सुबह से ही शहर के मेडिकल स्टोरों के शटर बंद रहे, जिससे दवा बाजार में सन्नाटा पसरा रहा। केवल आपातकालीन सेवाओं से जुड़े स्टोर और पीएम जन औषधि केंद्रों को इस बंद से छूट दी गई, ताकि मरीजों को जरूरी दवाओं की उपलब्धता में कोई बाधा न आए।
ऑनलाइन दवा कंपनियों पर गंभीर आरोप
एसोसिएशन के अध्यक्ष चंदू जादवानी ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन दवा कंपनियां भारी डिस्काउंट और ऑफर्स का लालच देकर व्यापार कर रही हैं, जिससे स्थानीय दवा कारोबारियों को भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि निगरानी व्यवस्था कमजोर होने के कारण ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर एक्सपायरी दवाओं की बिक्री तक के मामले सामने आ रहे हैं, जो आम जनता के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।
व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन फार्मेसी के बढ़ते प्रभाव ने छोटे और मध्यम दवा विक्रेताओं के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर दिया है। कई दुकानदारों का कारोबार लगातार घट रहा है और वे आर्थिक दबाव में आ रहे हैं।
16 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा गया
दोपहर के समय एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन को 16 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। इसमें मुख्य रूप से ऑनलाइन दवा बिक्री पर पूर्ण नियंत्रण या प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। इसके साथ ही दवाओं पर दिए जा रहे अत्यधिक डिस्काउंट को रोकने और एक मजबूत नियामक व्यवस्था बनाने की बात भी रखी गई।
संघ के सचिव सागर आहूजा ने कहा कि बिना सख्त नियमों के चल रही ऑनलाइन फार्मेसी व्यवस्था पारंपरिक दवा कारोबारियों के अधिकारों का हनन कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध मरीजों के खिलाफ नहीं, बल्कि अनियंत्रित ऑनलाइन व्यापार प्रणाली के खिलाफ है।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
एसोसिएशन ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। व्यापारियों ने कहा कि वे अपने हितों और आम जनता की सुरक्षा दोनों के लिए एक मजबूत और पारदर्शी दवा बिक्री प्रणाली की मांग कर रहे हैं।
कटनी का यह बंद केवल व्यापारिक विरोध नहीं बल्कि दवा वितरण प्रणाली में सुधार की मांग के रूप में देखा जा रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन और सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं।