उज्जैन में फाग महोत्सव की धूम, भक्तों ने मंदिरों में गुलाल-फूल से खेली होली, अन्य शहरों से भी उमड़े श्रद्धालु

उज्जैन। धर्मनगरी उज्जैन में फाल्गुन मास के आगमन के साथ ही फाग महोत्सव का भव्य आयोजन शुरू हो गया है। शनिवार को शहर के प्रमुख मंदिरों में भक्तों ने रंग-बिरंगी होली खेलते हुए भगवान के प्रति अपनी आस्था और श्रद्धा दिखाई। नई पेठ स्थित गजलक्ष्मी मंदिर, छत्री चौक का गोपाल मंदिर और खाटू श्याम जी मंदिर में भक्तों ने गुलाल और फूलों से भगवान के चरणों को सजाया और भजन-कीर्तन के मधुर गीतों के बीच पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। मंदिरों में फाग उत्सव का आयोजन भक्ति, संगीत और रंगों का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। मंदिर परिसर में श्रद्धालु अपने परिवार के साथ शामिल होकर भगवान के चरणों में प्रार्थना करते हुए गुलाल उड़ाते और फूलों की होली खेलते नजर आए। भजन-कीर्तन और कीर्तन के बीच भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण और राधा की रासलीला का स्मरण करते हुए होली के पारंपरिक उत्सव में भाग लिया। इस बार फाग महोत्सव में उज्जैन के अलावा देवास, इंदौर, रतलाम और आसपास के अन्य शहरों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर प्रशासन और पुजारियों ने बताया कि फाल्गुन मास में होली का पर्व भगवान श्रीकृष्ण और राधा के साथ गोपियों द्वारा खेली गई होली की परंपरा का प्रतीक है। पुजारी अनिमेश शर्मा ने बताया कि यह उत्सव भक्तों के लिए भक्ति और उल्लास का अवसर होता है और प्रत्येक वर्ष बसंत पंचमी के बाद फाल्गुन मास की शुरुआत से इसे विशेष रूप से मनाया जाता है। फाग महोत्सव के दौरान मंदिरों में रंगों के साथ-साथ फूलों और पिचकारियों का भी आनंद लिया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान के चरणों में रंगीन गुलाल डालते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया और भक्ति गीतों में सम्मिलित होकर उत्सव का आनंद लिया। मंदिरों में साफ-सफाई और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया, ताकि बड़े पैमाने पर आए श्रद्धालु सुरक्षित रूप से इस रंगीन महोत्सव में भाग ले सकें। इस साल फाग महोत्सव में मंदिरों की सजावट भी आकर्षक थी। मंदिरों में फूलों और रंग-बिरंगी वस्तुओं से विशेष आयोजन किया गया, जिससे भक्तों को न केवल भक्ति का अनुभव मिला बल्कि होली के पारंपरिक रंगों का भी आनंद लेने का अवसर मिला। शहरवासियों और मंदिर प्रशासन ने फाग महोत्सव को सफल बनाने के लिए विभिन्न व्यवस्थाओं का ख्याल रखा। श्रद्धालुओं ने बताया कि इस उत्सव के दौरान मंदिरों में रंग और फूलों से होली खेलना भगवान के प्रति उनकी आस्था और प्रेम को दर्शाता है। उज्जैन में फाग महोत्सव न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्त्व रखता है बल्कि यह शहर में पर्यटन और सामाजिक मेलजोल को भी बढ़ावा देता है। इस उत्सव ने पूरे शहर को रंगों और खुशियों से सराबोर कर दिया।
उज्जैन में चोरी का बड़ा हमला: RSS पदाधिकारी पर हमला, आंख में गंभीर चोट, चेन्नई में मिलेगा इलाज

