सबसे बड़ा झटका टीम को खिलाड़ियों की लगातार चोटों के रूप में लगा। नाथन एलिस चोट के कारण टूर्नामेंट से बाहर हो गए, वहीं शानदार लय में नजर आ रहे आयुष म्हात्रे भी इंजरी के चलते टीम से हट गए। तेज गेंदबाज खलील अहमद ने शुरुआती 5 मैचों में अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन बाद में चोटिल होकर बाहर हो गए। इसके अलावा जेमी ओवरटन जैसे ऑलराउंडर का भी अहम समय पर बाहर होना टीम के लिए बड़ा नुकसान साबित हुआ।
टीम के लिए सबसे बड़ी कमी एमएस धोनी की गैरमौजूदगी रही। विकेट के पीछे से मैच को पढ़ने और मुश्किल परिस्थितियों में टीम को संभालने वाले धोनी इस पूरे सीजन चोट के कारण एक भी मैच नहीं खेल सके। उनकी अनुपस्थिति में कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ पर अतिरिक्त दबाव रहा, लेकिन वे टीम को उस तरह से संभाल नहीं पाए जैसी उम्मीद थी।
सीएसके ने इस सीजन कई युवा खिलाड़ियों पर बड़ा निवेश किया था, लेकिन वे उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके। प्रशांत वीर और कार्तिक शर्मा जैसे महंगे खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन उनका योगदान बेहद सीमित रहा। उर्विल पटेल भी केवल एक अर्धशतक ही लगा सके, जिससे टीम की बल्लेबाजी कमजोर पड़ती गई।
टीम के दो प्रमुख बल्लेबाज ऋतुराज गायकवाड़ और डेवाल्ड ब्रेविस भी लगातार प्रभाव नहीं छोड़ सके। ब्रेविस 11 मैचों में सिर्फ 151 रन बना सके और एक भी अर्धशतक नहीं लगा पाए। वहीं ऋतुराज का स्ट्राइक रेट भी अपेक्षित स्तर से नीचे रहा, जिससे टीम को मजबूत शुरुआत नहीं मिल सकी।
गेंदबाजी विभाग भी CSK की कमजोरी साबित हुआ। अनुभवी गेंदबाजों की कमी साफ दिखाई दी। खलील अहमद के बाहर होने के बाद तेज गेंदबाजी आक्रमण कमजोर हो गया। अंशुल कंबोज और स्पेंसर जॉनसन जैसे गेंदबाज लगातार रन लुटाते रहे, जबकि स्पिन विभाग में नूर अहमद भी निरंतरता नहीं दिखा सके।
इन सभी कारणों ने मिलकर चेन्नई सुपर किंग्स के प्लेऑफ सपने को तोड़ दिया और टीम एक बार फिर अपने पुराने प्रदर्शन की छाया में संघर्ष करती नजर आई।