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जिंदगी की जंग लड़ रहा भागीरथ बोरवेल से सुरक्षित निकालने की कोशिशें तेज

उज्जैन । मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के बड़नगर तहसील अंतर्गत ग्राम झालरिया में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है जहां 3 साल का मासूम बच्चा बोरवेल में गिर गया। घटना के बाद से ही एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई हैं और बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास तेजी से जारी हैं। जानकारी के अनुसार बच्चा भागीरथ अपने परिवार के साथ भेड़ चराने के लिए क्षेत्र में आया था। खेलते-खेलते वह खुले पड़े बोरवेल के पास पहुंच गया जहां पहले ढक्कन लगा हुआ था लेकिन बताया जा रहा है कि जानवरों के चरने के दौरान वह ढक्कन हट गया और इसी कारण यह हादसा हो गया। हादसा गुरुवार रात करीब 8 से 9 बजे के बीच हुआ जिसके बाद तुरंत प्रशासन, पुलिस और रेस्क्यू टीमों को सूचना दी गई। घटना के बाद से रातभर लगातार राहत और बचाव कार्य चलता रहा और मशीनों की मदद से ऑपरेशन को तेज किया गया। पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि बच्चे को करीब 75 फीट की गहराई पर लोकेट कर लिया गया है। बोरवेल के अंदर कैमरे और विशेष उपकरण डालकर बच्चे की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि हर पल की जानकारी मिल सके और उसे सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज करने के लिए मौके पर 5 पोकलेन और जेसीबी मशीनें लगाई गई हैं। इसके साथ ही बोरवेल के पास समानांतर गड्ढा खोदकर टनल बनाने का काम भी तेजी से किया जा रहा है ताकि वैकल्पिक रास्ते से बच्चे तक पहुंचा जा सके। प्रशासन ने पूरे इलाके को घेराबंदी कर दिया है और किसी भी तरह की भीड़ को रोकने के निर्देश दिए हैं ताकि बचाव कार्य में कोई बाधा न आए। अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे मौके पर न जुटें और राहत कार्य में सहयोग करें। मासूम भागीरथ, जो राजस्थान के पाली जिले के निवासी बताए जा रहे हैं, अपने परिवार के साथ कुछ दिनों से इस क्षेत्र में रुके हुए थे। फिलहाल पूरे प्रशासन का ध्यान केवल एक ही लक्ष्य पर है किसी भी तरह बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालना। यह हादसा एक बार फिर खुले बोरवेल की खतरनाक स्थिति और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। राहत टीमों का ऑपरेशन लगातार जारी है और सभी की नजर अब सिर्फ इस बात पर है कि मासूम को कब तक सुरक्षित बाहर निकाला जा सकेगा।

MP कैबिनेट: उज्जैन में 590 करोड़ से होगा हवाई पट्टी का विस्तार, बोइंग और एयरबस का होगा संचालन…