उज्जैन । उज्जैन के देवास रोड स्थित पार्श्वनाथ कॉलोनी में 18 फरवरी की रात लगभग 2 बजे चोरी की नीयत से घुसे छह बदमाशों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पदाधिकारी अर्जुन सिंह पर हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। बताया गया कि हमलावरों ने उनके चेहरे पर हथियार से वार किया, जिससे उनकी आंख में गंभीर चोट आई। गंभीर स्थिति को देखते हुए उनका ऑपरेशन इंदौर के अस्पताल में किया गया और आगे के बेहतर इलाज के लिए उन्हें चेन्नई रेफर कर दिया गया। घटना के दौरान मकान मालिक मनोहर सिंह बाहर गए हुए थे और कॉलोनी निवासी अभिलाष जैन ने बताया कि संदिग्ध आवाज सुनकर आसपास के लोग जाग गए। अर्जुन सिंह मौके पर पहुंचे और बदमाशों को ललकारा, जिससे गुस्साए आरोपियों ने उन पर हमला कर दिया। यह वही मकान है जिसे 2023 में भी चोरों ने निशाना बनाया था। पुलिस ने घटना की सूचना मिलते ही नागझिरी थाना क्षेत्र में जाकर आसपास के सीसीटीवी फुटेज जुटाए और मामले की जांच शुरू की। घटना का वीडियो भी सामने आया है जिसमें बदमाश सामान उठाते दिख रहे हैं। शनिवार को कॉलोनीवासी एसपी प्रदीप शर्मा से मिले और सुरक्षा बढ़ाने की मांग की। एसपी ने अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए और भरोसा दिलाया कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। साथ ही, उन्होंने रहवासियों को निजी सुरक्षा गार्ड बढ़ाने की सलाह दी। घटना ने उज्जैन की पार्श्वनाथ कॉलोनी में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी है और आरोपियों की पहचान के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने महाकाल की भस्म आरती में लिया आशीर्वाद, नंदी हॉल में किया ध्यान

उज्जैन। भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ आज तड़के उज्जैन स्थित ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे और भस्म आरती में शामिल हुए। भस्म आरती में बाबा महाकाल के दर्शन लाभ लेने के बाद उन्हें श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया। इस दौरान पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि भारत में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है जो हमारी वर्षों पुरानी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने मंदिर की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों का संरक्षण और विकास सराहनीय है। धनखड़ ने कहा मैं प्रशासन की सरलता सुगमता और लगनशीलता से बहुत प्रभावित हूं। यहां सभी से समानता का व्यवहार किया जा रहा है। मैं एक स्वच्छ छवि लेकर यहां से जा रहा हूं। उन्होंने यह भी बताया कि मंदिर में आकर अहंकार ईर्ष्या अहम और प्रतिशोध का त्याग होता है। इसके बाद पूर्व उपराष्ट्रपति नंदी हॉल में बैठकर ध्यान साधना में लीन हुए। उनका यह दौरा धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है साथ ही यह महाकालेश्वर मंदिर की लोकप्रियता और अनुशासन को भी दर्शाता है।
महाकाल भस्म आरती 24 फरवरी: उज्जैन में भगवान महाकाल का दिव्य श्रृंगार और भव्य आराधना

उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध Mahakaleshwar Temple में फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी और अष्टमी तिथि मंगलवार तड़के 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। इस अवसर पर महाकाल भस्म आरती का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें भगवान महाकाल का दिव्य श्रृंगार किया गया। मंदिर के पट खुलने के साथ ही पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया और भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से भगवान का अभिषेक संपन्न हुआ। भगवान महाकाल का मनोहारी श्रृंगार चंदन के त्रिपुंड, त्रिनेत्र और भांग के साथ किया गया। भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया और मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढंककर भस्म रमाई गई। इसके बाद शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। आभूषणों और सुगंधित पुष्पों से भगवान का अलंकरण किया गया। अल सुबह भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे और उन्होंने बाबा महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया। भक्त नंदी महाराज का दर्शन कर उनके कान के समीप जाकर अपनी मनोकामनाओं के पूर्ण होने का आशीर्वाद प्राप्त करते रहे। इस दौरान पूरा मंदिर बाबा महाकाल की जयकारों से गुंजायमान रहा। भक्तजन मंत्रोच्चार और भक्ति रस में डूबकर भगवान के चरणों में अपने मन की शांति और आशीर्वाद के लिए उपस्थित रहे। मंदिर में भक्तों की उपस्थिति ने माहौल को और भी आध्यात्मिक और भव्य बना दिया। पंचामृत अभिषेक और भस्म आरती का अनुभव श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत अद्भुत और प्रेरक रहा। भक्तों ने पूजा में अपनी श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ भाग लिया और महाकाल का दर्शन करके आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। इस अवसर ने मंदिर और श्रद्धालुओं के बीच गहरा आध्यात्मिक संबंध और भक्ति भाव का अद्वितीय अनुभव प्रस्तुत किया। श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का यह आयोजन न केवल भव्य था बल्कि भक्तों के लिए धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व से परिपूर्ण रहा। भक्तजन यहाँ अपने मनोकामनाओं की पूर्ति, जीवन में सुख-शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्ति के लिए हर वर्ष इस भव्य आरती में भाग लेते हैं।
CM MOHAN YADAV:उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाई-वे से किसानों और क्षेत्र का समग्र विकास, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दी बड़ी सौगात

CM MOHAN YADAV: भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन से जावरा तक बनने वाली ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड हाई वे परियोजना को जिले के किसानों और जनप्रतिनिधियों के समक्ष मंजूरी मिलने पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि यह परियोजना न सिर्फ क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी बल्कि स्थानीय क्षेत्र के समग्र विकास की नई पहचान भी बनेगी। करीब 5017 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह हाई वे किसानों व्यापारियों और आम जनता के जीवन स्तर को सीधे लाभान्वित करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकास की दिशा में प्रदेश में सभी एकजुट हैं और जीवाईएएन पहल को आगे बढ़ाकर प्रदेश को देश के विकसित प्रदेशों में शामिल करने का लक्ष्य है। किसानों की बेहतरी और कृषि उत्पादों को बड़ी मंडियों तक पहुंचाने के लिए यह हाई वे एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री ने किसान प्रतिनिधि मंडल को संबोधित करते हुए बताया कि उज्जैन जावरा हाई वे परियोजना के अलावा प्रदेश में सड़कों और राजमार्गों का विस्तृत नेटवर्क तैयार किया जा रहा है जिससे किसानों की पहुंच सुगम होगी। इस अवसर पर घट्टिया विधायक डॉ. सतीश मालवीय और नागदा विधायक डॉ. तेज बहादुर सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया और उन्हें विकास पुरूष बताया। RBI New Rules: बीमा की गलत बिक्री अब अपराध: बैंकों को वित्त मंत्री की दो टूक चेतावनी, 1 जुलाई से सख्त नियम लागू डॉ. यादव ने किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए भी कई योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ग्रीष्मकालीन उड़द पर हर किसान को 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस मिलेगा। इसके साथ ही सरसों चना मसूर तुअर और अन्य दलहन व तिलहन की फसलों के लिए भावांतर भुगतान योजना और उत्पादन बढ़ाने के ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। प्रदेश के दुग्ध उत्पादन को देश के कुल उत्पादन का 20 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए भी योजनाएं बनाई जा रही हैं। आगामी शैक्षणिक सत्र से कक्षा आठवीं तक के विद्यार्थियों को टेट्रा पैक में दूध उपलब्ध कराया जाएगा जिससे उत्पादन और पोषण दोनों में वृद्धि होगी। मुख्यमंत्री ने किसानों को अन्नदाता से ऊर्जादाता और उद्यमी बनाने की दिशा में भी कार्यरत योजनाओं का जिक्र किया। अगले तीन वर्षों में एक लाख किसानों को सोलर पंप उपलब्ध कराए जाएंगे जिससे सिंचाई और अतिरिक्त बिजली उत्पादन का विकल्प मिलेगा। कृषि आधारित उद्योगों और फूड पार्क की स्थापना से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य स्थानीय स्तर पर मिलेगा। डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में गरीब युवा किसान और महिला कल्याण के लिए मिशन मोड में कार्य जारी है। उज्जैन मेट्रोपॉलिटिन क्षेत्र में शामिल होने से नागदा खाचरौद और रतलाम सहित पूरे क्षेत्र का समग्र विकास सुनिश्चित होगा। किसान प्रतिनिधिमंडल में मौजूद समाजसेवी और स्थानीय किसानों ने इस पहल का स्वागत किया।
अगले 4 दिन मध्य प्रदेश में आंधी-बारिश का अलर्ट, दक्षिण-पूर्वी हिस्सा रहेगा ज्यादा प्रभावित

भोपाल। मध्य प्रदेश में अगले चार दिनों तक आंधी और बारिश का मौसम जारी रहने वाला है। शुक्रवार को साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ लाइन की सक्रियता के चलते प्रदेश के 20 से अधिक जिलों में बारिश हुई। शनिवार को बादलों की छाया बनी हुई है। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि 23 और 24 फरवरी को एक नया सिस्टम प्रभावी होगा, जो खासकर प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में ज्यादा असर दिखाएगा। पिछले तीन दिन से प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी-बारिश का दौर जारी है। कुछ इलाकों में ओले भी गिरे। बीते 24 घंटों में भोपाल, रतलाम, मंदसौर, शाजापुर, धार, इंदौर, रायसेन, उज्जैन, सागर, छतरपुर सहित 20 से अधिक जिलों में वर्षा दर्ज की गई।पिछले तीन दिन से प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी-बारिश का दौर जारी है। कुछ इलाकों में ओले भी गिरे। बीते 24 घंटों में भोपाल, रतलाम, मंदसौर, शाजापुर, धार, इंदौर, रायसेन, उज्जैन, सागर, छतरपुर सहित 20 से अधिक जिलों में वर्षा दर्ज की गई। तेज हवाओं और आंधी के चलते रतलाम, शाजापुर और उज्जैन में फसलों को नुकसान पहुंचा है। गेहूं की फसलें क्षतिग्रस्त हुई हैं, जिससे दानों पर असर और किसानों की परेशानियाँ बढ़ सकती हैं। अनुमान है कि अगले तीन दिनों में 25 जिलों में फसल नुकसान हो सकता है। इसको देखते हुए सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे शुरू कर दिया है। राजस्व अमला मैदान में जाकर फसल नुकसान का आंकलन कर रहा है। अगले दो दिनों का मौसम का अंदाजा22 फरवरी: बारिश की संभावना नहीं, हालांकि बादल छाए रह सकते हैं।23 फरवरी: दक्षिणी जिलों में नया सिस्टम सक्रिय होने से बारिश होने की संभावना। बारिश की संभावना वाले जिले मौसम विभाग के अनुसार छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा और मऊगंज जिलों में बारिश होने का अनुमान है। इनके आस-पास के क्षेत्रों में भी मौसम बदलने और बारिश की संभावना बनी रहेगी। जबलपुर में भी मौसम ने करवट ली है। शुक्रवार देर रात हल्के बादल छाए और वातावरण में नमी महसूस की गई। शनिवार सुबह करीब 6 बजे से शहर के कई इलाकों में बूंदाबांदी हुई, जिससे वातावरण सुहावना हो गया और ठंड का असर बढ़ गया। सुबह का न्यूनतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
उज्जैन में महाशिवरात्रि पर भगवान महाकाल की विशेष भस्मारती: रजत मुकुट और रुद्राक्ष माला से हुआ भव्य श्रृंगार

उज्जैन । महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार दोपहर भगवान महाकाल की विशेष भस्मारती संपन्न हुई। साल में केवल एक बार होने वाली यह भस्म आरती दोपहर 12 बजे शुरू होकर दोपहर 2 बजे तक चली। इससे पहले सुबह से ही चार प्रहर पूजन, अभिषेक और मंत्रोच्चार के साथ भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया। रविवार रात 10:30 बजे से प्रारंभ हुए चार प्रहर पूजन में 11 ब्राह्मणों ने एकादश-एकादशनी रुद्रपाठ और वैदिक मंत्रों के साथ भगवान महाकाल का अभिषेक किया। पंचामृत, गंगाजल, गुलाब जल, भांग और केसर मिश्रित दूध से पूजा के बाद भगवान को नवीन वस्त्र और सप्तधान्य अर्पित किए गए। इसके बाद मोगरा और गुलाब के सुगंधित पुष्पों से तैयार 3 क्विंटल का भव्य सेहरा बांधा गया और रजत शेषनाग मुकुट, रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष माला सहित अन्य आभूषणों से अलंकरण किया गया। सेहरा आरती के बाद भस्म आरती के लिए भगवान का सेहरा उतारा गया और आभूषण, वस्त्र हटाकर भस्म अर्पित किया गया। इस भस्मारती में प्रशासनिक अधिकारी और भारी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। दोपहर 2:30 बजे भोग आरती संपन्न हुई, जिसके बाद नि:शुल्क अन्नक्षेत्र में ब्राह्मणों का भोजन कराते हुए दक्षिणा प्रदान की गई। भस्मारती के बाद संध्या पूजन, संध्या आरती और शयन आरती के साथ भगवान के पट बंद किए गए। महाशिवरात्रि पर्व का समापन 18 फरवरी को पंचमुखारविंद दर्शन के साथ होगा, जिसमें भगवान के पांच स्वरूपों का दर्शन किया जाएगा। महाशिवरात्रि पर मंदिर में श्रद्धालुओं का भारी सैलाब रहा। रविवार तक करीब 4 लाख भक्त भगवान महाकाल के दर्शन कर चुके हैं। शहर के होटल, लॉज और होम-स्टे पहले ही फुल हो चुके हैं, जिससे महाकालेश्वर मंदिर क्षेत्र में भक्तों की भारी भीड़ देखी गई।
उज्जैनः सिंहस्थ के दौरान करोड़ों श्रद्धालु मोक्षदायिनी शिप्रा में लगाएंगे आस्था की डुबकी, विश्व की रहेगी निगाह

भोपाल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) ने कहा कि सिंहस्थ महापर्व (Simhastha Mahaparva) का आयोजन विश्व के लिए अद्वितीय है। सिंहस्थ महापर्व के दौरान करोड़ों श्रद्धालु मोक्षदायिनी शिप्रा में आस्था की डुबकी लगाएंगे। इस महापर्व पर विश्व की निगाह रहेगी। सिंहस्थ-2028 मध्य प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है। हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए कि प्रत्येक श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के पवित्र अनुष्ठानों में शामिल हो सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार देर शाम उज्जैन में सिंहस्थ 2028 अंतर्गत मंत्री मंडलीय समिति से अनुशंसित अधोसरंचना के प्रगतिरत विकास कार्यों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बैठक में अलग-अलग विभागों के माध्यम से सिंहस्थ-2028 के लिए किए जा रहे विकास कार्यों की प्रगति की जानकारी लेकर समीक्षा की। उन्होंने उज्जैनवासियों से सेवाभाव की तरह कार्य करने का आहवान किया। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए कार्यों को समय-सीमा में पूर्ण कराएं। मुख्यमंत्री ने की किसानों की फसल की चिंतामुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ 2028 के प्रगतिरत कार्यों की समीक्षा के दौरान गेहूं की फसल की सिंचाई के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिप्रा नदी पर घाट निर्माण के दौरान किसानों को पानी की उपलब्धता बनी रहनी चाहिए। इसके लिए नर्मदा जल की आपूर्ति की जाए। वतर्मान में गेहूं की फसल को सिंचाई के लिए एक पानी की और जरुरत होगी। इसके लिए शिप्रा नदी में जल प्रवाह सुनिश्चित बनाए रखे। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिये कि सभी अधिकारी गंभीरता के साथ काम करें। मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा और संजय दुबे को निर्देश दिए है कि उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के काम में किसी भी तरह की रुकावट न आए। इसके लिए मुख्यमंत्री निवास पर भी सिंहस्थ सेल गठित कर मॉनीटरिंग सुनिश्चित की जाये और जिन विभागों में अधिकारियों की कमी है, वहाँ पदस्थापना तत्काल की जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अनुभवी अधिकारियों के लिए यदि सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारिेयों को रखना है तो उसके लिए भी नियमानुसार कार्यवाही कर तत्काल रुप से उन्हें रखा जाए। सिंहस्थ-2028 के लिए अब रिवर्स कैलेंडर बनाकर निर्माण कार्य तीव्र गति से पूर्ण करें। वर्तमान समय से लेकर सिंहस्थ-2028 तक दो वर्षाकाल का समय आने वाला है। इसलिए समय-सीमा में काम गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा किया जाना अनिवार्य है। उन्होंने विभिन्न निर्माण एजेसिंयों द्वारा किए जा रहे कार्यो की समीक्षा की, साथ ही निर्देश दिए कि जो निर्माण एजेंसियां काम कर रही है उनके संसाधनों की भी लगातार मॉनीटरिंग हो। वर्तमान समय माइक्रों मैनेजमेंट से नैनो मैनेजमेंट की ओर जाने का है। युद्ध स्तर की तैयारियां शुरु करना है। सभी अधिकारी 24 घंटे-07 दिन सक्रिय रहें। सिंहस्थ 2028 को बेहतर प्रबंधन के साथ करने के लिए उज्जैन जिले के सभी नागरिकों को जिम्मेदारी के भाव के साथ काम करने के लिए प्रेरित करें, उनको यह लगना चाहिए कि यह हमारा व्यक्तिगत काम है। इसके लिए सभी नागरिकों में जिम्मेदारी के साथ समर्पण का भाव भी पैदा करने के लिए समन्वय बनाकर कार्य करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ-2028 के अंतर्गत प्रचलित निर्माण कार्यों की समय-समय पर मॉनीटरिंग हो। उन्होंने सिंहस्थ के संदर्भ में विभागों को समन्वयपूर्वक कार्य करने और आवश्यक सुविधाओं के विकास के लिए समय-सीमा में कार्यों को पूर्ण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अधिकारियों को निर्देश1. सिंहस्थ-2028 के लिए होम स्टे, धर्मशाला, स्कूल, कॉलेज आदि में व्यवस्थाओं केलिए आधारभूत संरचना तैयार करने के लिए कार्य योजना बनाई जाए।2. उज्जैन शहर से जोड़ने वाले आसपास के गांव में होम स्टे की व्यवस्था के लिए लोगों को प्रशिक्षण भी दिया जाए। सिंहस्थ-2028 मेला क्षेत्र में आंतरिक और बाहरी व्यवस्थाओं की अलग-अलग रूपरेखा बनाएं। सिंहस्थ मेले की बाहर की व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद बनाने के लिए जरूरी है कि उसकी समस्त जगहों की मैपिंग की जाए।