आकाश और तारों से जुड़े संकेतों को भारतीय परंपराओं और सामुद्रिक शास्त्र में खास महत्व दिया गया है। माना जाता है कि प्रकृति में होने वाले बदलाव केवल मौसम ही नहीं बताते, बल्कि आने वाले समय की शुभ-अशुभ घटनाओं की ओर भी इशारा करते हैं। हालांकि आधुनिक विज्ञान इन बातों को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं मानता, लेकिन लोकमान्यताओं में ये संकेत आज भी चर्चा का विषय बने हुए हैं।
सामुद्रिक शास्त्र में आकाश के रंग और उसकी स्थिति को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। इसके अनुसार,अगर आकाश अचानक लाल दिखाई दे, तो इसे अपशकुन माना जाता है। यह युद्ध, विवाद या अशांति का संकेत हो सकता है। साथ ही घर-परिवार और पड़ोस में तनाव की संभावना भी जताई जाती है।अगर आकाश नीला और साफ नजर आए, तो इसे शुभ संकेत माना जाता है और यह अच्छी वर्षा व अनुकूल परिस्थितियों की ओर इशारा करता है।
यदि आकाश सफेद या धुंधला दिखाई दे, तो इसे अपशकुन माना जाता है, जो बीमारियों या स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की चेतावनी हो सकता है।
तारों से जुड़े शकुन-अपशकुन
तारों को लेकर भी कई मान्यताएं प्रचलित हैं
कुछ परंपराओं में उंगली से तारों की ओर इशारा करना अशुभ माना गया है।
टूटते तारे को देखना किसी महत्वपूर्ण घटना या परिवर्तन का संकेत माना जाता है।
वहीं, टूटते तारे को देखकर मनोकामना करना शुभ माना जाता है और इसे इच्छापूर्ति से जोड़ा जाता है।
धूमकेतु से जुड़े संकेत
धूमकेतु (Comet) के दिखाई देने को भी शास्त्रों में विशेष माना गया है।
इसके उदय को अपशकुन माना जाता है, जो बड़े प्रशासनिक बदलाव या अस्थिरता की ओर संकेत कर सकता है।आकाश और तारों से जुड़े ये संकेत प्राचीन परंपराओं और मान्यताओं का हिस्सा हैं। आधुनिक विज्ञान इन्हें प्रतीकात्मक मानता है, लेकिन भारतीय संस्कृति में इन्हें आज भी भविष्य के संकेत के रूप में देखा जाता है।