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सोशल मीडिया स्टार बने दुकानदार की मुश्किलें बढ़ीं, पीएम मोदी से जुड़ी मुलाकात के बाद धमकी का आरोप

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनावी दौरे के दौरान झालमुड़ी खिलाने वाले स्थानीय दुकानदार को जान से मारने की धमकियां मिलने का आरोप है। इस घटना के बाद दुकानदार और उसका परिवार गहरे डर और तनाव में है। यह मामला उस घटना से जुड़ा है जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी झाड़ग्राम पहुंचे थे। जनसभा समाप्त होने के बाद जब उनका काफिला लौट रहा था, तभी उन्होंने अचानक सड़क किनारे एक छोटी सी झालमुड़ी की दुकान पर रुककर स्थानीय विक्रेता बिक्रम साऊ से मुलाकात की थी। इस दौरान पीएम मोदी ने उनके हाथ की बनी झालमुड़ी का स्वाद लिया और उनसे बातचीत भी की। यह पल कैमरे में कैद हो गया और कुछ ही समय में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद बिक्रम साऊ रातों-रात सुर्खियों में आ गए। इस वायरल घटना के बाद उनकी दुकान पर लोगों की भीड़ बढ़ने लगी और वे एक तरह से स्थानीय स्तर पर चर्चित चेहरा बन गए। लेकिन अब यही लोकप्रियता उनके लिए परेशानी का कारण बन गई है। दुकानदार का आरोप है कि पिछले कुछ दिनों से उन्हें लगातार अंतरराष्ट्रीय नंबरों से फोन कॉल्स और वीडियो कॉल्स आ रही हैं, जिनमें पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों के नंबर शामिल बताए जा रहे हैं। बिक्रम साऊ का कहना है कि इन कॉल्स के दौरान उन्हें और उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने और जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। अचानक मिल रही इन धमकियों से पूरा परिवार दहशत में है और सामान्य जीवन प्रभावित हो गया है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि परिवार ने स्थानीय पुलिस प्रशासन से सुरक्षा की मांग की है और शिकायत दर्ज कराई है। दुकानदार के अनुसार, जो घटना पहले उनके जीवन का सबसे खुशी का पल थी, वही अब उनके लिए डर का कारण बन गई है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद उन्हें पहचान तो मिली, लेकिन इसके साथ ही अनचाही परेशानियां भी बढ़ गईं। इस मामले ने स्थानीय स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है। लोग इस बात को लेकर हैरान हैं कि एक सामान्य दुकानदार, जिसकी पहचान एक साधारण स्ट्रीट फूड विक्रेता के रूप में थी, अचानक इस तरह की धमकियों का सामना कर रहा है। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है और कॉल्स की ट्रेसिंग की कोशिश की जा रही है। हालांकि अभी तक किसी भी तरह की आधिकारिक पुष्टि या गिरफ्तारी की जानकारी सामने नहीं आई है। इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद आम लोगों की जिंदगी कितनी तेजी से बदल सकती है, और कभी-कभी यह लोकप्रियता उनके लिए चुनौती भी बन जाती है। फिलहाल बिक्रम साऊ और उनका परिवार सुरक्षा और सामान्य जीवन की वापसी की उम्मीद कर रहा है, जबकि प्रशासन मामले की जांच में जुटा हुआ है।

कड़ी निगरानी में फलता सीट पर पुनर्मतदान, ईवीएम विवाद के बाद जनता की मजबूत भागीदारी, राजनीतिक मुकाबला हुआ रोचक