3. उज्जैन सिंहस्थ-2028 की तैयारी में बेहतर प्रबंधन के लिए उज्जैन में महाशिवरात्रि, श्रावण, नागपंचमी एवं अन्य त्योहारों पर व्यवस्थाओं को प्रायोगिक रूप से बनाए और उसके अनुभवों का लाभ लेते हुए सिंहस्थ के भीड प्रबंधन कार्य योजना बने।4. उज्जैन शहर से जुड़ने वाले दूसरे जिलों के वैकल्पिक मार्गों का चयन कर लें और इन मार्गों को गुगल मैपिंग के साथ उन्नयन भी कराया जाए, जिससे भीड़ प्रबंधन में इन मार्गों का उपयोग हो सके। साथ ही उज्जैन शहर के महाकाल मंदिर पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्गों का भी चयन करें, जिससे भीड़ प्रबंधन आसानी से हो सके।5. श्री मंगलनाथ, श्री भूखीमाता रामघाट के आसपास घाटों को जोड़ने वाले मार्गों को चिन्हित कर उन्नयन करें। सिंहस्थ मेला क्षेत्र के बाहर सामाजिक सामुदायिक भवन, स्कूल, कॉलेज धर्मशाला बनाने वाली संस्थाओं को प्रोत्साहित करें।6. सिंहस्थ 2028 के लिए काम कर रही निर्माण एजेंसी जो समय पर काम पूरा करें उनको प्रोत्साहन स्वरूप व्यवस्था भी बना कर दें। समीक्षा बैठक में प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, महापौर मुकेश टटवाल, विधायक अनिल जैन कालूहेडा, सतीश मालवीय, जितेन्द्र पंड्या, नगर निगम अध्यक्ष कलावती यादव, सिंहस्थ मेला अधिकारी सह संभागायुक्त आशीष सिंह, एडीजी राकेश गुप्ता, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह एवं अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
महाकाल का महापर्व 15 फरवरी को 44 घंटे तक नॉनस्टॉप दर्शन और दोपहर 12 बजे अद्भुत भस्म आरती का दिव्य आयोजन

उज्जैन का विश्वप्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर एक बार फिर महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भक्ति और आस्था के महासागर में डूबने जा रहा है। इस बार महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी 2026 रविवार को मनाया जाएगा और इसे लेकर मंदिर प्रशासन ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं। श्रद्धालुओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए महाकाल मंदिर के पट लगातार 44 घंटे तक खुले रहेंगे ताकि देश और विदेश से आने वाले लाखों भक्त बिना किसी बाधा के बाबा महाकाल के दर्शन कर सकें। 6 फरवरी से ही महाकालेश्वर मंदिर में शिव नवरात्रि के साथ भगवान शिव के विवाहोत्सव की शुरुआत हो चुकी है। यह आयोजन 16 फरवरी 2026 तक चलेगा। पूरे मंदिर परिसर को भव्य और आकर्षक सजावट से सजाया जा रहा है। फूलों की विशेष साज सज्जा के साथ महादेव का दिव्य श्रृंगार किया जाएगा। मंदिर प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था से लेकर श्रद्धालुओं की सुविधा तक हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। महाशिवरात्रि के दिन 15 फरवरी को सुबह 6 बजे से दर्शन प्रारंभ होंगे और 16 फरवरी की सुबह तक बिना किसी विश्राम के जारी रहेंगे। इन 44 घंटों के दौरान मंदिर नॉनस्टॉप खुला रहेगा। श्रद्धालु दिन और रात किसी भी समय बाबा महाकाल के दर्शन कर सकेंगे। यह व्यवस्था विशेष रूप से उन भक्तों के लिए की गई है जो दूर दराज से उज्जैन पहुंचते हैं और महाशिवरात्रि पर महाकाल के साक्षात दर्शन की अभिलाषा रखते हैं। महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की आराधना का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। इस दिन चारों प्रहर महादेव की पूजा की जाती है। भक्त व्रत रखते हैं और रात्रि जागरण कर शिव नाम का