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होर्मुज संकट: भारत की तेल रणनीति में रूस और सऊदी की अहम भूमिका..


नई दिल्ली :भारत का कच्चे तेल आयात रणनीति India पिछले कुछ महीनों में काफी बदल गया है। हालाँकि भारत ने रूस से तेल की खरीद कम कर दी है, लेकिन रूस अभी भी सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है। फरवरी में सऊदी अरब से क्रूड की सप्लाई में 30 फीसदी की वृद्धि हुई और यह रोजाना 10 लाख बैरल के स्तर तक पहुंच गई, जो जनवरी में 7.7 लाख बैरल थी।

ग्लोबल डेटा सर्विस प्रोवाइडर Kpler के अनुसार, पिछले कुछ सालों में सऊदी से आयात रोजाना 6-7 लाख बैरल के आसपास था, लेकिन फरवरी में यह छह साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। वहीं रूस से तेल का आयात जनवरी में 11 लाख और दिसंबर में 12 लाख बैरल था, जबकि फरवरी में यह करीब 10 लाख बैरल प्रति दिन रहा।

पश्चिम एशिया से भारत की सप्लाई बढ़ने के कारण गल्फ क्षेत्र से आने वाले क्रूड की हिस्सेदारी इम्पोर्ट बास्केट में बढ़ी है। लेकिन ईरान संकट और होर्मुज की खाड़ी में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से यह स्थिति अस्थिर हो गई है। भारत के पास वर्तमान में केवल 18 दिन का क्रूड स्टॉक उपलब्ध है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ईरान संकट लंबा खिंचता है तो भारतीय रिफाइनरी कंपनियों को वैकल्पिक स्रोतों से तेल खरीदना होगा। रूस से अतिरिक्त सप्लाई की संभावना मौजूद है क्योंकि उसके कई जहाज समुद्र में हैं जिन्हें भारत की तरफ मोड़ा जा सकता है।

इस बीच भारत ने होर्मुज की खाड़ी में ट्रांजिट कर रहे 25-27 लाख बैरल तेल पर भी नजर रखी है, जो ईराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत से आ रहा है। संकट की स्थिति में भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रिफाइनिंग आपूर्ति बनाए रखने के लिए रूस और सऊदी से तेल की खरीद बढ़ाना पड़ सकता है।इस रणनीति से भारत न केवल आपूर्ति संकट से निपटने में सक्षम होगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच स्थिरता भी बनाए रख सकेगा।

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