मुख्यमंत्री आज रंगपंचमी पर उज्जैन में श्री कृष्ण-सुदामा रंग उत्सव में होंगे शामिल

उज्जैन। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज रविवार को रंग पंचमी के अवसर पर उज्जैन में आयोजित श्री कृष्ण-सुदामा रंग उत्सव कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. यादव सुबह 09 बजे श्री कृष्ण सुदामा रंग उत्सव गेर (चल समारोह) में सिंधी कॉलोनी से सम्मिलित होकर टॉवर चौराहे तक जाएंगे। टॉवर चौराहे पर मुख्य कार्यक्रम आयोजित होंगे। इन सभी कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री सम्मिलित होंगे। रंग उत्सव कार्यक्रम में सामाजिक संस्थाओं द्वारा स्वागत द्वार, मंच लगाकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्वागत किया जाएगा। इस अवसर पर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्र से आने वाली मंडली, झांकियां, फाग उत्सव करने वाले संस्थाओं के द्वारा विशेष आयोजन भी किए जाएंगे। लाइव झांकियां भी इस कार्यक्रम में सम्मिलित होगी।
उज्जैन रंगपंचमी गेर पर हाई-टेक सुरक्षा व्यवस्था, ड्रोन निगरानी से रखी जाएगी पैनी नजर

उज्जैन। उज्जैन में रंगपंचमी गेर को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए पुलिस ने हाई-टेक सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। शहर भर के गेर मार्ग पर त्रि-स्तरीय सुरक्षा लागू की गई है, जिसमें ड्रोन कैमरों से हवाई निगरानी की जा रही है। लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन हर गतिविधि पर नजर रख रहा है और किसी भी असामाजिक गतिविधि को तुरंत रोकने के लिए तैयार है। पुलिस ने गेर मार्ग के ऊंचे स्थानों, संकरी गलियों और संवेदनशील चौराहों पर विशेष निगरानी रखी है। ड्रोन से मिलने वाली लाइव फीड कंट्रोल रूम तक भेजी जा रही है, जिससे अधिकारी भीड़ के घनत्व, यातायात और संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रख सकते हैं। आवश्यकता पड़ने पर भीड़ को मोड़ने और मार्ग को व्यवस्थित करने के निर्देश तुरंत दिए जा रहे हैं। गेर शुरू होने से पहले पुलिस ने संवेदनशील स्थानों और छतों की भी जांच की। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कहीं भी पत्थर, कांच या अन्य आपत्तिजनक वस्तुएं जमा न हों। इसके साथ ही गेर में हड़बड़ी और असामाजिक तत्वों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरों का भी उपयोग किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की शहर में मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था और भी कड़ी कर दी गई है। प्रशासन ने सुनिश्चित किया है कि रंगपंचमी गेर श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित, आनंददायक और व्यवस्थित बने। पुलिस ने बताया कि ड्रोन निगरानी और लाइव फीड के माध्यम से किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी। गेर मार्ग पर तैनात पुलिसकर्मी और विशेष सुरक्षा दल भीड़ प्रबंधन में सक्रिय रहेंगे। इसके साथ ही श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे निर्धारित मार्ग और सुरक्षा नियमों का पालन करें। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि गेर में किसी भी प्रकार की हिंसा या असामाजिक गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जाएगी। ड्रोन और हाई-टेक कैमरों की मदद से प्रशासन पूरे गेर मार्ग का हर गतिविधि रिकॉर्ड कर रहा है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को तुरंत रोका जा सके। इस हाई-टेक निगरानी से रंगपंचमी गेर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और मार्ग व्यवस्थित रहेगी। प्रशासन की यह पहल गेर को सुरक्षित बनाने और भीड़ प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी।
तपने लगा मध्य प्रदेश, इंदौर में पारा 36 डिग्री पार, भोपाल-ग्वालियर में 35 डिग्री से ज्यादा

