ट्रंप ने ईरान डील से किया इनकार, नए सुप्रीम लीडर के जीवित होने पर जताया शक

वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे तनाव को लेकर संभावित समझौते को खारिज कर दिया है। शनिवार को एनबीसी न्यूज से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि ईरान ने बातचीत में दिलचस्पी दिखाई है लेकिन प्रस्तावित शर्तें काफी अच्छी नहीं हैं”। उन्होंने साफ किया कि जब तक युद्ध की स्थिति जारी है वाशिंगटन जल्दबाजी में कोई सीजफायर डील नहीं करेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा ईरान डील करना चाहता है और मैं इसे नहीं करना चाहता क्योंकि शर्तें अभी पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने संभावित समझौते की शर्तों पर अधिक जानकारी देने से इनकार किया लेकिन यह स्वीकार किया कि न्यूक्लियर महत्वाकांक्षाओं को छोड़ना किसी भी मामले में प्राथमिकता होगी। इंटरव्यू में ट्रंप ने अमेरिकी फोर्स द्वारा ईरान के रणनीतिक ऑयल हब खार्ग आइलैंड पर स्ट्राइक का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि खार्ग आइलैंड को पूरी तरह तबाह कर दिया गया है लेकिन जरूरत पड़ने पर हम फिर से हमला कर सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने ऊर्जा लाइनों को नहीं छुआ क्योंकि उन्हें फिर से बनाने में सालों लग जाते हैं। ट्रंप ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर सैय्यद मोजतबा हुसैनी खामेनेई के जीवित होने पर भी संदेह व्यक्त किया। उन्होंने कहा मुझे नहीं पता कि वह जिंदा भी हैं या नहीं। अभी तक कोई उन्हें सार्वजनिक रूप में नहीं देख पाया है। मैं सुन रहा हूं कि वह जिंदा नहीं हैं और अगर हैं तो उन्हें अपने देश के लिए स्मार्ट काम करना चाहिए और वह है सरेंडर करना।” ट्रंप ने किसी खास ईरानी नेता को भविष्य के विकल्प के रूप में नामित करने से इनकार करते हुए कहा कि अमेरिका के पास ऐसे लोग हैं जो देश के भविष्य के लिए बेहतरीन नेतृत्व कर सकते हैं। उन्होंने ग्लोबल ऊर्जा की कीमतों के बीच रूस के तेल पर लगाए गए बैन को अस्थायी रूप से कम करने की रणनीति का भी जिक्र किया। ट्रंप के अनुसार यह बैन 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद लगाया गया था और संकट खत्म होते ही इसे वापस ले लिया जाएगा। यूक्रेन को मदद देने के सवाल पर ट्रंप ने कहा कि हमें जिस आखिरी इंसान से मदद चाहिए वह वोलोडिमिर जेलेंस्की हैं। उनका यह बयान वैश्विक राजनीति और सुरक्षा स्थिति में अमेरिका के रुख को स्पष्ट करता है। अमेरिकी राष्ट्रपति का ईरान डील से इनकार और नए सुप्रीम लीडर के जीवित होने पर संदेह ने मध्य पूर्व की राजनीति में नई अस्थिरता की संभावना पैदा कर दी है। ट्रंप ने अपनी प्राथमिकताओं में ऊर्जा सुरक्षा और सैन्य सटीकता को सबसे ऊपर रखा है जबकि वार्ता और रणनीतिक समझौते फिलहाल लंबित हैं।
इजरायल-ईरान संघर्ष: भारत पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और अर्थव्यवस्था पर असर

