उज्जैन में प्रदीप पांडे चिंटू ने किए महाकाल दर्शन, बोले-जीवन का सबसे दिव्य पल

नई दिल्ली । आस्था और भक्ति के पवित्र संगम के रूप में प्रसिद्ध उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग एक बार फिर सुर्खियों में रहा, जहां भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के लोकप्रिय अभिनेता Pradeep Pandey Chintuने बाबा महाकाल के दर्शन कर आध्यात्मिक अनुभव साझा किया। अपनी फिल्मों में रोमांस, एक्शन और भावनात्मक किरदारों के लिए पहचाने जाने वाले चिंटू इस बार पूरी तरह भक्ति भाव में डूबे नजर आए। उज्जैन पहुंचने के बाद उन्होंने मंदिर परिसर में विधिवत पूजा-अर्चना की और बाबा महाकाल के दरबार में शीश नवाया। इस दौरान उन्होंने भस्म आरती में भी भाग लिया, जिसे हिंदू धर्म में अत्यंत दिव्य और दुर्लभ माना जाता है। सुबह के समय होने वाली इस आरती में शामिल होने के लिए देशभर से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। दर्शन के बाद अपने अनुभव को साझा करते हुए अभिनेता ने कहा कि यह उनकी पहली महाकाल यात्रा थी और यह पल उनके जीवन में हमेशा याद रहने वाला है। उन्होंने बताया कि भस्म आरती का दृश्य इतना अद्भुत और आध्यात्मिक था कि उसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है। पूरे वातावरण में गूंजते मंत्रोच्चार, भक्तों की आस्था और दिव्यता ने उनके मन को गहराई तक प्रभावित किया। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर में मौजूद ऊर्जा और शांति ने उन्हें एक अलग ही अनुभूति कराई, जिसे वह जीवन भर नहीं भूल पाएंगे। उनके अनुसार, यह यात्रा केवल एक धार्मिक अनुभव नहीं बल्कि आत्मिक शांति का भी माध्यम बनी। महाकाल मंदिर की भस्म आरती को लेकर यह मान्यता है कि यह आरती भगवान शिव को समर्पित सबसे विशेष अनुष्ठानों में से एक है। इसमें शामिल होने वाले श्रद्धालु इसे जीवन का सौभाग्य मानते हैं। यही कारण है कि यहां हर साल लाखों भक्त देश और विदेश से पहुंचते हैं। इस पवित्र स्थल पर केवल आम श्रद्धालु ही नहीं, बल्कि फिल्म और मनोरंजन जगत की कई प्रसिद्ध हस्तियां भी समय-समय पर दर्शन के लिए आती रहती हैं। हाल के वर्षों में कई कलाकार यहां आकर महाकाल के दर्शन कर चुके हैं और अपने अनुभव साझा कर चुके हैं, जिससे इस मंदिर की लोकप्रियता और भी बढ़ी है। अगर अभिनेता के करियर की बात करें तो उन्होंने वर्ष 2009 में अपने अभिनय सफर की शुरुआत की थी। शुरुआती सफलता के बाद उन्होंने लगातार कई लोकप्रिय फिल्मों में काम किया और भोजपुरी सिनेमा में अपनी मजबूत पहचान बनाई। उनकी फिल्मों ने दर्शकों के बीच खास जगह बनाई है और वह आज इंडस्ट्री के प्रमुख कलाकारों में गिने जाते हैं। उनकी हालिया आध्यात्मिक यात्रा ने एक बार फिर यह दिखाया कि व्यस्त फिल्मी जीवन के बीच भी कलाकार आस्था और संस्कृति से जुड़े रहते हैं। उज्जैन की यह यात्रा उनके लिए केवल एक धार्मिक पड़ाव नहीं, बल्कि एक भावनात्मक और आत्मिक अनुभव बनकर सामने आई।
उज्जैन में बड़ा विवाद: यादव समाज से परिवार निष्कासित, सामाजिक गतिविधियों पर लगी रोक

नई दिल्ली । उज्जैन जिले की बड़नगर तहसील के ग्राम बंगरेड में यह पूरा विवाद एक शादी समारोह से शुरू हुआ। डॉक्टर विष्णु प्रसाद यादव के यहां आयोजित कार्यक्रम में समाज की ओर से चंदा और धर्मशाला किराए को लेकर असहमति सामने आई। समाज द्वारा ₹5100 की बजाय ₹11,000 की राशि तय किए जाने पर वॉट्सऐप ग्रुप में चर्चा शुरू हुई। इसी दौरान नरेंद्र यादव ने सुझाव दिया कि यदि किसी से गलती हुई है तो उसे स्वीकार कर राशि वापस कर देनी चाहिए। टिप्पणी के बाद बढ़ा विवाद, फोन पर गाली-गलौज का आरोपपीड़ित नरेंद्र यादव का आरोप है कि उनकी इस टिप्पणी के बाद कुछ लोगों ने नाराजगी जताई। इसके बाद