विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक बाजारों में जारी अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव के चलते सोने की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। निवेशकों द्वारा सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में सोने को प्राथमिकता दिए जाने के कारण इसकी कीमतों में दीर्घकालिक मजबूती देखी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की नीतिगत अनिश्चितताओं का भी असर सोने की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है।
चांदी की कीमतों में भी इस समय स्थिरता बनी हुई है। देश के प्रमुख बाजारों में चांदी का औसत भाव लगभग 2,75,000 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बना हुआ है, जबकि कुछ औद्योगिक केंद्रों में यह 2,80,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक दर्ज किया जा रहा है। औद्योगिक मांग और वैश्विक बाजार संकेतों के आधार पर चांदी की कीमतों में समय-समय पर उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है, लेकिन फिलहाल बाजार में कोई बड़ा बदलाव नहीं है।
जानकारों का मानना है कि वीकेंड पर कारोबार बंद रहने के कारण कीमतों में स्थिरता स्वाभाविक है। असली दिशा अब सोमवार को बाजार खुलने के बाद ही स्पष्ट होगी, जब अंतरराष्ट्रीय संकेतों के साथ घरेलू मांग और निवेश प्रवाह का प्रभाव सामने आएगा। खासकर अमेरिकी अर्थव्यवस्था से आने वाले रोजगार और विकास संबंधी आंकड़े तथा वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियां कीमती धातुओं की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
निवेश विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा समय में सोने में दीर्घकालिक निवेश को लेकर सकारात्मक रुख बना हुआ है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोना एक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में मजबूत स्थिति में है। हालांकि अल्पकालिक निवेशकों के लिए बाजार में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है, जिससे उन्हें सावधानी के साथ निर्णय लेने की सलाह दी जा रही है।
बाजार विश्लेषकों का यह भी कहना है कि आने वाले दिनों में यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव या आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है, तो सोने और चांदी दोनों की कीमतों में और तेजी देखी जा सकती है। वहीं यदि वैश्विक परिस्थितियों में स्थिरता आती है, तो कीमतों में हल्का दबाव भी संभव है। ऐसे में निवेशकों की नजर अब अगले कारोबारी सप्ताह पर टिकी हुई है, जो कीमती धातुओं की दिशा के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।