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले की फलता विधानसभा सीट पर पुनर्मतदान की प्रक्रिया गुरुवार को कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच शांतिपूर्ण ढंग से जारी रही। सुबह से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं और लोगों में अपने मताधिकार को लेकर विशेष उत्साह नजर आया। दोपहर 1 बजे तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में 60 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया, जो स्थानीय प्रशासन और चुनाव प्रक्रिया के प्रति जनता के सक्रिय रुझान को दर्शाता है। पूरे इलाके में केंद्रीय सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है ताकि मतदान प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी हो सके। इस पुनर्मतदान की आवश्यकता उस समय उत्पन्न हुई जब मुख्य मतदान के दौरान कुछ पोलिंग बूथों पर ईवीएम और मतदाता सूची से जुड़ी तकनीकी एवं प्रशासनिक गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आईं। आरोप था कि नाम वापसी के बाद भी कुछ मशीनों में संबंधित उम्मीदवार का नाम और चुनाव चिह्न प्रदर्शित हो रहा था, जिससे मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी। इस गंभीर स्थिति के सामने आने के बाद चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठे और व्यापक शिकायतों के आधार पर संबंधित बूथों पर पुनर्मतदान का निर्णय लिया गया। नए मतदान में सभी ईवीएम को अपडेट कर पूरी तरह संशोधित किया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि या भ्रम की स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि मतदान प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी रहे। सुरक्षा व्यवस्था को भी पहले से अधिक मजबूत किया गया है और हर मतदान केंद्र पर निगरानी के लिए विशेष टीमों को तैनात किया गया है। इसके साथ ही सभी संवेदनशील क्षेत्रों में चौकसी बढ़ा दी गई है और लगातार निगरानी की जा रही है। सुबह से ही मतदान केंद्रों के बाहर लोगों की लंबी कतारें लोकतंत्र के प्रति जागरूकता और सक्रिय भागीदारी को दर्शा रही हैं। महिला और पुरुष दोनों वर्गों के मतदाताओं में अपने मताधिकार को लेकर उत्साह देखा गया है। प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि पूरी प्रक्रिया पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी तरह की गड़बड़ी या दबाव की स्थिति को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह पुनर्मतदान भले ही सीमित क्षेत्र में हो रहा हो, लेकिन इसका प्रभाव क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों पर महत्वपूर्ण हो सकता है। विभिन्न दलों के बीच यह मुकाबला अब और भी दिलचस्प हो गया है, क्योंकि मतदान के रुझान आगामी राजनीतिक रणनीतियों को प्रभावित कर सकते हैं। फिलहाल पूरे क्षेत्र में शांतिपूर्ण माहौल में मतदान जारी है और प्रशासन इसे सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए पूरी तरह सतर्क है।

बंगाल की सियासत में बड़ा उलटफेर, फाल्टा सीट पर TMC उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनाव लड़ने से किया इनकार

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में फाल्टा विधानसभा सीट को लेकर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जिसने सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मतदान से ठीक पहले पार्टी के उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनावी मैदान से हटने का फैसला कर सभी को चौंका दिया है। इस अचानक हुए घटनाक्रम ने न केवल पार्टी के भीतर हलचल पैदा कर दी है, बल्कि पूरे राजनीतिक माहौल में भी चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है। फाल्टा सीट पर पहले हुए मतदान के दौरान कथित अनियमितताओं और धांधली के आरोप सामने आए थे, जिसके बाद चुनाव प्रक्रिया को रद्द कर दोबारा मतदान कराने का निर्णय लिया गया था। दोबारा मतदान की तारीख तय होने के बाद सभी दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी थीं, लेकिन अंतिम समय में TMC उम्मीदवार का पीछे हटना एक अप्रत्याशित राजनीतिक मोड़ माना जा रहा है। जहांगीर खान अपने प्रचार अभियान के दौरान अपने अलग अंदाज और बयानों को लेकर काफी चर्चा में रहे थे। उनके वायरल प्रचार स्टाइल और आत्मविश्वास भरे बयानों ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया था। लेकिन चुनाव से महज कुछ दिन पहले उनके मैदान छोड़ने के फैसले ने सभी राजनीतिक समीकरणों को बदल दिया है और विपक्ष को भी इस पर सवाल उठाने का मौका मिल गया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ इसे व्यक्तिगत कारणों से लिया गया फैसला बता रहे हैं, तो कुछ का मानना है कि राजनीतिक और कानूनी दबाव ने इस स्थिति को जन्म दिया है। हालांकि आधिकारिक तौर पर उम्मीदवार की ओर से अपना नाम वापस लेने की पुष्टि की गई है, लेकिन इसके पीछे की पूरी वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। इस बीच यह भी चर्चा में है कि फाल्टा सीट पर पहले चरण के मतदान के दौरान कई बूथों पर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद चुनाव आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराई और फिर दोबारा मतदान का आदेश दिया। इसी पृष्ठभूमि में यह नया घटनाक्रम राजनीतिक महत्व और बढ़ा देता है। कुल मिलाकर फाल्टा विधानसभा सीट पर यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ लेकर आया है। मतदान से ठीक पहले उम्मीदवार का हटना न केवल सत्ताधारी दल के लिए चुनौती बन गया है, बल्कि आने वाले दिनों में इस सीट के राजनीतिक समीकरणों को भी पूरी तरह बदल सकता है।

West Bengal election: बंगाल में सत्ता बदली तो मचा बवाल! ममता-अभिषेक के घरों से हटी सुरक्षा, TMC ऑफिस पर बुलडोजर, देशभर में सियासी हलचल तेज

 West Bengal election: नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की सियासत में उबाल साफ नजर आ रहा है। रिजल्ट के महज दो दिन बाद ही हालात ऐसे बने कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी के घरों से अतिरिक्त सुरक्षा हटा ली गई। कोलकाता के कैमैक स्ट्रीट स्थित पार्टी मुख्यालय से भी पुलिस बल कम कर दिया गया, जिससे पूरे घटनाक्रम को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, अभिषेक बनर्जी को पहले की तरह Z कैटेगरी सुरक्षा मिलती रहेगी, लेकिन अचानक सुरक्षा में कटौती ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। इधर, चुनाव नतीजों के बाद शुरू हुई हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही। कोलकाता के न्यू मार्केट इलाके में मंगलवार रात हालात उस वक्त बिगड़ गए जब उग्र भीड़ ने टीएमसी के पार्टी कार्यालय पर बुलडोजर चला दिया। इस दौरान आसपास की दुकानों में भी तोड़फोड़ की गई, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। टीएमसी ने इस घटना का वीडियो शेयर करते हुए बीजेपी पर निशाना साधा और इसे ‘परिवर्तन की असल तस्वीर’ बताया। वहीं विपक्षी दलों ने कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा नॉर्थ 24 परगना के संदेशखाली में हुई घटना से भी लगाया जा सकता है, जहां गश्त कर रही पुलिस और केंद्रीय बलों पर हमला कर दिया गया। उपद्रवियों की फायरिंग में पांच सुरक्षाकर्मी घायल हो गए, जिनमें एक महिला पुलिसकर्मी भी शामिल है। मौके से बम से भरा बैग मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं और पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इस बीच, बंगाल की सियासत के साथ-साथ दक्षिण भारत में भी बड़ा राजनीतिक मोड़ देखने को मिला है। तमिलनाडु में कांग्रेस ने बड़ा दांव खेलते हुए TVK प्रमुख विजय को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। कांग्रेस नेताओं ने खुद उनके मुख्यालय पहुंचकर समर्थन पत्र सौंपा, जिससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि राज्य में नई राजनीतिक धुरी बनने की कोशिश हो रही है। दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस ने इसके साथ ही DMK से अपना पुराना गठबंधन भी तोड़ दिया है। हालांकि, तमिलनाडु में अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। TVK और AIADMK के बीच संभावित गठबंधन को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। पार्टी नेताओं की मुलाकातों ने सियासी अटकलों को और हवा दे दी है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह तय होगा कि विजय किसके साथ मिलकर सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ते हैं। कुल मिलाकर, एक तरफ बंगाल हिंसा और राजनीतिक टकराव की आग में झुलस रहा है, तो दूसरी तरफ तमिलनाडु में सत्ता समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। देश की राजनीति इस वक्त एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है, जहां हर दिन नई घटनाएं और नए गठबंधन तस्वीर को और दिलचस्प बना रहे हैं।

पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद बदलेगा समीकरण, तीस्ता जल विवाद सुलझने की उम्मीद..

ढाका। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की बड़ी जीत के बाद इसका असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। इस राजनीतिक बदलाव ने भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से लंबित जल विवादों के समाधान को लेकर नई उम्मीदें जगा दी हैं। बांग्लादेश की सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने भाजपा को जीत पर बधाई देते हुए इसे द्विपक्षीय संबंधों के लिए सकारात्मक संकेत बताया है। पार्टी के सूचना सचिव अजीजुल बारी हेलाल ने शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा के प्रदर्शन की सराहना की और उम्मीद जताई कि इससे दोनों पक्षों के रिश्ते और मजबूत होंगे। बीएनपी का मानना है कि नई राजनीतिक परिस्थिति से ढाका और कोलकाता के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों को सुलझाने में मदद मिल सकती है। खासतौर पर तीस्ता नदी जल बंटवारा समझौते को लेकर नई प्रगति की संभावना जताई गई है। तीस्ता विवाद पर ममता पर आरोपबीएनपी ने अपने बयान में ममता बनर्जी और उनकी सरकार को तीस्ता समझौते में देरी के लिए जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी का आरोप है कि पिछली राज्य सरकार के रुख के कारण यह संधि लंबे समय से अटकी हुई है। अब बीएनपी को उम्मीद है कि भाजपा सरकार केंद्र के साथ समन्वय कर इस समझौते को आगे बढ़ाएगी। उनका कहना है कि सत्ता परिवर्तन के बाद तीस्ता बैराज परियोजना को लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। पुराना है जल बंटवारे का मुद्दाभारत और बांग्लादेश के बीच कुल 54 नदियां साझा हैं, लेकिन अब तक सिर्फ दो जल समझौते ही हो सके हैं—गंगा जल संधि और कुशियारा नदी संधि। 1996 की गंगा जल संधि के तहत फरक्का बैराज पर पानी के बंटवारे को नियंत्रित किया जाता है, हालांकि बांग्लादेश समय-समय पर कम पानी मिलने की शिकायत करता रहा है। तीस्ता नदी को लेकर 1983 में एक अस्थायी समझौता हुआ था, जिसमें बांग्लादेश को 36% और भारत को 39% पानी देने की बात कही गई थी, लेकिन यह पूरी तरह लागू नहीं हो पाया। बाद में 2011 में मनमोहन सिंह की बांग्लादेश यात्रा के दौरान नए प्रस्ताव पर चर्चा हुई, लेकिन राज्य सरकार के विरोध के चलते यह समझौता भी अधूरा रह गया। वैचारिक अंतर के बावजूद सहयोग की उम्मीदबीएनपी नेता हेलाल ने यह भी कहा कि भले ही बीएनपी और भाजपा के बीच वैचारिक अंतर हो, लेकिन राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि तीस्ता जल विवाद और द्विपक्षीय संबंध जैसे मुद्दों पर दोनों पक्ष सहयोग कर सकते हैं। उनके अनुसार, पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तेजी आने की संभावना है, जिससे लंबे समय से लंबित मुद्दों के समाधान का रास्ता साफ हो सकता है।

WEST BENGAL ELECTION: भवानीपुर में काउंटिंग पर हंगामा, ममता और अधिकारी आमने-सामने

WEST BENGAL ELECTION

HIGHLIGHTS: भवानीपुर में काउंटिंग के दौरान बड़ा विवाद ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी पहुंचे सेंटर डेढ़ घंटे तक रुकी रही मतगणना मोबाइल फोन एंट्री से बढ़ा मामला TMC ने लगाए गड़बड़ी के आरोप   WEST BENGAL ELECTION: कोलकाता। पश्चिम बंगाल के भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में मतगणना के दौरान बड़ा विवाद खड़ा हो गया। 12वें राउंड के बाद अचानक परिणाम अपडेट न होने से सियासी हलचल तेज हो गई। इसी बीच मुख्यमंत्रीममता बनर्जी खुद काउंटिंग सेंटर सखावत मेमोरियल स्कूल पहुंच गईं और स्थिति का जायजा लिया। इस घटनाक्रम ने चुनावी माहौल को और गर्मा दिया। नारद जयंती पर ‘सांस्कृतिक पुनर्जागरण और मीडिया’ का संदेश, डॉ. मयंक चतुर्वेदी ने रखा राष्ट्रीय दृष्टिकोण काउंटिंग सेंटर पर आमने-सामने विवाद बढ़ते ही भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी भी काउंटिंग सेंटर पहुंच गए। दोनों बड़े नेताओं की मौजूदगी से माहौल और तनावपूर्ण हो गया। इस दौरान दोनों पक्षों के समर्थकों में भी हलचल देखने को मिली, जिससे स्थिति संवेदनशील बनी रही। GWALIOR CM MOHAN YADAV: ग्वालियर एयरपोर्ट पर CM यादव बोले- बंगाल में राष्ट्रवाद और लोकतंत्र की जित हुई डेढ़ घंटे तक रुकी रही गिनती मतगणना प्रक्रिया करीब डेढ़ घंटे तक रुकी रही, जिससे कई सवाल खड़े हो गए। चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार अब तक 13 राउंड की गिनती पूरी हो चुकी है और ममता बनर्जी करीब 5349 वोटों से आगे चल रही हैं। गिनती रुकने को लेकर विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए। खंडवा में बीजेपी कार्यकर्ताओं का जोरदार जश्न, पीएम मोदी की तस्वीरों के साथ बांटी गई झालमुड़ी, गूंजा शहर मोबाइल एंट्री से बढ़ा विवाद चुनाव आयोग के एक अधिकारी के मुताबिक गिनती में रुकावट उस समय आई, जब एक व्यक्ति मोबाइल फोन लेकर काउंटिंग सेंटर में प्रवेश कर गया। नियमों के उल्लंघन के कारण प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोका गया और डिवाइस जब्त करने के बाद गिनती फिर से शुरू की गई। डिजिटल ठगी का नया जाल! बुजुर्ग सबसे ज्यादा निशाने पर, ये 5 उपाय बचाएंगे आपकी मेहनत की कमाई TMC के आरोपों से गरमाई सियासत TMC उम्मीदवार गौतम देब ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि काउंटिंग में गड़बड़ी की कोशिश की गई। उन्होंने दावा किया कि कुछ पोस्टल बैलेट बॉक्स बिना सील और कवर के मिले। इस पूरे घटनाक्रम के बाद भवानीपुर सीट राज्य की सबसे चर्चित सीट बन गई है।    

बंगाल में सत्ता बदलने की आहट! BJP 186 सीटों पर आगे, भवानीपुर में ममता vs सुवेंदु की सीधी टक्कर

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की सियासत में बड़ा उलटफेर होता दिख रहा है। 293 सीटों पर जारी मतगणना के रुझानों में Bharatiya Janata Party (BJP) ने स्पष्ट बढ़त बना ली है और सत्ता परिवर्तन की तस्वीर साफ नजर आने लगी है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक BJP 186 सीटों पर आगे चल रही है और अब तक 14 सीटों पर जीत दर्ज कर चुकी है, जबकि All India Trinamool Congress (TMC) 82 सीटों पर आगे है और 5 सीटें जीत चुकी है। बहुमत का आंकड़ा 148 है, जिसे BJP रुझानों में पार करती दिख रही है। सबसे ज्यादा नजरें भवानीपुर सीट पर टिकी हैं, जहां Mamata Banerjee और Suvendu Adhikari के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल रही है। यहां ममता बनर्जी करीब 7 हजार वोटों से आगे चल रही हैं। दोनों नेता काउंटिंग सेंटर पहुंच चुके हैं, जहां भारी सुरक्षा बल तैनात है और ड्रोन से निगरानी की जा रही है। मतगणना के दौरान कुछ जगहों से तनाव की खबरें भी सामने आई हैं। Cooch Behar में TMC नेता के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है, जबकि Kolkata में पार्टी के अस्थायी कार्यालय में तोड़फोड़ की खबर है। भवानीपुर के सखावत स्कूल मेमोरियल काउंटिंग सेंटर में करीब 45 मिनट तक गिनती रुकी रही, हालांकि बाद में प्रक्रिया फिर शुरू कर दी गई। सुरक्षा के चलते उम्मीदवारों को मोबाइल फोन बाहर जमा कराकर अंदर जाने दिया गया। इस बीच पानीहाटी सीट से चर्चित आरजीकर केस से जुड़ी पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ करीब 20 हजार वोटों से आगे चल रही हैं, जो चुनाव का एक बड़ा मानवीय और भावनात्मक पहलू भी बन गया है। कुल मिलाकर, रुझान साफ संकेत दे रहे हैं कि बंगाल में लंबे समय बाद सत्ता परिवर्तन हो सकता है, जिससे राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

GWALIOR CM MOHAN YADAV: ग्वालियर एयरपोर्ट पर CM यादव बोले- बंगाल में राष्ट्रवाद और लोकतंत्र की जित हुई

CM MOHAN YADAV AT GWALIOR

HIGHLIGHTS: CM मोहन यादव का चुनावी रुझानों पर बड़ा बयान बंगाल में TMC और राहुल गांधी पर साधा निशाना चुनावी माहौल को बताया “राष्ट्रवाद की जीत” दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालन पर घोषणाएं ग्वालियर दौरे में कई कार्यक्रमों में शामिल हुए   GWALIOR CM MOHAN YADAV: ग्वालियर। पांच राज्यों के चुनावी रुझानों के बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्वालियर एयरपोर्ट पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि देश में जो रुझान सामने आ रहे हैं, वह राष्ट्रवाद और लोकतंत्र की जीत है। साथ ही उन्होंने इसे त्योहार जैसा माहौल बताते हुए कहा कि बंगाल की जनता ने अहंकार को नकारकर विकास और मजबूत नेतृत्व को चुना है। खंडवा में बीजेपी कार्यकर्ताओं का जोरदार जश्न, पीएम मोदी की तस्वीरों के साथ बांटी गई झालमुड़ी, गूंजा शहर बंगाल पर TMC पर हमला मोहन यादव ने पश्चिम बंगाल के संदर्भ में तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में घुसपैठियों और देशविरोधी ताकतों के साथ खड़े रहने के कारण जनता ने TMC पर भरोसा नहीं जताया। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में BJP पर जनता ने विश्वास जताया है। डिजिटल ठगी का नया जाल! बुजुर्ग सबसे ज्यादा निशाने पर, ये 5 उपाय बचाएंगे आपकी मेहनत की कमाई राहुल गांधी पर भी साधा निशाना मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गाँधी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि उनकी भाषा लोकतंत्र के पवित्र माहौल को प्रभावित करती है और इससे अराजकता को बढ़ावा मिलता है। यह बयान सियासी बहस को और तेज करने वाला माना जा रहा है। तेल की राजनीति में नया तूफान! UAE के फैसले पर ईरान का हमला, OPEC में बढ़ी दरार दुग्ध उत्पादन और विकास की घोषणाएं ग्वालियर में आयोजित राज्य स्तरीय दुग्ध उत्पादक सम्मेलन में मोहन यादव ने मध्य प्रदेश को दुग्ध उत्पादन में देश में नंबर वन बनाने का लक्ष्य रखा। उन्होंने गोशालाओं में प्रति गाय 40 रुपये खर्च करने, पशु आहार निर्माण इकाइयों और वेलनेस सेंटर खोलने की घोषणा की। साथ ही डबरा में नए पशु चिकित्सालय की भी घोषणा की गई। TAMILNADU ELECTION 2026: CM एमके स्टालिन को उनके पुराने साथी वी.एस. बाबू ने दी पटखनी कार्यक्रमों की श्रृंखला और दौरा मुख्यमंत्री ने ग्वालियर में ऋषि गालव विश्वविद्यालय का भूमिपूजन किया और अन्य स्थानीय कार्यक्रमों में भाग लिया। इसके बाद उन्होंने आरोग्यधाम सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। तय कार्यक्रम के अनुसार वे विभिन्न आयोजनों में शामिल होकर शाम को भोपाल के लिए रवाना हो गए।

बंगाल फतह के बाद बीजेपी का अगला टारगेट पंजाब! जीत के जोश में बड़ा सियासी ऐलान

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में शानदार बढ़त के बाद बीजेपी अब सिर्फ जश्न के मूड में नहीं है, बल्कि अगले मिशन की तैयारी में भी जुट गई है। पार्टी ने साफ संकेत दे दिया है कि अब उसका अगला बड़ा राजनीतिक टारगेट पंजाब होगा। बंगाल में मिल रही बढ़त को बीजेपी राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा संदेश मान रही है। पार्टी नेताओं का मानना है कि यह जीत सिर्फ एक राज्य की नहीं, बल्कि देशभर में बदलते सियासी समीकरणों की शुरुआत है। बीजेपी प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने सोशल मीडिया पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, “पश्चिम बंगाल के बाद अब पंजाब की बारी है, AAP सरकार अपना बोरिया-बिस्तर बांध ले।” इस बयान ने साफ कर दिया है कि पार्टी अब पंजाब की राजनीति में आक्रामक रुख अपनाने वाली है। दिल्ली समेत देशभर में बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच जश्न का माहौल है। पार्टी मुख्यालयों में ढोल-नगाड़ों के साथ जीत का उत्सव मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय पहुंचकर कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे और इस जीत को जनता के भरोसे का नतीजा बताएंगे। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, बंगाल में बीजेपी का प्रदर्शन पार्टी को नई ऊर्जा देने वाला है। यह जीत आने वाले चुनावों के लिए रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाएगी, खासकर उन राज्यों में जहां बीजेपी अभी सत्ता से दूर है। कुल मिलाकर, बंगाल की जीत ने बीजेपी के हौसले बुलंद कर दिए हैं और अब पार्टी इस लहर को पंजाब तक ले जाने की तैयारी में है। आने वाले दिनों में देश की राजनीति और भी ज्यादा गरमाने वाली है।

बंगाल में बीजेपी की ‘सुनामी’ के संकेत, स्वाति मालीवाल बोलीं- खत्म होगी गुंडागर्दी और तुष्टिकरण की राजनीति

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर होता दिख रहा है। विधानसभा चुनाव के शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी ने जबरदस्त बढ़त बना ली है और बहुमत के आंकड़े को पार करती नजर आ रही है। 294 सीटों वाली विधानसभा में 148 का आंकड़ा जादुई माना जाता है, जिसे बीजेपी शुरुआती ट्रेंड्स में पार करती दिखाई दे रही है। इसी बीच आम आदमी पार्टी छोड़कर हाल ही में बीजेपी में शामिल हुईं राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने इस संभावित जीत को “ऐतिहासिक बदलाव” बताया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी नेतृत्व को बधाई देते हुए कहा कि बंगाल में दशकों से चली आ रही हिंसा, गुंडागर्दी और वोट बैंक की राजनीति अब खत्म होने की ओर है। मालीवाल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि बीजेपी सिर्फ बंगाल में ही नहीं बल्कि असम और पुडुचेरी में भी मजबूत प्रदर्शन कर रही है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि देश की राजनीति में बड़ा बदलाव आ रहा है। चुनावी रुझानों में यह भी देखने को मिल रहा है कि बीजेपी सीमावर्ती इलाकों, आदिवासी क्षेत्रों और औद्योगिक बेल्ट में मजबूत पकड़ बना रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस को कोलकाता और कुछ पारंपरिक गढ़ों में बढ़त मिल रही है। सुबह 8 बजे से शुरू हुई मतगणना में पहले पोस्टल बैलेट और फिर ईवीएम वोटों की गिनती की जा रही है। शुरुआती आंकड़े भले ही अंतिम नतीजे न हों, लेकिन जो तस्वीर उभर रही है, वह पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे रही है।