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने उज्जैन हवाई पट्टी (Ujjain airstrip) के विस्तार के लिए 590 करोड़ रुपये की लागत से 437 एकड़ भूमि के अधिग्रहण को मंजूरी दे दी है। उड़ान योजना के तहत यहां बोइंग और एयरबस (Boeing and Airbus.) जैसे बड़े विमानों के संचालन के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के साथ समझौता किया गया है। उज्जैन एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन केंद्र है जहां प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर (Mahakaleshwar Temple) स्थित है। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 2,923 करोड़ रुपये के 22 विकास कार्यों को मंजूरी दी है जिन्हें दिवाली 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। उज्जैन हवाई पट्टी का होगा विकासएक अधिकारी के अनुसार, केंद्र सरकार की उड़ान योजना के तहत उज्जैन हवाई पट्टी के विकास के लिए राज्य सरकार और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के बीच समझौता हुआ है ताकि यहां बोइंग और एयरबस 320 जैसे बड़े विमानों का संचालन हो सके। सरकारी हवाई पट्टी के विकास और विस्तार के लिए आवश्यक समझौते और समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। 437.5 एकड़ जमीन के अधिग्रहण को मंजूरीअधिकारी ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने इस परियोजना के लिए 437.5 एकड़ जमीन के अधिग्रहण को मंजूरी दी है। इसके लिए 590 करोड़ रुपये की रकम मंजूर की गई है।उज्जैन एक धार्मिक नगरी है। महाकालेश्वर मंदिर की वजह से यह पर्यटन के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। महाकालेश्वर मंदिर देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। उज्जैन में सांदीपनी आश्रम भी है। महाकुंभ के कामों को पूरा करने के लिए तय की डेडलाइनअधिकारी ने बताया कि उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन होता है जहां दूर-दूर से बहुत से श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। उज्जैन सेवा क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ता हुआ शहर है इसलिए यहां की हवाई पट्टी को सुधारना बहुत जरूरी है। सिंहस्थ मेले के लिए बनी कैबिनेट कमेटी ने तय किया है कि साल 2028 के महाकुंभ से जुड़े सभी कामों को दिवाली 2027 तक पूरा कर लिया जाए। 9 अप्रैल से गेहूं की खरीदकैबिनेट ने शिक्षा, खेती, सिंचाई, प्रशासन और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने वाली योजनाओं के लिए 16,720 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। साथ ही कैबिनेट ने किसानों के हित में एक बड़ा फैसला लेते हुए गेहूं की खरीद 10 अप्रैल के बजाय 9 अप्रैल से ही शुरू करने की मंजूरी दे दी है। विकास कार्यों का होगा थर्ड पार्टी ऑडिटवहीं मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कैबिनेट समिति की 5वीं बैठक में कहा कि बुनियादी ढांचे के सभी काम अच्छी क्वालिटी के साथ तय समय पर पूरे होने चाहिए। समिति ने 2,923.84 करोड़ रुपये के 22 कामों को मंजूरी दी। सीएम मोहन यादव ने निर्देश दिया कि सिंहस्थ 2028 के कामों का थर्ड पार्टी ऑडिट कराया जाए ताकि काम की गुणवत्ता पक्की हो सके। 100 किलोमीटर के दायरे में होगे काममुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सिंहस्थ 2028 के लिए उज्जैन में बन रहे भवनों का निर्माण ऐसा हो कि वे बाद में भी वार्षिक कार्यक्रमों के काम आ सकें। उन्होंने निर्देश दिया कि महाकाल मंदिर और अन्य तीर्थों तक पहुंचने के लिए बेहतर सड़कें बनाई जाएं। मुख्यमंत्री ने दूर से आने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए उज्जैन के 100 किलोमीटर के दायरे में होमस्टे, पार्किंग और जन-सुविधाओं को बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने क्षिप्रा नदी पर पैदल चलने वालों के लिए एक अलग पुल बनाने का भी आदेश दिया।

MP: उज्जैन में महाकाल : द मास्टर ऑफ टाइम अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन

भोपाल। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में स्थित तारामंडल में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘महाकाल : द मास्टर ऑफ टाइम’ का रविवार देर शाम आयोजित पैनल चर्चा ‘वे फॉरवर्ड’ सत्र के साथ समापन हुआ। इस सत्र में देश के प्रमुख वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों ने अंतरिक्ष अनुसंधान, खगोल विज्ञान, स्वदेशी तकनीक, स्टार्टअप्स और भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका पर अपने विचार रखे। मानव संसाधन और स्टार्टअप की भूमिका रही महत्वपूर्णपीआरएल, डीओएस अहमदाबाद के निदेशक प्रो. अनिल भारद्वाज ने सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रमों की सफलता के लिए कुशल मानव संसाधन सबसे महत्वपूर्ण आधार है। चंद्रमा पर मानव मिशन जैसे लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित, जीव विज्ञान, चिकित्सा और इंजीनियरिंग जैसे विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की आवश्यकता होगी। उन्होंने अंतरिक्ष चिकित्सा, जैव विज्ञान और खाद्य प्रौद्योगिकी जैसे उभरते क्षेत्रों के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने शिक्षा संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के बीच बेहतर समन्वय और सूचना के आदान-प्रदान को आवश्यक बताते हुए कहा कि देश में विकसित हो रहे स्टार्टअप अंतरिक्ष क्षेत्र की जटिल चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। स्वदेशी तकनीक और उद्योग सहभागिता पर जोरएनसीआरए-टीआईएफआर, एसपीपी परिसर पुणे के निदेशक प्रो. यशवंत गुप्ता ने खगोल विज्ञान की बड़ी परियोजनाओं में तकनीकी आत्मनिर्भरता और उद्योगों की भागीदारी को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि पहले कई तकनीकों के लिए भारत को विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन जीएमआरटी जैसे प्रोजेक्ट्स ने देश की तकनीकी क्षमता को साबित किया है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक परियोजनाओं में विकसित तकनीकों का साझा उपयोग किया जा सकता है, जिससे लागत कम होगी और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने अनुसंधान संस्थानों और उद्योगों के बीच मजबूत तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की आवश्यकता बताई। स्पेस साइंस की शिक्षा का विस्तार आवश्यकआईआईएसटी के कुलपति प्रो. दीपांकर बनर्जी ने बतायाकि पिछले कुछ वर्षों में स्पेस साइंस क्षेत्र में 300 से अधिक स्टार्टअप सामने आए हैं, जो इस क्षेत्र की बढ़ती संभावनाओं को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में एस्ट्रोनॉमी और एस्ट्रोफिजिक्स की शिक्षा सीमित संस्थानों तक ही केंद्रित है, इसलिए इस ज्ञान को व्यापक स्तर पर पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि स्पेस साइंस और एस्ट्रोनॉमी जैसे विषयों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा जाना चाहिए, जिससे विद्यार्थी प्रारंभ से ही इस क्षेत्र के प्रति प्रेरित हो सकें। प्रो. बनर्जी शिक्षा, उद्योग, तकनीक और अनुसंधान संस्थानों के संयुक्त प्रयासों को भविष्य के लिए आवश्यक बताया। भारतीय ज्ञान परंपरा और इतिहास के पुनर्पाठ पर बलइंडोलॉजिस्ट एवं चिंतक, पद्मश्री डॉ. भगवती लाल राजपुरोहित ने भारतीय इतिहास और ज्ञान परंपरा के प्रमाण आधारित अध्ययन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने उज्जैन और मालवा क्षेत्र की कालगणना एवं खगोल विज्ञान की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इतिहास को तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर पुनः समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि उज्जैन प्राचीन काल से समय गणना और खगोल अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है और इस विरासत को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पुनः स्थापित करने की आवश्यकता है। युवाओं के लिए अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में अपार अवसरपैनल विशेषज्ञों ने कहा कि भारत का अंतरिक्ष और खगोल विज्ञान क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है और इसमें युवाओं के लिए रोजगार और अनुसंधान की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। यदि शिक्षा, अनुसंधान संस्थानों और उद्योगों के बीच समन्वित प्रयास किए जाएं, तो भारत इस क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ सकता है। सम्मेलन ने उज्जैन की प्राचीन कालगणना परंपरा को आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़ते हुए विज्ञान, इतिहास और भारतीय ज्ञान प्रणाली के समन्वय का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।

महाकाल के दरबार पहुंची एक्ट्रेस कावेरी प्रियम, भस्म आरती में शामिल हुईं, बोलीं- यहां की ऊर्जा है अलौकिक

उज्जैन। उज्‍जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के भस्म आरती के दौरान टीवी और फिल्म एक्ट्रेस कावेरी प्रियम भगवान महाकाल के दर्शन करने पहुंचीं। सुबह करीब 4 बजे उन्होंने आरती में भाग लिया और नंदी हॉल में बैठकर इस दिव्य अनुष्ठान का अनुभव किया। आरती के बाद उन्होंने मंदिर की देहरी से भगवान महाकाल को जल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। ‘भस्म आरती में मिलती है अद्भुत ऊर्जा’ दर्शन के बाद कावेरी प्रियम ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि बाबा महाकाल के दरबार की शक्ति को शब्दों में व्यक्त करना आसान नहीं है। उन्होंने बताया, “मैं पिछले तीन वर्षों से यहां लगातार आ रही हूं। भस्म आरती के समय जो ऊर्जा महसूस होती है, वह सच में अद्भुत और अलौकिक है।” टीवी से फिल्मों तक बनाया खास मुकाम कावेरी प्रियम ने अपने करियर की शुरुआत टीवी शो नागिन 2 में बीके के किरदार से की थी। इसके बाद उन्होंने ये रिश्ते हैं प्यार के में कुहू माहेश्वरी राजवंश और जिद्दी दिल माने ना में डॉ. मोनामी महाजन की भूमिका निभाकर दर्शकों के बीच पहचान बनाई। फिल्मों में उन्होंने तिश्नगी से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की।

