इंदौर को बड़ी राहत, सरवटे–गंगवाल रोड प्रोजेक्ट फिर शुरू, अब 80 नहीं बल्कि 60 फीट चौड़ी बनेगी सड़क

इंदौर शहर में लंबे समय से अटकी पड़ी एक महत्वपूर्ण सड़क परियोजना अब फिर से शुरू होने जा रही है, जिससे स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। सरवटे से गंगवाल बस स्टैंड के बीच बनने वाली यह सड़क पिछले कई महीनों से विवाद और तकनीकी कारणों के चलते अधूरी पड़ी थी, लेकिन अब इसे आगे बढ़ाने पर सहमति बन गई है। शुरुआत में इस सड़क को 80 फीट चौड़ा करने की योजना तैयार की गई थी, लेकिन स्थानीय निवासियों की आपत्तियों और लगातार चल रहे विरोध के बाद इसमें बदलाव किया गया है। अब यह सड़क 60 फीट चौड़ाई के साथ विकसित की जाएगी। इस निर्णय के बाद परियोजना को मंजूरी मिल गई है और निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की संभावना है। यह सड़क निर्माण कार्य स्मार्ट सिटी योजना के तहत शुरू किया गया था, लेकिन बीच में फंडिंग और तकनीकी अड़चनों के कारण काम रुक गया। इसके अलावा बाधक निर्माणों को हटाने को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई थी, जिससे परियोजना लंबे समय तक अधर में लटकी रही। स्थानीय स्तर पर इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए कई प्रयास किए गए और बजट की व्यवस्था भी की गई, लेकिन निर्माण कार्य फिर भी शुरू नहीं हो सका। अब नए वर्क ऑर्डर और संशोधित चौड़ाई के साथ इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। चौड़ाई कम करने के फैसले के बाद स्थानीय लोगों और प्रशासन के बीच सहमति बन गई है, जिससे अब विवाद की स्थिति समाप्त हो गई है। माना जा रहा है कि इस सड़क के बनने से क्षेत्र में यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और रोजमर्रा की आवाजाही आसान हो जाएगी। यह परियोजना पूरी होने के बाद सरवटे से गंगवाल बस स्टैंड के बीच का इलाका अधिक व्यवस्थित और सुगम बन सकेगा। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सालभर से रुकी यह योजना कितनी तेजी से पूरी होती है और लोगों को इसका वास्तविक लाभ कब तक मिलता है।
GWALIOR AMRIT 2.0: अमृत 2.0 में ग्वालियर को 30 करोड़ की मंजूरी, सीवर सिस्टम होगा हाईटेक

HIGHLIGHTS : अमृत 2.0 के तहत ग्वालियर को 30 करोड़ की मंजूरी 20 करोड़ से सीवर सिस्टम के लिए आधुनिक मशीनें खरीदी जाएंगी 5 करोड़ से जीआईएस डैशबोर्ड तैयार होगा 5.75 करोड़ जल संरक्षण और वाटर हार्वेस्टिंग पर खर्च 4.25 करोड़ से संपत्तियों का सर्वे, बढ़ेगा नगर निगम का राजस्व GWALIOR AMRIT 2.0: ग्वालियर। शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए अमृत 2.0 योजना के तहत 30 करोड़ रुपए की सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है। इस राशि में केंद्र और राज्य सरकार दोनों का 15-15 करोड़ रुपए का योगदान रहेगा। नगर निगम का मानना है कि इस फंड से शहर की मूलभूत सुविधाओं में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। GWALIORB JC MILLS CASE: जेसी मिल विवाद पर हाईकोर्ट सख्त; अब नहीं टलेगी सुनवाई, 13 मई को होगी अंतिम बहस सीवर सिस्टम के लिए आएंगी अत्याधुनिक मशीनें नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय के अनुसार, इस बजट का बड़ा हिस्सा सीवर व्यवस्था को सुधारने में खर्च किया जाएगा। करीब 20 करोड़ रुपए से सीवर लाइनों की सफाई और रखरखाव के लिए आधुनिक मशीनें खरीदी जाएंगी। इसके अलावा 5 करोड़ रुपए की लागत से जीआईएस आधारित डैशबोर्ड तैयार होगा, जिससे सीवर नेटवर्क की निगरानी और समस्या समाधान तेज होगा। दिल्ली MCD में बीजेपी का दबदबा: प्रवेश वाही बने मेयर, डॉ. मोनिका पंत डिप्टी मेयर चुनी गईं जल संरक्षण पर भी फोकस शहर में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए 5.75 करोड़ रुपए वाटर हार्वेस्टिंग प्रोजेक्ट्स पर खर्च किए जाएंगे। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत कुओं और बावड़ियों के संरक्षण और पुनर्भरण का काम किया जाएगा। जीआईएस मैपिंग के जरिए जल स्रोतों की पहचान कर उन्हें फिर से जीवित करने की योजना है। IPL 2026 Purple Cap Race: एक मैच ने बदला खेल, टॉप-5 में बड़ा उलटफेर संपत्तियों का सर्वे, बढ़ेगा राजस्व नगर निगम 4.25 करोड़ रुपए खर्च कर शहर की सभी संपत्तियों का जीआईएस आधारित सर्वे करेगा। इससे ज्यादा से ज्यादा संपत्तियां रिकॉर्ड में आएंगी और संपत्तिकर संग्रह में वृद्धि होगी। इस पहल से नगर निगम की आय बढ़ने के साथ-साथ शहर के विकास कार्यों को भी गति मिलेगी।
SMART CITY BUSES : ग्वालियर स्मार्ट सिटी बस सेवा फेल… 11 करोड़ खर्च, फिर भी बसें बनीं कबाड़?

HIGHLIGHTS: 11 करोड़ रुपये खर्च के बाद भी बस सेवा पूरी तरह फेल 32 बसें सड़कों से गायब होकर कबाड़ में तब्दील जीपीएस जैसी सुविधाएं भी नहीं बचा सकीं योजना ऑटो और विक्रम के दबदबे से बस सेवा प्रभावित जनता ने योजना को पैसों की बर्बादी बताया SMART CITY BUSES : मध्यप्रदेश। ग्वालियर में शहरवासियों को सस्ती और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन सुविधा देने के लिए शुरू की गई स्मार्ट सिटी बस सेवा अब पूरी तरह बंद होती नज़र आ रही है। बता दें कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी विकास निगम द्वारा शुरू की गई यह योजना कुछ ही महीनों में असफल साबित हो गई। गर्मियों में चिड़चिड़ापन और गुस्सा क्यों बढ़ता है? इन उपायों से पाएं मन की शांति 11 करोड़ की लगत से हुई थी शुरु साल 2023 में करीब 11 करोड़ रुपये की लागत से 32 बसों का प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। इसमें इंट्रा-सिटी और इंटरसिटी बसें शामिल थीं, जिनमें जीपीएस ट्रैकिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं भी लगाई गई थीं। लेकिन संचालन में गंभीर कमियों के कारण यह योजना सफल नहीं हो सकी। Summer Skincare Tips: रूखी त्वचा से छुटकारा पाने के लिए अपनाएं ये आसान और असरदार नुस्खे बसें सड़कों से गायब होकर कबाड़ में बदलीं आज हालात यह हैं कि ये बसें शहर के सुनसान इलाकों जैसे रेस कोर्स रोड और पुलों के नीचे खड़ी जंग खा रही हैं। जिन बसों को शहर की लाइफलाइन बनना था, वे अब शोपीस में तब्दील होकर कबाड़ में बदल चुकी हैं। ऑटो और विक्रम का दबदबा बना बड़ी वजह शहर में पहले से चल रहे ऑटो और विक्रम का दबदबा इतना अधिक रहा कि निजी ऑपरेटर ने बस सेवा चलाने में रुचि नहीं दिखाई। इसी वजह से धीरे-धीरे पूरी बस सेवा व्यवस्था ठप हो गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह जनता के पैसों की बर्बादी है और स्मार्ट सिटी के नाम पर केवल दिखावटी विकास किया जा रहा है।
GWALIOIR ILLEGAL COLONIES: ग्वालियर में अवैध कॉलोनियों पर शिकंजा, बिना अनुमति प्लॉट बेचने वालों पर FIR

HIGHLIGHTS: • ग्वालियर में अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई• दो थाना क्षेत्रों में FIR दर्ज• बिना अनुमति प्लॉट बेचने के आरोप• कई कॉलोनाइजर और कंपनियां आरोपी• प्रशासन ने खरीदारों को दी चेतावनी GWALIOIR ILLEGAL COLONIES: मध्यप्रदेश। ग्वालियर में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ जिला प्रशासन और पुलिस ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। बता दें कि बीती रात पुरानी छावनी और तिघरा थाना क्षेत्रों में दो अलग-अलग मामलों में कॉलोनाइजरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। आरोप है कि बिना अनुमति, NOC और ले-आउट स्वीकृति के कॉलोनियां विकसित कर प्लॉट बेचे जा रहे थे। PARSHAD WATER TANK PROTEST: पानी