भोपाल। मध्य प्रदेश में मार्च की शुरुआत से ही गर्मी का असर तेज होता दिखाई दे रहा है। आमतौर पर प्रदेश में 15 मार्च के बाद तापमान तेजी से बढ़ता है, लेकिन इस बार ट्रेंड बदल गया है और महीने के शुरुआती दिनों में ही पारा चढ़ने लगा है। सागर और ग्वालियर-चंबल संभाग के बाद अब इंदौर और उज्जैन क्षेत्र में भी गर्मी का प्रभाव बढ़ गया है। इंदौर में अधिकतम तापमान 36.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। वहीं भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। शुक्रवार को नर्मदापुरम प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 38.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा धार, दमोह, सागर, शाजापुर, गुना, छतरपुर, रतलाम और टीकमगढ़ में भी तापमान 36 डिग्री या उससे अधिक रहा। रात का तापमान भी 18 डिग्री से ऊपर बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के पूर्वी हिस्से से एक टर्फ गुजर रही है और साइक्लोनिक सर्कुलेशन भी सक्रिय है, लेकिन इसका प्रदेश के मौसम पर ज्यादा असर नहीं पड़ रहा है। आसमान साफ होने के कारण सूरज की तेज किरणें सीधे जमीन पर पड़ रही हैं, जिससे गर्मी का असर बढ़ गया है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले दो दिनों में प्रदेश के अधिकतम तापमान में करीब 4 डिग्री तक बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में संभावना है कि मार्च के पहले पखवाड़े में ही कई शहरों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाए। विशेषज्ञों के मुताबिक इस साल अप्रैल और मई में हीट वेव यानी लू चलने की संभावना है, जो करीब 15 से 20 दिनों तक रह सकती है। हालांकि मार्च में फिलहाल लू चलने का कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है। तेज धूप को देखते हुए विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि दोपहर के समय करीब तीन घंटे तक धूप से बचकर छांव में रहने की कोशिश करें।
Priyanshi Prajapat: अर्मेनिया में युद्ध के बीच फंसी उज्जैन की महिला पहलवान प्रियांशी प्रजापत सुरक्षित लौटीं, सीएम मोहन यादव ने किया त्वरित हस्तक्षेप

Priyanshi Prajapat: नई दिल्ली। अर्मेनिया में आयोजित कुश्ती वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा लेने गई उज्जैन की प्रियांशी प्रजापत पिछले चार दिनों से युद्ध के कारण फंसी थीं। अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के चलते उनका दुबई के रास्ते भारत लौटना असंभव हो गया। इस मुश्किल समय में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहलवान से लाइव बातचीत कर उनकी सुरक्षित वापसी के लिए तुरंत कदम उठाए। सीएम के निर्देश और मध्यप्रदेश कुश्ती संघ के सहयोग से प्रियांशी को अर्मेनिया से तुर्की और कजाकिस्तान के मार्ग से भारत लाया गया। गुरुवार सुबह प्रियांशी देश लौट आईं और उनके परिवार व खेल प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई। प्रियांशी मध्यप्रदेश की एकमात्र खिलाड़ी थीं जो इस विश्व चैम्पियनशिप में प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रही थीं। उनकी सुरक्षित वापसी ने राज्य सरकार के त्वरित और प्रभावी हस्तक्षेप की अहमियत को भी दर्शाया। इन हालात में उनके पिता ने मध्यप्रदेश कुश्ती संघ के अध्यक्ष नारायण यादव से संपर्क किया और मदद के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सूचित किया। मुख्यमंत्री ने तुरंत हस्तक्षेप किया और प्रियांशी से ऑनलाइन बातचीत कर उन्हें युद्ध के खतरनाक हालात में सुरक्षित मार्ग से लौटने का भरोसा दिया। सीएम के निर्देशों और मध्यप्रदेश कुश्ती संघ के सहयोग से प्रियांशी को अर्मेनिया से तुर्की और कजाकिस्तान के मार्ग से सुरक्षित भारत लाया गया। गुरुवार सुबह वे देश लौट आईं, और उनके परिवार, प्रशिक्षक और खेल प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई। प्रियांशी की वापसी ने राज्य सरकार