हादसे ने लिया उग्र रूप युवक की मौत के बाद पथराव और आगजनी से हाईवे पर हड़कंप

उज्जैन । मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले में एक सड़क हादसा उस समय हिंसक रूप ले बैठा जब एक युवक की मौत के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने जमकर हंगामा कर दिया घटना गरोठ नेशनल हाईवे पर बीती रात की है जहां दिल्ली से उज्जैन महाकाल दर्शन के लिए आ रही एक मिनी बस और ट्रैक्टर के बीच जोरदार टक्कर हो गई इस हादसे में 21 वर्षीय युवक विजय सोलंकी की दर्दनाक मौत हो गई जबकि चार अन्य लोग घायल हो गए जिनमें से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मिनी बस तेज रफ्तार में थी और तुलाहेड़ा टोल प्लाजा के पास उसने ट्रैक्टर को पीछे से टक्कर मार दी टक्कर इतनी भीषण थी कि ट्रैक्टर पलट गया और विजय सोलंकी उसके नीचे दब गया बताया जा रहा है कि वह करीब एक घंटे तक ट्रैक्टर के नीचे फंसा रहा और समय पर राहत नहीं मिलने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई इस हादसे में उसका साथी राजेश शर्मा गंभीर रूप से घायल हो गया वहीं बस चालक शिवकुमार और यात्री बॉबी व धर्मेंद्र कुमार भी घायल हुए हैं गंभीर घायलों को निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है हादसे के बाद जैसे ही युवक की मौत की खबर गांव में फैली लोगों में आक्रोश फैल गया बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और उन्होंने मिनी बस पर पथराव शुरू कर दिया देखते ही देखते गुस्सा इतना बढ़ गया कि बस में आग लगा दी गई आग इतनी तेजी से फैली कि पूरी बस और उसमें रखा यात्रियों का सामान जलकर खाक हो गया हालांकि राहत की बात यह रही कि सभी यात्री समय रहते बस से बाहर निकल गए और उनकी जान बच गई बाद में उन्हें अन्य वाहनों के जरिए उज्जैन रवाना किया गया घटना के बाद ग्रामीणों ने हाईवे पर चक्काजाम कर दिया और टोल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की उनका आरोप था कि टोल प्लाजा पर मौजूद कर्मचारियों की लापरवाही के कारण राहत कार्य में देरी हुई और यदि समय पर मदद मिल जाती तो विजय सोलंकी की जान बचाई जा सकती थी इस आरोप ने स्थिति को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में करने की कोशिश की भारी पुलिस बल तैनात किया गया और समझाइश के बाद जाम खुलवाया गया प्रशासन ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है यह घटना न केवल एक सड़क हादसे की त्रासदी को दर्शाती है बल्कि यह भी बताती है कि समय पर राहत और जिम्मेदारी की कमी कैसे हालात को और बिगाड़ सकती है एक तरफ जहां एक युवक की मौत ने परिवार को गहरे दुख में डाल दिया वहीं दूसरी ओर गुस्से की आग ने एक और नुकसान की तस्वीर सामने ला दी अब देखना होगा कि जांच के बाद सच्चाई क्या सामने आती है और जिम्मेदारी तय होती है या नहीं