नई दिल्ली। शनिवार को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई की, जिससे मध्यपूर्व में तनाव चरम पर पहुँच गया है। ईरान दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में से एक है और इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता की चेतावनी सामने आई है। तेल की सप्लाई बाधित होने की स्थिति में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है, जिसका असर भारत जैसे तेल आयातक देशों पर सीधे पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इस हमले का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिख सकता है। अनिश्चितता के चलते निवेशक बड़े पैमाने पर बिकवाली कर सकते हैं, जिससे बाजार में दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल भारतीय बाजार इस हमले के बाद ईरान की प्रतिक्रिया और अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं। बाजार की चाल मुख्य रूप से इस तनाव की अवधि और गंभीरता पर निर्भर करेगी। भारत में कच्चे तेल की मौजूदा कीमत लगभग 67 डॉलर प्रति बैरल है, और हाल ही में इसमें लगभग 2% की बढ़ोतरी हुई है। यदि ईरान पर यह तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो शॉर्ट और मीडियम टर्म में भारतीय बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। तेल महंगा होने से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, पेट्रोल-डीजल, पेंट, एविएशन और टायर बनाने वाली कंपनियों पर सीधा असर पड़ेगा। उत्पादन लागत बढ़ने से उपभोक्ताओं को महंगे उत्पाद खरीदने पड़ सकते हैं। महंगाई पर भी इसका असर देखा जा सकता है। ईंधन, परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से देश में महंगाई बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले हफ्तों में बाजार अस्थिर रहेंगे और निवेशकों में बेचैनी बढ़ सकती है। सरकारी स्तर पर भी इस संकट को लेकर निगरानी बढ़ा दी गई है। भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक स्टॉक बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति पर नजर रख रहा है। वित्तीय और निवेश संस्थानों को भी निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। संक्षेप में, ईरान पर इजरायल-यूएस हमला भारत के लिए आर्थिक चुनौती लेकर आया है। तेल की कीमतों में तेजी, शेयर बाजार में दबाव और महंगाई में वृद्धि का खतरा बढ़ गया है। ऑयल, एविएशन, पेंट और टायर जैसे सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, इसलिए निवेशकों और उपभोक्ताओं को सतर्कता और समझदारी से आर्थिक फैसले लेने होंगे।
T20 World Cup 2026: पाकिस्तान के साहिबजादा ने बनाए सबसे ज्यादा रन, ईशान किशन और वरुण चक्रवर्ती भी टॉप-5 में

नई दिल्ली । T20 World Cup 2026 के ग्रुप स्टेज का अंत ऑस्ट्रेलिया और ओमान के मुकाबले के साथ हो गया है। ऑस्ट्रेलिया ने इस आखिरी ग्रुप मैच में ओमान को 9 विकेट से हराकर सुपर-8 में अपनी जगह पक्की कर ली। अगले राउंड की शुरुआत 22 फरवरी से होगी। ग्रुप स्टेज में सबसे ज्यादा रन और विकेट लेने वाले खिलाड़ियों की चर्चा अभी भी क्रिकेट फैंस के बीच जोरों पर है। सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजपाकिस्तान के सलामी बल्लेबाज साहिबजादा फरहान ग्रुप स्टेज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे। चार मैचों में उन्होंने एक शतक और एक अर्धशतक के साथ कुल 220 रन बनाए। उनके अलावा कोई भी बल्लेबाज 200 रन का आंकड़ा नहीं छू सका। दूसरे नंबर पर श्रीलंका के पाथुम निसंका रहे, जिन्होंने 4 मैचों में 66.33 की औसत और 156.69 के स्ट्राइक रेट के साथ 199 रन बनाए। निसंका ने भी इस दौरान एक शतक