दिलीप घोष ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि फाल्टा में जिस तरह का मतदान हुआ है, उससे यह स्पष्ट है कि जनता ने अपने मताधिकार का उपयोग बड़े स्तर पर किया है और अब परिणाम को लेकर किसी प्रकार का संशय नहीं बचा है। उन्होंने दावा किया कि चुनावी प्रक्रिया में किसी तरह की अव्यवस्था नहीं रही और पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण और नियंत्रित वातावरण में संपन्न हुई।
उन्होंने आगे कहा कि विपक्षी दल चुनावी मैदान में सक्रियता दिखाने में असफल रहे हैं और मतदाताओं के बीच उनकी पकड़ कमजोर दिखाई दी है। उनके अनुसार राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में जिस तरह की उम्मीद की जा रही थी, वैसा संघर्ष जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं दिया। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के कारण जनता का रुझान स्पष्ट रूप से सकारात्मक दिशा में है।
मतगणना से पहले बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच उन्होंने नगर निकाय से जुड़े मामलों पर भी टिप्पणी की और कहा कि प्रशासनिक कार्रवाई को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है। उन्होंने यह संकेत भी दिया कि कानून और व्यवस्था के मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी और सभी मामलों की जांच निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ेगी।
फाल्टा उपचुनाव को लेकर चुनावी प्रक्रिया पहले ही चर्चा में रही है। मतदान के दौरान भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी और बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती सुनिश्चित की गई थी ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। मतदान केंद्रों पर शांतिपूर्ण माहौल रहा और मतदाताओं ने उत्साह के साथ भागीदारी की।
गौरतलब है कि फाल्टा में पहले चरण के मतदान के बाद कुछ अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद निर्वाचन प्रक्रिया को दोबारा कराने का निर्णय लिया गया था। दोबारा मतदान के दौरान प्रशासन ने अतिरिक्त सतर्कता बरती और पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में रखा गया। इसी वजह से इस बार मतदान अपेक्षाकृत अधिक शांतिपूर्ण और व्यवस्थित माना जा रहा है।
अब सभी की नजरें मतगणना पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि जनता ने किस राजनीतिक दल पर भरोसा जताया है। हालांकि, मतगणना से पहले ही सियासी बयानबाजी ने माहौल को पूरी तरह राजनीतिक रंग दे दिया है और दोनों पक्ष अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं।