यह अभ्यास रूस और बेलारूस की संयुक्त सैन्य क्षमता को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है, जिसमें टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियारों की तैनाती और उनके संचालन का भी अभ्यास शामिल है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस अभ्यास में इस्कंदर मिसाइल सिस्टम और अन्य परमाणु क्षमता वाले हथियारों का भी परीक्षण किया जा रहा है।
अभ्यास में क्या-क्या शामिल?
रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस सैन्य अभ्यास में भारी संख्या में सैन्य उपकरण शामिल किए गए हैं, जिनमें मिसाइल सिस्टम, फाइटर जेट, युद्धपोत और पनडुब्बियां शामिल हैं। इस अभ्यास का उद्देश्य सैनिकों को परमाणु और रणनीतिक युद्ध परिस्थितियों के लिए तैयार करना बताया गया है।
यूक्रेन की तीखी प्रतिक्रिया
Ukraine ने रूस के इस कदम की कड़ी निंदा की है। यूक्रेन का कहना है कि बेलारूस में परमाणु हथियारों की तैनाती और इस तरह का अभ्यास अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है।
यूक्रेन ने इसे परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के सिद्धांतों के खिलाफ बताया है और कहा है कि इससे यूरोप में तनाव और बढ़ सकता है।
बढ़ता रूस-नाटो तनाव
विशेषज्ञों के अनुसार, यह अभ्यास ऐसे समय पर हो रहा है जब रूस और पश्चिमी देशों के बीच पहले से ही यूक्रेन युद्ध को लेकर तनाव चरम पर है। रूस इसे अपनी सुरक्षा जरूरत बता रहा है, जबकि नाटो और यूक्रेन इसे उकसाने वाली कार्रवाई मान रहे हैं।
इस सैन्य अभ्यास ने एक बार फिर यूरोप में बड़े युद्ध के खतरे को लेकर चिंता बढ़ा दी है, हालांकि अभी किसी भी पक्ष ने सीधे टकराव की बात नहीं कही है।