विश्व काल-गणना के केंद्र के रूप में उज्जैन की भूमिका पर विशेषज्ञों ने किया मंथन

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में महाकाल की पावन धरा उज्जैन में शुक्रवार को तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “महाकाल : द मास्टर ऑफ टाइम” की शुरुआत हुई। सम्मेलन में देश-विदेश के प्रख्यात खगोलविदों, वैज्ञानिकों और शीर्षस्थ विद्वानों ने भारतीय काल-गणना की वैज्ञानिकता और उसकी प्राचीन श्रेष्ठता पर गहन मंथन किया। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य उज्जैन की गौरवशाली पहचान को वैश्विक पटल पर पुनः स्थापित करना है। उज्जैन नगरी युगों तक विश्व के प्रधान मध्याह्न रेखा (प्राइम मेरिडियन) और काल-गणना का केंद्र रही है। विद्वानों ने एक स्वर में यह आह्वान किया कि अब समय आ गया है जब हम समय की वैश्विक अवधारणा के ‘भारतीयकरण’ की ओर बढ़ें और अपनी उस वैज्ञानिक विरासत को जीवंत करें, जो सदियों तक मानवता के लिए समय का बोध कराती रही है। सम्मेलन के प्रथम सत्र का मुख्य विषय “समय क्या है? इसका मापन कैसे हुआ तथा प्रधान मध्यान्ह (मेरेडियन) रेखा के रूप में उज्जैन का महत्व” रहा। सत्र का संचालन करते हुए आईआईटी गुवाहाटी के प्रो. तडीकोंडा वेंकट भारत ने समय के मूल स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्राचीन भारत काल-गणना के क्षेत्र में संपूर्ण विश्व का मार्गदर्शक था। कालांतर में सांस्कृतिक संक्रमण के कारण हमारा यह अमूल्य ज्ञान पाश्चात्य पद्धतियों के अधीन हो गया। अब समय की मांग है कि हम आधुनिक विज्ञान और शोध के माध्यम से अपनी विरासत का पुनरुद्धार करें। राज्यसभा की एस. राधाकृष्णन पीठ के इतिहासविद् डॉ. एम.एल. राजा ने गर्व के साथ भारत को ‘काल-गणना का देवता’ निरूपित किया। उन्होंने कहा कि पाश्चात्य जगत जिस कालखंड की सूक्ष्मता को समझने का प्रयास कर रहा है, वह भारतीय मनीषियों के लिए हजारों वर्ष पूर्व भी प्रत्यक्ष सत्य था। डॉ. राजा ने भारतीय कैलेंडर की वैज्ञानिकता सिद्ध करते हुए बताया कि हमारी पद्धति में लीप ईयर जैसी कोई विसंगति नहीं है; यह खगोलीय पिंडों की गति का शुद्ध गणित है। उन्होंने ‘एक राष्ट्र, एक संस्कृति और एक संवत’ का दूरगामी विचार प्रस्तुत करते हुए भारतीय साक्ष्यों को अकाट्य प्रमाणों के साथ विश्व के सम्मुख रखने की आवश्यकता पर बल दिया। काशी के प्रो. विनय कुमार पांडेय ने उज्जैन (अवंतिका) के शास्त्रीय और खगोलीय महत्व को नए आयाम दिए। उन्होंने स्कंद पुराण, नारद पुराण और सूर्य सिद्धांत जैसे ग्रंथों का उदाहरण देते हुए बताया कि “काल-गणना का वास्तविक मूल केन्द्र अवंतिका ही है।” उन्होंने कहा कि उज्जैन विश्व का वह अनूठा भौगोलिक स्थल है जहाँ श्मशान और शक्तिपीठ एक साथ विद्यमान हैं, जो इसे समय की उत्पत्ति और लय का केंद्र बनाते हैं। खगोलशास्त्री पं. कैलाशपति नायक ने समय के आध्यात्मिक और व्यावहारिक पक्ष को जोड़ते हुए कहा कि समय के चक्र को गति देने वाले स्वयं भगवान महाकाल हैं। उन्होंने पंचांग की महत्ता को रेखांकित करते हुए उज्जैन को पुनः समय के मानक केंद्र के रूप में स्थापित करने के इस प्रयास की मुक्त कंठ से सराहना की। सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव आधुनिक विज्ञान और प्राचीन परंपरा का अद्भुत समन्वय रहा। सीएसआईआर-एनपीएल के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. दीपक शर्मा ने वर्तमान युग की परिशुद्ध समय मापन तकनीकों और एटॉमिक क्लॉक्स की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि यदि नैनो सेकंड स्तर की सटीकता बनाए नहीं रखी जाए तो जीपीएस जैसी तकनीकों की सटीकता भी प्रभावित हो सकती है। डॉ. शर्मा ने यह महत्वपूर्ण तथ्य साझा किया कि आधुनिक विज्ञान की यह सूक्ष्म परिशुद्धता वास्तव में हमारी प्राचीन भारतीय गणना पद्धतियों में पहले से ही अंतर्निहित रही है। उन्होंने पारंपरिक भारतीय ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर विशेष बल दिया। सम्मेलन का द्वितीय सत्र “काल चक्र: इनवॉल्यूशन एण्ड इवॉल्यूशन ऑफ सिविलाइजेशन इन टाइम एण्ड स्पेस” विषय पर केंद्रित रहा। सेंटर फॉर पॉलिसी स्टडीज, चेन्नई के अध्यक्ष प्रो. एम.डी. श्रीनिवास और कर्नाटक संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने कहा कि भारतीय कालचक्र की अवधारणा केवल एक रेखीय गति नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित चक्रीय व्यवस्था है, जो नैतिक मूल्यों और पर्यावरणीय संतुलन को भी अपने भीतर समेटे हुए है। भारतीय ज्ञान परंपरा नवाचार को प्राचीन सिद्धांतों की पुनर्खोज के रूप में देखती है, जो ज्ञान की निरंतरता को बनाए रखते हुए उसे आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने का मार्ग प्रदान करती है। सम्मेलन के दोनों सत्रों में यह प्रतिपादित किया गया कि उज्जैन केवल आस्था और श्रद्धा का केंद्र नहीं है, बल्कि यह विश्व के समय चक्र का वैज्ञानिक उद्गम स्थल भी है। विद्वानों ने इस संकल्प को दोहराया कि भारत की समृद्ध काल-गणना परंपरा को आधुनिक अनुसंधान के साथ जोड़कर भविष्य के लिए और अधिक उपयोगी बनाया जाएगा। यह अंतर्राष्ट्रीय मंथन न केवल उज्जैन की ऐतिहासिक भूमिका को पुनः स्थापित करने में सफल रहेगा, बल्कि इसने आने वाले समय में भारत को काल-विज्ञान के क्षेत्र में पुनः ‘विश्व गुरु’ के रूप में प्रतिष्ठित करने का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।

उज्जैन वह स्थान है जहां अध्यात्म और विज्ञान के बीच की दूरी समाप्त हो जाती है : केंद्रीय मंत्री प्रधान

