नई तबादला नीति में कर्मचारियों को कई महत्वपूर्ण राहतें दी गई हैं। सरकार ने साफ किया है कि पति-पत्नी की पोस्टिंग एक ही स्थान पर रखने के मामलों पर प्राथमिकता से विचार किया जाएगा। इसके अलावा गंभीर बीमारी से पीड़ित कर्मचारियों को भी तबादलों में विशेष रियायत दी जाएगी। सरकार ने ऐसे मामलों को संवेदनशील मानते हुए उन्हें प्राथमिक श्रेणी में रखने का फैसला किया है।
कैबिनेट बैठक के बाद एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप ने जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री की ‘ए प्लस’ नोटशीट वाले तबादलों को 31 मई तक पूरा किया जाएगा। लंबित आवेदन भी इसी अवधि में निपटाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पति-पत्नी की पोस्टिंग और गंभीर बीमारी से जुड़े मामलों को सामान्य तबादला नीति से अलग रखा गया है, ताकि इन मामलों में त्वरित निर्णय लिए जा सकें।
नई नीति में प्रशासनिक और स्वैच्छिक तबादलों की सीमा अलग-अलग तय करने का भी प्रस्ताव रखा गया है। अब तक दोनों को एक ही कोटे में शामिल किया जाता था, जिससे प्रशासनिक जरूरतों के मुताबिक फेरबदल करने में परेशानी होती थी। सरकार का मानना है कि अलग कोटा तय होने से प्रशासनिक व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी।
तबादलों की सीमा को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था बनाई गई है। जिन विभागों में 200 तक कर्मचारी हैं, वहां कुल कर्मचारियों के 20 प्रतिशत तक तबादले किए जा सकेंगे। 200 से 1000 कर्मचारियों वाले विभागों में 15 प्रतिशत, 1000 से 2000 कर्मचारियों वाले विभागों में 10 प्रतिशत और 2000 से अधिक कर्मचारियों वाले विभागों में पांच प्रतिशत तबादले किए जाएंगे।
स्कूल शिक्षा विभाग की तबादला नीति हर वर्ष की तरह अलग रहेगी। वहीं जनजातीय कार्य, राजस्व और ऊर्जा विभाग भी अपनी अलग नीति जारी कर सकेंगे, लेकिन वे मूल ढांचे से अलग व्यवस्था नहीं बना पाएंगे। तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के तबादले जिला स्तर पर प्रभारी मंत्री और कलेक्टर की अनुशंसा से होंगे, जबकि प्रथम श्रेणी अधिकारियों के तबादलों के लिए मुख्यमंत्री की मंजूरी जरूरी होगी।
सरकार ने यह भी तय किया है कि सभी ट्रांसफर ऑर्डर ऑनलाइन सिस्टम के जरिए जारी किए जाएंगे। हालांकि जिन विभागों में ऑनलाइन व्यवस्था उपलब्ध नहीं है, वहां ऑफलाइन आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। अनुसूचित क्षेत्रों में रिक्त पदों को प्राथमिकता से भरने का निर्णय लिया गया है। साथ ही किसी जिले में तीन वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद ही तबादले किए जाएंगे और वरिष्ठता का भी ध्यान रखा जाएगा।
कर्मचारी संगठनों के नेताओं को नियुक्ति के बाद चार साल तक तबादलों से छूट देने का प्रावधान भी रखा गया है। वहीं गंभीर बीमारी से जूझ रहे और सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचे शिक्षकों को तबादले से राहत दी जाएगी। अतिरिक्त शिक्षकों को अन्य संस्थानों में समायोजित करने की प्रक्रिया भी लागू की जाएगी।
कैबिनेट बैठक में तबादला नीति के अलावा कई अन्य अहम मुद्दों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने उज्जैन में वर्ष 2027 में होने वाली मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक का उल्लेख किया और कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सिंहस्थ-2028 की तैयारियों का भी निरीक्षण करेंगे। बैठक में प्रदेश को नक्सल मुक्त बनाने वाले पुलिस अधिकारियों को सम्मानित किए जाने की जानकारी भी साझा की गई।