नहीं तो जान देंगे, ग्वालियर में पार्षद का अर्द्धनग्न प्रदर्शन; पानी सप्लाई न होने पर दी चेतावनी बिना मंजूरी काटे गए प्लॉट तिघरा थाना क्षेत्र में ग्राम जिगसौली की जमीन पर कॉलोनाइजर नरेश किरार द्वारा अवैध कॉलोनी विकसित की जा रही थी। बताया जा रहा है कि उन्होंने न तो कॉलोनी विकास की अनुमति ली और न ही नगर एवं ग्राम निवेश विभाग से ले-आउट पास कराया। इसके बावजूद भूखंड काटकर लोगों को बेचे जा रहे थे, जिससे कई खरीदार प्रभावित हुए। PICKUP FIRE INDORE : खंडवा-इंदौर हाईवे पर चलती पिकअप में आग, ड्राइवर ने जंपर बचाई जान दूसरे मामले में कई आरोपी शामिल दूसरे मामले में पुरानी छावनी थाना पुलिस ने सत्यभान सिंह नरवरिया, अभिलाख सिंह नरवरिया और हरिकृष्णा प्रॉपर्टीज प्रा. लि. के डायरेक्टर सहित कई लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। साथ ही इन पर ग्राम सुसैरा की जमीन पर बिना अनुमति कॉलोनी विकसित कर प्लॉट बेचने का आरोप है, पुलिस ने इस मामले में अन्य सहयोगियों को भी आरोपी बनाया है। LENSKART CONTROVERSY: लेंसकार्ट विवाद में धीरेंद्र शास्त्री की एंट्री, बोले- अपनी कंपनी लाहौर में खोल लो प्रशासन की सख्ती, जांच जारी पुलिस का कहना है कि जिला प्रशासन की शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। बिना परमिशन और एनओसी लिए लोगों को भ्रमित कर प्लॉट बेचने वालों पर सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। मामले की जांच जारी है और आगे और भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। West Bengal election : मतदान से ठीक पहले राजनीतिक तनाव बढ़ा, प्रशासन ने अतिरिक्त बल तैनात किए.. खरीदारों के लिए चेतावनी इस कार्रवाई के बाद प्रशासन ने आम लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। बिना वैध दस्तावेजों और स्वीकृति के प्लॉट खरीदने से नुकसान हो सकता है। अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में ऐसे मामलों में और सख्ती बरती जाएगी।
भारत मंडपम में अमृत मित्र महोत्सव: महिला सशक्तिकरण और शहरी विकास का संगम

नई दिल्ली । नई दिल्ली में 13 मार्च को आयोजित होने वाले अमृत मित्र महोत्सव में देशभर से स्व-सहायता समूह की महिलाएँ शामिल होंगी। मध्यप्रदेश की लगभग 300 महिलाएँ इस राष्ट्रीय मंच पर अपनी सक्रिय भागीदारी के लिए भाग लेंगी। नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने बताया कि राज्य के 55 नगरीय निकायों में 312 स्व-सहायता समूहों की 1 028 महिलाओं को अमृत मित्र के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन महिलाओं ने जल गुणवत्ता परीक्षण सार्वजनिक उद्यानों के रख-रखाव और केंद्र सरकार के पेड़ों के लिए महिलाएं कार्यक्रम के तहत पौधरोपण एवं सुरक्षा के कार्यों को सफलतापूर्वक निभाया है। यह महोत्सव भारत मंडपम नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है और इसमें उत्तर प्रदेश हरियाणा महाराष्ट्र राजस्थान सहित देश के अन्य राज्यों से भी अमृत मित्र महिलाएँ सम्मिलित होंगी। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं की उत्कृष्ट उपलब्धियों को मान्यता देना और शहरी विकास में उनके योगदान को रेखांकित करना है। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर इस अवसर पर जल संरक्षण स्वच्छता और शहरी प्रबंधन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को सम्मानित करेंगे। यह न केवल महिलाओं की उपलब्धियों को पहचान देगा बल्कि महिला नेतृत्व के माध्यम से सतत शहरी विकास की संकल्पना को भी सुदृढ़ करेगा। आयुक्त संकेत भोंडवे ने नई दिल्ली जा रही सभी अमृत मित्र महिलाओं को बधाई देते हुए कहा कि यह पहल शहरी विकास में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और नेतृत्व का प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने विश्वास जताया कि मध्यप्रदेश की महिलाएँ इस राष्ट्रीय मंच पर राज्य के नवाचारों और उत्कृष्ट कार्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेंगी। अमृत मित्र पहल के तहत महिलाएँ केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय मंच पर भी शहरी विकास की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को निभा रही हैं। यह पहल महिला सशक्तिकरण और शहरी प्रबंधन के संगम का प्रतीक बनकर सामने आई है। आयोजन में सहभागिता से महिलाओं का मनोबल बढ़ेगा और शहरी क्षेत्रों में सतत विकास के लिए उनका नेतृत्व और अधिक सशक्त होगा।
भोपाल संभाग में डेवलपमेंट प्लान पर एसीएस की बैठक: पानी की समस्या और नगरीय विकास पर जोर, विधायकों ने ग्रीष्मकालीन पानी संकट उजागर किया

भोपाल। भोपाल संभाग की विकास योजनाओं और शासकीय नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर अपर मुख्य सचिव (एसीएस) संजय कुमार शुक्ला ने बुधवार को कमिश्नर ऑफिस में अहम बैठक की। बैठक में संभाग के विभिन्न जिलों से जुड़े कलेक्टर, जिपं सीईओ और विधायकों ने हिस्सा लिया। मुख्य चर्चा का केंद्र पानी से जुड़े मुद्दे, पेयजल आपूर्ति, अधोसंरचना विकास और स्वास्थ्य एवं शिक्षा व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग रहा। बैठक में भोपाल दक्षिण-पश्चिम विधायक भगवानदास सबनानी, सांची विधायक प्रभुराम चौधरी, शमशाबाद विधायक सूर्यप्रकाश मीणा, नरसिंहगढ़ विधायक मोहन शर्मा और बैरसिया विधायक विष्णु खत्री उपस्थित रहे। अन्य जिलों के विधायक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। एसीएस शुक्ला ने पानी आपूर्ति, नल-जल योजना और जल जीवन मिशन की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि गर्मी के मौसम में नागरिकों को पर्याप्त पानी उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि समूह पेयजल योजनाओं को समय-सीमा में पूर्ण करना प्राथमिकता होनी चाहिए। शुक्ला ने कलेक्टर्स को निर्देश दिए कि जनप्रतिनिधियों और विधायकों के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखें और उनके द्वारा उठाए गए स्थानीय मुद्दों का तत्काल समाधान सुनिश्चित करें। स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देते हुए शुक्ला ने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, स्कूलों और आंगनवाड़ियों की संचालन मॉनिटरिंग नियमित रूप से की जाए। किसी भी कमी या अनियमितता पाए जाने पर तुरंत कार्रवाई की जाए। अधोसंरचना और नगरीय विकास के तहत, उन्होंने अमृत-2.0 योजना के निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि कार्य पूर्ण होने के बाद सड़कों और सार्वजनिक ढांचों को जीर्ण-शीर्ण अवस्था में न छोड़ा जाए। शहरों की बाहरी सीमाओं पर बहुद्देश्यीय विकास परियोजनाओं का निर्माण समयबद्ध तरीके से किया जाए ताकि शहरी विकास नियोजित रूप में हो। बैठक में दोहरा प्रभार वाले अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए कि वे संबंधित कार्यस्थलों पर नियमित समीक्षा के लिए उपस्थित रहें और किसी प्रकार की बाधा रोकें। साथ ही, बांधों और अधिग्रहीत भूमि का शीघ्र नामांतरण संबंधित विभागों के नाम करने के निर्देश भी दिए गए। एसीएस शुक्ला ने स्पष्ट किया कि शहरों के विकास और नागरिक सुविधाओं के सुचारू संचालन के लिए अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय अनिवार्य है। बैठक में सभी प्रतिनिधियों ने गर्मी के मौसम में पेयजल संकट और योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
MP Water Conservation: मध्यप्रदेश ने जल गंगा संवर्धन अभियान 2026 को दी अंतिम रूप, अमृत मित्र संभालेंगे जल संरक्षण की कमान