भोपाल । केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उज्जैन वह स्थान है जहाँ अध्यात्म और विज्ञान के बीच की दूरी समाप्त हो जाती है और एक नई दृष्टि का जन्म होता है। भारत के जितने भी प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र हैं चाहे वह उज्जैन हो काशी हो कांची हो या पुरी धाम सभी भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित ऐसी जीती-जागती प्रयोगशालाएं हैं जहाँ विज्ञान कला संस्कृति साहित्य और आध्यात्मिकता का अद्भुत समन्वय मिलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को उज्जैन में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन महाकाल द मास्टर ऑफ टाइम के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने महाकाल द मास्टर ऑफ टाइम अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में पधारे विद्वानों और विशेषज्ञों का स्वागत अभिनंदन किया। केंद्रीय मंत्री प्रधान ने विज्ञान और आध्यात्मिकता के अटूट संबंध पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि विज्ञान आध्यात्मिकता के बिना अधूरा है और इसका सबसे सटीक उदाहरण स्वयं उज्जैन नगरी और महाकाल मंदिर की व्यवस्थाओं में दिखाई देता है। केंद्रीय मंत्री प्रधान ने महाकाल मंदिर के एक वैज्ञानिक अनुष्ठान का उल्लेख करते हुए बताया कि वैशाख मास के पहले दिन से भगवान शिव के ऊपर मटके से निरंतर जल की धारा प्रवाहित करने की व्यवस्था केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि ग्रीष्मकाल की चुनौतियों का एक वैज्ञानिक समाधान और पर्यावरणीय प्रबंधन है। यह दर्शाता है कि हमारा समाज सदियों से काल गणना और प्रकृति के बदलावों के अनुसार अपनी जीवनशैली को ढालने की वैज्ञानिक समझ रखता था। भारतीय ज्ञान परंपरा में पर्यावरण के प्रति उत्तरदायित्व और संतुलित जीवन प्रवाह हमेशा से केंद्र में रहा है। केंद्रीय मंत्री प्रधान ने शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे बड़े बदलावों का जिक्र करते हुए ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने जोर दिया कि हमें अपनी शिक्षा पद्धति को केवल रटने की पुरानी परिपाटी से निकालकर सृजनशीलता डिजाइन थिंकिंग और क्रिटिकल थिंकिंग की ओर ले जाना होगा। आज का युग एआई और कंप्यूटेशनल थिंकिंग का है भारत के विद्यार्थी वैश्विक स्तर पर इस दौड़ में पीछे न रहें इसके लिए स्कूली स्तर पर ही एआई जैसे नए पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री प्रधान ने स्पष्ट किया कि ज्ञान पर किसी भाषा का एकाधिकार नहीं हो सकता इसलिए शिक्षा को भारतीय भाषाओं और लोक-संस्कृतियों के साथ जोड़ा जा रहा है जिससे हर विद्यार्थी अपनी मातृभाषा में जटिल वैज्ञानिक विषयों को सरलता से समझ सके। केंद्रीय मंत्री प्रधान ने कहा कि उज्जैन वह स्थान है जहाँ से कर्क रेखा गुजरती है और यहीं से प्राचीन काल में दुनिया की काल गणना होती थी इसलिए अब समय आ गया है कि हम ‘ग्रीनविच मीन टाइम के स्थान पर ‘महाकाल स्टैंडर्ड टाइम की तार्किक स्थापना करें। उन्होंने कहा कि आधुनिक एआई उपकरण भी यह स्वीकार करते हैं कि काल गणना का मूल केंद्र उज्जैन के आसपास का क्षेत्र है अतः हमें अपने वैज्ञानिक स्वाभिमान को वैश्विक स्तर पर पुनः स्थापित करना होगा और यह इस विमर्श का मुख्य उद्देश्य है। केंद्रीय मंत्री प्रधान ने कहा कि भारत आज अंतरिक्ष ड्रोन और सूचना प्रौद्योगिकी में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले दो दशकों में भारत न केवल अपनी आवश्यकताओं को पूरा करेगा बल्कि ‘वसुधैव कुटुंबकम की भावना के साथ पूरे विश्व की पर्यावरणीय और आर्थिक चुनौतियों का वैज्ञानिक समाधान भी प्रदान करेगा। उज्जैन में ‘विज्ञान केंद्र और ‘तारामंडल का सुदृढ़ीकरण इसी दिशा में एक बड़ा कदम है जिससे आने वाली पीढ़ी वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ सके। प्रख्यात चिंतक एवं लेखक सुरेश सोनी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में काल (समय) की अवधारणा अत्यंत गहन और वैज्ञानिक है। भारतीय कालगणना खगोलीय पिंडों की गति ऋतु चक्र और प्रकृति के नियमों से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि भविष्य की समग्र प्रगति के लिए विज्ञान एवं तकनीक कला अध्यात्म सामाजिकता और सामाजिक अर्थशास्त्र के बीच संतुलित समन्वय आवश्यक है। उज्जैन में स्थापित कालयंत्र इस प्राचीन वैज्ञानिक परंपरा और आधुनिक तकनीक के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने युवाओं से भारतीय वैज्ञानिक विरासत को समझने प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने और विज्ञान को मानवीय मूल्यों से जोड़ने का आह्वान किया। नीति आयोग के सदस्य एवं प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. वी. के. सारस्वत ने कहा कि उज्जैन प्राचीन काल से कालगणना और खगोल विज्ञान का प्रमुख केंद्र रहा है। उन्होंने वैदिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय को विकसित भारत@2047 के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन स्वच्छ ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा जैसी चुनौतियों का समाधान नवाचार और स्वदेशी अनुसंधान से ही संभव है। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत की आवश्यकता पर बल देते हुए एआई क्वांटम तकनीक और सेमीकंडक्टर जैसे डीप टेक क्षेत्रों में अनुसंधान बढ़ाने R&D में निवेश विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि भारतीय युवाओं की क्षमता से भारत 2047 तक तकनीकी रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनेगा। विज्ञान भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री शिव कुमार शर्मा ने कहा कि यह आयोजन विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा में नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। शिक्षा केवल जानकारी का माध्यम नहीं बल्कि समाज को परिवर्तनकारी दृष्टि देने का साधन है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लर्निंग बाइ डूइंग सिद्धांत के तहत विद्यार्थी विज्ञान मंथन 2026-27 का शुभारंभ किया गया जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति गौरव भाव जगाते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार क्षमता का विकास करना है। राष्ट्रीय समन्वयक आईकेएस नई दिल्ली डॉ. गांती एस. मूर्ति ने कहा कि यह सम्मेलन अतीत के ज्ञान के संरक्षण नवाचार के सृजन और ज्ञान के निरंतर प्रवाह पर आधारित है। सम्मेलन में बच्चों के लिए भौतिकी प्रशिक्षण विशेष सत्र और प्रदर्शनी के माध्यम से खगोल विज्ञान एवं आधुनिक नवाचारों को प्रस्तुत किया गया है। महाकाल द मास्टर ऑफ टाइम अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का मूल ध्येय भारत की उस समृद्ध वैज्ञानिक थाती को आधुनिक जगत के साथ एकाकार करना है जो सदियों से हमारी पहचान रही है। इस युगांतरकारी आयोजन का सबसे प्रमुख संकल्प उज्जैन को ‘विश्व के मेरिडियन शून्य रेखा के रूप में पुनः प्रतिष्ठित करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विजन के अनुरूप यह सम्मेलन ‘विकसित भारत के स्वप्न को साकार करने की दिशा में ‘स्पेस इकोनॉमी अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के नए द्वार खोलेगा। यहाँ खगोल

