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जंग से कांपा बाजार, डिफेंस शेयरों ने भरी उड़ान! HAL-BEL समेत ड्रोन स्टॉक्स में तेजी


नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद बढ़े भू-राजनीतिक तनाव का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखा। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन 30 शेयरों वाला Bombay Stock Exchange सेंसेक्स 1,500 अंकों से ज्यादा टूटकर 78,543.73 के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया। वहीं 50 शेयरों वाला National Stock Exchange of India निफ्टी50 भी करीब 500 अंकों की गिरावट के साथ 24,645.10 तक फिसल गया। अधिकतर सेक्टर लाल निशान में रहे और निवेशकों की संपत्ति में भारी गिरावट दर्ज की गई।

गिरते बाजार में डिफेंस बना सहारा
जहां ऑटो, बैंकिंग और एविएशन जैसे सेक्टर दबाव में दिखे, वहीं डिफेंस सेक्टर ने मजबूती दिखाई। बढ़ते वैश्विक सैन्य तनाव के बीच रक्षा खर्च में संभावित बढ़ोतरी की उम्मीद ने इस सेक्टर में निवेशकों का भरोसा मजबूत किया। सरकारी रक्षा कंपनी Bharat Electronics Limited (बीईएल) और Hindustan Aeronautics Limited (एचएएल) मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। इन दिग्गज कंपनियों की तेजी ने पूरे डिफेंस इंडेक्स को सहारा दिया।

ड्रोन कंपनियों में निवेशकों की होड़
आधुनिक युद्ध में ड्रोन और सर्विलांस तकनीक की बढ़ती भूमिका ने ड्रोन से जुड़ी कंपनियों को चर्चा में ला दिया है। कारोबार के दौरान Paras Defence and Space Technologies, ideaForge Technology और Tejas Networks के शेयरों में जबरदस्त उछाल देखा गया। कुछ शेयरों में 10 से 15 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि निगरानी, रडार, संचार उपकरण और ड्रोन तकनीक की मांग आने वाले समय में और बढ़ सकती है।

रक्षा बजट बढ़ने की उम्मीद से बढ़ा भरोसा
बाजार जानकारों के मुताबिक, जब भी वैश्विक स्तर पर युद्ध या सैन्य तनाव बढ़ता है तो देशों के रक्षा बजट में इजाफा होने की संभावना प्रबल हो जाती है। भारत पहले से ही आत्मनिर्भरता की दिशा में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा दे रहा है और बजट आवंटन में लगातार वृद्धि कर रहा है। ऐसे में यदि मौजूदा संघर्ष लंबा खिंचता है तो घरेलू रक्षा कंपनियों को नए ऑर्डर मिलने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

अस्थिरता बनी रह सकती है
हालांकि विशेषज्ञों ने चेताया है कि निकट अवधि में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से एविएशन और ऑटो सेक्टर पर दबाव बन सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम और डिफेंस सेक्टर की अगली चाल पर टिकी हुई है।

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