की तत्परता और संकट प्रबंधन क्षमता को उजागर किया। प्रियांशी इस चैम्पियनशिप में मध्यप्रदेश की एकमात्र प्रतिनिधि खिलाड़ी थीं। उनके साथियों और प्रशिक्षकों ने बताया कि यह उनका सपना था कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन करें, लेकिन युद्ध और अंतरराष्ट्रीय तनाव ने उन्हें अचानक कठिनाई में डाल दिया। इस बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सक्रिय भूमिका और त्वरित निर्णय ने उनकी जान को सुरक्षित रखने में अहम योगदान दिया। प्रियांशी के सुरक्षित लौटने के बाद प्रदेश की खेल प्रतिष्ठा भी बढ़ी है। युवा खिलाड़ी और उनके परिवार ने मुख्यमंत्री और मध्यप्रदेश कुश्ती संघ को धन्यवाद दिया। इसके अलावा, इस घटना ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय संकट में राज्य सरकार और खेल संस्थाएं मिलकर खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती हैं। प्रियांशी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह चार दिन उनके जीवन के सबसे तनावपूर्ण रहे। उन्होंने बताया कि दुबई और अर्मेनिया में युद्ध के कारण भय का माहौल था, लेकिन उन्हें विश्वास था कि मुख्यमंत्री और संबंधित अधिकारी उनकी मदद करेंगे। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री ने मुझे व्यक्तिगत रूप से आश्वस्त किया और सही मार्ग से भारत लौटने में मदद की। यह अनुभव यादगार तो है, लेकिन काफी डराने वाला भी रहा।” इस घटना ने यह संदेश भी दिया कि खेल और खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए प्रशासनिक तत्परता बेहद जरूरी है। प्रियांशी अब सुरक्षित हैं और अपने परिवार के साथ हैं, जबकि मध्यप्रदेश सरकार की इस सक्रिय भूमिका को खेल जगत में सराहा जा रहा है।
T20 WORLD CUP: सेमीफाइनल से पहले टीम इंडिया के लिए मंदिरों में पूजा: उज्जैन में खिलाड़ियों की फोटो रखकर जीत की प्रार्थना

T20 WORLD CUP: नई दिल्ली। भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाले हाई-वोल्टेज सेमीफाइनल मुकाबले को लेकर देशभर में क्रिकेट प्रेमियों का उत्साह चरम पर है। इसी उत्साह के बीच मध्यप्रदेश के उज्जैन में क्रिकेट फैंस ने टीम इंडिया की जीत के लिए विशेष पूजा-अर्चना की। उज्जैन के प्रसिद्ध अंगारेश्वर मंदिर में गुरुवार को क्रिकेट प्रेमियों, पुजारियों और श्रद्धालुओं ने मिलकर भारतीय टीम की सफलता के लिए भगवान से प्रार्थना की। टी-20 विश्व कप के दूसरे सेमीफाइनल मुकाबले में भारत का सामना इंग्लैंड से होना है। यह महत्वपूर्ण मैच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में शाम 7 बजे खेला जाएगा, जबकि टॉस 6:30 बजे होगा। इस मुकाबले को लेकर देशभर के क्रिकेट प्रशंसकों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। करो या मरो की स्थिति वाले इस मैच से पहले फैंस ने मंदिर में विशेष अनुष्ठान कर टीम इंडिया की जीत की कामना की। अंगारेश्वर मंदिर में आयोजित इस पूजा में करीब 50 से अधिक पंडित, पुजारी, श्रद्धालु और क्रिकेट प्रेमी शामिल हुए। सभी ने मिलकर भगवान शिव का अभिषेक किया और भारतीय टीम की जीत के लिए विशेष प्रार्थना की। इस दौरान टीम इंडिया के खिलाड़ियों की तस्वीरें भी मंदिर में रखी गईं। सूर्यकुमार यादव, अभिषेक शर्मा, हार्दिक पंड्या और शिवम दुबे जैसे खिलाड़ियों की फोटो शिवलिंग के पास रखकर विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया। क्रिकेट प्रेमियों का कहना था कि भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाला यह मुकाबला बेहद महत्वपूर्ण है और पूरी उम्मीद है कि टीम इंडिया शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में अपनी जगह बनाएगी। पूजा में शामिल लोगों ने कहा कि टीम इंडिया की जीत के लिए वे भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं और देशवासियों की उम्मीदें खिलाड़ियों के साथ हैं। खाड़ी देशों में फंसे मप्र निवासियों के लिए सरकार अलर्ट, भोपाल और नई दिल्ली में 24×7 कंट्रोल रूम शुरू इधर, सेमीफाइनल मुकाबले से पहले भारतीय खिलाड़ियों ने भी भगवान के दर्शन किए। इंग्लैंड के खिलाफ महत्वपूर्ण मैच से एक दिन पहले भारतीय टीम के कुछ खिलाड़ी मुंबई के प्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर पहुंचे थे। यहां अक्षर पटेल, ईशान किशन और अभिषेक शर्मा ने भगवान गणपति के दर्शन कर आशीर्वाद लिया और टीम की सफलता के लिए प्रार्थना की। भारत और इंग्लैंड के बीच यह मुकाबला लगातार तीसरी बार टी-20 विश्व कप के सेमीफाइनल में देखने को मिल रहा है। इससे पहले वर्ष 2022 और 2024 में भी दोनों टीमें सेमीफाइनल में आमने-सामने आ चुकी हैं। इन मुकाबलों में दोनों टीमों ने एक-एक जीत हासिल की थी और खास बात यह रही कि सेमीफाइनल जीतने वाली टीम ने फाइनल मुकाबला भी अपने नाम किया था। ऐसे में इस बार का सेमीफाइनल भी बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है। क्रिकेट विशेषज्ञों के अनुसार दोनों टीमों के पास मजबूत बल्लेबाजी और गेंदबाजी लाइनअप है, जिससे मुकाबला काफी कड़ा रहने की संभावना है। देशभर के क्रिकेट प्रेमियों की नजरें अब इस अहम मुकाबले पर टिकी हुई हैं। फैंस को उम्मीद है कि भारतीय टीम शानदार प्रदर्शन करते हुए इंग्लैंड को हराएगी और टी-20 विश्व कप के फाइनल में अपनी जगह बनाएगी। इसी उम्मीद के साथ मंदिरों में प्रार्थनाएं और दुआओं का सिलसिला जारी है।
उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण को लेकर हंगामा, भीड़ ने भाजपा विधायक का दफ्तर घेरा; महिलाएं फूट-फूट कर रोईं

उज्जैन । उज्जैन के पिपलीनाका क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण को लेकर स्थानीय लोगों और विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा के बीच संघर्ष हुआ। मंगलवार को नगर निगम ने पिपलीनाका से गढ़कालिका और भैरवगढ़ मार्ग पर सड़क चौड़ीकरण के दायरे में आने वाले मकानों के मालिकों को नोटिस जारी किए थे, जिसमें उन्हें सात दिनों के भीतर प्रभावित हिस्से को खाली करने का निर्देश दिया गया। इसके बाद गुरुवार को करीब 400 से अधिक लोग विरोध प्रदर्शन के लिए विधायक के आगर रोड स्थित दफ्तर पहुंचे। भीड़ ने विधायक की गाड़ी को रोक लिया और उन्हें भाजपा कार्यालय तक ले गए। कार्यालय में महिलाएं रोते-बिलखते हुए घुस गईं और नारेबाजी की। प्रदर्शन में कई परिवारों ने अपने घर टूटने और रोजी-रोटी पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जताई। महिलाओं ने कहा कि उन्होंने वोट देकर विधायक को चुना था, लेकिन अब उनके आशियानों को ही तोड़ा जा रहा है। विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने प्रभावित लोगों की बात सुनने के बाद कलेक्टर रोशन सिंह से चर्चा की और आश्वासन दिया कि समाधान निकाले जाने की कोशिश की जाएगी। स्थानीय रहवासियों ने सड़क चौड़ाई को 100 फीट रखने के प्रस्ताव के बजाय 80 फीट करने की मांग की है ताकि कई मकानों को टूटने से बचाया जा सके। पिपलीनाका से गढ़कालिका मंदिर, ओखलेश्वर श्मशान और भैरवगढ़ जेल चौराहा तक कई घर और दुकानों को नोटिस दिए गए हैं। कई परिवार आर्थिक तंगी और बीमारी के दोहरे बोझ में हैं। जैसे संगीता भारती ने बताया कि उन्होंने अपने पति और बेटे को खो दिया है और अब अकेले ही परिवार का गुजारा करती हैं। ममता सैनी ने कहा कि अगर उनका घर टूट गया, तो वे अपने बच्चों को लेकर दर-दर भटकने को मजबूर होंगी। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अपील की है कि सड़क निर्माण के लिए जरूरत पड़ने पर केवल 10 फीट जमीन ली जाए, ताकि उनके पूरे घर को तोड़े जाने से बचाया जा सके। प्रशासन जल्द ही इस सड़क चौड़ीकरण कार्य को शुरू करने की तैयारी में है।
उज्जैन में चंद्र ग्रहण के कारण मंदिरों के पट बंद, श्रद्धालु करेंगे बाहर से पूजा; महाकाल मंदिर में रहेगी विशेष व्यवस्था!