और एक अर्धशतक जड़ा। टॉप-5 में एकमात्र भारतीय खिलाड़ी ईशान किशन हैं। ग्रुप स्टेज खत्म होने तक ईशान 5वें पायदान पर रहे। चार मैचों में दो अर्धशतकों के साथ उन्होंने कुल 176 रन बनाए। पाकिस्तान के खिलाफ महामुकाबले में 77 रन की धुआंधार पारी खेलकर ईशान प्लेयर ऑफ द मैच भी बने। इस लिस्ट में कुसल मेंडिस और एडन मारक्रम भी शामिल हैं। सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजजहां बल्लेबाजों ने धमाल मचाया, वहीं गेंदबाजों ने भी कमाल किया। ग्रुप स्टेज में सबसे ज्यादा विकेट लेने का रिकॉर्ड अमेरिका के शैडली वैन शाल्कविक के नाम रहा। सिर्फ चार मैचों में ही उन्होंने 13 विकेट लिए और दो बार 4-विकेट हॉल भी लिए। उनके बाद भारत के वरुण चक्रवर्ती ने 9 विकेट चटकाए और टॉप-5 में जगह बनाई। इसके अलावा ब्लेसिंग मुजरबानी, माइकल लीस्क और अजमतुल्लाह उमरजई ने भी 9-9 विकेट लेकर अपने नाम दर्ज किए। भले ही USA की टीम सुपर-8 में नहीं पहुंची, शैडली वैन शाल्कविक का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा। ग्रुप स्टेज के आंकड़े यह साफ कर रहे हैं कि साहिबजादा फरहान, शैडली वैन शाल्कविक और वरुण चक्रवर्ती जैसे खिलाड़ी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में अपनी टीमों के लिए बड़े गेम चेंजर साबित हो रहे हैं। सुपर-8 में अब मुकाबले और रोमांचक होने वाले हैं और फैंस को इस राउंड में भी कई धमाकेदार पारी और प्रदर्शन देखने को मिलने की उम्मीद है।
USA ने पिछले T20 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान को हराकर था… आज फिर होगी दोनों की भिड़ंत, फिर उलटफेर के आसार

कोलंबो। आईसीसी पुरुष टी20 वर्ल्ड कप 2026 (ICC Men’s T20 World Cup 2026) में आज मंगलवार को पाकिस्तान और अमेरिका (Pakistan and America) के बीच ब्लॉकबस्टर मुकाबला होने वाला है. यह मुकाबला भारतीय समयानुसार शाम 7 बजे से कोलंबो के सिंहलीज स्पोर्ट्स क्लब (SSC) में शुरू होगा. लगभग 20 महीने पहले टी20 विश्व कप 2024 में अमेरिका (USA) ने पाकिस्तान को सुपर ओवर में हराया था. पाकिस्तानी टीम (Pakistani Team) और उसके फैन्स के जेहन में उस कड़वी हार की यादें अब भी मौजूद हैं. एक तरह से संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने पहले टी20 विश्व कप में ही पाकिस्तान को मात देकर अपने आगमन का संदेश दे दिया था. हालांकि मौजूदा वर्ल्ड कप में उसकी शुरुआत अच्छी नहीं रही है. भारत के खिलाफ अपने पहले मैच में हार का सामना करने के बाद अमेरिकी टीम कप्तान मोनांक पटेल की अगुवाई में शानदार वापसी की कोशिश करेगी. नीदरलैंड्स के हाथों हारने से बचा था PAKसंयुक्त राज्य अमेरिका यदि पाकिस्तान को एक बार फिर धूल चटा दे, तो हैरानी की बात नहीं होनी चाहिए. पाकिस्तानी टीम की बल्लेबाजी जिस तरह से मिडिल ओवर्स में ढह रही है, वो अमेरिकी टीम के लिए प्लस पॉइंट हैं. पाकिस्तान ने नीदरलैंड्स के खिलाफ 148 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए शानदार शुरुआत की थी, लेकिन मध्यक्रम ने गच्चा दे दिया था। इसके बाद फहीम अशरफ की साहसिक पारी ने पाकिस्तानी टीम को किसी तरह जीत दिलाई थी. पाकिस्तान की बल्लेबाजी में पूर्व कप्तान बाबर आजम पर निगाहें रहेंगी, जिन्होंने टी20 इंटरनेशनल में फिर से वापसी की है. ओपनर सैम अयूब से भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद होगी, जो हाल ही में स्पिन गेंदबाजी में ज्यादा सक्रिय रहे हैं। कप्तान सलमान अली आगा ने नीदरलैड्स पर जीत के बाद कहा था, ‘हमने अच्छी शुरुआत की थी, लेकिन विकेट गिरने से दबाव बढ़ गया. ऐसे मैचों में हमें दबाव को सहन करना सीखना होगा. एक बार जब कोई खिलाड़ी इनिंग्स में जम जाए, तो उसे सुनिश्चित करना होगा कि वह मैच को समाप्त करे। संयुक्त राज्य अमेरिका की टीम भी अपने ओपनिंग बल्लेबाजों से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद कर रही है. मोनांक पटेल ने स्वीकार किया कि भारत के खिलाफ पावरप्ले में उनके खिलाड़ी ढीले शॉट्स खेल रहे थे. वहीं तेज गेंदबाज सौरभ नेत्रवालकर भी पाकिस्तान के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन करने की लालसा रखेंगे. हालांकि, उनके साथी पेसर अली खान की फिटनेस पर सवाल हैं, जो भारत के खिलाफ मैच के दौरान मैदान से बाहर चले गए थे. अमेरिकी टीम की गेंदबाजी ने पहले मैच में कुछ उम्मीद जगाई थी. साउथ अफ्रीका में जन्मे शैडली वैन शल्कविक की अगुवाई में अमेरिकी टीम ने गेंदबाजी में अच्छा प्रदर्शन किया था। मुकाबले में यूएसए की संभावित प्लेइंग-11: एंड्रीज गौस (विकेटकीपर), सैतेजा मुक्कमल्ला, मोनांक पटेल (कप्तान), मिलिंद कुमार, संजय कृष्णमूर्ति, शुभम रंजने, हरमीत सिंह, मोहम्मद मोहसिन, शैडली वान शल्कविक, एहसान आदिल और सौरभ नेत्रवलकर. मुकाबले में पाकिस्तान की संभावित प्लेइंग-11: सैम अयूब, साहिबजादा फरहान, सलमान अली आगा (कप्तान), बाबर आजम, उस्मान खान (विकेटकीपर), शादाब खान, मोहम्मद नवाज, फहीम अशरफ, शाहीन आफरीदी, सलमान मिर्जा और अबरार अहमद टी20 वर्ल्ड कप के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका का फुल स्क्वॉड: मोनांक पटेल (कप्तान), एंड्रीज गौस (विकेटकीपर), सैतेजा मुक्कमल्ला, मिलिंद कुमार, शुभम रंजने, हरमीत सिंह, मोहम्मद मोहसिन, अली खान, नोस्टुश केंजिगे, शायन जहांगीर, सौरभ नेत्रवलकर, शैडली वान शल्कविक, शेहान जयसूर्या, एहसान आदिल और संजय कृष्णमूर्ति. टी20 वर्ल्ड कप के लिए पाकिस्तान का फुल स्क्वॉड: सलमान अली आगा (कप्तान), अबरार अहमद, बाबर आजम, फहीम अशरफ, फखर जमां, ख्वाजा नफाय, मोहम्मद नवाज, मोहम्मद सलमान मिर्जा, नसीम शाह, साहिबजादा फरहान, सैम अयूब, शाहीन शाह आफरीदी, शादाब खान, उस्मान खान और उस्मान तारिक. टी 20 वर्ल्ड कप में आज होने वाले मुकाबले10 फरवरी 2026. 11:00 AM. नीदरलैंड्स vs नामीबिया. दिल्ली10 फरवरी 2026. 3:00 PM. न्यूजीलैंड vs UAE. चेन्नई10 फरवरी 2026. 7:00 PM. पाकिस्तान vs USA. SSC. कोलंबो
50 साल बाद पहली बार रूस-अमेरिका के बीच कोई परमाणु सीमा नहीं, न्यू स्टार्ट संधि समाप्त, वैश्विक सुरक्षा पर चिंता

नई दिल्ली। रूस और अमेरिका के बीच परमाणु हथियारों पर लगी अंतिम बड़ी कानूनी पाबंदी अब समाप्त हो गई है। 5 फरवरी 2026 को न्यू स्टार्ट संधि की अवधि पूरी हो गई, जिससे लगभग 50 साल बाद दोनों देशों के रणनीतिक परमाणु हथियारों-जैसे अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें, सबमरीन-लॉन्च मिसाइलें और बॉम्बर-पर कोई बाध्यकारी सीमा नहीं रही। विशेषज्ञ इसे वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे के रूप में देख रहे हैं। न्यू स्टार्ट संधि क्या थी?