Chambalkichugli.com

दिल्ली में अवैध निर्माण पर नगर निगम का हथौड़ा: मालवीय नगर अग्निकांड के बाद एमसीडी की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई, 217 इमारतें ध्वस्त और 237 संपत्तियां सील

नई दिल्ली । दिल्ली नगर निगम ने राजधानी में अवैध निर्माण और भवन नियमों के गंभीर उल्लंघन के खिलाफ अपने अब तक के सबसे बड़े प्रशासनिक और दंडात्मक अभियान को तेज कर दिया है। शहर के रिहाइशी और व्यावसायिक इलाकों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर बनाई गई इमारतों पर निगम का डंडा पूरी ताकत से चला है। हाल ही में मालवीय नगर के एक होटल में हुए भीषण अग्निकांड के बाद नींद से जागे नागरिक प्रशासन ने अवैध रूप से संचालित और निर्मित संपत्तियों को लक्षित करते हुए चौबीसों घंटे की कार्रवाई शुरू कर दी है, जिसके तहत तोड़फोड़ और सीलिंग का काम युद्ध स्तर पर जारी है।

प्रशासनिक अधिकारियों से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को ही निगम की प्रवर्तन टीमों ने शहर के विभिन्न कोनों में चौदह अवैध संपत्तियों को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया, जबकि पच्चीस अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को मौके पर ही सील कर दिया गया। पिछले दस दिनों के भीतर राजस्व विभाग और नगर निगम की संयुक्त टीमों ने पूरी दिल्ली में सात सौ सत्तर से अधिक संदिग्ध और अनियमित प्रतिष्ठानों के खिलाफ औचक निरीक्षण कर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की है, जिससे नियम तोड़ने वाले भवन स्वामियों में हड़कंप मचा हुआ है।

जून महीने की शुरुआत में हुए मालवीय नगर अग्निकांड को एक टर्निंग पॉइंट मानते हुए नगर निकाय ने पिछले दो हफ्तों के भीतर कुल दो सौ सत्रह अवैध संपत्तियों को मलबे में तब्दील कर दिया है, जबकि दो सौ सैंतीस अन्य विवादित संपत्तियों पर सरकारी ताला लटकाया जा चुका है। इस अभूतपूर्व कार्रवाई के दौरान निगम ने कानूनसम्मत प्रक्रिया का पालन करते हुए अवैध निर्माण के मामलों में तीन सौ तीस कारण बताओ नोटिस और संपत्तियों को कुर्क या सील करने के लिए एक सौ एकावन वैधानिक नोटिस जारी किए हैं, जिसके साथ ही इक्यानवे पक्के विध्वंस आदेश भी पारित किए जा चुके हैं।

राजस्व विभाग की दैनिक निरीक्षण रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली के सभी बारह जोनों में विशेष टीमें लगातार ग्राउंड सर्वे कर रही हैं। उत्तरी जिले, नई दिल्ली जिले और दक्षिण-पश्चिम जिले में जिलाधिकारियों और निगम अभियंताओं की संयुक्त टीमों ने औचक निरीक्षण किए हैं, जहां पाई गई भारी अनियमितताओं के दस्तावेज नजफगढ़ जोन को आगे की दंडात्मक कार्रवाई के लिए सौंपे गए हैं। इसी तरह दक्षिण-पूर्व और पश्चिमी जिलों में भी दर्जनों ऐसी इमारतों को चिन्हित किया गया है जो बिना स्वीकृत मानचित्र या बिना फायर एनओसी के व्यावसायिक गतिविधियां संचालित कर रही थीं।

दिल्ली में नागरिक बुनियादी ढांचे की विफलता, अग्नि सुरक्षा नियमों के खुले उल्लंघन और स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक ढिलाई के कारण पूर्व में हुए कई हादसों को देखते हुए उच्च स्तरीय बैठकों में यह सख्त नीति तैयार की गई है। निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ किया है कि यह अभियान किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरी दिल्ली में जहां भी सुरक्षा मानकों के साथ समझौता पाया जाएगा, वहां बुलडोजर की कार्रवाई और सीलिंग की प्रक्रिया को बिना किसी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के अंजाम दिया जाता रहेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular News