उन्होंने कहा कि इतिहास में अक्सर पहले भौतिक बुनियादी ढांचे का निर्माण होता था और उसके बाद तकनीकी प्रगति उस पर आधारित होकर आगे बढ़ती थी। लेकिन वर्तमान समय में यह प्रक्रिया बदल चुकी है। अब ऊर्जा, डेटा, कनेक्टिविटी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। किसी भी एआई प्रणाली के प्रभावी संचालन के लिए ऊर्जा, डेटा ट्रांसमिशन और मजबूत नेटवर्किंग अवसंरचना की आवश्यकता होती है। ऐसे में तकनीकी विकास और भौतिक ढांचे का निर्माण एक साथ आगे बढ़ना अनिवार्य हो गया है।
गौतम अदाणी ने कहा कि भविष्य में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त केवल उन संस्थानों को मिलेगी जो ऊर्जा, तकनीक, लॉजिस्टिक्स, कनेक्टिविटी और निष्पादन क्षमता को एकीकृत प्रणाली के रूप में विकसित करने में सफल होंगे। उनके अनुसार आने वाला दशक केवल नई तकनीकों का नहीं, बल्कि उन तकनीकों को संचालित करने वाले मजबूत बुनियादी ढांचे का भी होगा। यही कारण है कि दुनिया भर में तकनीकी नेतृत्व की दौड़ अब इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयारियों की दौड़ में भी बदलती दिखाई दे रही है।
उन्होंने अपने समूह के विभिन्न क्षेत्रों में किए गए निवेशों का उल्लेख करते हुए बताया कि ऊर्जा, ट्रांसमिशन, बंदरगाह, हवाई अड्डे, लॉजिस्टिक्स, डेटा सेंटर और विनिर्माण क्षेत्र में बड़े स्तर पर विस्तार किया गया है। उनका कहना था कि इन क्षेत्रों को अलग-अलग व्यवसायों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह एक ऐसी परस्पर जुड़ी प्रणाली का हिस्सा हैं जो भविष्य की डिजिटल और भौतिक अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार प्रदान करती है।
उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया इस समय ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और एआई आधारित तकनीकों की बढ़ती मांग जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में जिन देशों के पास मजबूत ऊर्जा नेटवर्क, विश्वसनीय परिवहन व्यवस्था, उच्च क्षमता वाली डेटा संरचना और औद्योगिक उत्पादन क्षमता होगी, वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे निकल सकेंगे।
भारत को लेकर उन्होंने विशेष आशावाद व्यक्त करते हुए कहा कि देश के पास एक अनूठा अवसर मौजूद है। कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तरह भारत को पुरानी प्रणालियों को बदलने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि वह सीधे आधुनिक भौतिक और डिजिटल अवसंरचना को समानांतर रूप से विकसित कर सकता है। नवीकरणीय ऊर्जा, भंडारण क्षमता, बंदरगाह, हवाई अड्डे, डेटा सेंटर और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क इसी व्यापक परिवर्तन का हिस्सा बन रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में केवल अधिक निर्माण करना ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसी मजबूत भौतिक और डिजिटल नींव तैयार करना आवश्यक है जो देश को दीर्घकालिक विकास की दिशा में आगे ले जा सके। उनके अनुसार बुनियादी ढांचा किसी राष्ट्र को शक्ति देता है और इंटेलिजेंस उसे प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रदान करती है। इन दोनों का प्रभावी संगम ही वैश्विक विकास के अगले चरण को परिभाषित करेगा और भारत इस परिवर्तन का नेतृत्व करने की क्षमता रखता है।