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Iran-Israel War: मिडिल ईस्ट जंग तेज: ईरान की चेतावनी‘एक लीटर तेल भी नहीं जाने देंगे’, होर्मुज स्ट्रेट पर नई शर्त

   Iran-Israel War: नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष का आज 11वां दिन है और इसी बीच ईरान ने दुनिया के लिए एक बड़ी चेतावनी जारी की है। ईरान की ताकतवर सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि अगर हमले जारी रहे तो वह एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने देगा। ईरान ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री तेल मार्ग होर्मुज स्ट्रेट को लेकर नई शर्त भी रख दी है। ईरानी सेना का कहना है कि कुछ देशों के जहाजों को ही इस रास्ते से गुजरने दिया जाएगा और इसके लिए उन देशों को पहले अपने यहां से अमेरिका और इजराइल के राजदूतों को निकालना होगा। तो पूरी दुनिया में तेल संकट पैदा हो सकता है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान इस रास्ते से गुजरने वाले तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों से सुरक्षा शुल्क यानी सिक्योरिटी टैक्स वसूलने की योजना भी बना रहा है, खासकर उन देशों के जहाजों से जो अमेरिका के सहयोगी माने जाते हैं। इसी बीच युद्ध का असर क्षेत्र के दूसरे देशों पर भी दिखने लगा है। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी UNHCR के अनुसार 2 मार्च से अब तक 80 हजार से ज्यादा सीरियाई नागरिक लेबनान से सीमा पार कर अपने देश वापस लौट चुके हैं। एजेंसी की प्रवक्ता सेलिन श्मिट ने बताया कि इजराइली हमलों के डर से कई परिवार जल्दबाजी में लेबनान छोड़कर लौटे हैं। अधिकांश लोग बिना सामान लिए ही निकल गए और फिलहाल अपने रिश्तेदारों के घरों में रह रहे हैं। अभी तक इन लोगों ने आपातकालीन आश्रय की कोई आधिकारिक मांग दर्ज नहीं कराई है। युद्ध के बीच ईरान ने साफ कर दिया है कि वह फिलहाल युद्धविराम नहीं चाहता। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान पर हमला करने वालों को ऐसा जवाब दिया जाएगा कि वे दोबारा ऐसा करने की हिम्मत न करें। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को नहीं लगता कि अमेरिका और इजराइल से बातचीत करके यह युद्ध खत्म होगा। उनके मुताबिक ईरान उस स्थिति को खत्म करना चाहता है जिसमें पहले युद्ध होता है, फिर बातचीत और युद्धविराम होता है और कुछ समय बाद फिर से लड़ाई शुरू हो जाती है। दूसरी तरफ इराक ने भी इस संघर्ष से दूरी बनाने की कोशिश की है। इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने अमेरिका से साफ कहा है कि इराक की जमीन या उसके हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल पड़ोसी देशों पर हमले के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह बात अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत के दौरान कही। इराक का कहना है कि वह इस युद्ध में शामिल नहीं होना चाहता और अपने क्षेत्र को किसी भी सैन्य टकराव से दूर रखना चाहता है। युद्ध के कारण एशिया के कई देशों में भी चिंता बढ़ गई है। पाकिस्तान के बाद अब थाईलैंड ने ईंधन बचाने के लिए सरकारी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम करने का आदेश दिया है। थाई सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के विदेश यात्रा पर भी रोक लगा दी है और ऊर्जा बचत के लिए अलग-अलग उपाय लागू किए हैं। पाकिस्तान में भी सरकार ने खर्च कम करने के लिए सरकारी दफ्तरों को हफ्ते में चार दिन खोलने और आधे कर्मचारियों को घर से काम करने का फैसला किया है। वहीं वियतनाम ने लोगों से ईंधन बचाने की अपील की है और बांग्लादेश ने ऊर्जा संकट को देखते हुए विश्वविद्यालय बंद कर दिए हैं तथा छुट्टियों की अवधि बढ़ा दी है। इस संघर्ष का पर्यावरण पर भी असर दिखने लगा है। पाकिस्तान के मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि ईरान में हुए हवाई हमलों के बाद वहां से उठने वाला धुआं और प्रदूषण पाकिस्तान के पश्चिमी इलाकों तक पहुंच सकता है, जिससे हवा की गुणवत्ता खराब हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के तेल भंडारण ठिकानों पर हमलों के बाद कई शहरों के ऊपर घना काला धुआं छाया हुआ है और वहां सांस लेना मुश्किल हो गया है। दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी अरामको ने भी इस स्थिति को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। कंपनी के सीईओ अमीन नासिर के अनुसार अगर युद्ध जारी रहता है और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो वैश्विक तेल बाजार में बड़ा संकट पैदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि इससे केवल ऊर्जा क्षेत्र ही नहीं बल्कि शिपिंग, बीमा, हवाई यात्रा, खेती और ऑटोमोबाइल जैसे कई उद्योगों पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा दुनिया में तेल का भंडार पहले ही पिछले पांच वर्षों के सबसे निचले स्तर के आसपास है, इसलिए सप्लाई में किसी भी बड़ी रुकावट से स्थिति और गंभीर हो सकती है। इसी बीच तुर्किये ने भी अपनी सुरक्षा बढ़ा दी है और देश के दक्षिण-पूर्वी इलाके में अमेरिकी पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किया गया है। तुर्किये का कहना है कि हाल की घटनाओं को देखते हुए उसकी सीमाओं और हवाई क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत की जा रही है। उधर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिकी नौसेना अब तक ईरान के 46 युद्धपोतों को डुबो चुकी है। उनके इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि युद्ध कब खत्म होगा यह ईरान तय करेगा और अगर हमले जारी रहे तो क्षेत्र से एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। युद्ध का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। मिस्र ने घरेलू ईंधन की कीमतों में करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कर दी है। सरकार का कहना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध के कारण तेल सप्लाई और समुद्री परिवहन मार्ग प्रभावित हो रहे हैं, जिसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है। कुल मिलाकर मिडिल ईस्ट में जारी यह संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय युद्ध नहीं रह गया है। तेल सप्लाई, शरणार्थी संकट, पर्यावरण और वैश्विक अर्थव्यवस्था—इन सभी पर इसका असर साफ दिखाई देने लगा है और अगर हालात जल्द नहीं संभले तो दुनिया को एक बड़े ऊर्जा और आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।