न्यू स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटीNew START2010 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव के बीच हस्ताक्षरित एक ऐतिहासिक समझौता था। यह संधि उन रणनीतिक हथियारों की तैनाती को सीमित करती थी जो देश के महत्वपूर्ण राजनीतिक और सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकते थे। इसे 2011 में लागू किया गया और मूलतः 10 साल के लिए थी। 2021 में इसे राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 5 साल बढ़ाकर 2026 तक कर दिया। संधि का इतिहासपरमाणु हथियारों पर नियंत्रण की पहल शीत युद्ध के समय से चली आ रही है। 1970 के दशक में SALT समझौते ने संख्या पर सीमा लगाई, लेकिन कटौती नहीं की। 1991: START I – हजारों हथियारों में कटौती 1993: START II – और कटौती, पर पूरी तरह लागू नहीं 2002: SORT – 1,700-2,200 वारहेड्स पर सहमति, जांच-पड़ताल सीमित 2010: न्यू स्टार्ट – रणनीतिक हथियारों पर बाध्यकारी सीमा 2021 के बाद स्थिति2023 में रूस ने निरीक्षण बंद कर दिया, लेकिन सीमा पालन का दावा जारी रखा। इसका कारण यूक्रेन युद्ध में अमेरिका की भूमिका बताया गया। अब संधि पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और दोनों देश स्वतंत्र हैं। रूस का बयानरूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अब न्यू स्टार्ट संधि के तहत कोई दायित्व या पारस्परिक घोषणा दोनों देशों पर लागू नहीं है। संयुक्त राष्ट्र ने इसे अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए “गंभीर क्षण” करार दिया।संभावित असरसंधि समाप्त होने के बाद रूस और अमेरिका दोनों अपनी मिसाइलों और रणनीतिक वारहेड्स की संख्या बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी और लॉजिस्टिक कारणों से यह तुरंत संभव नहीं है, लेकिन लंबी अवधि में हथियारों की नई होड़ शुरू हो सकती है।वैश्विक संतुलनरूस और अमेरिका के पास दुनिया के 90% से अधिक परमाणु हथियार हैं। जनवरी 2025 तक रूस के पास 4,309 और अमेरिका के पास 3,700 वारहेड्स थे। अन्य देशों जैसे चीन600), फ्रांस290और ब्रिटेन225के पास अपेक्षाकृत कम हथियार हैं। विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय चेतावनीसुरक्षा विशेषज्ञों ने कहा है कि न्यू स्टार्ट के खत्म होने से वैश्विक परमाणु होड़ तेज हो सकती है। फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स के मैट कोर्डा के अनुसार, दोनों देश अपनी तैनात क्षमताओं को लगभग दोगुना कर सकते हैं। संधि समाप्त होने से पहले पोप लियो और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने दोनों देशों से अपील की कि वे परमाणु सीमाओं को बनाए रखें और नई, सत्यापनीय संधि पर तुरंत बातचीत शुरू करें। गुतारेस ने चेतावनी दी कि दशकों में पहली बार दुनिया सबसे बड़े परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बिना किसी बाध्यकारी सीमा के दौर में प्रवेश कर रही है, जिससे हथियारों के इस्तेमाल का जोखिम सबसे अधिक बढ़ गया है।
अमेरिका की नई योजना: 50 देशों के साथ चीन के खनिज प्रभुत्व को देगा चुनौती, भारत की भूमिका अहम

नई दिल्ली। रूस और अमेरिका के बीच परमाणु हथियारों पर लगी अंतिम बड़ी कानूनी पाबंदी अब समाप्त हो गई है। 5 फरवरी 2026 को न्यू स्टार्ट संधि की अवधि पूरी हो गई, जिससे लगभग 50 साल बाद दोनों देशों के रणनीतिक परमाणु हथियारों-जैसे अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें, सबमरीन-लॉन्च मिसाइलें और बॉम्बर-पर कोई बाध्यकारी सीमा नहीं रही। विशेषज्ञ इसे वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे के रूप में देख रहे हैं। न्यू स्टार्ट संधि क्या थी?न्यू स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटीNew START2010 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव के बीच हस्ताक्षरित एक ऐतिहासिक समझौता था। यह संधि उन रणनीतिक हथियारों की तैनाती को सीमित करती थी जो देश के महत्वपूर्ण राजनीतिक और सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकते थे। इसे 2011 में लागू किया गया और मूलतः 10 साल के लिए थी। 2021 में इसे राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 5 साल बढ़ाकर 2026 तक कर दिया। संधि का इतिहासपरमाणु हथियारों पर नियंत्रण की पहल शीत युद्ध के समय से चली आ रही है। 1970 के दशक में SALT समझौते ने संख्या पर सीमा लगाई, लेकिन कटौती नहीं की। 1991: START I – हजारों हथियारों में कटौती 1993: START II – और कटौती, पर पूरी तरह लागू नहीं 2002: SORT – 1,700-2,200 वारहेड्स पर सहमति, जांच-पड़ताल सीमित 2010: न्यू स्टार्ट – रणनीतिक हथियारों पर बाध्यकारी सीमा 2021 के बाद स्थिति2023 में रूस ने निरीक्षण बंद कर दिया, लेकिन सीमा पालन का दावा जारी रखा। इसका कारण यूक्रेन युद्ध में अमेरिका की भूमिका बताया गया। अब संधि पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और दोनों देश स्वतंत्र हैं। रूस का बयानरूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अब न्यू स्टार्ट संधि के तहत कोई दायित्व या पारस्परिक घोषणा दोनों देशों पर लागू नहीं है। संयुक्त राष्ट्र ने इसे अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए “गंभीर क्षण” करार दिया। संभावित असरसंधि समाप्त होने के बाद रूस और अमेरिका दोनों अपनी मिसाइलों और रणनीतिक वारहेड्स की संख्या बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी और लॉजिस्टिक कारणों से यह तुरंत संभव नहीं है, लेकिन लंबी अवधि में हथियारों की नई होड़ शुरू हो सकती है। वैश्विक संतुलनरूस और अमेरिका के पास दुनिया के 90% से अधिक परमाणु हथियार हैं। जनवरी 2025 तक रूस के पास 4,309 और अमेरिका के पास 3,700 वारहेड्स थे। अन्य देशों जैसे चीन600), फ्रांस290और ब्रिटेन225के पास अपेक्षाकृत कम हथियार हैं। विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय चेतावनीसुरक्षा विशेषज्ञों ने कहा है कि न्यू स्टार्ट के खत्म होने से वैश्विक परमाणु होड़ तेज हो सकती है। फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स के मैट कोर्डा के अनुसार, दोनों देश अपनी तैनात क्षमताओं को लगभग दोगुना कर सकते हैं। संधि समाप्त होने से पहले पोप लियो और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने दोनों देशों से अपील की कि वे परमाणु सीमाओं को बनाए रखें और नई, सत्यापनीय संधि पर तुरंत बातचीत शुरू करें। गुतारेस ने चेतावनी दी कि दशकों में पहली बार दुनिया सबसे बड़े परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बिना किसी बाध्यकारी सीमा के दौर में प्रवेश कर रही है, जिससे हथियारों के इस्तेमाल का जोखिम सबसे अधिक बढ़ गया है।