समाज के एक पंच के भाई ईश्वरलाल यादव ने उन्हें फोन कर अपशब्द कहे और समाज छोड़ने तक की बात कही। नरेंद्र यादव का कहना है कि उन्होंने यह पूरी बात समाज के ग्रुप में भी साझा की, लेकिन किसी सदस्य ने उनका समर्थन नहीं किया। सामाजिक बहिष्कार और निष्कासन का संदेशआरोप है कि बिना किसी निष्पक्ष बैठक और बिना उनका पक्ष सुने ही समाज के वॉट्सऐप ग्रुप में उनके परिवार को निष्कासित करने का संदेश जारी कर दिया गया। इसके बाद उनके परिवार को गांव के सामाजिक कार्यक्रमों और अन्य गतिविधियों में शामिल होने से रोक दिया गया, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। प्रशासन तक पहुंचा मामला, पहले भी की गई शिकायतनरेंद्र यादव ने बताया कि उन्होंने पहले भी एसपी कार्यालय में शिकायत दी थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।बाद में समाज की बैठक जरूर हुई, लेकिन उसमें उन्हें शामिल नहीं किया गया। बैठक में केवल चंदे की राशि वापस कर मामले को समाप्त मान लिया गया। न्याय की मांग और गंभीर आरोपपीड़ित का आरोप है कि धर्मशाला किराए और चंदे में कथित अनियमितताओं का विरोध करने पर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और सामाजिक रूप से अलग-थलग कर दिया गया। उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए। धर्म परिवर्तन की चेतावनी से बढ़ा मामलानरेंद्र यादव ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला और समाज में उनका सम्मान वापस नहीं किया गया, तो वे परिवार सहित धर्म परिवर्तन करने और अदालत जाने पर विचार करेंगे। प्रशासन की प्रतिक्रियाजिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शिकायत को जांच में ले लिया है। अधिकारियों ने कहा है कि पूरे मामले की जांच के बाद वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। यह मामला सामाजिक संगठनों में आंतरिक विवाद, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ते तनाव और सामाजिक बहिष्कार जैसे गंभीर मुद्दों को उजागर करता है। प्रशासन की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
“मैं भी उसके पास जाऊंगा…” उज्जैन में पत्नी के गम में पति ने तोड़ा दम, इलाके में सनसनी

नई दिल्ली। देवास-उज्जैन क्षेत्र के ग्राम काट बड़ौदा में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां पत्नी की मौत के गहरे सदमे में डूबे एक युवक ने अपनी जान दे दी। 25 वर्षीय सुभाष भाटी ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से मानसिक रूप से बेहद परेशान चल रहा था और बार-बार कहता था “वह चली गई… अब मैं भी उसके पास जाऊंगा।” प्रेम विवाह के बाद खुशहाल जीवन पर टूटा दुखों का पहाड़सुभाष भाटी ने करीब पांच साल पहले कोमल से प्रेम विवाह किया था। दोनों की कहानी सामान्य रिश्तों की तरह शुरू हुई, लेकिन एक दर्दनाक हादसे ने सबकुछ बदल दिया। शादी के एक साल बाद सड़क दुर्घटना में कोमल की मौत हो गई, जिसने सुभाष को पूरी तरह तोड़ दिया।परिजनों के अनुसार, इस घटना के बाद वह मानसिक अवसाद में चला गया और सामान्य जीवन जीना उसके लिए मुश्किल हो गया। लगातार आत्मघाती विचार और पहले भी कोशिशेंपरिजनों ने बताया कि सुभाष कई बार आत्महत्या की कोशिश कर चुका था। उसने एक-दो बार ट्रेन के सामने कूदने का प्रयास भी किया, लेकिन परिवार समय रहते उसे बचा लेता था। इसके बाद परिवार उसे अकेला नहीं छोड़ता था, लेकिन अंदरूनी दर्द लगातार बढ़ता गया। बेटी भी नहीं रोक सकी टूटे हुए मन कोसुभाष और कोमल की चार साल की एक बेटी है। परिवार उसे समझाने की कोशिश करता रहा कि वह बेटी के लिए जीए, लेकिन सुभाष बार-बार यही कहता था कि बेटी को परिवार संभाल लेगा और उसे अपनी पत्नी के पास जाना है। अंतिम कदम और मौतरविवार को सुभाष घर से बाहर गया और जहरीला पदार्थ खा लिया। हालत बिगड़ने पर उसे पहले देवास जिला अस्पताल ले जाया गया और फिर उज्जैन रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। एक खुशहाल शुरुआत का दुखद अंतपरिवार के अनुसार, सुभाष और कोमल की मुलाकात एक सामाजिक कार्यक्रम में हुई थी, जहां से उनकी दोस्ती शुरू हुई और बाद में शादी में बदल गई। 