Lara Dutta Dubai Tension: लारा दत्ता इमोशनल हुईं, बेटी के साथ दुबई में फंसीं: शूटिंग के दौरान धमाके और फाइटर जेट देखे

Lara Dutta Dubai Tension: नई दिल्ली। एक्ट्रेस लारा दत्ता दुबई में अपनी बेटी सायरा के साथ वर्क ट्रिप पर थीं, जब अचानक वहां तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई। लारा ने बताया कि 28 फरवरी को दुबई के एक स्टूडियो में शूटिंग के दौरान उन्हें ऊपर से तेज धमाके सुनाई दिए और आसमान में कई फाइटर जेट उड़ते दिखे। उन्होंने कहा कि हालात डराने वाले थे, लेकिन वह खुद को असुरक्षित महसूस नहीं कर रही थीं। Gwalior Bride Threatened: शादी के 7 दिन पहले युवती को जाने से मरने की धमकी, आरोपी समीर खान गिरफ्तार लारा ने बताया कि धमाकों के समय उनका परिवार सुरक्षित विला में था, लेकिन खिड़कियां और दरवाजे हिल रहे थे। उन्होंने यूएई सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि वहां हर व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है और लोग अपने सामान्य कामों में लगे हुए हैं। लारा ने कहा कि फ्लाइट्स सीमित हैं, लेकिन वे मुंबई लौटने की कोशिश कर रहे हैं ताकि उनकी बेटी और अन्य लोग इस तनावपूर्ण स्थिति से सुरक्षित रहें। एक्ट्रेस ने यह भी कहा कि किसी भी आम नागरिक को डर के माहौल में जीने का अधिकार नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि स्थिति जल्द सामान्य होगी और सही फैसले लिए जाएंगे। Sonu Sood Dubai Crisis: सोनू सूद ने दुबई में फंसे नागरिकों के लिए इंसानियत का हाथ बढ़ाया, मुफ्त में सुरक्षित ठहरने की सुविधा दी इस बीच दुबई में ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण कई उड़ानें रद्द हुईं और हजारों यात्री फंसे। लारा ने वीडियो में अपने अनुभव साझा किए और इमोशनल होते हुए कहा कि हालात पिछले कुछ दिनों में काफी तनावपूर्ण रहे।

Gold and Silver Prices: US-Iran टेंशन के बीच सुरक्षित निवेश… फिर 3 लाख के पार जा सकते हैं चांदी के दाम

Gold and Silver Prices: नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच बढ़ते तनाव से सोने-चांदी की कीमतों (Gold and Silver Prices) में एक बार फिर उछाल आया है। देश की राजधानी दिल्ली में गुरुवार को चांदी जहां 2.6 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई तो सोना 1.58 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम की ऊंचाई पर पहुंच गया। यह उछाल वैश्विक रुख तथा अमेरिका एवं ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच सुरक्षित निवेश वाली संपत्तियों की मांग में बढ़ोतरी की वजह से आया। अगर हालात में सुधार नहीं हुआ तो चांदी की कीमत (Silver Prices) एक बार फिर से 3 लाख रुपये के पार जा सकती है। वहीं, सोना भी अपने ऑल टाइम हाई के करीब जा सकता है। बता दें कि चांदी की कीमत जनवरी महीने में 4 लाख रुपये के स्तर को पार कर गई थी। 18 हजार रुपये महंगी हुई चांदी स्थानीय बाजार के जानकारों के मुताबिक, चांदी बुधवार के 2,46,000 रुपये प्रति किलोग्राम के बंद स्तर से 18,000 रुपये या 7.32 प्रतिशत बढ़कर 2,64,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी कर मिलाकर) हो गई। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना भी 1,950 रुपये या 1.24 प्रतिशत बढ़कर 1,58,650 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी कर मिलाकर) हो गया। पिछले सत्र में यह 1,56,700 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में, हाजिर चांदी 1.03 प्रतिशत बढ़कर 77.97 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी, जबकि सोना थोड़ा बढ़कर 4,991.24 डॉलर प्रति औंस पर था। क्या कहते हैं एक्सपर्ट? एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सौमिल गांधी ने कहा-ईरान के खिलाफ संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की बढ़ती अटकलों के बीच भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ने के कारण सुरक्षित निवेश परिसंपत्तियों की मांग में नई लहर से समर्थन पाकर सोने की कीमतें बढ़कर लगभग 5,000 डॉलर प्रति औंस हो गईं। उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन के बीच नई बातचीत के विफल होने से भी वैश्विक अनिश्चितता फिर से बढ़ गई है, जिससे निवेशक सुरक्षित निवेश वाली परिसंपत्तियों में आवंटन बढ़ा रहे हैं। ऑगमोंट में रिसर्च हेड रेनिशा चैनानी ने कहा कि निवेशक अमेरिकी जीडीपी और व्यक्तिगत खपत खर्च (पीसीई) मुद्रास्फीति आंकड़े सहित मुख्य वृहद आर्थिक आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, जो आने वाले महीनों में फेडरल रिजर्व की ब्याज दर की उम्मीदों को आकार दे सकता है। शेयर बाजार में भी कोहराम अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से उपजी चिंताओं के बीच गुरुवार को शेयर बाजार में भी कोहराम रहा। बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक सेंसेक्स तीन सत्रों से जारी तेजी पर विराम लगाते हुए 1,236.11 अंक यानी 1.48 प्रतिशत टूटकर 82,498.14 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय सेंसेक्स 1,470.05 अंक फिसलकर 82,264.20 अंक पर आ गया था। वहीं, एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 365 अंक यानी 1.41 प्रतिशत लुढ़ककर 25,454.35 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान निफ्टी एक समय 430.6 अंक के नुकसान के साथ 25,388.75 अंक तक आ गया था।

AMERICA VS IRAN: US-Iran तनाव का असरः शेयर मार्केट में बड़ी गिरावट से निवेशकों ने गंवाए 8 लाख करोड़ रुपये…

AMERICA VS IRAN: नई दिल्ली। गुरुवार को सेंसेक्स (Sensex) में 1236 अंक की जोरदार गिरावट (Strong Decline) में निवेशकों के करीब ₹आठ लाख करोड़ की संपत्ति साफ हो गई। बीएसई (BSE) में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर लगभग ₹464 लाख करोड़ पर आ गया, जो पिछले सत्र में करीब ₹472 लाख करोड़ था। बाजार की यह गिरावट सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही। बीएसई मिडकैप (BSE Midcap) और स्मॉलकैप इंडेक्स (Smallcap Indices) भी आधे प्रतिशत से ज्यादा गिर गए। इससे साफ है कि बिकवाली व्यापक थी। बुधवार को एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिकी सेना मिलिट्री (US Army Military) इस सप्ताहांत ही ईरान (Iran) पर हमला करने वाली है। बताया गया कि ईरान पर अमेरिकी हमला शायद एक ‘बड़ा, हफ्तों तक चलने वाला अभियान’ होगा जो सीमित हमले के बजाय पूरे युद्ध जैसा होगा। बाजार अमेरिका-ईरान रिश्तों से जुड़े घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहा है। जानकारों का कहना है कि निवेश तनाव के और बढ़ने की उम्मीद में बाजार से रकम निकाल रहे हैं। विदेशी हिस्सेदारी 15 साल के निचले स्तर पर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने कुछ महीनों में एनएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों से रिकॉर्ड 18.9 अरब डॉलर यानी लगभग ₹1.6 लाख करोड़ से अधिक निकाल लिया है, जिससे उनका कुल स्वामित्व पिछले 15.5 वर्षों के सबसे निचले स्तर 16.7% पर पहुंच गया है। इस गिरावट का असर प्रमुख सूचकांकों पर भी दिखा। निफ्टी 50 में एफपीआई का हिस्सा 23.8% तक गिर गया, जो पिछले कई वर्षों में सबसे कम रहा। आईटी कंपनियों से हाथ खींचे फरवरी के पहले छह महीनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय आईटी सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के लगभग ₹11,000 करोड़ के शेयर बेचे, क्योंकि इस सेक्टर में एआई से पैदा होने वाली चुनौतियों को लेकर चिंता बढ़ रही थी। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड के मुताबिक, एक से 15 फरवरी के बीच एफपीआई ने भारतीय आईटी शेयरों में ₹10,956 करोड़ के शेयर बेचे। इससे पहले जनवरी 2026 में एफपीआई ने आईटी सेक्टर से ₹1,835 करोड़ निकाले थे। इस वजह से, 15 फरवरी, 2026 तक आईटी शेयरों में कुल एफपीआई निवेश लगभग 16% घटकर ₹4,48,938 करोड़ रह गया, जो जनवरी के आखिर में ₹5,33,953 करोड़ था। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने संभाला मोर्चा एफपीआई की निरंतर निकासी के बीच, घरेलू संस्थागत निवेशकों जैसे म्यूचुअल फंड, बैंकों, बीमा कंपनियों ने भारतीय शेयरों में खरीदारी में तेजी बनाई रखी। घरेलू बाजार में घरेलू संस्थागत निवेशकों का कुल हिस्सा अब 19% तक पहुच गया है, जो एफपीआई से अधिक है। इस दौरान म्यूचुअल फंड्स की होल्डिंग्स 11.1% के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंची हैं। यह प्रवाह मुख्यतः एसआईपी यानी सिस्टेमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान के जरिये मजबूत निवेश और घरेलू संस्थानों की निरंतर खरीद के कारण रहा है। ऐसे माहौल में शेयर खरीदने कितना सही? जानकारों के मुताबिक, निफ्टी इस समय वित्त वर्ष 27 की अनुमानित कमाई के करीब 20 गुना पर ट्रेड कर रहा है, जबकि एनएसई मिडकैप इंडेक्स 28 गुना और स्मॉलकैप इंडेक्स 24 गुना के आसपास है। उनका कहना है कि ऐसे माहौल में यह स्टॉक पिकर का बाजार बन जाता है, जहां सही शेयर चुनना ही असली खेल है। 1. प्रॉफिट-बुकिंग के कारण बिकवाली हाल के तेजी के बाद निवेशक मुनाफा सुरक्षित करने के लिए शेयर बेच रहे हैं, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ा है। 2. वैश्विक संकेत कमजोर अंतरराष्ट्रीय बाजारों के कमजोर रुख और अस्थिरता के कारण विदेशी निवेशक सतर्क हैं, जिससे भारतीय बाजार में बिकवाली बढ़ी। 3. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें तेल की बढ़ती कीमतों से लागत और मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ता है, जो निवेशकों के मनोबल को कमजोर करता है। 4. प्रमुख शेयरों में भारी गिरावट बैंक, वित्तीय सेवाएँ, मेटल, एफएमसीजी जैसे बड़े समूहों के शेयरों में बिकवाली से इंडेक्स को बड़ी चोट लग रही है। 5. वैश्विक नीतिगत अनिश्चितता यूएस फेडरल रिज़र्व की नीति समेत ग्लोबल नीतिगत असमंजस ने विदेशी पूंजी प्रवाह को प्रभावित किया है। 6. बाजार में व्यापक मंदी मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में भी गिरावट के साथ व्यापक बिकवाली देखने को मिल रही है।