इस दर्दनाक हादसे में अब तक कुल 8 मजदूरों की मौत हो चुकी है। इससे पहले भी कई घायलों ने अलग-अलग अस्पतालों में इलाज के दौरान दम तोड़ा था। गुरुवार देर रात और सोमवार को भी कुछ मरीजों की मौत की पुष्टि हुई थी, जिससे मृतकों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है।
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, कई मरीजों की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। कुछ मजदूरों के शरीर 90 से 99 प्रतिशत तक झुलस चुके थे, जिससे उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई थी। गंभीर घायलों का इलाज MYH की बर्न यूनिट में किया जा रहा है, जहां संक्रमण से बचाव के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।
वहीं एक अन्य घायल विशाल (25) को सिर में गंभीर चोट लगने के बाद न्यूरो सर्जरी वार्ड में भर्ती किया गया था। धमाके के दौरान वह दूर जाकर गिरा था, जिससे उसके सिर में खून का थक्का जम गया था। डॉक्टरों के अनुसार उसकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि बर्न यूनिट में संक्रमण के खतरे को देखते हुए विशेष सावधानियां बरती जा रही हैं। 24 घंटे निगरानी के लिए नर्सिंग स्टाफ की शिफ्टवार ड्यूटी लगाई गई है ताकि मरीजों की देखभाल में कोई कमी न रहे।
हादसे के बाद चोइथराम हॉस्पिटल में भर्ती कई मरीजों में से अधिकांश को डिस्चार्ज कर दिया गया है, जबकि एक मरीज अभी भी उपचाराधीन है। उसकी स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है और उसे जल्द ही छुट्टी दिए जाने की संभावना है।
यह हादसा 14 मई की सुबह करीब 11:30 बजे हुआ था, जब टोंककला स्थित पटाखा फैक्ट्री में अचानक जोरदार विस्फोट हो गया था। विस्फोट इतना भयानक था कि फैक्ट्री की दीवारें ढह गईं और शवों के टुकड़े 20 से 25 फीट दूर तक जा गिरे थे। आसपास के घरों तक कंपन महसूस किया गया था, जिससे इलाके में दहशत फैल गई थी।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, धमाके के बाद कई मजदूर झुलसी हालत में बाहर भागते नजर आए थे। कई लोगों के कपड़े शरीर से चिपक गए थे और फैक्ट्री परिसर में चारों ओर जले हुए अवशेष बिखरे पड़े थे।
इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार बढ़ रही मौतों ने प्रशासन और फैक्ट्री संचालन पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। फिलहाल जांच जारी है और घायलों के इलाज पर नजर रखी जा रही है।