स्मरण करते हैं। उज्जैन नगरी इस अवसर पर पूरी तरह शिवमय हो जाती है। हर ओर हर हर महादेव के जयघोष गूंजते हैं और वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो जाता है। इस पर्व का सबसे विशेष और आकर्षक आयोजन 16 फरवरी को दोपहर 12 बजे होने वाली भस्म आरती होगी। महाकालेश्वर मंदिर में दोपहर की भस्म आरती साल में केवल एक बार महाशिवरात्रि पर ही आयोजित की जाती है। यह अद्भुत और दुर्लभ दृश्य देखने के लिए हर वर्ष लाखों श्रद्धालु उमड़ते हैं। भस्म आरती से पहले भगवान महाकाल को फलों फूलों और सप्तधान्य से निर्मित भव्य सेहरा बांधा जाता है। यह श्रृंगार अपने आप में अद्वितीय होता है और श्रद्धालुओं के लिए दिव्य अनुभूति का क्षण बन जाता है। महाशिवरात्रि और शिव नवरात्रि का यह भव्य समापन 16 फरवरी को भस्म आरती के साथ होगा। उज्जैन का यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से भी अत्यंत खास है। महाकाल की नगरी में इस दौरान उमड़ने वाली आस्था यह दर्शाती है कि भगवान शिव के प्रति श्रद्धा आज भी उतनी ही प्रगाढ़ है जितनी सदियों पहले थी। महाकाल के दरबार में इस महापर्व पर शामिल होना हर शिवभक्त के लिए सौभाग्य की बात मानी जाती है और इस वर्ष 44 घंटे के निरंतर दर्शन ने इस उत्सव को और भी ऐतिहासिक बना दिया है।
MP में 30 से ज्यादा जिलों में कोहरे की चादर, ग्वालियर-चंबल क्षेत्र सबसे प्रभावित..

भोपाल। मध्य प्रदेश का आधा से अधिक हिस्सा कोहरे की चपेट में है। गुरुवार सुबह भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन और 30 से अधिक जिलों में मध्यम से घना कोहरा छाया हुआ है। मौसम विभाग ने इस दौरान गाड़ी चलाते समय विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। बुधवार को दिन में ठंडी हवाओं के चलते अधिकतर शहरों का अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में कोहरे के कारण विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम हो सकती है, जिससे सड़क हादसों का खतरा बढ़ जाता है। मौसम विभाग ने कहा है कि सुबह के समय अनिवार्य होने पर ही सफर करें और गाड़ी चलाते समय फॉग लाइट का इस्तेमाल करते हुए धीमी गति अपनाएं। शुक्रवार को भी कोहरे का अलर्ट जारी है। किस जिलों में कोहरा छायामौसम विभाग के अनुसार गुरुवार सुबह भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, रायसेन, सागर, राजगढ़, शाजापुर, आगर-मालवा, रतलाम, नीमच, मंदसौर, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल और अनूपपुर जिलों में कोहरे का प्रभाव है। अगले दो दिन का मौसम 6 फरवरी: ग्वालियर, भिंड, दतिया, मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल और अनूपपुर में घना कोहरा रहेगा। भोपाल, गुना, अशोकनगर, इंदौर, सागर, दमोह, जबलपुर, कटनी, विदिशा, सीहोर, रायसेन सहित कई जिलों में हल्के से मध्यम कोहरे का असर रहेगा। 7 फरवरी: अधिकांश जिलों में हल्के से मध्यम कोहरे का अनुमान है। इस दिन बारिश की संभावना नहीं है। इस मौसम के पीछे की वजहउत्तर भारत में सक्रिय वेस्टर्न डिस्टरबेंस और साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम के कारण प्रदेश के कई जिलों में बादल छाए रहे। पहाड़ी क्षेत्रों में हुई बर्फबारी से ठंडी हवाएं मैदानी इलाकों में पहुंच रही हैं। पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में 8 फरवरी से नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव होने वाला है, जिसका असर प्रदेश में नजर आएगा। 10 फरवरी से मावठे गिरने की संभावना है।