HIGHLIGHTS:
- ग्वालियर हाईकोर्ट ने पुजारी का स्वामित्व दावा खारिज किया
- 42 हेक्टेयर कृषि भूमि पर राज्य सरकार का अधिकार
- देवता को माना कानूनी इकाई, पुजारी केवल सेवक
- मंदिर प्रबंधन और नियुक्ति का अधिकार सरकार को
- निचली अदालतों के फैसले पलटे गए

MP NEWS: मध्यप्रदेश। ग्वालियर हाईकोर्ट ने अशोकनगर स्थित 200 साल पुराने श्री गणेशजी मंदिर की 42 हेक्टेयर कृषि भूमि पर राज्य सरकार का अधिकार घोषित कर दिया है। बता दें कि वर्ष 2006 से लंबित द्वितीय अपील पर सुनवाई करते हुए एकल पीठ ने निचली अदालतों के आदेश पलट दिए हैं।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मंदिर की पूरी जमीन माफी औकाफ विभाग की संपत्ति है और पुजारी का निजी स्वामित्व का दावा वैध नहीं है।
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कोर्ट की टिप्पणी: देवता ही संपत्ति के मालिक
राज्य सरकार ने दलील दी कि मंदिर की संपत्ति देवता की होती है और पुजारी मात्र सेवक होता है। भूमि रिकॉर्ड में भी यह संपत्ति माफी औकाफ विभाग के नाम दर्ज है।
न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया ने अपने निर्णय में कहा कि देवता एक कानूनी इकाई (लीगल पर्सन) हैं और संपत्ति उन्हीं में निहित रहती है। पुजारी को केवल पूजा-अर्चना का अधिकार है, स्वामित्व का नहीं।
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तीन गांवों में फैली है 42 हेक्टेयर जमीन
यह मामला कुल 42 हेक्टेयर कृषि भूमि से जुड़ा है, जो तीन गांवों साडीता (35.003 हेक्टेयर), नागौदखेड़ी (4.922 हेक्टेयर) और मिस्टील (2.790 हेक्टेयर) में स्थित है।
कोर्ट ने कहा कि मंदिर और उससे जुड़ी संपत्ति राज्य सरकार में निहित रहेगी। मंदिर का प्रबंधन और पुजारी की नियुक्ति का अधिकार भी सरकार के पास रहेगा।
उत्तराधिकार का प्रमाण नहीं दे पाए पुजारी
पुजारी भालचंद राव ने दावा किया था कि मंदिर और जमीन उनके पूर्वजों को लगभग 200 वर्ष पूर्व उत्तराधिकार में मिली थी। इसी आधार पर निचली अदालतों ने उनके पक्ष में फैसला दिया था।
हालांकि हाईकोर्ट में वे उत्तराधिकार का ठोस प्रमाण पेश नहीं कर सके। कोर्ट ने कहा कि मंदिर को निजी संपत्ति बताना देवता के हितों के विपरीत है। प्रमाण के अभाव में पुजारी का दावा खारिज कर दिया गया।