Mahakal The Master of Time : उज्जैन में ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ पर वैश्विक मंथन शुरू, विज्ञान और सनातन का अनोखा संगम

   Mahakal The Master of Time : भोपाल। मध्य प्रदेश के आध्यात्मिक शहर उज्जैन में ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ विषय पर आधारित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और प्रदर्शनी का शुक्रवार को भव्य शुभारंभ हुआ। इस आयोजन ने उज्जैन को एक बार फिर वैश्विक बौद्धिक विमर्श के केंद्र में स्थापित कर दिया है, जहां ‘समय’ की अवधारणा पर विज्ञान और सनातन दृष्टिकोण के समन्वय पर चर्चा हो रही है। कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ वसंत विहार स्थित अत्याधुनिक तारामंडल परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत और वरिष्ठ विचारक सुरेश सोनी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। यह आयोजन शासन, विज्ञान और संस्कृति के संगम का प्रतीक बनकर उभरा। इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. सारस्वत, सांसद अनिल फिरोजिया सहित देश-विदेश के वैज्ञानिक, खगोलविद और शिक्षाविद भी उपस्थित रहे। साइंस सेंटर से उज्जैन को नई पहचान करीब 15.20 करोड़ रुपये की लागत से बने इस आधुनिक साइंस सेंटर ने उज्जैन को विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में नई पहचान दी है। केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से तैयार यह केंद्र विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। विज्ञान और सनातन के बीच सेतु सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान के बीच सेतु निर्माण करना है। ‘महाकाल’ यानी समय की अवधारणा को वैज्ञानिक नजरिए से समझने का प्रयास किया जा रहा है। इसरो के वैज्ञानिकों के साथ जापान सहित कई देशों के विशेषज्ञ इसमें भाग ले रहे हैं। युवाओं के लिए खास आकर्षण इस आयोजन में युवाओं और विद्यार्थियों के लिए कई गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। सैटेलाइट मेकिंग वर्कशॉप, यूएवी और आरसी प्लेन ट्रेनिंग, टेलीस्कोप से आकाश अवलोकन और सनस्पॉट स्टडी जैसी गतिविधियां उन्हें विज्ञान से जोड़ रही हैं। डोंगला में डीप स्काई ऑब्जर्वेशन भी विशेष आकर्षण का केंद्र है। विकास परियोजनाओं की भी शुरुआत सम्मेलन के साथ ही विकास कार्यों का भी शुभारंभ हुआ। सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए 701 करोड़ रुपये की लागत से 19 किलोमीटर लंबे फोर-लेन बायपास का भूमिपूजन किया गया। इसके अलावा 22 करोड़ रुपये की लागत से विक्रमादित्य हेरिटेज होटल के विस्तार की घोषणा की गई। आस्था और विज्ञान का अनोखा संगम वक्ताओं ने कहा कि उज्जैन में महाकाल की नगरी में ‘समय’ पर हो रहा यह मंथन आस्था और आधुनिक विज्ञान के संगम का प्रतीक है। यह आयोजन न केवल नई सोच को जन्म देगा, बल्कि युवाओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा।

