तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों बड़ा सियासी तूफान खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री Vijay द्वारा मुल्लिवैक्काल स्मृति दिवस को लेकर किए गए एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद विवाद तेज हो गया है। इस मुद्दे ने अब राज्य की राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस का रूप ले लिया है।
मुल्लिवैक्काल पोस्ट से शुरू हुआ विवाद
यह विवाद 18 मई को तब शुरू हुआ जब 2009 के मुल्लिवैक्काल घटनाक्रम की याद में सीएम विजय ने एक भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने श्रीलंकाई तमिल समुदाय के अधिकारों और पीड़ितों को याद करते हुए एकजुटता की बात कही। इसी पोस्ट को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग व्याख्याएं सामने आने लगीं।
भाजपा का कांग्रेस पर हमला
भाजपा नेता Amit Malviya ने इस पोस्ट को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पोस्ट लिट्टे प्रमुख Velupillai Prabhakaran को अप्रत्यक्ष श्रद्धांजलि जैसा है, जिनकी संगठन पर पूर्व प्रधानमंत्री Rajiv Gandhi की हत्या का आरोप है। भाजपा ने कांग्रेस की चुप्पी पर भी सवाल उठाए और इसे गंभीर राजनीतिक मुद्दा बताया।
टीवीके की सफाई
विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) ने बयान जारी कर सफाई दी। पार्टी ने कहा कि सीएम के संदेश का उद्देश्य किसी भी संगठन या नेता को समर्थन देना नहीं था, बल्कि 2009 में मारे गए हजारों निर्दोष तमिल नागरिकों को श्रद्धांजलि देना था। टीवीके ने यह भी स्पष्ट किया कि पोस्ट में कहीं भी प्रभाकरण का नाम नहीं लिया गया था।
मुल्लिवैक्काल स्मृति दिवस का संदर्भ
टीवीके के अनुसार, 18 मई को दुनियाभर में बसे श्रीलंकाई तमिल समुदाय द्वारा ‘मुल्लिवैक्काल स्मृति दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, जिसमें युद्ध में मारे गए आम नागरिकों को याद किया जाता है। पार्टी ने कहा कि यह संदेश केवल उन्हीं पीड़ितों की स्मृति में था।
राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ा
इस पूरे मामले ने तमिलनाडु की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है, जिसमें भाजपा, कांग्रेस और टीवीके के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है और आगे इसके और तूल पकड़ने की संभावना है।