2020 में दोनों ने विवाह किया और 2022 में बेटी का जन्म हुआ, लेकिन कुछ महीनों बाद ही एक सड़क हादसे ने कोमल की जान ले ली। यह घटना केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक सहारे की गंभीर जरूरत को भी उजागर करती है। गहरे सदमे और अकेलेपन में फंसे व्यक्ति को समय पर मदद और काउंसलिंग न मिले तो परिणाम बेहद दुखद हो सकते हैं।:
MP: उज्जैन के नागदा में सीढ़ियां चढ़कर बैंक के अंदर पहुंचे नंदी, देखते ही भाग खड़े हुए ग्राहक

उज्जैन। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन (Ujjain) जिले के नागदा (Nagda) में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। महिदपुर रोड स्थित श्रीराम फाइनेंस बैंक (Shriram Finance Bank) में अचानक एक नंदी और गाय घुस गए। बैंक के अंदर मवेशियों को देख स्टाफ और ग्राहकों में अफरा-तफरी मच गई। दरअसल, मध्य प्रदेश में आवारा मवेशियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बार आवारा मवेशियों ने बैंक के अंदर बवाल काटा! जानकारी के मुताबिक, नागदा शहर के महिदपुर रोड स्थित पुराने बस स्टैंड क्षेत्र में श्रीराम फाइनेंस बैंक में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक नंदी और गाय अचानक बैंक के अंदर घुस गए। बैंक में मौजूद ग्राहक और कर्मचारी घबराकर बाहर निकल आए। कुछ देर तक बैंक का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया। इस घटना को किसी ने अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया, जिसका वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में देखा जा सकता है कि बैंक के अंदर नंदी और गाय इधर-उधर भागते हुए नजर आ रही है, वहीं कुछ लोग उसे बाहर निकालने का प्रयास करते हुए दिखाई दे रहे है। हालांकि कुछ ही देर बाद नंदी गाय बैंक के बाहर निकल गए। लेकिन इस घटना से एक बार फिर प्रशासन पर सवाल खड़े हो रहे है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, यह पहली बार नहीं है, आवारा मवेशी अक्सर इस इलाके में नजर आते हैं और कई बार दुकानों और संस्थानों के अंदर भी घुस जाते हैं। ऐसे में हर बार स्थानीय गौ-सेवा संगठनों की मदद लेनी पड़ती है।
MP: उज्जैन में फिर गरजा प्रशासन का बुलडोजर… महाकाल मंदिर मार्ग में बाधा बनी 5 इमारतें जमींदोज

उज्जैन। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन (Ujjain) में विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर (Mahakaleshwar Temple) के पास स्थित बेगम बाग क्षेत्र में शनिवार को एक बार फिर बुलडोजर कार्रवाई को अंजाम दिया गया। इस दौरान 5 बहुमंजिला इमारतों को जमींदोज कर दिया गया। ये सभी इमारतें महाकाल मंदिर पहुंच मार्ग पर बनी थीं और इनकी लीज खत्म हो चुकी थी, साथ ही इनमें अवैध रूप से व्यवसायिक गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा था। कार्रवाई के बारे में जानकारी देते हुए प्रशासन ने बताया कि जिस भूमि पर ये सभी इमारतें बनी हुई थीं, वो जमीन उज्जैन विकास प्राधिकरण की है, और जिसे 30 वर्ष की लीज पर आवासीय उपयोग के लिए दिया गया था, लेकिन यहां रहने वाले लोगों ने नियम विरुद्ध जाकर इसका व्यावसायिक उपयोग शुरू कर दिया था। जिसके चलते लीज समाप्ति के बाद उसका नवीनीकरण नहीं किया गया। वहीं जब उज्जैन विकास प्राधिकरण ने इस बारे में लोगों को नोटिस जारी किए तो संबंधित