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हंता वायरस से दहशत: क्रूज पर संक्रमण की पुष्टि, 17 अमेरिकी यात्रियों को इमरजेंसी फ्लाइट से अमेरिका शिफ्ट

नई दिल्ली। अमेरिका में हंता वायरस को लेकर चिंता एक बार फिर बढ़ गई है, जब डच क्रूज जहाज एमवी होंडियस पर सवार एक अमेरिकी यात्री में संक्रमण की पुष्टि हुई। एक अन्य यात्री में हल्के लक्षण पाए गए हैं। अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग के अनुसार स्थिति को देखते हुए जहाज पर मौजूद 17 अमेरिकी नागरिकों को तुरंत विशेष विमान के जरिए अमेरिका वापस लाया जा रहा है। सभी यात्रियों को बायोकंटेनमेंट यूनिट में रखा गया है ताकि संक्रमण के फैलाव को रोका जा सके। प्रोटोकॉल के तहत इन यात्रियों को पहले नेब्रास्का के ओमाहा स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ नेब्रास्का मेडिकल सेंटर के विशेष उपचार केंद्र में ले जाया जाएगा, जहां सभी की विस्तृत जांच होगी। इसके बाद जरूरत के अनुसार उन्हें दूसरे केंद्रों में शिफ्ट किया जाएगा और उपचार दिया जाएगा। जानकारी के मुताबिक शनिवार तक इस प्रकोप से जुड़े 8 संदिग्ध मामले और 3 मौतें भी दर्ज की जा चुकी हैं, जिससे स्थिति की गंभीरता और बढ़ गई है। अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) के अनुसार हंता वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड 1 से 8 सप्ताह तक हो सकता है। यह वायरस मुख्य रूप से चूहों जैसे रोडेंट्स से फैलता है, हालांकि दुर्लभ मामलों में मानव से मानव संक्रमण भी संभव है। विशेषज्ञों के मुताबिक संक्रमित मामलों में मृत्यु दर एक-तिहाई से भी अधिक हो सकती है। इसी बीच ब्रिटेन में भी इसी जहाज से निकाले गए 20 यात्रियों को आइसोलेशन में रखा गया है। उन्हें मैनचेस्टर से अस्पताल ले जाकर 72 घंटे की निगरानी में रखा गया है। यदि लक्षण नहीं दिखते हैं तो उन्हें घर भेजा जाएगा, लेकिन 42 दिन तक सेल्फ-आइसोलेशन अनिवार्य रहेगा। ब्रिटिश सरकार ने अपने दूरस्थ क्षेत्र ट्रिस्टन दा कुन्हा में भी मेडिकल और सैन्य टीम भेजी है, जहां एक व्यक्ति में संक्रमण की पुष्टि हुई है। यह पहली बार है जब ब्रिटेन ने ऐसे मानवीय मिशन के लिए पैराशूट के जरिए डॉक्टरों को भेजा है। हालांकि स्वास्थ्य एजेंसियों ने साफ किया है कि आम जनता के लिए इस वायरस का खतरा बेहद कम है, लेकिन क्रूज और अंतरराष्ट्रीय यात्रा से जुड़े मामलों ने वैश्विक स्वास्थ्य सतर्कता को फिर से बढ़ा दिया है।

अमेरिका–कनाडा हथियार तस्करी रैकेट का भंडाफोड़: 89 हथियारों के साथ 3 गिरफ्तार, पाकिस्तानी नागरिक भी शामिल

नई दिल्ली। अमेरिका में सुरक्षा एजेंसियों ने हथियार तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। न्यूयॉर्क स्टेट पुलिस ने 89 हथियारों की अवैध खेप के साथ तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जो इन्हें अमेरिका से कनाडा भेजने की फिराक में थे। पकड़े गए आरोपियों में एक पाकिस्तानी नागरिक भी शामिल है। जानकारी के मुताबिक, यह कार्रवाई स्टेट रूट-90 पर उस समय हुई जब पुलिस ने एक संदिग्ध वाहन को रोका। शुरुआती पूछताछ में जवाब असंगत पाए जाने पर जब तलाशी ली गई तो कार के भीतर भारी मात्रा में हथियार बरामद हुए। कुछ हथियार पीछे की सीट पर खुले तौर पर रखे हुए थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 22 वर्षीय मलिक ब्रॉमफील्ड (कनाडा नागरिक), 25 वर्षीय फैजान अली (पाकिस्तानी नागरिक) और 22 वर्षीय कमाल सलमान (कनाडा-अमेरिका-जॉर्डन की नागरिकता) के रूप में हुई है। जांच एजेंसियों के अनुसार, फैजान अली के पास एक एक्सपायर्ड पाकिस्तानी नेशनल ड्राइविंग परमिट भी मिला है, जो किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर जारी था। बरामद हथियारों में कम से कम 17 चोरी की बंदूकें भी शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी 80 से अधिक हथियार कनाडा पहुंचाने की योजना में थे। इस पूरे ऑपरेशन में न्यूयॉर्क स्टेट पुलिस, एफबीआई और एटीएफ की संयुक्त टीम शामिल रही। यूएस अटॉर्नी ऑफिस ने बताया कि सभी आरोपियों पर अवैध हथियार तस्करी, बिना लाइसेंस हथियार कारोबार और चोरी के हथियार रखने सहित गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। दोष सिद्ध होने पर आरोपियों को 5 से 15 साल तक की सजा हो सकती है, जबकि अंतिम निर्णय अदालत करेगी। अमेरिकी जांच एजेंसियों ने इस नेटवर्क को कनाडा और अमेरिका दोनों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है। 

अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ा, इस्लामाबाद में नई बातचीत की तैयारी; न्यूक्लियर प्रोग्राम और होर्मुज स्ट्रेट बना बड़ा विवाद

नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए अगले हफ्ते इस्लामाबाद में नई दौर की बातचीत हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देश मध्यस्थों के जरिए एक 14-बिंदु ड्राफ्ट पर काम कर रहे हैं, जिसमें ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम, होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा और यूरेनियम भंडार जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि उन्हें ईरान के जवाब का इंतजार है और अगर प्रगति हुई तो समझौते की दिशा आगे बढ़ सकती है। हालांकि ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम या हाईली एनरिच्ड यूरेनियम को रोकने के लिए किसी समझौते पर तैयार नहीं है। इससे दोनों देशों के बीच मतभेद और गहरे हो गए हैं। इसी बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव भी बढ़ता जा रहा है। अमेरिका ने दावा किया है कि उसने 70 से ज्यादा जहाजों को ईरानी बंदरगाहों तक पहुंचने से रोका है, जबकि ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी बाहरी दखल पर क्षेत्र में बड़ा संघर्ष शुरू हो सकता है। UAE ने भी दावा किया है कि ईरान ने उसके ऊपर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिन्हें एयर डिफेंस सिस्टम ने नष्ट कर दिया। वहीं, खाड़ी क्षेत्र में तनाव के चलते तेल और सोने की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। रूस ने अमेरिका और बहरीन के संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए उसे वापस लेने की मांग की है, जबकि चीन और अन्य देशों की स्थिति इस पूरे मामले में अलग-अलग नजर आ रही है।

मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर: UAE पर ईरान का मिसाइल-ड्रोन हमला, अमेरिका की जवाबी बमबारी से हालात और बिगड़े

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है, जहां संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने दावा किया है कि ईरान ने उसके क्षेत्र पर 2 बैलिस्टिक मिसाइल और 3 ड्रोन दागे। UAE रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उसकी एयर डिफेंस सिस्टम ने सभी मिसाइल और ड्रोन को हवा में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया, हालांकि इस हमले में 3 लोगों के घायल होने की जानकारी भी सामने आई है। अभी तक ईरान की तरफ से इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने सीजफायर के बावजूद ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की है। अमेरिका का कहना है कि ईरानी सेना ने उसके जंगी जहाजों पर मिसाइल, ड्रोन और छोटी नावों से हमला किया था, जिसके जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ चेतावनी दी है कि अगर ईरान किसी डील पर नहीं पहुंचता, तो आगे और भी बड़े हमले किए जाएंगे। वहीं ईरान ने पलटवार करते हुए दावा किया है कि अमेरिकी हमले में सैन्य ठिकानों की बजाय नागरिक इलाकों को निशाना बनाया गया है। ईरान ने यह भी कहा है कि उसने जवाबी कार्रवाई में होर्मुज स्ट्रेट और चाबहार पोर्ट के पास मौजूद अमेरिकी सैन्य जहाजों को निशाना बनाया। इसके साथ ही ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिकी हमले ओमान की खाड़ी में उसके तेल टैंकरों पर भी किए गए। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि CIA की इंटेलिजेंस गलत है और ईरान की मिसाइल क्षमता खत्म नहीं हुई है। उन्होंने दावा किया कि देश का मिसाइल रिजर्व अभी भी मजबूत स्थिति में है और ईरान किसी भी हालात में अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। अराघची ने यह भी कहा कि जब भी कूटनीतिक समाधान की संभावना बनती है, अमेरिका सैन्य रास्ता अपना लेता है, लेकिन ईरान दबाव में झुकने वाला नहीं है। इसी बीच होर्मुज स्ट्रेट में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं, जहां करीब 1500 जहाज फंसे होने की जानकारी सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री एजेंसी के अनुसार, इस संकट का असर तेल, गैस और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ रहा है, जिससे कई देशों में आर्थिक और खाद्य संकट की आशंका बढ़ गई है। मध्य पूर्व में इजराइल-हिजबुल्लाह संघर्ष भी तेज हो गया है, जहां दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमलों का दावा कर रहे हैं। साथ ही अमेरिका ने ईरान से जुड़े नेटवर्क पर नए प्रतिबंध भी लगाए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ गया है।

बांग्लादेश पर चीन का बड़ा दांव! वांग यी ने भारत-अमेरिका को दिया साफ संदेश

नई दिल्ली। चीन और बांग्लादेश के बीच बढ़ती नजदीकियों ने दक्षिण एशिया की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। बीजिंग दौरे पर पहुंचे बांग्लादेश के विदेश मंत्री Khalilur Rahman ने चीनी विदेश मंत्री Wang Yi से मुलाकात की, जिसके बाद चीन ने ऐसा बयान दिया जिसे भारत और अमेरिका के लिए बड़ा संदेश माना जा रहा है। वांग यी ने साफ कहा कि दक्षिण एशियाई देशों के साथ चीन के संबंध किसी तीसरे पक्ष को निशाना बनाने के लिए नहीं हैं और न ही इन रिश्तों पर किसी बाहरी देश का असर होना चाहिए। माना जा रहा है कि यह इशारा India और United States की ओर था। बांग्लादेश की नई सरकार और चीन की सक्रियताफरवरी में नई बीएनपी सरकार बनने के बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्री की यह पहली चीन यात्रा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अगले महीने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री Tarique Rahman भी चीन दौरे पर जा सकते हैं। बैठक के दौरान दोनों देशों ने आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया। चीन ने बांग्लादेश को हरसंभव समर्थन देने की बात कही। बेल्ट एंड रोड परियोजना पर जोरवांग यी ने कहा कि चीन बांग्लादेश के विकास में सबसे भरोसेमंद साझेदार बनना चाहता है। उन्होंने चीन की महत्वाकांक्षी Belt and Road Initiative परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। ताइवान मुद्दे पर चीन को मिला समर्थनबांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने “वन चाइना पॉलिसी” का समर्थन करते हुए कहा कि ताइवान चीन का हिस्सा है और बीजिंग ही पूरे चीन की वैध सरकार है। इसे चीन के लिए बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है। दक्षिण एशिया में बदल रहे समीकरणविशेषज्ञों का मानना है कि चीन लगातार दक्षिण एशिया में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। बांग्लादेश के साथ बढ़ती नजदीकियां भारत और अमेरिका दोनों के लिए रणनीतिक चिंता का विषय बन सकती हैं।

Strait of Hormuz: होर्मुज में टेंशन हाई: फ्रांसीसी जहाज पर हमला, ट्रम्प ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ रोका; मिडिल ईस्ट में बढ़ा युद्ध का खतरा

 Strait of Hormuz: नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंचता जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में एक फ्रांसीसी कार्गो जहाज पर हमले ने हालात और गंभीर बना दिए हैं। CMA CGM ने पुष्टि की है कि उसके ‘सैन एंटोनियो’ जहाज को पार करते समय मिसाइल या ड्रोन से निशाना बनाया गया, जिसमें कई क्रू मेंबर घायल हो गए और जहाज को नुकसान पहुंचा। दुनिया के सबसे अहम व्यापारिक मार्गों में से एक  कंपनी के अनुसार, घायल कर्मचारियों को तुरंत सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर इलाज शुरू कर दिया गया है। इस घटना ने वैश्विक समुद्री सुरक्षा और तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि यह इलाका दुनिया के सबसे अहम व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। ईरान ने इस फैसले पर तंज कसते हुए इसे अपनी रणनीतिक बढ़त बताया है। इसी बीच डोनाल्ड ट्रम्प ने बड़ा फैसला लेते हुए ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ ऑपरेशन को रोक दिया है। यह ऑपरेशन अमेरिका ने होर्मुज में फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए शुरू किया था, लेकिन इसे अचानक बंद करने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। ईरान ने इस फैसले पर तंज कसते हुए इसे अपनी रणनीतिक बढ़त बताया है। पिछले 24 घंटों में हालात तेजी से बदले हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका ने नया प्रस्ताव पेश कर ईरान से हमले रोकने, माइंस हटाने और जहाजों से टोल वसूली बंद करने की मांग की है। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात पर लगातार दूसरे दिन मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए, हालांकि वहां के डिफेंस सिस्टम ने इन हमलों को हवा में ही नाकाम कर दिया। अमेरिका ने हालात को संभालने के लिए USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश वॉरशिप को भी होर्मुज भेजा था, लेकिन ऑपरेशन रुकने के बाद इसकी भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं, फुजैराह हमले में तीन भारतीय नागरिकों के घायल होने पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और सभी पक्षों से तुरंत हिंसा रोकने की अपील की है। तनाव के बीच चीन ने साफ कहा है कि अब युद्ध को रोकना बेहद जरूरी है। चीन के अनुसार, इस संघर्ष का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सप्लाई पर पड़ सकता है। साथ ही उसने ईरान के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को भी दोहराया है।दूसरी ओर, शहबाज शरीफ ने ट्रम्प के फैसले की तारीफ करते हुए इसे क्षेत्र में शांति की दिशा में सही कदम बताया है। कुल मिलाकर होर्मुज में बढ़ता तनाव अब वैश्विक संकट का रूप लेता दिख रहा है। एक तरफ सैन्य गतिविधियां तेज हो रही हैं, तो दूसरी तरफ कूटनीतिक बयानबाजी भी चरम पर है। आने वाले दिनों में यह टकराव किस दिशा में जाएगा, इस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।

अमेरिका में 16 साल तक अवैध रूप से रहने पर गुजरात के कारोबारी पर बड़ा एक्शन, 15 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना

नई दिल्ली। अमेरिका में लंबे समय तक अवैध रूप से रहने के मामले में एक भारतीय मूल के गुजराती कारोबारी पर बड़ी कार्रवाई की गई है। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने उस पर करीब 1.8 मिलियन डॉलर यानी लगभग 15 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। यह मामला इमिग्रेशन नियमों के गंभीर उल्लंघन से जुड़ा बताया जा रहा है। मेक्सिको के रास्ते अमेरिका में हुई एंट्रीजानकारी के मुताबिक, यह कारोबारी मेक्सिको के रास्ते अमेरिका में दाखिल हुआ था और पिछले 16 वर्षों से वहां अवैध रूप से रह रहायह मामला इमिग्रेशन नियमों के गंभीर उल्लंघन से जुड़ा बताया जा रहा है।मेक्सिको के रास्ते अमेरिका में हुई एंट्रीजानकारी के मुताबिक, यह कारोबारी मेक्सिको के रास्ते अमेरिका में दाखिल हुआ था और पिछले 16 वर्षों से वहां अवैध रूप से रह  था। जांच में सामने आया कि उसे कई साल पहले ही देश छोड़ने का आदेश दिया गया था, लेकिन उसने इस आदेश का पालन नहीं किया और लगातार अमेरिका में ही बना रहा। रोजाना जुर्माना बढ़ता गयाइमिग्रेशन एंड नेशनैलिटी एक्ट के तहत जारी नोटिस में कहा गया है कि डिपोर्टेशन ऑर्डर का पालन न करने की स्थिति में उस पर रोजाना जुर्माना लगाया गया। यह जुर्माना 998 डॉलर प्रतिदिन के हिसाब से तय किया गया, जो समय के साथ बढ़ते-बढ़ते लगभग 1.8 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया। सख्त इमिग्रेशन नीति का हिस्सा कार्रवाईअमेरिकी प्रशासन अवैध प्रवासियों के खिलाफ हाल के वर्षों में सख्त रुख अपनाए हुए है। इस मामले को भी उसी नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें लंबे समय तक आदेश का उल्लंघन करने वालों पर भारी आर्थिक दंड लगाया जाता है। मामला चर्चा में क्यों है?यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जुर्माने की रकम बेहद बड़ी है और यह साफ संकेत देता है कि अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम नियमों के उल्लंघन को लेकर बेहद सख्त कार्रवाई कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, ऐसे मामलों में संदेश दिया जाता है कि डिपोर्टेशन ऑर्डर की अनदेखी करना गंभीर आर्थिक परिणाम ला सकता है।

INDIAN ENERGY SECURITY : भारत की ऊर्जा सुरक्षा: होर्मुज स्ट्रेट और तेल-एलएनजी आयात की चुनौतियां

  INDIAN ENERGY SECURITY : नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। भारत अपनी सीक्रेट डिप्लोमेसी और रणनीतिक कदमों के माध्यम से ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने की कोशिशों में लगा है। हालात ऐसे हैं कि अमेरिका को नाटो देशों से अपील करनी पड़ रही है कि होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने के लिए युद्धपोत भेजें। भारत ने इस चुनौती के बीच भी अपने दो तेल टैंकर शिप्स को होर्मुज स्ट्रेट से निकालकर भारतीय समुद्री तट पर पहुंचा दिया है जबकि कई अन्य शिप्स की वापसी की संभावना बनी हुई है। भारत लगभग 85-89 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है और इसमें से पहले लगभग 55 फीसदी तेल होर्मुज स्ट्रेट से होकर आता था। अब यह आंकड़ा लगभग 70 फीसदी तक बढ़ गया है। भारत की दैनिक तेल खपत लगभग 55 लाख बैरल है और यह तेल लगभग 40 देशों से आयात किया जाता है। भारत का कच्चा तेल मुख्य रूप से रूस इराक सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से आता है। इसके अलावा अमेरिका से तेल आयात बढ़ा है। खाड़ी और मिडिल ईस्ट में कुवैत कतर ओमान और मिस्र; अफ्रीका में नाइजीरिया अंगोला लीबिया और अल्जीरिया; अमेरिका महाद्वीप में कनाडा मेक्सिको और ब्राजील; मिडिल एशिया में कजाकिस्तान और अजरबैजान भारत के तेल आपूर्तिकर्ता हैं। प्राकृतिक गैस की बात करें तो भारत की कुल खपत लगभग 189 मिलियन घन मीटर प्रतिदिन है जिसमें से घरेलू उत्पादन 97.5 मिलियन घन मीटर प्रतिदिन है। अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण लगभग 47.4 मिलियन घन मीटर की आपूर्ति प्रभावित हुई है। रसोई गैस में भारत लगभग 60 फीसदी आयात पर निर्भर है। इस आयात का करीब 90 फीसदी हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर आता है। हालात प्रभावित होने के बावजूद घरेलू एलपीजी उत्पादन में 25 फीसदी की वृद्धि कर इसे संतुलित किया गया है। भारत मुख्य रूप से कतर सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से एलपीजी आयात करता है जबकि अमेरिका भी इस सूची में शामिल हो गया है। एलएनजी में भारत का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता कतर है जिससे कुल एलएनजी का 47-50 फीसदी आता है। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात ओमान नाइजीरिया अंगोला ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से भी एलएनजी आती है। विशेषज्ञों के अनुसार होर्मुज स्ट्रेट इसलिए इतना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दुनिया के तेल और गैस व्यापार का मुख्य मार्ग है। यदि यहां किसी तरह की बाधा आती है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और तेल व गैस की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। भारत ने रणनीतिक भंडार और वैकल्पिक मार्गों के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय और द्विपक्षीय सहयोग के जरिए भारतीय समुद्री शिप्स को सुरक्षित मार्ग मुहैया कराया जा रहा है।

ईरान युद्ध के बीच अमेरिका में गैस कीमतें बढ़ीं, ट्रंप के लिए बढ़ी राजनीतिक चुनौती

नई दिल्ली । अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच जारी युद्ध अब सिर्फ सैन्य संघर्ष नहीं रह गया है बल्कि यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के घरेलू राजनीतिक भविष्य को भी प्रभावित करने लगा है। युद्ध के तीसरे सप्ताह में ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ा जिससे अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें तेज़ी से बढ़ीं और औसत कीमत एक महीने में 2.94 डॉलर से बढ़कर 3.72 डॉलर प्रति गैलन हो गई। महंगाई और जीवनयापन की लागत पहले से ही अमेरिकी मतदाताओं की चिंता का बड़ा कारण हैं। बढ़ती गैस कीमतें ट्रंप प्रशासन के अफोर्डेबिलिटी एजेंडा पर भी दबाव डाल रही हैं। विशेषज्ञ क्लिफर्ड यंग के अनुसार यह स्थिति राष्ट्रपति की घरेलू रणनीति को प्रभावित कर सकती है और उनकी लोकप्रियता पर असर डाल सकती है। सैन्य मोर्चे पर ट्रंप प्रशासन ने जापान से लगभग 5 000 सैनिकों और नाविकों वाली मरीन उभयचर इकाई को मध्य पूर्व भेजने का आदेश दिया है। यह कदम अमेरिका को सैन्य विकल्प खुले रखने की दिशा में देखा जा रहा है लेकिन इससे क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा को लेकर जोखिम भी बढ़ सकता है। ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते खतरे के बीच इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की अपील की। उन्होंने चीन फ्रांस जापान दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन से इसमें शामिल होने का अनुरोध किया। हालांकि कई यूरोपीय देश और ऑस्ट्रेलिया इस पहल में शामिल होने से इन्कार कर चुके हैं। व्यक्तिगत और राजनीतिक मोर्चे पर ट्रंप ने अप्रैल में प्रस्तावित चीन यात्रा को युद्ध के कारण एक महीने के लिए टाल दिया। व्हाइट हाउस प्रेस सचिव ने बताया कि कमांडर-इन-चीफ के रूप में राष्ट्रपति की सर्वोच्च जिम्मेदारी ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की सफलता सुनिश्चित करना है। इस बीच ट्रंप युद्ध को लेकर सार्वजनिक रूप से दबाव में नहीं दिखते। सोमवार रात उन्होंने एक घंटे से अधिक लंबे संबोधन में युद्ध के अलावा केनेडी सेंटर के नवीनीकरण व्हाइट हाउस बॉलरूम निर्माण वर्ल्ड कप और अन्य घरेलू मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की। अमेरिकी राजनीतिक परिदृश्य में यह स्थिति ट्रंप के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है। युद्ध लंबा खिंचता है और ऊर्जा कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो यह उनके कार्यकाल और आगामी चुनावों में महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती हैं।

ट्रंप बोले पागलों के हाथ में परमाणु हथियार नहीं ; ईरान युद्ध अभी लंबा खिंच सकता है

नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध अब और लंबा चल सकता है। वॉशिंगटन स्थित व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दुनिया पागलों के नियंत्रण में परमाणु हथियार नहीं रहने दे सकती। ट्रंप ने बताया कि अमेरिका ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई करके यह सुनिश्चित किया कि यह देश कभी परमाणु खतरा न बने। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़रायल ने मिलकर ईरान पर सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। ट्रंप ने बताया कि बिना इस कार्रवाई के ईरान पहले ही परमाणु ताकत बन चुका होता। उन्होंने कहा कि उस समय ईरान परमाणु हथियार हासिल करने से सिर्फ दो हफ्ते दूर था और कूटनीतिक बातचीत काम नहीं आती। राष्ट्रपति ने कहा युद्ध बहुत अच्छे से आगे बढ़ रहा है। हम बहुत बढ़िया काम कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट नहीं किया कि यह संघर्ष कब तक चलेगा। ट्रंप ने यह भी बताया कि अमेरिका भविष्य में लौट सकता है लेकिन अब तक मकसद यह सुनिश्चित करना था कि किसी और राष्ट्रपति को ऐसी परेशानी न झेलनी पड़े। इस बीच ट्रंप प्रशासन को अंदरूनी झटका भी लगा है। नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर के प्रमुख जोसेफ केंट ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई के विरोध में इस्तीफा दे दिया। केंट ने सोशल मीडिया पर अपने त्याग पत्र में लिखा कि अमेरिका पर ईरान की ओर से कोई आसन्न खतरा नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि यह युद्ध इज़रायल और उसके प्रभावशाली लॉबी समूहों के दबाव में शुरू किया गया। केंट ने साफ शब्दों में कहा कि वह अपनी अंतरात्मा के खिलाफ इस युद्ध का समर्थन नहीं कर सकते। इस इस्तीफे के समय ऑपरेशन एपिक फ्यूरी अपने तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ रहा है। इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि ईरान संकट न केवल अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बल्कि अमेरिकी प्रशासन के अंदर भी गंभीर बहस का विषय बन गया है।