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यूरोप में हड़कंप, यूक्रेन के ड्रोन रूस की तकनीक से भटककर NATO सीमा तक पहुंचे

नई दिल्ली । रूस-यूक्रेन युद्ध में अब तकनीक का नया और खतरनाक अध्याय जुड़ता दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार रूस ने एक ऐसी रणनीति अपनाई है जिसमें यूक्रेन के ड्रोन को हवा में ही नियंत्रित या भटकाने की कोशिश की जा रही है। इस पूरी प्रक्रिया में GPS जैमिंग और स्पूफिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किए जाने का दावा किया जा रहा है, जिससे युद्ध का स्वरूप और अधिक जटिल और तकनीक-आधारित होता जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक रूस द्वारा यूक्रेनी ड्रोन के नेविगेशन सिस्टम को बाधित किया जाता है, जिससे वे अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं। इसके बाद नकली GPS सिग्नल भेजकर उन्हें गलत दिशा में मोड़ा जाता है। इस प्रक्रिया में कई बार ड्रोन अपने तय लक्ष्य की बजाय दूसरी दिशा में उड़ते हुए NATO देशों की सीमा तक पहुंच जाते हैं या फिर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं।

हाल ही में लिथुआनिया की राजधानी विल्नियस में अचानक हवाई सुरक्षा अलर्ट जारी होने के बाद स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई। वहां राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया, उड़ान सेवाएं रोक दी गईं और कई क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया। बाद में यह सामने आया कि आसमान में देखे गए ड्रोन यूक्रेन के थे, लेकिन उनके मार्ग में बदलाव होने के कारण वे नाटो सीमा के पास पहुंच गए थे।

इस घटना के बाद यूरोप में सुरक्षा चिंताएं और बढ़ गई हैं। लातविया, एस्टोनिया और फिनलैंड जैसे नाटो देशों में भी पहले ड्रोन से जुड़े ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। कुछ घटनाओं में ड्रोन महत्वपूर्ण ठिकानों के पास पाए गए, जिससे सुरक्षा एजेंसियां लगातार अलर्ट मोड में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बल्कि पूरे यूरोप की सामरिक स्थिरता के लिए चुनौती बनती जा रही है।

रिपोर्टों के अनुसार रूस की इस रणनीति का उद्देश्य सीधे हमले के बजाय तकनीकी दबाव बनाना और दुश्मन की ड्रोन आधारित युद्ध क्षमता को कमजोर करना माना जा रहा है। यूक्रेन की ओर से जिन ड्रोन का इस्तेमाल रूस के खिलाफ किया जा रहा था, अब वही तकनीक रूस द्वारा बाधित किए जाने से यूक्रेन की रणनीति पर भी असर पड़ रहा है।

यूक्रेन के लिए ड्रोन युद्ध एक महत्वपूर्ण हथियार बन चुका है, जो कम लागत में गहरे और सटीक हमले करने में सक्षम है। लेकिन अब GPS आधारित सिस्टम पर बढ़ते खतरे के चलते यूक्रेन नई तकनीकों की ओर बढ़ रहा है। इसमें फाइबर ऑप्टिक ड्रोन और AI आधारित नेविगेशन सिस्टम शामिल हैं, जो GPS पर निर्भर नहीं रहते।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तकनीकी प्रभुत्व ही सबसे बड़ा हथियार बन जाएगा। ड्रोन युद्ध, साइबर हमले और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग जैसी तकनीकें वैश्विक सुरक्षा समीकरणों को पूरी तरह बदल रही हैं।

फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने NATO देशों की चिंता बढ़ा दी है और यूरोप में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में कदम तेज कर दिए गए हैं।

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