लोग न्यायालय पहुंच गए। हालांकि लोअर कोर्ट, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से स्टे खारिज होने के बाद अवैध अतिक्रमणों के खिलाफ अब यह कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों ने नहीं किया विरोधअधिकारियों ने बताया कि शनिवार सुबह 9 बजे शुरू हुई कार्रवाई में स्थानीय लोगों द्वारा किसी प्रकार का कोई विरोध देखने को नही मिला। इससे पहले जब यहां इसी प्रकार से बनी 58 इमारतों पर बुलडोजर कार्रवाई की जा रही थी, तब जरूर लोगों ने विरोध किया था, हालांकि शनिवार को हुई कार्रवाई शांतिपूवक चलती रही। संवेदनशील इलाका होने की वजह से थी कड़ी सुरक्षाप्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि जिस जगह पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चल रही है, वह महाकाल मंदिर पहुंच मार्ग है और मुस्लिम बाहुल्य इलाका होने के कारण अति संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए इस रास्ते से वाहनों की आवाजाही को पूरी तरह बन्द कर दिया गया और केवल श्रद्धालुओं को पैदल जाने की अनुमति दी गई। यह है पूरा मामला, UDA की है जमीनउज्जैन विकास प्राधिकरण ने सन् 1985 में बेगम बाग क्षेत्र में 30 साल की लीज पर आवासीय उपयोग के लिए भूखंड दिए थे। लेकिन भूखंड धारकों ने इनका उपयोग आवासीय तौर पर करने की बजाय पूरी तरह व्यावसायिक तौर पर करना शुरू कर दिया। जो कि पूरी तरह नियम विरुद्ध था। इसके बाद वर्ष 2014-15 में 30 वर्षीय लीज भी खत्म हो गई और प्राधिकरण द्वारा उसका नवीनीकरण नहीं किया गया। आवासीय जमीन का हो रहा था व्यवसायिक उपयोगइसके बाद भूखंड के दुरुपयोग को लेकर उज्जैन विकास प्राधिकरण ने लगातार नोटिस दिए। फिर आगे चलकर वर्ष 2023-24 में उज्जैन विकास प्राधिकरण ने भूखंड धारकों की लीज भी समाप्त कर दी। जिसको लेकर भूखंड धारक न्यायालय पहुंच गए और जहां से उन्हें स्टे मिल गया। इसके बाद अलग-अलग न्यायालय में इन भूखंडों का मामला विचाराधीन रहा। न्यायालय का स्टे हटते ही तोड़ने की कार्यवाही शुरू कर दी गई। सालभर के दौरान 58 इमारतों को गिराया जा चुकाअधिकारियों ने बताया कि पिछले एक साल के दौरान यहां छह चरणों में इस तरह अवैध रूप से बनी 58 बिल्डिंगों को गिराया जा चुका है। खास बात यह है कि उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा आवंटित इन भूखंडों में से 45 भूखंड ऐसे थे, जिनमें प्रत्येक का साइज करीब 2400 स्क्वेयर फीट था, लेकिन भूखंड धारकों ने इनके अलग-अलग टुकड़े कर करीब 90 बिल्डिंगें बना ली थीं। और इन 90 इमारतों में से 63 बिल्डिंग्स को जमीदोंज किया जा चुका है, शेष 27 बिल्डिंगों को भी जल्द ही कानूनी प्रक्रिया के तहत तोड़ा जाएगा। दो भूखंडों पर बना दी गई, छह इमारतेंप्रशासन ने बताया कि शनिवार को जिन 5 बिल्डिंगों पर कार्रवाई की जा रही है, वो कुल दो भूखंड थे, जिन पर छह इमारतें बना दी गई थीं और न्यायालय ने इनका स्टे खारिज कर दिया था। इसके बाद विकास प्राधिकरण की ओर से नोटिस दिया गया था, जिनकी समय सीमा समाप्त हो गई है। भवन मालिकों से बातचीत की गई और उन्हें न्यायालयीन प्रक्रिया के बारे में समझाया गया। इसके बाद उन्होंने स्वतः अपनी बिल्डिंग खाली करना शुरू कर दिया। इसी वजह से यह कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से चल रही है। उधर इस बारे में जानकारी देते हुए उज्जैन विकास प्राधिकरण सीईओ संदीप कुमार सोनी ने बताया कि माननीय न्यायालय से स्टे खारिज होने के बाद यह कार्रवाई की जा रही है। भूखंड धारक को भूखंड आवासीय तौर पर दिए गए थे, जिसका उन्होंने व्यावसायिक उपयोग किया। इसके अलावा लीज समाप्त होने के बाद लीज नवीनीकरण भी नहीं हो सका, इसलिए यह कार्रवाई की गई। जिस जगह यह कार्यवाही चल रही है यहां आगामी सिहंस्थ 2028 में ब्रिज निर्माण प्रस्तावित है।
