बैंक की ओर से जारी बयान में कहा गया कि चुनिंदा तथ्यों के आधार पर लगाए जा रहे आरोप भ्रामक हैं और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की अटकलों को पूरी तरह अस्वीकार किया जाता है। बैंक ने स्पष्ट किया कि आंतरिक समीक्षा और जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कोई अंतिम निष्कर्ष निकाला जाता है।
दरअसल, कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि बैंक की ऑडिट कमेटी ऑफ द बोर्ड (एसीबी) ने वित्त वर्ष 2024 और 2025 के दौरान Maharashtra State Road Development Corporation को किए गए करीब 45 करोड़ रुपए के भुगतान की आंतरिक सतर्कता जांच के निर्देश दिए हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला एमएसआरडीसी द्वारा बैंक में जमा राशि पर दिए जाने वाले ब्याज भुगतान से जुड़ा बताया गया। आरोप लगाया गया कि राशि सीधे ब्याज भुगतान के तौर पर जारी करने के बजाय मार्केटिंग विभाग के जरिए चार स्थानीय विक्रेताओं को सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान के नाम पर भेजी गई।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि बैंक के वरिष्ठ प्रबंधन स्तर पर इस व्यवस्था को लेकर चर्चा हुई थी, जिसमें बैंक के एमडी और सीईओ Sashidhar Jagdishan की मौजूदगी का भी जिक्र किया गया। हालांकि बैंक ने इन आरोपों पर सीधे तौर पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उसकी सभी प्रक्रियाएं तय नियामकीय मानकों और आंतरिक नियमों के अनुसार संचालित होती हैं।
इन खबरों के बाद शेयर बाजार में भी असर देखने को मिला। NSE: HDFCBANK के शेयर में गिरावट दर्ज की गई और कारोबार के दौरान यह करीब 2.69 प्रतिशत टूटकर 757.90 रुपए तक पहुंच गया।