महाकाल के दर्शन करने उज्‍जैन पहुंचे धर्मेंद्र प्रधान, सपत्नीक भस्म आरती में हुए शामिल

उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार तड़के केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपनी पत्नी के साथ पहुंचे। उन्होंने बाबा महाकाल के गर्भगृह में प्रवेश कर विधिपूर्वक पूजन-अर्चन किया और भस्म आरती में शामिल होकर दिव्य दर्शन किए। तड़के होने वाली भस्म आरती में भाग लेने के बाद धर्मेंद्र प्रधान करीब दो घंटे तक नंदी हॉल में बैठकर ध्यान में लीन रहे। इस दौरान मंदिर परिसर में गूंजते वैदिक मंत्र, ढोल-नगाड़ों की ध्वनि और भक्तिमय वातावरण ने पूरे अनुभव को आध्यात्मिक बना दिया। आरती के बाद केंद्रीय मंत्री ने गर्भगृह में भगवान महाकाल का अभिषेक कर देश की उन्नति, समाज की समृद्धि और विश्व शांति की कामना की। उन्होंने कहा कि भस्म आरती का अनुभव आत्मिक संतोष देने वाला होता है और यह आंतरिक शांति व ऊर्जा का स्रोत है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में शांति और सद्भाव की आवश्यकता पहले से अधिक है। ऐसे समय में भगवान महाकाल के चरणों में उन्होंने देश की प्रगति, सनातन संस्कृति के विस्तार और विश्व कल्याण की प्रार्थना की। धर्मेंद्र प्रधान ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी इस अनुभव को साझा करते हुए बताया कि उज्जैन में श्री अंगारेश्वर महादेव मंदिर में उन्हें गौसेवा का अवसर मिला, जिसे उन्होंने भारतीय संस्कृति की करुणा और लोकमंगल की भावना का प्रतीक बताया।

उज्जैन में गुरकीरत सिंह मनोचा का अंतिम संस्कार, 21 दिन बाद पहुंचा पार्थिव शरीर, CM समेत जनप्रतिनिधियों ने दी श्रद्धांजलि

उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन निवासी छात्र गुरकीरत सिंह मनोचा का शुक्रवार को चक्रतीर्थ शमशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, सांसद अनिल फिरोजिया और राज्यमंत्री गौतम टेटवाल ने उनके घर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की और परिजनों को सांत्वना दी। गौरतलब है कि गुरकीरत सिंह की 14 मार्च को कनाडा में हत्या कर दी गई थी। घटना के 21 दिन बाद शुक्रवार सुबह उनका पार्थिव शरीर उज्जैन स्थित घर लाया गया। जैसे ही शव घर पहुंचा, परिजन भावुक हो उठे और माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल था। मां ने अहमदाबाद एयरपोर्ट से शव लाने वाले एंबुलेंस चालक का हाथ जोड़कर आभार व्यक्त किया। सुबह करीब पौने 10 बजे अंतिम यात्रा घर से शुरू हुई। सबसे पहले गुरुद्वारे में अंतिम अरदास की गई, जिसके बाद चक्रतीर्थ स्थित विद्युत शवदाह गृह में अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में सिख समाज के लोग, रिश्तेदार और परिचित मौजूद रहे। पार्थिव शरीर गुरुवार शाम अहमदाबाद एयरपोर्ट पहुंचा था, जहां आवश्यक कस्टम और दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद रात करीब 9 बजे एंबुलेंस के जरिए उज्जैन के लिए रवाना किया गया। हमले में गई थी जानजानकारी के अनुसार, कनाडा के फोर्ट सेंट जॉन शहर में 14 मार्च को गुरकीरत सिंह पर पहले 10-12 युवकों ने हमला किया और फिर उस पर वाहन चढ़ा दिया। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद से परिवार बेटे के अंतिम दर्शन का इंतजार कर रहा था, जो अब 21 दिन बाद पूरा हो सका।