MP: उज्जैन के इस गांव में दुल्हे ने पेश की मिसाल…. 50 लाख का दहेज लौटाया

उज्जैन। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन जिले (Ujjain district) में बड़नगर तहसील (Badnagar tehsil) के ग्राम बंगरेड (Bangred village) में आयोजित एक तिलक समारोह ने दहेज प्रथा के खिलाफ एक संदेश दिया है. कई बार देखने को मिलता है कि दहेज के लालच में शादी टूट जाती है. लेकिन बंगरेड में एक परिवार ने दहेज न लेकर समाज के सामने मिसाल पेश की है. परिवार ने करीब 50 लाख रुपए का दहेज लौटा दिया, जिसकी पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। दूल्हे पक्ष ने दहेज लेने से किया इनकारक्षत्रिय महासभा के जिलाध्यक्ष जितेंद्र सिंह राजावत के पुत्र आदर्श दीप राजावत का विवाह इंदौर जिले के देपालपुर तहसील अंतर्गत तामलपुर निवासी किसान महेन्द्र सिंह पंवार की पुत्री बिंदिया कुमारी से आगामी नवंबर 2026 में तय हुआ है. जिसकी सगाई (तिलक) के दौरान दूल्हे पक्ष ने दहेज लेने से मना कर दिया। 50 लाख का दहेज वधु पक्ष को किया वापसरविवार को बड़नगर तहसील के बंगरेड स्थित रिसोर्ट में तिलक समारोह कार्यक्रम हुआ. कार्यक्रम के दौरान जब वधु पक्ष द्वारा पारंपरिक रूप से 25 लाख रुपए नकद और 15 तोला सोना (कुल करीब 50 लाख रुपए) देने की प्रक्रिया शुरू की गई, तभी दूल्हे आदर्श दीप राजावत और उनके पिता जितेंद्र सिंह राजावत ने दहेज लेने से साफ इनकार कर दिया. लोगों ने बताया दहेज प्रथा के खिलाफ प्रेरणादायक पहलदूल्हे पक्ष ने बताया कि वे किसी भी प्रकार का दहेज स्वीकार नहीं करेंगे और केवल प्रतीकात्मक रूप में एक सोने की अंगूठी ही लेंगे. इसके बाद पूरे सम्मान के साथ नकद राशि और सोने के आभूषण वधु पक्ष को लौटा दिए गए. लोगों ने इसे दहेज प्रथा के खिलाफ एक बड़ी और प्रेरणादायक पहल बताया। जितेंद्र सिंह राजावत ने कहा, “समाज में दहेज जैसी कुरीतियां अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं, लेकिन यदि लोग आगे आकर पहल करें, तो बदलाव संभव है. कई गरीब परिवार बेटियों की शादी में दहेज के कारण परेशान होते हैं. इसलिए इस पहल से समाज में सकारात्मक सुधार की उम्मीद है। दूल्हे को चाहिए सुंदर दुल्हन और ससुर को बहु बिटियाउज्जैन में आधा करोड़ का दहेज लेने से मना करने वाले ससुर जीतेंद्र राजावत ने कहा कि “उन्हे एक बहु और उसके साथ आने वाले धन दौलत की जरुरत नहीं है. ईश्वर ने उन्हे बहुत कुछ दिया है. उन्हे तो घर में एक बिटिया चाहिए तो पुत्रवधु के रुप में मिल रही है.” तिलक समारोह के बाद रिंग सेरेमनी में वर पक्ष ने बहु पक्ष की ओर से सिर्फ एक गोल्ड रिंग स्वीकारा. यह शादी नवंबर महीने में होनी है और इससे पहले ससुर की ओर से सिर्फ मजबूत रिश्ते की डिमांड की गई है जिससे दो परिवार एक साथ जुड़ जाएं।
MP: उज्जैन में 8 करोड़ के बीमा घोटाले का खुलासा… पैसों के लिए मरे हुए लोगों को भी नहीं छोड़ा

उज्जैन। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन जिले (Ujjain district) से एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां लोगों ने पैसे कमाने के लिए मृतकों को भी नहीं बख्शा. आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (Economic Offences Cell) ने एक बड़े इंश्योरेंस घोटाले (Major Insurance Scams) का खुलासा किया है, जिसमें करीब 8 करोड़ रुपए की ठगी सामने आई है. इस पूरे मामले में बीमा एजेंट से लेकर पंचायत स्तर तक के लोग शामिल पाए गए हैं. जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस से जुड़ा हुआ है. इस घोटाले में मृत लोगों और गंभीर बीमार व्यक्तियों के नाम पर बीमा पॉलिसी करवाई गई और बाद में फर्जी दस्तावेजों के