MP Water Conservation: भोपाल। मध्यप्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने प्रदेश की जल संपदा को संरक्षित करने और नगरीय क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए जल गंगा संवर्धन अभियान 2026 की व्यापक कार्य योजना को अंतिम रूप दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दिशा निर्देशों के अनुरूप तैयार यह योजना पारंपरिक जल स्रोतों के पुनरुद्धार और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने पर केंद्रित है। अभियान के तहत सभी नगरीय निकायों को नदियों तालाबों बावडियों और नालों के किनारे किए गए अतिक्रमण को चिह्नित कर तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इससे न केवल जल संरचनाओं का प्राकृतिक स्वरूप लौटेगा बल्कि वर्षा जल के प्रवाह से भू जल स्तर में भी वृद्धि होगी। अभियान में बुनियादी ढांचे और स्वच्छता कार्यों के लिए वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। अमृत 2.0 के तहत 112 जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार किया जाएगा जिनका क्षेत्रफल लगभग 3315 एकड़ है और इस पर 67 करोड़ रुपये का निवेश होगा। स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के अंतर्गत 100 प्रमुख नालों के शुद्धिकरण पर 664 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। भविष्य में 1000 जल ग्रहण संरचनाओं का वैज्ञानिक संवर्धन और 5000 नाले नालियों की सघन सफाई एवं सौंदर्यीकरण का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही नगरीय क्षेत्रों में 5000 नई रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणालियां स्थापित की जाएंगी। नागरिक सुविधाओं के विस्तार में प्रमुख बाजारों बस स्टैंडों और सार्वजनिक चौराहों पर सुव्यवस्थित प्याऊ स्थापित किए जाएंगे जिससे ग्रीष्मकाल में राहगीरों और आमजन को शुद्ध पेयजल उपलब्ध होगा। पर्यावरण संरक्षण के हिस्से के रूप में अमृत 2.0 के तहत 116 निकायों में 300 एकड़ क्षेत्र को हरित क्षेत्रों में विकसित किया जाएगा जिस पर लगभग 29 करोड़ रुपये खर्च होंगे। आगामी मानसून सत्र में 1 करोड़ पौधों का रोपण भी किया जाएगा। युवा सहभागिता को सुनिश्चित करने के लिए 5000 युवाओं को अमृत मित्र के रूप में MY Bharat पोर्टल पर पंजीकृत किया जाएगा। ये युवा जल संरक्षण के प्रति जन जागरूकता फैलाने और अभियान को सक्रिय रूप से आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगे। इस एकीकृत कार्य योजना से प्रदेश की जल धरोहर संरक्षित होगी और स्वच्छ हरित मध्यप्रदेश के संकल्प को साकार करने में मदद मिलेगी।
Clean Drinking Water: बुरहानपुर जल प्रदाय परियोजना को राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान

Clean Drinking Water: भोपाल । राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के अशोका होटल में आयोजित भव्य गरिमामय कार्यक्रम बिल्ड इंडिया इंफ्रा अवॉर्ड्स 2026 में मध्यप्रदेश नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उपक्रम मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी की बुरहानपुर जल प्रदाय परियोजना को प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया है गौरतलब है की यह अवार्ड सोशल इंपैक्ट एक्सीलेंस ऑफ द ईयर की श्रेणी में दिया गया है। यह परियोजना बुरहानपुर शहर में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से संचालित की गई है और विश्व बैंक के सहयोग से विकसित की गई प्रमुख शहरी अवसंरचना योजनाओं में शामिल है। केन्द्रीय सडक परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की विशेष उपस्थिति में जल शक्ति मंत्री सी आर पाटील द्वारा यह पुरस्कार दिया गया,इस अवसर पर केन्द्रीय पत्तन ,पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंदा सोनोबाल केन्द्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाईक आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के पूर्व सचिव डी एस मिश्रा और मध्यप्रदेश कैडर के सेवानिवृत्त वरिष्ठ आईएएस राघव चंद्रा भी मौजूद रहे। कम्पनी के प्रबंध संचालक संकेत भोंडवे और अतिरिक्त प्रबंध संचालक दिव्यांक सिंह इस उपलब्धि पर कम्पनी को बधाई दी है। एमपीयूडीसी की ओर से मुख्य अभियंता शैलेन्द्र शुक्ला के साथ तकनीकी अधिकारी कमलेश भटनागर ने यह सम्मान ग्रहण किया। गौरतलब है कि बुरहानपुर जल प्रदाय परियोजना के तहत एनीकट इंटेकवेल और 50 एमएलडी क्षमता का अत्याधुनिक जलशोधन संयंत्र स्थापित किया गया है। जल शोधन संयंत्र में पानी को फिल्ट्रेशन क्लोरीनेशन और अन्य वैज्ञानिक प्रक्रियाओं से शुद्ध किया जाता है जिससे यह न केवल सुरक्षित बल्कि स्वास्थ्य के लिए लाभदायक बन जाता है। पानी को वैज्ञानिक पद्धति से शुद्ध कर स्काडा प्रणाली के माध्यम से गुणवत्ता और आपूर्ति की निरंतर निगरानी की जाती है। पानी की क्वालिटी की रोज़ाना मॉनिटरिंग के लिए डब्ल्यूटीपी में एक हाई-लेवल वॉटर टेस्टिंग लैब भी लगाई गई है। शुद्ध जल को 8 नए ओवरहेड टैंकों और मजबूत पाइप नेटवर्क से शहर के प्रत्येक हिस्से तक पहुंचाया जा रहा है। योजना के अंतर्गत पुराने और क्षतिग्रस्त पाइपों को हटाकर नया वितरण नेटवर्क बिछाया गया है तथा लगभग 41,000 घरों में मीटरयुक्त नल कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। इससे लीकेज पर नियंत्रण हुआ है जल के अपव्यय में कमी आई है और जल वितरण व्यवस्था अधिक सुचारु बनी है। वर्तमान में नगरवासियों को प्रति व्यक्ति लगभग 135 लीटर शुद्ध पेयजल प्रतिदिन मिल रहा है जिससे नियमित और समान जलापूर्ति सुनिश्चित हो रही है। मुख्य अभियंता शैलेन्द्र शुक्ला ने बताया कि परियोजना के माध्यम से शहर में दीर्घकालिक जल उपलब्धता सुनिश्चित करने वितरण प्रणाली को सुदृढ़ बनाने तथा नागरिकों को स्वच्छ एवं नियमित पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया गया है। आधुनिक तकनीक बेहतर प्रबंधन और प्रभावी क्रियान्वयन के कारण इस योजना को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। यह उपलब्धि मध्य प्रदेश में शहरी आधारभूत संरचना के क्षेत्र में हो रहे नवाचार प्रभावी परियोजना प्रबंधन और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। बुरहानपुर जल प्रदाय परियोजना को मिला यह सम्मान राज्य की जल प्रबंधन पहलों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
बीआरटीएस मार्ग पर बदलेगा ट्रैफिक का चेहरा, इंदौर में एलिवेटेड कॉरिडोर निर्माण की फिर से हुई शुरुआत

इंदौर शहर में लंबे समय से प्रतीक्षित एलिवेटेड कॉरिडोर प्रोजेक्ट आखिरकार जमीन पर उतरता दिखाई दे रहा है। बीआरटीएस मार्ग पर बनने वाले इस बहुप्रतीक्षित कॉरिडोर का काम फिर से शुरू हो गया है और मशीनों की गूंज के साथ मिट्टी परीक्षण की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। करीब चार साल पहले गुजरात की कंपनी राजकमल बिल्डर्स को इस प्रोजेक्ट का ठेका दिया गया था, लेकिन विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से यह योजना अधर में लटक गई थी। अब एक बार फिर निर्माण की कवायद तेज हो गई है। करीब पंद्रह साल पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के कार्यकाल में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली थी। हालांकि बाद में एबी रोड पर बीआरटीएस निर्माण हो जाने के कारण एलिवेटेड कॉरिडोर की आवश्यकता और व्यवहारिकता को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही। लंबे विचार-विमर्श और समीक्षा के बाद मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलते ही परियोजना को दोबारा हरी झंडी दी गई और अब कॉरिडोर मार्ग पर बेरिकेडिंग कर काम शुरू कर दिया गया है। फिलहाल एलआईजी गुरुद्वारा के पास मिट्टी परीक्षण किया जा रहा है। इससे पहले ट्रैफिक सर्वे, प्लानिंग और प्रारंभिक मिट्टी परीक्षण पर ही पांच करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। अब दोबारा परीक्षण कर निर्माण की औपचारिक प्रक्रिया को गति दी जा रही है। छह किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर एलआईजी से नवलखा चौराहे तक बनेगा और इसे पूरा करने में लगभग तीन वर्ष का समय लगने का अनुमान है। यह प्रोजेक्ट वर्ष 2021 में राजकमल बिल्डर्स को सौंपा गया था और 2024 तक इसके पूरा होने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन ट्रैफिक लोड अपेक्षित 4 प्रतिशत तक नहीं पहुंचने के कारण मामला अटक गया। अनुबंध की शर्तों के अनुसार यदि लोक निर्माण विभाग परियोजना रद्द करता तो सरकार को कंपनी को 30 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ता। इसी कारण दो माह पहले दोबारा समीक्षा कर प्रोजेक्ट को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया गया और अब निर्माण प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना पर 300 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी। निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग द्वारा किया जा रहा है। हाल ही में नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर परियोजना की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में यह तय किया गया कि तीन प्रमुख चौराहों पर भुजाएं उतारी जाएंगी और ट्रैफिक सुगमता के लिए रोटरी भी बनाई जाएगी। एलिवेटेड कॉरिडोर बनने से बीआरटीएस मार्ग पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और शहर की यातायात व्यवस्था को नई दिशा मिलेगी। लंबे समय से अटकी इस परियोजना के फिर से शुरू होने से शहरवासियों में उम्मीद जगी है कि इंदौर का यातायात ढांचा और मजबूत होगा तथा विकास की रफ्तार और तेज होगी।
MP BUDGET SESSION: मप्र विधानसभा में ₹19,287 करोड़ का तीसरा अनुपूरक बजट पेश, राजस्व और पूंजीगत मद में बड़ा प्रावधान

MP BUDGET SESSION: भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा में बजट सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने वित्तीय वर्ष 2024-25 का तीसरा अनुपूरक बजट पेश किया। यह अनुपूरक बजट 19,287 करोड़ 32 लाख रुपये का है। इसके साथ ही आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 भी सदन के पटल पर रखा गया। प्रस्तुत अनुपूरक बजट में राजस्व मद में 8,934.03 करोड़ रुपये और पूंजीगत मद में 10,353.29 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रमुख विभागों को आवंटन सामान्य प्रशासन विभाग ₹100 करोड़ राजस्व विभाग ₹100 करोड़ वन विभाग ₹161 करोड़ औद्योगिक नीति एवं निवेश संवर्धन विभाग ₹1,250 करोड़ वित्त विभाग ₹1,650 करोड़ वाणिज्यिक कर विभाग ₹1,388 करोड़ खनिज विभाग माइनिंग फंड ₹321 करोड़ रक्षित निधि अंतरण योजना ₹140 करोड़ ऊर्जा विभाग ₹2,630 करोड़ श्रम विभाग ₹615 करोड़ 10 फाइनेंशियल मिस्टेक्स जो किसी को भी नहीं करनी चाहिए, समय रहते समझने में है समझदारी नगरीय विकास एवं आवास विभाग ₹2,569 करोड़ स्थानीय निकाय ₹248 करोड़ मिलियन शहर नर्मदा घाटी विकास विभाग ₹4,700 करोड़ जल संसाधन विभाग ₹300 करोड़ लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ₹300 करोड़ तकनीकी शिक्षा विभाग ₹720 करोड़ एमएसएमई विभाग ₹213 करोड़ सरकार के अनुसार यह अनुपूरक बजट विकास योजनाओं, अधोसंरचना विस्तार और विभिन्न विभागों की अतिरिक्त वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए लाया गया है।