वरी के शेर पर सवार स्वरूप के लिए प्रसिद्ध है। नवरात्र के दौरान सुबह से देर रात तक यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

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दिनभर की अनोखी परंपरा

मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा यह है कि यहां दिनभर में चार बार आरती और भोग किए जाते हैं। यही वजह है कि श्रद्धालु पूरे दिन किसी भी समय दर्शन के लिए आते हैं।

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चमत्कारिक इतिहास

मंदिर का इतिहास चमत्कारों से भरा हुआ है। मंदिर के पुजारी महेश कुमार के अनुसार, माता मूल रूप से डीडवाना (जिला नागौर) में विराजमान थीं। लगभग 400 साल पहले नगर सेठ पाढ़ाय को स्वप्न में माता ने दर्शन दिए और उन्हें 12 कोस तक बिना पीछे मुड़े पैदल चलने का निर्देश दिया। लेकिन अंत में सेठ ने पीछे मुड़कर देखा, जिससे माता की प्रतिमा अधूरी अवस्था में प्रकट हुई और उनके चरणों की पंजी अधूरी रह गई।

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सुरक्षा और ऐतिहासिक महत्ता

स्थानीय मान्यता है कि औरंगजेब भी इस मंदिर को खंडित नहीं कर सका, जिससे इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता और बढ़ जाती है।

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आधुनिक श्रद्धालुओं का आकर्षण

आज यह मंदिर न केवल श्रद्धालुओं के लिए, बल्कि ग्वालियर के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक नक्शे पर भी एक अहम स्थल बन चुका है।

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