साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस नए डिजिटल स्कैम की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसमें वायरस सीधे किसी अनजान नंबर से नहीं आता, बल्कि यूजर के किसी बहुत करीबी दोस्त, रिश्तेदार या सहकर्मी के अकाउंट से भेजा जाता है। जालसाज सबसे पहले किसी अन्य माध्यम का उपयोग कर आपके किसी परिचित का व्हाट्सएप अकाउंट पूरी तरह से हैक कर लेते हैं। इसके बाद, उस भरोसेमंद प्रोफाइल का गलत फायदा उठाते हुए उसकी चैट लिस्ट में शामिल तमाम लोगों को एक संदिग्ध फाइल भेज दी जाती है, जिस पर अमूमन लोग बिना किसी शक के भरोसा कर लेते हैं।
यह खतरनाक डिजिटल वायरस अक्सर ‘.vbs’ (वीबीस्क्रिप्ट) फॉर्मेट में तैयार किया जाता है, जिसे हैकर्स किसी साधारण डॉक्यूमेंट या सामान्य फोटो का नाम देकर भेजते हैं। जैसे ही कोई यूजर अपने कंप्यूटर या लैपटॉप पर इस फाइल को डाउनलोड करके ओपन करता है, वैसे ही यह सिस्टम के बैकग्राउंड में एक छिपे हुए सॉफ्टवेयर (मालवेयर) की तरह तुरंत एक्टिव हो जाता है। इसके सक्रिय होते ही सिस्टम की सुरक्षा प्रणाली ध्वस्त हो जाती है और पूरे लैपटॉप या कंप्यूटर का रिमोट कंट्रोल परोक्ष रूप से हैकर्स के हाथों में चला जाता है।
सिस्टम के भीतर इस खतरनाक कोडिंग फाइल के एक्टिव होते ही कंप्यूटर में सुरक्षित रखे गए सभी पर्सनल पासवर्ड, सोशल मीडिया हैंडल्स, ईमेल लॉग-इन और विशेष रूप से इंटरनेट बैंकिंग से जुड़ी संवेदनशील वित्तीय जानकारियां चुपचाप हैकर्स के मुख्य सर्वर पर स्थानांतरित होने लगती हैं। इस गोपनीय डाटा का उपयोग करके जालसाज पल भर में यूजर्स के बैंक खातों में जमा गाढ़ी कमाई साफ कर सकते हैं। इसके साथ ही, कंप्यूटर की गैलरी में मौजूद निजी तस्वीरों और दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल किए जाने का जोखिम भी लगातार बना रहता है।
सरकारी एजेंसी ने इस प्रकार के गंभीर डिजिटल फ्रॉड और वायरस के हमलों से सुरक्षित रहने के लिए कुछ बेहद जरूरी सुरक्षा उपाय भी सुझाए हैं। देश के सभी इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को सलाह दी गई है कि व्हाट्सएप पर किसी भी जानने वाले के नंबर से आई ऐसी किसी भी फाइल को भूलकर भी डाउनलोड न करें, जिसके अंत में एक्सटेंशन के रूप में ‘.vbs’ लिखा हुआ दिखाई दे। इसके अलावा, यदि कोई भी फाइल अचानक भेजी गई हो या संदिग्ध लगे, तो तुरंत उस संबंधित व्यक्ति को सामान्य वॉयस कॉल करके फाइल की वास्तविकता की जांच कर लेनी चाहिए। अपने सिस्टम की सुरक्षा बढ़ाने के लिए हमेशा एक प्रामाणिक एंटीवायरस का उपयोग करना चाहिए और किसी भी अप्रत्याशित वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर अपनी शिकायत दर्ज करानी चाहिए।