उज्जैन। उज्जैन में मंगलवार को चंद्र ग्रहण के चलते शहर के कई प्रमुख मंदिरों के पट बंद कर दिए गए। सुबह 6:47 बजे शुरू हुए सूतक काल के दौरान महाकालेश्वर मंदिर के अलावा अन्य मंदिरों में दर्शन वर्जित रहे। सूतक शाम 6:47 बजे तक रहेगा, जिसके बाद मंदिरों में शुद्धिकरण और संध्या आरती के बाद दर्शन फिर से शुरू होंगे। महाकाल मंदिर के पट खुले रहने के बावजूद गर्भगृह में पुजारियों ने मंत्रोच्चार किया। श्रद्धालु मंदिर परिसर के बाहर से ही भगवान के दर्शन कर रहे थे। इस दौरान मंदिर में केवल मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठान चल रहे थे। शहर के अन्य प्रमुख मंदिर जैसे सांदीपनि आश्रम, मंगलनाथ मंदिर, अंगारेश्वर मंदिर और गोपाल मंदिर में सुबह 5 बजे तक नियमित पूजा हुई, उसके बाद सूतक लगते ही पट बंद कर दिए गए। सूतक के दौरान भक्तों ने मंदिर के बाहर ही भगवान के दर्शन किए। मंगलनाथ मंदिर में भी पट बंद रहने के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। अंगारेश्वर, गोपाल, चिंताहरण हनुमान और सिद्धेश्वर मंदिर सहित हजारों मंदिरों में दर्शन रोक दिए गए थे। मंदिर प्रशासन ने कहा कि शाम को सूतक समाप्त होने के बाद सभी मंदिरों की सफाई और शुद्धिकरण के बाद भगवान का स्नान, श्रृंगार और संध्या आरती की जाएगी। ज्योतिषाचारियों के अनुसार सूतक काल में पूजा, भोग और मूर्ति के स्पर्श वर्जित होते हैं। यही कारण है कि अधिकांश मंदिरों में यह व्यवस्था लागू की गई। हालांकि महाकाल मंदिर में भक्त दर्शन कर सकते हैं, लेकिन गर्भगृह में पुजारियों ने ही मंत्रोच्चार और अनुष्ठान जारी रखा। सूतक से पहले होली का उत्सव भी मंदिरों में पारंपरिक रूप से मनाया गया। भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण के साथ हर्बल गुलाल और फूलों से होली खेली। इसके बाद विधि-विधान से मंदिरों के पट बंद कर दिए गए और दर्शन वर्जित कर दिए गए। मंदिर प्रशासन ने भक्तों से अपील की कि वे सूतक के दौरान मंदिर परिसर में प्रवेश न करें और बाहर से ही पूजा करें। संध्या में पट खुलने के बाद सभी मंदिरों में धार्मिक गतिविधियां सामान्य रूप से शुरू हो जाएंगी। इस तरह, चंद्र ग्रहण के दौरान उज्जैन के मंदिरों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और धार्मिक परंपरा दोनों का ध्यान रखा गया। भक्तों ने मंदिरों के बाहर भी पूजा कर अपनी आस्था व्यक्त की। सूतक समाप्ति के बाद मंदिरों में संपूर्ण शुद्धिकरण और भव्य संध्या आरती के साथ दर्शन शुरू होंगे, जिससे शहर में धार्मिक माहौल पूरी तरह लौट आएगा।
उज्जैन में पंच-परमेश्वर का भव्य नगर प्रवेश: संतों ने 200 साल पुरानी परंपरा के तहत होली उत्सव की तैयारियां शुरू कीं

नई दिल्ली। उज्जैन की पवित्र नगरी में होली के अवसर पर शुक्रवार को श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा में पंच-परमेश्वर का भव्य नगर प्रवेश हुआ। करीब 10 साल बाद आयोजित इस पेशवाई में देशभर से आए संतों का ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के बीच जोरदार स्वागत किया गया। यह आयोजन 200 वर्षों से निरंतर निभाई जा रही परंपरा का हिस्सा है और इसे वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ मेले की तैयारियों से जोड़ा गया है। देशभर के प्रमुख अखाड़ों के पंच-परमेश्वर संतों के रूप में उज्जैन पहुंचे। भ्रमणशील मंडल के महंत दुर्गादास, महंत अद्वैतानंद, महंत राम नौमी दास, सचिव हंस मुनि, महंत कोठारी सत्यानंद, मुकामी राम मुनि और मुकामी देवी दास सहित निर्वाण संतों ने अखाड़े में प्रवेश किया। महंत सत्यानंद ने बताया कि आने वाले दिनों में और अधिक संत उज्जैन पहुंचेंगे, जो शहर और मेले की व्यवस्थाओं की जानकारी लेंगे। नगर प्रवेश के दौरान संतों ने सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और देशभर में सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण का संदेश दिया। पेशवाई में शामिल साधु-संत और महंत पारंपरिक पोशाक और धार्मिक वाद्ययंत्रों के साथ नगर में यात्रा करते हुए दर्शकों का मन मोहते नजर आए। शहरवासियों ने अपने उत्साह और श्रद्धा के साथ संतों का स्वागत किया। उज्जैन में 4 मार्च को पंच-परमेश्वर और अन्य साधु-संतों के लिए होली उत्सव का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक चलेगा, जिसमें सभी संत पारंपरिक ढंग से हर्बल गुलाल और फूलों से होली खेलेंगे। इस दौरान भक्तजन भी मंदिर परिसर में उपस्थित रहकर होली का आनंद लेंगे। पंच-परमेश्वर परंपरा के अनुसार, अखाड़ों के सदस्य उन स्थलों का दौरा करते हैं, जहां कुंभ मेला आयोजित होने वाला होता है। उज्जैन में 2028 में सिंहस्थ मेला आयोजित होने के मद्देनजर संत आठ दिन तक यहां रहेंगे और साधु-संतों के लिए की जाने वाली व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे। उज्जैन का कार्य पूर्ण होने के बाद वे नासिक रवाना होंगे, जहां भी कुंभ मेला आयोजित होगा। इस भव्य नगर प्रवेश से उज्जैन की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को और मजबूती मिली है। शहरवासियों में संतों के आगमन और होली उत्सव को लेकर उत्साह साफ देखा जा सकता है। पंच-परमेश्वर का यह नगर प्रवेश ना सिर्फ धार्मिक उत्सव है, बल्कि आने वाले सिंहस्थ मेले के सफल आयोजन की रूपरेखा तैयार करने का भी अवसर है। उज्जैन में पंच-परमेश्वर का भव्य स्वागत और होली उत्सव इस बात का प्रमाण है कि सनातन संस्कृति और धार्मिक परंपराएं आज भी देशभर में जीवित हैं। संतों के मार्गदर्शन में आगामी मेले की तैयारियों से श्रद्धालु और नगरवासी समान रूप से लाभान्वित होंगे।
उज्जैन महाकाल में भव्य होली 2026: हर्बल गुलाल, पंचामृत भस्मारती और चंद्र ग्रहण के बीच खुले पट, श्रद्धालुओं ने किया अनोखा अनुभव

उज्जैन। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार को होली का पर्व भव्य और अनोखे अंदाज में मनाया गया। सुबह 4 बजे भस्मारती के समय पुजारी-पुरोहितों ने बाबा महाकाल के साथ हर्बल गुलाल से रंग खेला। इस अवसर पर भगवान शिव के परिवार माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय को भी गुलाल अर्पित किया गया। भगवान महाकाल का हरि ओम जल से अभिषेक किया गया, उसके बाद दूध, दही, घी, शकर, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से पूजा संपन्न हुई। नंदी जी का स्नान, ध्यान और पूजा भी विधिपूर्वक किया गया। भगवान महाकाल ने शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की माला धारण की। इस साल 3 मार्च को 14 मिनट का खग्रास चंद्र ग्रहण सुबह 6:32 से शाम 6:46 तक रहेगा। ग्रहण के कारण मंदिर में सुबह की दद्योदक और भोग आरती में भगवान महाकाल को केवल शक्कर का भोग अर्पित किया गया। इस दौरान श्रद्धालु और पुजारी भगवान को स्पर्श नहीं करेंगे। ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर का शुद्धिकरण होगा, उसके बाद भगवान का जलाभिषेक और संध्या आरती के साथ भोग अर्पित किया जाएगा। महाकाल मंदिर में साल में दो बार भगवान की दिनचर्या बदलती है। कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से ठंड के अनुसार और चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से गर्मी के अनुसार आरती का समय तय होता है। इस साल 4 मार्च से चैत्र कृष्ण प्रतिपदा शुरू होने से भगवान महाकाल को ठंडे जल से स्नान कराया जाएगा। इस अवधि में प्रतिदिन होने वाली पांच आरतियों में से तीन में समय का बदलाव किया जाएगा। मंदिर के पुजारी महेश शर्मा के अनुसार, भगवान महाकाल कालों के काल हैं और दक्षिण की ओर मुख करके बैठे हैं। इसलिए ग्रहण या किसी भी नक्षत्र का उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। ग्रहण के दौरान मंदिर की व्यवस्थाएं सामान्य रहेंगी, पुजारी मंत्रोच्चार करेंगे और भक्त सुरक्षित दर्शन कर सकेंगे। भक्तों और स्थानीय लोगों के लिए यह आयोजन अत्यंत दर्शनीय रहा। पारंपरिक विधियों, भस्मारती और हर्बल गुलाल के संगम ने होली को भव्य बना दिया। इस अवसर पर धार्मिक अनुशासन और ग्रहण के नियमों का पालन करते हुए भगवान महाकाल की भव्य पूजा-अर्चना संपन्न हुई, जो श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक आनंद और भक्ति का अनुभव लेकर आई।
देश में सबसे पहले होलिका दहन महाकाल मंदिर में, वैदिक मंत्रो के साथ जलेगी होली; आरती का समय बदलेगा

उज्जैन । देश में होली का पर्व इस बार महाकालेश्वर मंदिर में सबसे पहले मनाया जाएगा। सोमवार को होने वाले इस पर्व में परंपरा अनुसार भगवान महाकाल को केवल एक किलो हर्बल गुलाल प्रतीकात्मक रूप से अर्पित किया जाएगा। संध्या आरती के दौरान पुजारी भगवान को गुलाल अर्पित करेंगे जिसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मंदिर परिसर में गोबर के उपलों से बनी होलिका का दहन किया जाएगा। सुरक्षा कारणों से इस बार भी आम श्रद्धालुओं को होलिका दहन स्थल के पास जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मंदिर प्रशासन ने पूर्व में हुई आग की घटनाओं को देखते हुए विशेष सावधानी बरती है। होलिका दहन के दौरान संभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे। धुलेंड़ी पर विशेष शृंगार और भस्म आरती महाकाल मंदिर में धुलेंड़ी का पर्व मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन सुबह 4 बजे होने वाली भस्म आरती में सबसे पहले भगवान महाकाल को गुलाल लगाया जाएगा। इसके बाद भगवान का भांग और चंदन से विशेष शृंगार किया जाएगा। मंदिर के पुजारी आशीष शर्मा के अनुसार महाकाल मंदिर में सबसे पहले होली मनाने की यह प्राचीन परंपरा है जिसमें भगवान को प्रतीकात्मक रूप से गुलाल अर्पित किया जाता है। आरती के समय में बदलाव महाकाल मंदिर में साल में दो बार भगवान की दिनचर्या में बदलाव होता है। कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से ठंड के अनुसार आरती का समय तय होता है जबकि चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से गर्मी के अनुसार आरती का समय बदला जाता है। इस बार चैत्र कृष्ण प्रतिपदा 3 मार्च होली के दूसरे दिन से भगवान महाकाल की दिनचर्या में बदलाव आएगा। इस दिन से गर्मी की शुरुआत मानी जाती है। भगवान महाकाल को ठंडे जल से स्नान कराया जाएगा। ठंडे जल से स्नान का क्रम शरद पूर्णिमा तक रहेगा। इस दौरान प्रतिदिन होने वाली पांच में से तीन आरती का समय भी बदल जाएगा।