रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका अब भी यूनिकॉर्न कंपनियों की संख्या के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। उसके पास 806 यूनिकॉर्न हैं, जो वैश्विक कुल का लगभग आधा हिस्सा हैं। इसके बाद चीन 381 यूनिकॉर्न के साथ दूसरे और यूनाइटेड किंगडम 70 यूनिकॉर्न के साथ तीसरे स्थान पर है। भारत 61 यूनिकॉर्न के साथ चौथे स्थान पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने में सफल रहा है।
देश के भीतर बेंगलुरु एक बार फिर स्टार्टअप राजधानी के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखने में सफल रहा है। शहर में 25 यूनिकॉर्न कंपनियां मौजूद हैं, जो इसे भारत का सबसे बड़ा नवाचार केंद्र बनाती हैं। इसके बाद मुंबई 13 यूनिकॉर्न के साथ दूसरे स्थान पर है। इन दोनों शहरों ने तकनीकी उद्यम, निवेश और प्रतिभा विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी भूमिका को और मजबूत किया है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2026 में वैश्विक स्तर पर यूनिकॉर्न कंपनियों की संख्या बढ़कर 1,603 तक पहुंच गई है। इन सभी कंपनियों का संयुक्त मूल्यांकन लगभग 8 ट्रिलियन डॉलर आंका गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेज़ प्रगति ने वैश्विक स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई गति दी है और इसी वजह से यूनिकॉर्न कंपनियों के मूल्यांकन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
हुरुन की रिपोर्ट के अनुसार एआई क्षेत्र ने इस वर्ष सबसे अधिक प्रभाव डाला है। वैश्विक यूनिकॉर्न कंपनियों की कुल वैल्यू में एआई आधारित कंपनियों की हिस्सेदारी 36 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। एआई यूनिकॉर्न की संख्या भी तेजी से बढ़कर 215 हो गई है, जो फिनटेक क्षेत्र की कंपनियों के लगभग बराबर है। इससे स्पष्ट होता है कि आने वाले वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता वैश्विक निवेश और तकनीकी विकास की सबसे महत्वपूर्ण ताकत बनी रह सकती है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2026 के दौरान 308 नए स्टार्टअप यूनिकॉर्न बने, जो पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। हालांकि यह संख्या वर्ष 2021 के रिकॉर्ड स्तर से कम है, लेकिन इस बार उभरने वाले स्टार्टअप अधिक परिपक्व और उच्च गुणवत्ता वाले माने जा रहे हैं। इनमें एआई, रोबोटिक्स और नई ऊर्जा जैसे क्षेत्रों की कंपनियों का दबदबा देखने को मिला।
वैश्विक रैंकिंग में अमेरिका की एआई कंपनी एंथ्रोपिक सबसे अधिक मूल्यांकन वाली यूनिकॉर्न कंपनी बनी हुई है। इसके बाद ओपनएआई और चीन की बाइटडांस का स्थान है। इन कंपनियों की सफलता यह दर्शाती है कि भविष्य की अर्थव्यवस्था में एआई आधारित तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ती जाएगी और निवेशकों का झुकाव भी इसी क्षेत्र की ओर रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए यह रैंकिंग केवल संख्या का संकेत नहीं बल्कि देश की नवाचार क्षमता, उद्यमिता संस्कृति और डिजिटल अर्थव्यवस्था की मजबूती का प्रमाण है। यदि निवेश, अनुसंधान, तकनीकी विकास और नीतिगत सहयोग की वर्तमान गति बनी रहती है, तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक यूनिकॉर्न सूची में और मजबूत स्थान हासिल कर सकता है। देश का स्टार्टअप इकोसिस्टम अब केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता भी लगातार विकसित कर रहा है।