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4 मई से पहले अभेद्य रणनीति, ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की बड़ी बैठक..

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों से ठीक पहले सियासी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले तृणमूल कांग्रेस ने पूरी ताकत के साथ अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री Mamata Banerjee और पार्टी के प्रमुख नेताओं ने यह साफ संकेत दे दिया है कि इस बार मतगणना के दिन किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी उद्देश्य से एक अहम वर्चुअल बैठक आयोजित की जा रही है, जिसमें राज्यभर के काउंटिंग एजेंट्स को शामिल किया जाएगा।

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब एग्जिट पोल के नतीजों ने राजनीतिक माहौल को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि चुनाव परिणाम से पहले हर स्तर पर सतर्कता जरूरी है। यही वजह है कि इस बैठक को केवल औपचारिक चर्चा तक सीमित न रखकर इसे एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य मतगणना प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है।

सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में राज्य की लगभग सभी विधानसभा सीटों पर तैनात काउंटिंग एजेंट्स को विस्तार से दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। एजेंट्स को स्पष्ट रूप से कहा जाएगा कि वे मतगणना के हर चरण पर पैनी नजर बनाए रखें और किसी भी असामान्य स्थिति को तुरंत रिपोर्ट करें। पार्टी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि मतगणना के दौरान किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।

एजेंट्स की भूमिका को बेहद अहम माना जा रहा है। उन्हें निर्देश दिए जाने की संभावना है कि वे मतगणना शुरू होने से लेकर अंतिम परिणाम और प्रमाण पत्र जारी होने तक काउंटिंग सेंटर पर मौजूद रहें। इसके साथ ही उन्हें ईवीएम को स्ट्रॉन्ग रूम से बाहर लाने की प्रक्रिया, सील खोलने और हर राउंड की गिनती पर नजर रखने के लिए भी तैयार किया जा रहा है। पार्टी का मानना है कि अंतिम राउंड तक सतर्कता बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि कई बार परिणाम आखिरी चरणों में बदल सकते हैं।

इस बार TMC 2021 के अनुभवों से भी सबक ले रही है। पिछले चुनाव में कुछ स्थानों पर हुई अप्रत्याशित घटनाओं ने विवाद को जन्म दिया था, खासकर नंदीग्राम जैसे संवेदनशील क्षेत्र में। इन्हीं अनुभवों को ध्यान में रखते हुए इस बार अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है, ताकि किसी भी तरह की स्थिति को तुरंत नियंत्रित किया जा सके।

इसके अलावा, इस बार मतगणना प्रक्रिया में कुछ नई तकनीकी व्यवस्थाएं भी लागू की गई हैं, जिनमें QR कोड आधारित सत्यापन शामिल है। ऐसे में एजेंट्स को तकनीकी रूप से भी तैयार रहने के निर्देश दिए जाएंगे, ताकि वे नई प्रक्रियाओं को आसानी से समझ सकें और उनका सही तरीके से पालन सुनिश्चित कर सकें।

हाल के दिनों में कुछ काउंटिंग सेंटरों को लेकर उठे सवालों ने भी पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। इसी कारण Mamata Banerjee खुद भी सक्रिय नजर आईं और उन्होंने मतगणना प्रक्रिया की पारदर्शिता पर जोर दिया। पार्टी के भीतर यह साफ संदेश दिया गया है कि इस बार किसी भी तरह का जोखिम नहीं लिया जाएगा।

 तृणमूल कांग्रेस इस बार मतगणना को लेकर पूरी तरह सतर्क और संगठित रणनीति के साथ मैदान में उतर रही है। पार्टी का लक्ष्य केवल चुनाव जीतना ही नहीं, बल्कि पूरे प्रक्रिया को निष्पक्ष और विवाद रहित बनाए रखना भी है। अब सबकी नजरें 4 मई पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि यह रणनीति कितनी कारगर साबित होती है।

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