जरिए क्लेम करने की कोशिश की गई. इस मामले में अब तक 21 नॉमिनी सहित कुल 40 लोगों को आरोपी बनाया गया है. आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के एसपी समर वर्मा ने इस मामले का खुलासा करते हुए बताया कि यह स्कैम तब सामने आया जब बीमा कंपनी के पास लगातार ऐसे क्लेम आने लगे, जिनमें पॉलिसी लेने के कुछ समय बाद ही लोगों की मौत दिखाई गई थी. इस पर कंपनी को शक हुआ और उसने अपने स्तर पर जांच शुरू की. जांच के दौरान करीब 27 ऐसे मामले सामने आए, जिनमें बीमा पॉलिसी लेने के बाद जल्दी मौत दिखाई गई थी. इनमें से 8 मामले तो ऐसे निकले, जिनमें पहले से ही मृत लोगों के नाम पर पॉलिसी करवाई गई थी. यह मामला सामने आने के बाद बीमा कंपनी ने इसकी शिकायत आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ को दी. ईओडब्ल्यू ने जब इस पूरे मामले की जांच शुरू की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. जांच में पता चला कि आरोपियों ने पहले से मृत या गंभीर रूप से बीमार लोगों के नाम पर बीमा पॉलिसी जारी करवाई. इसके बाद उनके नाम पर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार किए गए और बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया गया. मृत लोगों के नाम पर बनाई गई बीमा पॉलिसियांकुछ मामलों में तो यह भी सामने आया कि पहले से मृत लोगों को जीवित दिखाकर उनके नाम पर पॉलिसी करवाई गई और बाद में उनकी मौत दिखाकर क्लेम करने की कोशिश की गई. इस पूरे खेल में पंचायत स्तर के अधिकारी भी शामिल पाए गए. जांच में सामने आया कि ग्राम सरपंच, ग्राम सचिव और सहायक सचिव ने मिलकर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाए. इन दस्तावेजों के आधार पर बीमा कंपनी में क्लेम लगाया गया. इसके अलावा क्लेम को सही साबित करने के लिए झूठे साक्ष्य भी तैयार किए गए. ईओडब्ल्यू की जांच में यह भी सामने आया कि इस घोटाले में 10 बीमा एजेंट शामिल थे. इनमें से कुछ एजेंटों ने एक से अधिक पॉलिसियां जारी करवाई थीं. इससे साफ है कि यह एक संगठित तरीके से किया गया अपराध था, जिसमें कई लोग मिलकर काम कर रहे थे. एसपी समर वर्मा ने बताया कि अब तक दो ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें ग्राम सरपंच, ग्राम सचिव और सहायक सचिव की भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आई है. इन लोगों ने पहले से मृत व्यक्तियों के नाम पर दोबारा मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार किए और उन्हें आधार बनाकर बीमा क्लेम करने की कोशिश की. इस मामले में अभी विस्तृत जांच जारी है. ईओडब्ल्यू दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच करवा रही है और आरोपियों से पूछताछ की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि आगे की जांच में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं. यह मामला इस बात को भी उजागर करता है कि किस तरह कुछ लोग सरकारी सिस्टम और बीमा प्रक्रियाओं का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं. संगठित तरीके से किए गए इस अपराध में कई स्तरों पर मिलीभगत सामने आई है, जो बेहद गंभीर चिंता का विषय है. जांच में 40 आरोपी, आगे और खुलासे की संभावनाफिलहाल ईओडब्ल्यू ने सभी आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और इस तरह के मामलों को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे. यह घोटाला न केवल आर्थिक अपराध है, बल्कि यह समाज की संवेदनाओं को भी ठेस पहुंचाने वाला मामला है, जहां लोगों ने पैसे के लिए मृतकों के नाम का भी दुरुपयोग किया. अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच में आगे क्या खुलासे होते हैं और कितने लोग इस मामले में और सामने आते हैं.
