राजेश खन्ना और अंजू महेंद्रू का रिश्ता थिएटर के दिनों से शुरू हुआ था और दोनों के बीच एक गहरा जुड़ाव था। साल 1969 में जब फिल्म बंधन की घोषणा हुई, तो पहली बार इस जोड़ी को बड़े पर्दे पर एक साथ देखने के लिए प्रशंसकों में जबरदस्त उत्साह था। फिल्म के निर्माण के दौरान दोनों के निजी संबंधों के कारण काफी चर्चाएं हुईं, लेकिन सेट पर जो हुआ वह पेशेवर रूप से काफी चिंताजनक था। बताया जाता है कि शूटिंग के दौरान दोनों के बीच किसी बात को लेकर भयंकर झगड़ा हो गया, जिसका सीधा असर उनके काम पर पड़ा। राजेश खन्ना ने खुद बाद में एक साक्षात्कार में स्वीकार किया था कि सेट पर उन दोनों का व्यवहार एक-दूसरे के प्रति बेहद खराब था। जब राजेश अपनी लाइनें बोलते थे तो अंजू मुंह फेर लेती थीं और जब अंजू के संवाद की बारी आती थी तो राजेश भी वैसा ही असहयोग करते थे।
तनाव और खींचतान के बीच पूरी हुई इस फिल्म ने एक कड़वा सच उजागर कर दिया। हालांकि फिल्म व्यावसायिक रूप से सफल रही, लेकिन दर्शकों को राजेश और अंजू की जोड़ी में वह कशिश नजर नहीं आई जिसकी उम्मीद की जा रही थी। दिलचस्प बात यह रही कि प्रशंसकों ने मुख्य नायिका के बजाय फिल्म की सह-कलाकार मुमताज और राजेश खन्ना के दृश्यों पर अधिक प्यार बरसाया, जिससे यह साफ हो गया कि असल जिंदगी की यह जोड़ी पर्दे पर जादू चलाने में नाकाम रही है। इसी के बाद से राजेश खन्ना के करियर का ग्राफ तेजी से बढ़ा और अन्य सफल फिल्मों के बाद वे देश के पहले सुपरस्टार बन गए, जिसने उनके निजी रिश्तों के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया।
सुपरस्टार बनने के बाद राजेश खन्ना के व्यस्त शेड्यूल और उनके स्वभाव में आए बदलावों ने इस रिश्ते में दरार को और गहरा कर दिया। एक ओर जहां सार्वजनिक चर्चाओं में अंजू महेंद्रू की पहचान केवल सुपरस्टार की प्रेमिका के रूप में सिमटने लगी, वहीं दूसरी ओर वैचारिक मतभेदों ने भी जन्म ले लिया। अंजू के अनुसार, राजेश खन्ना के जीवन में सफलता के साथ बढ़ते प्रभाव ने उनके बीच की सहजता को खत्म कर दिया था। अंजू ने यह भी साझा किया था कि राजेश को उनका मॉडलिंग करना पसंद नहीं था और उनके कहने पर उन्होंने कई पेशेवर समझौते भी किए, लेकिन फिर भी यह रिश्ता टूटने से नहीं बच सका। अंततः सात साल का यह सफर उस वक्त एक नाटकीय मोड़ पर खत्म हुआ जब राजेश खन्ना ने विवाह का फैसला लिया और फिल्म जगत के इस सबसे चर्चित प्रेम अध्याय का दुखद अंत हो गया।