HIGHLIGHTS:
- ग्वालियर में मां की मौत के बाद 5 दिन तक शव के साथ रहे बच्चे
- मानसिक स्थिति के कारण नहीं समझ पाए मां की मौत
- पुलिस ने ‘बीमार’ बताकर शव को घर से हटाया
- डेढ़ महीने बाद भी कर रहे मां का इंतजार
- आश्रम में काउंसलिंग जारी, सच्चाई स्वीकार नहीं कर पा रहे

GWALIOR NEWS : मध्यप्रदेश। ग्वालियर के टोपी बाजार इलाके से एक बेहद भावुक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। जहां 70 वर्षीय उर्मिला भदौरिया की मौत के बाद उनके मानसिक रूप से कमजोर बेटे अखंड प्रताप सिंह और बेटी रितु भदौरिया 5 दिनों तक उसी घर में मां के शव के साथ रहे, उन्हें यह तक समझ नहीं आया कि उनकी मां अब इस दुनिया में नहीं रही।
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5 दिन तक नहीं समझ पाए मां की मौत
14 फरवरी की रात उर्मिला भदौरिया का निधन हो गया था, लेकिन अखंड प्रताप सिंह (40) और रितु भदौरिया (38) इसे समझ नहीं सके। घर में सब कुछ सामान्य मानते हुए दोनों मां के पास ही रहे। जब 5 दिन बाद शव सड़ने लगा और बदबू बाहर फैलने लगी, तब पड़ोसियों को शक हुआ और पुलिस को सूचना दी गई।
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पुलिस ने ‘बीमार’ बताकर उठाया शव
पुलिस जब मौके पर पहुंची तो बच्चों की मानसिक स्थिति को देखते हुए उन्होंने उर्मिला देवी के शव को यह कहकर उठाया कि वह बीमार हैं और अस्पताल ले जाया जा रहा है। यही बात अब दोनों के मन में बैठ गई है और वे आज भी यही मानते हैं कि उनकी मां इलाज के लिए गई है।
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आज भी कर रहे इंतजार—“मां कब आएगी?”
घटना के करीब डेढ़ महीने बाद भी दोनों भाई-बहन आश्रम में रह रहे हैं और हर दिन अपनी मां का इंतजार करते हैं। कभी दरवाजे पर बैठ जाते हैं, तो कभी पूछते हैं “मां कब आएगी?” जब उन्हें सच्चाई बताने की कोशिश की जाती है, तो वे इसे मानने से इनकार कर देते हैं और कहते हैं कि मां उन्हें लेने जरूर आएगी।

मां ही थी उनकी पूरी दुनिया
पड़ोसियों के अनुसार, दोनों भाई-बहन शायद ही कभी घर से बाहर निकलते थे। उनकी पूरी दुनिया उनकी मां ही थी। उर्मिला भदौरिया ने पति के निधन के बाद अकेले ही बच्चों को पाला-पोसा, उन्हें पढ़ाया-लिखाया। बेटा बी-टेक और बेटी साइंस ग्रेजुएट है, लेकिन मानसिक स्थिति के कारण वे पूरी तरह मां पर निर्भर थे।
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काउंसलिंग के जरिए सच्चाई समझाने की कोशिश
फिलहाल दोनों को आश्रम में रखा गया है, जहां उनकी काउंसलिंग की जा रही है। लेकिन अब तक वे इस सच्चाई को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। आश्रम प्रबंधन के अनुसार बच्चे बार-बार घर जाने की जिद करते हैं और मां से मिलने की बात कहते हैं। ऐसे में धीरे-धीरे उन्हें सच्चाई समझाने की कोशिश जारी है।