उज्जैन के महाकाल मंदिर में अनुपम खेर की भक्ति यात्रा, देश और फैंस के लिए की विशेष प्रार्थना, मंदिर व्यवस्था की खुलकर की तारीफ

नई दिल्ली। उज्जैन: प्रसिद्ध अभिनेता अनुपम खेर ने मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित पवित्र महाकालेश्वर मंदिर में पहुंचकर भगवान शिव के दर्शन किए। अपनी इस आध्यात्मिक यात्रा के दौरान उन्होंने मंदिर में आयोजित आरती में भाग लिया और पूरे श्रद्धा भाव के साथ पूजा-अर्चना की। मंदिर में बिताए गए समय को उन्होंने बेहद दिव्य और ऊर्जावान अनुभव बताया और कहा कि यहां आकर उन्हें एक अलग ही शांति और शक्ति का एहसास हुआ, जो जीवन में एक विशेष प्रेरणा देता है। अनुपम खेर समय-समय पर अपनी धार्मिक यात्राओं को लेकर चर्चा में रहते हैं। वे देशभर के विभिन्न मंदिरों और पवित्र स्थलों पर जाकर आस्था व्यक्त करते हैं और अपने अनुभवों को फैंस के साथ साझा करते हैं। इसी क्रम में उनकी उज्जैन यात्रा भी बेहद खास रही, जहां उन्होंने महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने मंदिर परिसर की भव्यता और वातावरण की आध्यात्मिक ऊर्जा को करीब से महसूस किया। अभिनेता ने अपनी इस यात्रा की झलक अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा की, जहां उन्होंने कई तस्वीरें और वीडियो पोस्ट किए। इन दृश्यों में वे मंदिर परिसर में घूमते हुए और आरती में शामिल होते हुए दिखाई दिए। उन्होंने अपने संदेश में लिखा कि महाकाल के दर्शन करना उनके लिए अत्यंत सौभाग्य का विषय रहा और उन्होंने देशवासियों की शांति, सुख और समृद्धि के लिए भी प्रार्थना की। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की संस्कृति और धार्मिक स्थलों की प्राचीनता और भव्यता विश्व में अद्वितीय है। वीडियो संदेश में अनुपम खेर ने उत्साह के साथ ‘जय महाकाल’ का उद्घोष किया और बताया कि आरती के दौरान का अनुभव अत्यंत दिव्य था। उन्होंने कहा कि यहां का वातावरण मन और आत्मा दोनों को एक अलग ऊर्जा प्रदान करता है। साथ ही उन्होंने मंदिर प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं की भी प्रशंसा की और कहा कि यहां भक्तों के लिए सुव्यवस्थित और सम्मानजनक व्यवस्था की गई है, जिससे सभी श्रद्धालु सहजता से दर्शन कर सकें। अनुपम खेर ने यह भी बताया कि उन्होंने महाकाल के दर्शन के साथ-साथ सभी के कल्याण और देश की प्रगति के लिए विशेष प्रार्थना की। उनके अनुसार यह यात्रा केवल एक धार्मिक अनुभव नहीं थी, बल्कि आत्मिक शांति और आंतरिक शक्ति प्राप्त करने का एक माध्यम भी रही। वर्कफ्रंट की बात करें तो अनुपम खेर जल्द ही फिल्म ‘खोसला का घोसला’ के दूसरे भाग में नजर आएंगे, जिसमें वे एक बार फिर कमल किशोर खोसला के किरदार में दिखाई देंगे। इस फिल्म का निर्देशन दिबाकर बनर्जी कर रहे हैं और इसमें कई अनुभवी कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में होंगे। इसके अलावा वे निर्देशक सूरज बड़जात्या के आगामी प्रोजेक्ट का भी हिस्सा हैं, जिससे उनके प्रशंसकों में उत्साह बना हुआ है। महाकालेश्वर मंदिर की यह यात्रा एक बार फिर यह दर्शाती है कि अनुपम खेर अपने व्यस्त फिल्मी करियर के बावजूद आध्यात्मिकता और आस्था से गहरा जुड़ाव रखते हैं। उनका यह अनुभव न केवल उनके लिए व्यक्तिगत रूप से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि उनके चाहने वालों के लिए भी प्रेरणादायक संदेश लेकर आया है।
MP: उज्जैन में महाकाल मंदिर के पास अवैध कत्लखाने का खुलासा…दो आरोपी गिरफ्तार

उज्जैन। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन शहर (Ujjain city.) में प्रतिबंध के बावजूद प्रतिबंध क्षेत्र में चोरी छिपे कत्लखाना (Slaughterhouse) चल रहा था। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने बड़ी कार्यवाही करते हुए दो आरोपी को गिरफ्तार किया है और साथ ही मौके से भारी मात्रा में मांस, धारदार हथियार,जिन्दा गाय के बछड़े सहित तोलने का सामान जब्त किया है। पुलिस को देखते ही दोनों आरोपी भागने का प्रयास कर रहे थे, हालांकि पुलिस टीम ने उन्हें तुरंत पकड़ लिया। बताया जा रहा है कि महाकाल मंदिर (Mahakal Temple) के पास किसी भी तरह के मांस विक्रय पर प्रतिबंध लगा हुआ है। पुलिस ने अवैध रूप से गोवंश (पाडे) काटने और मांस बेचने के संबंध में पशु क्रूरता अधिनियम 11(1)(घ) और अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज कर आरोपी हाजी मुस्तकीम (निवासी: बम्बईया गली, कोट मोहल्ला) वसीम बम्बईया (निवासी: बम्बईया गली, कोट मोहल्ला) गिरिफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि घटना 12 अप्रेल की है और पुलिस इसमें गोपनीय तरीके से जांच पड़ताल कर रही थी। चोरी-छिपे पशु काटने का अवैध कत्लखानाउज्जैन शहर के महाकाल थाना क्षेत्र में पुलिस को सूचना मिल रही थी कि एक संदिग्ध मकान में चोरी-छिपे पशु काटने का अवैध कत्लखाना चल रहा है, इस पर पुलिस ने अपने खुफिया तंत्र को इस काम पर लगाया और 12 अप्रैल को सूचना मिलते ही महाकाल पुलिस ने दबिश देकर जिंदा गाय के बछड़े सहित मौके से भारी मात्रा में मांस, धारदार हथियार और एक इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटा बरामद किया है। आरोपी पाड़ों का मांस बेचने की तैयारी में थे। बता दें कि धार्मिक नगरी होने के कारण उज्जैन में बूचड़खाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। पशु अधिनियम क्रूरता में मामला दर्जपुलिस ने इस मामले में हाजी मुस्तकीम और वसीम बम्बईया नामक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह दोनों कोट मोहल्ला महाकाल क्षेत्र के निवासी हैं। उनके खिलाफ मध्य प्रदेश कृषि पशु परिरक्षण एवं पशु क्रूरता अधिनियम की धारा 11 (घ) और आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि यह अवैध कारोबार किस नेटवर्क के तहत संचालित हो रहा था और काटे गए मांस की आपूर्ति कहां की जानी थी। दबिश में पुलिस को मिला भारी मात्रा में मांसपुलिस को मौके से एक पाडे के कटे हुए चार पैर। 2 जीवित पाडे और 1 पाडी, जिन्हें क्रूरतापूर्वक रस्सियों से बांधकर रखा गया था। मांस तोलने के उपकरण, एक डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक कांटा, लोहे की तराजू और विभिन्न बाट। एक धारदार बक्का और एक धारदार लोहे की छुरी और मांस काटने का लकड़ी का ठिया। महाकाल थाना पुलिस ने बताया कि शासन द्वारा मांस की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद, आरोपी हाजी मुस्तकीम और उसका भाई वसीम अपने घर के नीचे बने एक कमरे में अवैध रूप से पाडे (मवेशी) काटकर उनका मांस बेच रहे हैं। जब पुलिस ने गवाहों के साथ वहां दबिश दी, तो दोनों आरोपी अपने हथियार (छुरे) मौके पर छोड़कर पीछे के रास्ते से भाग निकलने का प्रयास कर रहे थे, इस दौरान पुलिस ने मौके की वीडियोग्राफी करवाई और वहां से साक्ष्य बरामद किए।
उज्जैन में मंदिर हटाने को लेकर पंचम पूरा में हुआ विवाद, एसआई घायल

उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन के पंचमपुरा में शनिवार की रात मंदिर हटाने गई पुलिस और नगर निगम टीम के साथ कुछ लोगों ने अभद्रता करते हुए पथराव कर दिया। जिसमें एक माधव नगर थाने में पदस्थ एसआई घायल हो गया। उक्त घटना के बाद माधवनगर थाने के बाहर हिन्दूवादी संगठन के लोगों ने चक्का जाम करने का प्रयास किया। लेकिन पुलिस ने सभी को हटाया। गौरतलब है कि सांवेर रोड स्थित दो तालाब से लेकर तरणताल चौराहे तक मार्ग चौड़ीकरण किया जाना है। इस मार्ग पर स्थित पंचमपुरा में एक कालका माता का मंदिर को भी स्थानांतरित किया जा रहा है। शनिवार सुबह स्थानीय रहवासियों और नगर निगम ने विधि-विधान के साथ माता की मूर्ति को मंदिर से स्थानांतरित कर दिया था। शाम को जब नगर निगम की टीम मंदिर तोडऩे पहुंची तो मंदिर के समीप रहने वाले रवि बामनिया ने हिन्दूवादी संगठन के कार्यकर्ताओं को बुलाया लिया। स्थानीय लोगों ने नगर निगम की कार्रवाई का समर्थन किया और हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं को हस्तक्षेप करने से रोक दिया। आरोप है की इसी बात को लेकर रवि बामनिया के साथ लोगों ने मारपीट कर दी। जिससे गुस्सा होकर उसने पत्थर फैंके। जिसके कारण मौके पर अफरा-तफरी मच गई। एक पत्थर माधवनगर थाने में पदस्थ एसआई अंकित बनोधा को के सिर में ल ग गया। जिसके कारण वह घायल हो गया। मामला गरमाया तो पुलिस ने लोगों को मौ$के से खदेड़ दिया। कुछ ही देर में पुलिस बल की मौजुदगी में नगर निगम ने मंदिर को हटा दिया। उक्त घटना के बाद हिंदूवादी संगठनों ने माधव नगर थाने का घेराव करते हुए सड़क पर जाम लगाने का प्रयास किया। जहां पर सूचना मिलते ही सीएसपी दीपिका शींदे पहुंची और उन्होने हंगामा कर रहे लोगों को मौके से भागा दिया। इस दौरान पुलिस ने एक युवक को हिरासत में भी लिया।