पुलिस के अनुसार यह मामला वर्ष 2012 से जुड़ा है। विवेक विहार निवासी ऊषा रानी ने अपनी आय बढ़ाने के उद्देश्य से अपने दो फ्लैट किराए पर दिए थे। किराएदारों ने स्वयं को कारोबारी बताकर विधिवत किरायेदारी समझौता किया और कुछ समय तक सामान्य रूप से वहां रहे। इसके बाद दोनों फ्लैट खाली कर चले गए। मकान मालकिन ने भी इसे सामान्य घटना मानते हुए आगे कोई संदेह नहीं जताया।
करीब एक वर्ष बाद स्थिति तब बदली जब बैंक ऋण से जुड़े मामले में कानूनी प्रतिनिधि उनके घर पहुंचे और बकाया ऋण के संबंध में जानकारी मांगी। इस सूचना से हैरान मकान मालकिन ने पुलिस से संपर्क किया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि उनके नाम पर केवल एक नहीं, बल्कि लगभग 18 करोड़ रुपये के कई ऋण दर्ज हैं, जिनके लिए उनकी संपत्तियों को आधार बनाया गया था। जांच के दौरान यह भी पता चला कि ऋण प्राप्त करने के लिए कथित रूप से फर्जी दस्तावेज और जाली हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि कथित रूप से संपत्ति के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर उन्हें बैंक में प्रस्तुत किया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार मकान मालकिन के परिवार से संबंधित पहचान दस्तावेजों की प्रतियां इस्तेमाल की गईं, जबकि हस्ताक्षर वास्तविक नहीं थे। इसके अलावा एक महिला द्वारा स्वयं को संपत्ति की वास्तविक मालिक बताकर उप-पंजीयक कार्यालय में दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने की भी जानकारी सामने आई, जिससे फर्जीवाड़े की आशंका और गहरी हो गई।
जांच में यह भी आरोप सामने आया कि ऋण के माध्यम से प्राप्त धनराशि को कई अलग-अलग शेल कंपनियों के जरिए स्थानांतरित किया गया, ताकि लेनदेन की वास्तविक श्रृंखला को छिपाया जा सके। वित्तीय रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच के बाद विभिन्न एजेंसियों ने इस पूरे नेटवर्क की भूमिका की पड़ताल शुरू की। मामले में पुलिस के साथ अन्य जांच एजेंसियां भी शामिल हुईं और वित्तीय लेनदेन के कई पहलुओं की जांच की गई।
जांच के दौरान एक आरोपी की गिरफ्तारी भी की गई। पुलिस का कहना है कि वह लंबे समय तक गिरफ्तारी से बचता रहा और उसके खिलाफ पहले भी धोखाधड़ी से जुड़े मामले दर्ज रहे हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस कथित फर्जीवाड़े में और किन लोगों की भूमिका रही तथा बैंकिंग और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया में कहां-कहां चूक हुई।
यह मामला संपत्ति मालिकों के लिए भी महत्वपूर्ण सीख माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि किरायेदारी के दौरान पहचान और संपत्ति संबंधी दस्तावेज साझा करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतना आवश्यक है। किसी भी प्रकार के दस्तावेज देने से पहले उनकी आवश्यकता, उपयोग और सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। साथ ही समय-समय पर संपत्ति के रिकॉर्ड, बैंकिंग गतिविधियों और आधिकारिक दस्तावेजों की निगरानी करते रहना ऐसे मामलों से बचाव का महत्वपूर्ण उपाय माना