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महिला दिवस पर बदली तस्वीर: ग्वालियर चंबल में आत्मरक्षा के लिए हथियार रख रहीं महिलाएं, 600 के करीब महिला लाइसेंस धारक

ग्वालियर । अंतरराष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मध्य प्रदेश के ग्वालियर चंबल संभाग से महिला सशक्तिकरण की एक अलग और मजबूत तस्वीर सामने आ रही है। कभी डकैतों के आतंक से पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र में अब महिलाएं आत्मरक्षा के लिए लाइसेंसी हथियार रख रही हैं। ग्वालियर भिंड और मुरैना जिलों में महिलाएं रिवॉल्वर और पिस्टल के लाइसेंस लेकर अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूकता का संदेश दे रही हैं। Gwalior चंबल क्षेत्र में देश में सबसे अधिक लाइसेंसी हथियार जारी होने की बात कही जाती है। अब इस परंपरा में महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार केवल ग्वालियर जिले में ही 30 हजार से अधिक हथियार लाइसेंस जारी हैं जिनमें लगभग 600 लाइसेंस महिलाओं के नाम पर हैं। यह संख्या धीरे धीरे बढ़ती जा रही है जो इस क्षेत्र में बदलती सामाजिक सोच को दर्शाती है। ग्वालियर शहर के धर्मवीर पेट्रोल पंप क्षेत्र में रहने वाली विद्या देवी कौरव भी उन महिलाओं में शामिल हैं जिनके पास लाइसेंसी हथियार है। उन्होंने बताया कि हथियार रखना उनके लिए शौक नहीं बल्कि आत्मरक्षा का माध्यम है। विद्या देवी बताती हैं कि उनकी शादी के समय पूरा क्षेत्र दस्यु प्रभावित था और सन 1970 के दशक में डकैतों ने उनके पति को दो बार पकड़ लिया था। इन घटनाओं के बाद उनका परिवार सब कुछ छोड़कर ग्वालियर आकर बस गया। उन्होंने कहा कि उस समय उनके मन में एक सवाल उठा कि यदि घर में पुरुष न हों तो महिलाएं अपनी सुरक्षा कैसे करेंगी। उनका मानना है कि अक्सर यह कहा जाता है कि हथियार पुरुष ही चला सकते हैं लेकिन जब महिलाओं के पास हथियार होंगे ही नहीं तो वे चलाना कैसे सीखेंगी। इसी सोच के साथ उन्होंने लाइसेंसी हथियार लिया। विद्या देवी का कहना है कि ग्वालियर की धरती वीरता की प्रतीक रही है क्योंकि यहां महान स्वतंत्रता सेनानी Rani Lakshmibai ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। ऐसे में महिलाओं को भी उनसे प्रेरणा लेते हुए आत्मरक्षा के लिए तैयार रहना चाहिए। ग्वालियर के गोले का मंदिर क्षेत्र में रहने वाली गुड्डी बैस भी पिछले 20 वर्षों से लाइसेंसी हथियार रखती हैं। उनका कहना है कि लोग अक्सर हथियार को शौक से जोड़कर देखते हैं जबकि असल में यह आत्मरक्षा का साधन है। उन्होंने बताया कि एक समय उनके पति पर जानलेवा हमला हुआ था जिसके बाद उन्हें महसूस हुआ कि जरूरत पड़ने पर खुद की और परिवार की सुरक्षा के लिए हथियार होना जरूरी है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार हथियारों के लाइसेंस जारी करने में सुरक्षा और नियमों का पूरा ध्यान रखा जाता है। एसडीएम सीबी प्रसाद के मुताबिक जिले में लाइसेंसी हथियारों की संख्या भले अधिक हो लेकिन उनके दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रशासन सख्त निगरानी रखता है। ग्वालियर चंबल क्षेत्र की यह बदलती तस्वीर बताती है कि महिलाएं अब केवल घर परिवार तक सीमित नहीं रहीं। वे हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और जरूरत पड़ने पर अपनी तथा अपने परिवार की सुरक्षा के लिए भी तैयार हैं। यह बदलाव न केवल इस क्षेत्र की सामाजिक सोच में परिवर्तन का संकेत है बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा भी बन रहा है।

औरत को तारीफ नहीं सम्मान चाहिए इंटरनेशनल वूमेन्स डे पर समाज के आईने में झांकती एक बात

नई दिल्ली:हर साल 8 मार्च को दुनिया भर में International Women’s Day मनाया जाता है। इस दिन महिलाओं के सम्मान अधिकार और उपलब्धियों की बात की जाती है। लेकिन सच यही है कि हर साल यह दिन हमें यह याद दिला देता है कि समाज अब भी औरत के असली वजूद को पूरी तरह समझ नहीं पाया है। हम अक्सर कहते हैं कि हमारी बेटियां बेटों से कम नहीं हैं लेकिन इस वाक्य के भीतर ही एक छिपा हुआ सच है कि कहीं न कहीं हम अभी भी बराबरी को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर पाए हैं। जब हम कहते हैं कि औरत आजाद है तो इसका मतलब यह भी होता है कि उसकी आजादी अभी अधूरी है। जब हम कहते हैं कि बेटियों को भी पढ़ाना चाहिए उन्हें भी आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए तो यह भी इस बात का संकेत है कि इस दिशा में अभी बहुत काम बाकी है। आज की महिला जीवन के हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही है। राजनीति से लेकर विज्ञान खेल से लेकर सेना और कला से लेकर व्यापार तक महिलाएं हर जगह अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। लेकिन सवाल यह है कि उसे बार बार खुद को साबित करने की जरूरत क्यों पड़ती है। समाज अक्सर किसी महिला की सफलता को तब स्वीकार करता है जब वह उन सीमाओं को पार कर लेती है जिन्हें लंबे समय तक पुरुषों ने तय किया था। कई बार तो महिला की कामयाबी को इस तरह देखा जाता है जैसे उसने किसी पुरुष की भूमिका निभाकर यह उपलब्धि हासिल की हो। असल में हमें यह समझना होगा कि औरत केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि पूरे समाज का ताना बाना है। परिवार रिश्तों और भावनाओं को जोड़कर रखने वाली सबसे मजबूत कड़ी अक्सर वही होती है। बचपन से अपने सपनों को सहेजने वाली और फिर अपनों की खुशियों के लिए उन्हें पीछे छोड़ देने वाली भी अक्सर वही होती है। बेटी के रूप में वह रहमत है मां के रूप में जन्नत है बहन के रूप में इज्जत है और दोस्त के रूप में भरोसा है। लेकिन समाज का दूसरा चेहरा भी उतना ही कड़वा है। महिलाओं के साथ हिंसा और अपमान की घटनाएं समय समय पर सामने आती रहती हैं। देश में कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिन्होंने पूरे समाज को झकझोर दिया। Manipur women parading case 2023 हो या Kanjhawala case 2023 Delhi जैसी घटनाएं यह दिखाती हैं कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर अभी भी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। इसी तरह Bilkis Bano का मामला भी बार बार यह सवाल उठाता है कि न्याय और संवेदनशीलता के मामले में समाज कहां खड़ा है। समस्या की जड़ कहीं और भी है। हम अक्सर महिलाओं का सम्मान उनके रिश्तों के आधार पर करते हैं। हमें लगता है कि हमें अपनी मां बहन बेटी या पत्नी की ही इज्जत करनी चाहिए। लेकिन असली सम्मान तब होगा जब सड़क पर चलने वाली या दफ्तर में काम करने वाली हर महिला को वही सम्मान मिले जो हम अपने घर की महिलाओं को देते हैं। हमारी संस्कृति और साहित्य में भी कई बार औरत की खूबसूरती को केवल उसके चेहरे उसकी आंखों या उसकी जुल्फों तक सीमित कर दिया गया है। शायरियों और कविताओं में उसकी आंखों की गहराई और उसके होंठों की नाजुकी का खूब जिक्र मिलता है। इसमें कोई शक नहीं कि महिला की सुंदरता बेमिसाल होती है लेकिन उसकी असली पहचान केवल उसके रूप में नहीं बल्कि उसके व्यक्तित्व उसकी सोच उसकी मेहनत और उसकी संवेदनशीलता में होती है। आज की महिला शायद केवल तारीफ नहीं चाहती बल्कि सम्मान चाहती है। उसे यह एहसास चाहिए कि समाज उसे बराबरी की नजर से देखता है। क्योंकि सच यही है कि किसी महिला को खूबसूरत कहना अच्छी बात हो सकती है लेकिन उसकी इज्जत करना उससे भी कहीं ज्यादा खूबसूरत है।

नारी सशक्तिकरण में नई मिसाल बना मध्यप्रदेश: स्वास्थ्य, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण की योजनाओं से बदल रही महिलाओं की तस्वीर

भोपाल । मध्यप्रदेश में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बीते कुछ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने महिलाओं और बालिकाओं के स्वास्थ्य पोषण सुरक्षा संरक्षण और आर्थिक आत्मनिर्भरता को केंद्र में रखकर अनेक योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू किया है। इन योजनाओं के सकारात्मक परिणाम अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगे हैं जिसके चलते मध्यप्रदेश धीरे धीरे नारी सशक्तिकरण के क्षेत्र में देश के लिए एक रोल मॉडल बनकर उभर रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी देश की प्रगति को समाज के चार प्रमुख वर्गों की उन्नति से जोड़ते हुए महिलाओं के सशक्तिकरण को प्राथमिकता देने की बात कही है। इसी दृष्टि से मध्यप्रदेश सरकार ने महिला कल्याण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को मजबूत करने की रणनीति अपनाई है। प्रदेश में महिलाओं और बच्चों के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से देवी अहिल्या नारी सशक्तिकरण अभियान सहित कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं जिनका लाभ लाखों महिलाएं और बालिकाएं उठा रही हैं। प्रदेश में एकीकृत बाल विकास परियोजनाओं के तहत 453 परियोजनाओं के अंतर्गत 97 हजार 882 आंगनवाड़ी केंद्र स्वीकृत हैं जिनके माध्यम से लगभग 84 लाख हितग्राहियों को सेवाएं दी जा रही हैं। आंगनवाड़ियों में जियो फेंसिंग आधारित ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली लागू की गई है जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है। साथ ही प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है जहां आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी ऑनलाइन प्रणाली से शुरू की गई है। वित्तीय वर्ष 2026 27 में सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 कार्यक्रम के लिए 3 हजार 768 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। पोषण 2.0 के अंतर्गत मातृ एवं शिशु पोषण गंभीर कुपोषित बच्चों के उपचार और निगरानी के लिए पोषण ट्रैकर ऐप के माध्यम से आंगनवाड़ियों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। प्रदेश में फेस मैचिंग प्रणाली के जरिए 94 प्रतिशत हितग्राहियों का सत्यापन किया जा चुका है जो देश में सर्वाधिक है। पूरक पोषण आहार कार्यक्रम के तहत टेक होम राशन और गर्म पका भोजन योजना के माध्यम से 60 लाख से अधिक बच्चों गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को लाभ मिल रहा है। इस वर्ष के बजट में पोषण आहार के लिए 1 हजार 150 करोड़ और पोषण अभियान के लिए 250 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। मुख्यमंत्री बाल आरोग्य संवर्धन कार्यक्रम के माध्यम से वर्ष 2025 में पंजीकृत 7.37 लाख गंभीर कुपोषित बच्चों में से 3.71 लाख बच्चों को सामान्य पोषण स्तर तक लाया गया है। झाबुआ जिले के मोटी आई नवाचार को प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार भी मिल चुका है। प्रदेश में 5 हजार 263 नए आंगनवाड़ी भवनों का निर्माण कार्य जारी है वहीं लगभग 38 हजार 900 आंगनवाड़ी भवनों में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने की योजना भी प्रस्तावित की गई है। भवन निर्माण और आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए 459 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना प्रदेश की सबसे बड़ी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर योजना बन चुकी है। वर्तमान में 1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह 1 हजार 500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। जून 2023 से फरवरी 2026 तक इस योजना के तहत 52 हजार 305 करोड़ रुपये महिलाओं के खातों में सीधे ट्रांसफर किए जा चुके हैं। वित्तीय वर्ष 2026 27 में इस योजना के लिए 23 हजार 882 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। वहीं लाड़ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत अब तक 52.56 लाख बालिकाओं का पंजीयन हो चुका है जिसके लिए 1 हजार 801 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। महिला सुरक्षा और संरक्षण के क्षेत्र में भी प्रदेश में महत्वपूर्ण पहल की गई है। राज्य में 57 वन स्टॉप सेंटर संचालित हैं जबकि 8 नए केंद्रों को स्वीकृति दी गई है। महिला हेल्पलाइन 181 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के माध्यम से इस वर्ष 1.43 लाख से अधिक मामलों का निराकरण किया गया है। भोपाल और इंदौर में सखी निवास संचालित हैं तथा 8 नए वर्किंग वूमन हॉस्टल स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा शक्ति सदन शौर्या दल योजना और समेकित बाल संरक्षण योजना के माध्यम से हजारों महिलाओं और बच्चों को संरक्षण और पुनर्वास सहायता प्रदान की जा रही है। महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश महिला वित्त एवं विकास निगम के माध्यम से हजारों स्व सहायता समूहों और महिला उद्यमियों को आर्थिक सहायता और ब्याज अनुदान दिया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026 27 के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग को कुल 32 हजार 730 करोड़ 45 हजार रुपये का बजट आवंटित किया गया है जो महिलाओं और बच्चों के कल्याण के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इन योजनाओं और प्रयासों के चलते मध्यप्रदेश में महिलाएं आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं।

लाड़ली बहना योजना से बदली मंजू यादव की किस्मत: घर से शुरू किया सिलाई काम, आज चला रहीं रोजगार देने वाला सेंटर

भोपाल ।मध्यप्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभर रही है। इस योजना के माध्यम से कई महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। नर्मदापुरम जिले की रहने वाली मंजू यादव इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर सामने आई हैं जिन्होंने योजना से मिली आर्थिक सहायता का सदुपयोग करते हुए अपनी जिंदगी की दिशा ही बदल दी। आज वे न केवल आत्मनिर्भर बन चुकी हैं बल्कि अपने प्रयासों से अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार कर रही हैं। नर्मदापुरम जिले के वार्ड क्रमांक 31 दीवान चौक ग्वालटोली निवासी 30 वर्षीय मंजू यादव कभी सीमित आय और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच अपने परिवार का सहारा बनने का सपना देखती थीं। आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण उनके लिए यह सपना पूरा करना आसान नहीं था लेकिन मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने उनके जीवन में उम्मीद की एक नई किरण जगाई। जून 2023 से उन्हें इस योजना के तहत नियमित आर्थिक सहायता मिलने लगी जिससे उन्हें अपने भविष्य के लिए कुछ नया करने का आत्मविश्वास मिला। मंजू यादव ने योजना से प्राप्त राशि को खर्च करने के बजाय सोच समझकर उसका उपयोग करने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने घर से ही सिलाई का छोटा सा काम शुरू किया। शुरुआत में उन्होंने सीमित संसाधनों के साथ काम शुरू किया लेकिन उनकी मेहनत और लगन ने धीरे धीरे इस छोटे से प्रयास को एक सफल व्यवसाय में बदल दिया। आसपास के लोगों से कपड़ों की सिलाई के ऑर्डर मिलने लगे और उनका काम लगातार बढ़ने लगा। फरवरी 2026 तक मंजू यादव को योजना की 33वीं किश्त सहित कुल 43 हजार 500 रुपये की सहायता राशि प्राप्त हो चुकी है। इस आर्थिक सहयोग और सिलाई के काम से हुए मुनाफे को उन्होंने अपने व्यवसाय के विस्तार में लगाया। उन्होंने सिलाई के लिए अतिरिक्त मशीनें खरीदीं और धीरे धीरे अपने काम को बढ़ाते हुए एक सिलाई सेंटर की शुरुआत कर दी। आज उनके सेंटर में पांच सिलाई मशीनें संचालित हो रही हैं और काम भी नियमित रूप से मिल रहा है। मंजू यादव की इस पहल का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि उन्होंने केवल खुद को ही आत्मनिर्भर नहीं बनाया बल्कि अपने सिलाई सेंटर के माध्यम से अन्य महिलाओं को भी रोजगार का अवसर प्रदान किया है। उनके साथ काम करने वाली कई महिलाएं अब नियमित आय अर्जित कर रही हैं जिससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति भी बेहतर हो रही है। मंजू यादव भावुक होकर बताती हैं कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने उनके जीवन में नया आत्मविश्वास और उम्मीद जगाई है। इस योजना ने उन्हें अपने सपनों को साकार करने का अवसर दिया। आज वे गर्व के साथ अपने परिवार की जिम्मेदारियों में योगदान दे रही हैं और अपने काम के माध्यम से समाज में एक सकारात्मक संदेश भी दे रही हैं कि सही अवसर और थोड़े से सहयोग से महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं। उनकी सफलता की कहानी यह दर्शाती है कि यदि योजनाओं का सही तरीके से लाभ उठाया जाए तो वे न केवल व्यक्तिगत जीवन में बदलाव ला सकती हैं बल्कि समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन की राह खोल सकती हैं।

सीएम रेखा गुप्ता का संदेश: बेटियों को अवसर और आजादी दें, समाज और परिवार भी उठाएं जिम्मेदारी

नई दिल्ली। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने महिला बुद्धिजीवियों के राष्ट्रीय सम्मेलन ‘भारती-नारी से नारायणी’ को संबोधित करते हुए कहा कि महिला सशक्तीकरण सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर परिवार और समाज की जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं के लिए लगातार योजनाएं चला रही है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और अपने पैरों पर खड़ी हो सकें, लेकिन समाज को भी बेटियों को अवसर और आजादी देने की जिम्मेदारी उठानी होगी। सीएम रेखा गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने लाल किले से खुले में शौच बंद करने और शौचालय बनाने की बात की। इससे पहले समाज और राजनीति में इसे गंभीरता से नहीं लिया गया था। प्रधानमंत्री की पहल से लाखों शौचालय बनाए गए और महिलाओं का जीवन आसान हुआ। पहले महिलाओं को घर में अंगीठी पर लकड़ी जलानी पड़ती थी, लेकिन अब गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे उनका जीवन सुरक्षित और आरामदायक हुआ। उन्होंने महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक अधिकार भी दिए जाने का जिक्र किया। चाहे बैंक अकाउंट खोलना हो, मुद्रा लोन लेना हो, महिलाओं के नाम घर देना हो या राजनीति में 33 प्रतिशत आरक्षण देना हो, सरकार और प्रधानमंत्री मोदी ने महिलाओं के लिए नए रास्ते खोले हैं। रेखा गुप्ता ने दिल्ली सरकार की नई योजना ‘लखपति बिटिया योजना’ का भी उल्लेख किया। इस योजना के तहत बेटी की शिक्षा को ग्रेजुएशन तक पूरा करने पर उसके खाते में जन्म से लेकर हर पड़ाव पर पैसा जमा किया जाएगा, जिससे लगभग सवा लाख रुपये तक की राशि बेटी को मिल सकेगी और वह आत्मनिर्भर बन सके। पहले यह योजना केवल दसवीं तक ही सीमित थी। सीएम ने समाजसेवा और महिलाओं की मदद के लिए काम करने वाले संगठनों, जैसे सेविका समिति का समर्थन करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने माता-पिता से कहा कि अपनी बेटियों को हर अवसर और निर्णय लेने की आजादी दें। जो मौके आपको नहीं मिले, वह अपनी बेटी को जरूर दें। जब हर मां अपनी बेटी के लिए रास्ता बनाएगी, तो समाज भी अपने आप ऊंचाइयों तक पहुंचेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला सशक्तीकरण केवल सरकारी योजनाओं पर निर्भर नहीं है। परिवार, समाज और संगठन मिलकर ही महिलाओं को वास्तविक अवसर और आजादी दे सकते हैं। तभी कोई महिला अपनी क्षमता और सोच के अनुसार किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सकती है। सीएम रेखा गुप्ता का यह संदेश महिलाओं के अधिकारों और समाज की भूमिका को उजागर करता है और हर स्तर पर महिला सशक्तीकरण की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

नारी सम्मान ही सभ्य, सुसंस्कृत होने की पहचान

विनोद बब्बरयस्य पूज्यंते नार्यस्तु तत्र रमन्ते देवता  अथार्त जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। इसी प्रकार कहा गया- ‘न गृहं गृह मित्याहु गृहिणी गृह मुच्यते’.  सच ही है परिवार संस्था की संकल्पना नारी के बिना व्यर्थ  है। महल हो या टूटी झोंपड़ी गृहलक्ष्मी के प्रवेश से ही घर बनता है। परिवार के विस्तार, पोषण, विकास का प्रश्न हो या हास- उल्लास, सृजन, संयम, धर्म, परोपकार का, नारी नायिका की भूमिका में है। पुरुष जीविका अर्जन के नाम पर अपनी जिम्मेवारी से पल्ला झाड़ सकते हैं परंतु परिवार को सुसंस्कृत, परिष्कृत और समुन्नत बनाने के अपने उत्तरदायित्व को नारी कभी नहीं भूलती। नारी को परिवार का हृदय और प्राण कहा जाता है तो समाज का सेतुबंध भी नारी ही है। उदारचेत्ता और सुव्यवस्था की अभ्यस्त सुसंस्कारी देवी अपनी कोमलता, संवेदना, करुणा, स्नेह और ममता के स्वाभाविक गुणों से परिवार की जिम्मेवारी निभाते हुए सामाजिक रिश्तों को भी निभाती है। इतिहास साक्षी है, मातृशक्ति ने सदैव अपनी संतान में मातृभूमि के प्रति श्रद्धा के संस्कार विकसित किये। माता जीजाबाई को कौन नहीं जानता जिसने वीर शिवा को छत्रपति बनाया था। हाड़ा रानी ने अपने नवविवाहित पति को मातृभूमि के प्रति कर्तव्य याद दिलाने के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान प्रस्तुत किया। पद्मीनी संग हजारों देवियों ने जौहर कर धर्म रक्षा का स्वर्णिम अध्याय लिखा। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने इतिहास पर ऐसी छाप छोड़ी की हर नारी में उनकी छवि तलाशी जाती है क्योंकि कोमल हृदय देवी आवश्यकता पड़ने पर चंडी का रूप भी धारण कर सकती है। स्वतंत्रता संग्राम में कित्तूर कर्नाटक की रानी चेनम्मा से लखनऊ की बेगम हजरत महल, मध्यप्रदेश के रामगढ़ की रानी अवन्तीबाई, मुंडभर की महावीरी देवी सहित असंख्य वीरांगनाओं ने अपने युद्ध कौशल से दुश्मन के छक्के छुड़ाये। इतिहास साक्षी है, 1857 की क्रान्ति के दौरान दिल्ली के आस-पास के गाँवों की 255 महिलाओं ने क्रांति की मशाल को अपने प्राण देकर भी बूझने न दिया। इन्हें अंग्रेजों ने मुजफ्फरनगर में गोली से उड़ा दिया गया था। इतना ही नहीं, स्वामी श्रद्धानन्द की पुत्री वेद कुमारी और आज्ञावती ने महिलाओं को संगठित कर अंग्रेजी वस्तुओं के बहिष्कार और उनकी होली जलाने का अभियान शुरु किया। नागा रानी गुइंदाल्यू, दुर्गा भाभी, सरोजिनी नायडू सहित अनेक वीरांगनाओं के अनन्य राष्ट्रप्रेम, अदम्य साहस, अटूट प्रतिबद्धता की गौरवशाली दास्तान हमारी मातृशक्ति के इस रूप से भी साक्षात्कार कराती है। नारी ने समाज को अपना सब दिया लेकिन भटके हुए लोगों ने उसके साथ न्याय नहीं किया। 1947 में धर्म के आधार पर देश विभाजन के समय हमारी मातृशक्ति को अपमान और अपार कष्ट सहने पड़े। यही नहीं,  एक काल विशेष अक्रांताओं द्वारा नारी अपहरण, हरम, हत्या, पर्दा, सौतन, जबरन धर्मांतरण से आरंभ हुआ। इससे कालांतर में कुछ कुरीतियां पनपी। यथा नवजात कन्या की हत्या, बाल विवाह, सती प्रथा, देवदासी प्रथा, अशिक्षा, विधवा का अभिशाप। कामुक सोच के कारण नारी को सुरक्षित पिंजरे में बंद करने वाली कुप्रथाएं हावी हो गई। आखिर राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने अकारण तो नहीं कहा होगा- अबला जीवन तेरी हाय यही कहानी! आंचल में है दूध और आंखों में पानी।  कारण कुछ भी हो लेकिन एक काल विशेष से नारी शोषित रही है। परिस्थितियों ने ऐसा दबाव बनाया कि वह लगातार डरी, सहमी रही। इसी बीच कुछ क्रूर बादशाहों और समाजों ने नारी श्रद्धा और सम्मान को ‘सामान’ बना दिया। विकृतियों ने ऐसा विकराल रूप धारण किया कि राजाओं को जन्म देने वाली नारी की जिंदगी का फैसला करते हुए भी उससे बात तक नहीं जाती थी। ज्ञातव्य है कि गुरु नानक देव जी ने नारी निंदा करने वालों को चेताते हुए कहा है – सो क्यों मंदा आखिए जिस जम्मे राजान । नामधारी संप्रदाय के संस्थापक सद्गुरु राम सिंह जी ने सर्वप्रथम बेटियों के जीवन के अधिकार के पक्ष में कुड़ी मार से नहीं, व्यवहार को जन जन तक पहुंचते हुए ऐसे राक्षसों से संबंध न रखने का आह्वान किया था ! कल नहीं, आज भी कन्या भ्रूण हत्या होती है। पर्दाप्रथा, दहेज या बालविवाह जैसी कुप्रथाएं अभी कायम है।  एक संप्रदाय विशेष में हलाला जैसी घृणित परंपराएं आज भी कायम है। उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के विपरीत तलाक के बाद महिलाओं  को उनके अधिकारों से वंचित रखा गया है। हर काल में भेदभाव और अन्याय की स्थिति को बदलने और नारी को सम्मान दिलाने वाले कुछ महापुरुष हुए हैं जिन्होंने अपने-अपने ढंग से ऐसी कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठा नारी सशक्तिकरण का उद्घोष किया। इसमें कोई संदेह नहीं कि आज स्थिति बहुत बदली है। आज भारत की नारी वायुसेना के लड़ाकू विमान उड़ाने से राजनीति, प्रशासन,  व्यवसाय और शिक्षा के क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण स्थान बना चुकी है। देश के सर्वोच्च राष्ट्रपति के पद को आज आदिवासी समाज से संबंध रखने वाली एक देवी सुशोभित कर रही है। तो इससे पूर्व देश की प्रधानमंत्री  और अनेक राज्यों में मुख्यमंत्री भी नारी रह चुकी हैं। देश की राजधानी दिल्ली की वर्तमान मुख्यमंत्री भी एक नारी है। यह सर्वाधिक है कि मोदी सरकार के प्रयासों से संसद और विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण विधेयक नई संसद  में सर्वप्रथम सर्वसम्मति से पारित होकर कानून बना जो जनगणना व नए परिसीमन के बाद शीघ्र लागू होगा। स्वाभाविक है इस क्रांतिकारी परिवर्तन के बाद लोकतंत्र और प्रशासन की सूरत भी बदलेगी।  पंचायतों में महिलाओं को पचास फीसदी आरक्षण पहले से ही प्राप्त है। इसके बावजूद देश के ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में बदलाव की गति अत्यंत धीमी है। उसपर कन्या भ्रूण हत्या गंभीर असंतुलन पैदा कर रही है। यह स्थिति तब हैजबकि भारतीय संस्कृति के मूल आधार वेदों में नारी जाति को उच्च स्थान दिया गया है। नारी के प्रति ऐसा सम्मान और स्थान विश्व के किसी भी मत की पुस्तक में देखने को नहीं मिलता। महिला दिवस की सार्थकता तब है जब राजनीति और समाज की धारणा बदलें। नारी को उसका खोया सम्मान, अधिकार मिलें। अन्यथा ऐसे दिवस केवल शाब्दिक कर्मकांड बनकर रह जाएगे। ध्यान रहे अपनी मातृशक्ति के अशिक्षित, अस्वस्थ, असंतुलित, अपमानित, असमान रहते कोई भी समाज न तो विकास कर सकता है और न ही विश्व में सम्मान प्राप्त कर सकता है। हॉ कृतघन जरूर कहला सकता है। देश की सभी बेटियों को उच्चतम स्तर तक की शिक्षा तथा अन्य सुविधाएं बिना शुल्क, बिना भेदभाव दी जानी चाहिए । महिलाओं से संबंधित अपराधों की

जूट बैग, सिलाई और हस्तशिल्प से महिलाओं का आत्मनिर्भर सफर, प्रधानमंत्री योजना कारगर

उत्तराखंड के पर्वतीय जनपद चमोली में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक सकारात्मक पहल देखने को मिल रही है। भारत सरकार की ‘प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना’ के तहत महिलाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन रही हैं और अपना व्यवसाय चला रही हैं। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना और उन्हें समाज में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ाना है। चमोली में इस योजना के माध्यम से अब तक 200 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को जूट बैग निर्माण, सिलाई-कढ़ाई, हस्तशिल्प और अन्य उपयोगी उत्पाद बनाने की विधिवत जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से या व्यक्तिगत स्तर पर अपने व्यवसाय शुरू कर रही हैं। इससे न सिर्फ उनकी आय में वृद्धि हुई है, बल्कि उनके आत्मविश्वास में भी इजाफा हुआ है। महिलाओं का कहना है कि इस योजना ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया है। अब वे अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी में सक्रिय योगदान दे रही हैं। प्रशिक्षण से महिलाएं छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू कर रही हैं और नियमित आमदनी प्राप्त कर रही हैं। इसके साथ ही उन्हें उत्पाद की गुणवत्ता, पैकेजिंग और विपणन से संबंधित जानकारी भी दी जा रही है, ताकि उनका उत्पाद व्यापक बाजार में पहुंच सके। लाभार्थी सीमा नेगी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में बताया कि उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान मुफ्त सिलाई सीखी और अब सिलाई मशीन से जूट बैग बना रही हैं। इसके अलावा वे महिलाओं के सूट और ब्लाउज सिलने का काम भी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में सरकार की यह पहल बहुत महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षण लेने के बाद महिलाएं आत्मनिर्भर हो रही हैं और किसी पर निर्भर होने की जरूरत नहीं है। चमोली में इस योजना के तहत प्रशिक्षण प्राप्त महिलाओं ने अपनी मेहनत और लगन से छोटे व्यवसाय स्थापित कर लिए हैं। जूट बैग और हस्तशिल्प उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग है, जिससे उन्हें नियमित आय मिल रही है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और परिवार में उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। महिलाएं अब अपने व्यवसाय को विकसित कर रही हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का यह कदम महिलाओं के जीवन में नई उम्मीद और उत्साह लेकर आया है। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है, बल्कि समाज में उनके स्थान और सम्मान में भी वृद्धि हुई है। प्रशिक्षण से प्राप्त कौशल ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का मार्ग दिखाया है और उन्होंने इसे पूरी लगन से अपनाया है। चमोली में महिलाओं की इस पहल से यह स्पष्ट होता है कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में महिलाओं के सशक्तिकरण का एक प्रभावी माध्यम बन रही है। यह योजना न सिर्फ रोजगार सृजन कर रही है, बल्कि ग्रामीण समाज में महिलाओं की भूमिका को मजबूत कर रही है और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

MP BUDGET: एमपी बजट 2026‑27: 8वीं तक टेट्रा पैक दूध फ्री, 15,000 शिक्षक भर्ती, लाड़ली बहनों के लिए 23,882 करोड़ का बड़ा प्रावधान

  MP BUDGET:  भोपाल । मध्य प्रदेश विधानसभा में बुधवार को वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने वित्तीय वर्ष 2026‑27 का बजट ₹4,38,317 करोड़ के प्रावधान के साथ पेश किया, जिसे सरकार गरीब, महिला, युवा, किसान और इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रित बताया। इस बजट में कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है और शिक्षा, महिला सशक्तिकरण व पोषण जैसे कई बड़े लाभार्थी कदम उठाए गए हैं। सबसे बड़ा ऐलान लाड़ली बहना योजना के लिए ₹23,882 करोड़ के भारी प्रावधान का रहा, जिससे महिलाओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता जारी रहेगी। योजना के तहत लगभग 1.25 करोड़ महिलाएं प्रतिमाह ₹1,500 की राशि पा रही हैं और सरकार ने इसे प्राथमिकता देने की बात कही। शिक्षा क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठाया गया है। सरकार ने घोषणा की कि 8वीं कक्षा तक के सभी बच्चों को सरकारी स्कूलों में टेट्रा पैक दूध मुफ्त मिलेगा, जिससे बच्चों के पोषण स्तर में सुधार होगा और स्कूल उपस्थिति भी बढ़ेगी। इसके साथ ही 15,000 नए शिक्षकों की भर्ती की घोषणा कर शिक्षा तंत्र को और मजबूत किए जाने का लक्ष्य रखा गया। बजट में 5,700 वर्किंग वुमन हॉस्टल बनाये जाने का प्रावधान किया गया है, जिससे कामकाजी महिलाओं को बेहतर आवास सुविधाएं मिल सकें, और पंचायत एवं ग्रामीण विकास के लिए लगभग ₹40,062 करोड़ आवंटित किया गया है, जो ग्रामीण क्षेत्रों के विकास व बुनियादी ढांचे के विस्तार की दिशा में कदम है। सरकार ने किसानों के लिए भी बड़े ऐलान किए। बजट में 1 लाख किसानों को सोलर पंप उपलब्ध कराने की घोषणा की गई है, जिससे विद्युत लागत बचाने और सिंचाई क्षमताओं का विस्तार करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा जी‑राम‑जी योजना और पीएम जनमन योजना के लिए भी करोड़ों रुपये का प्रावधान किया गया है। वित्त मंत्री ने बजट भाषण में कहा कि यह बजट “PM के सपनों को साकार करने वाला बजट” और हर नारी को न्याय देने वाला है, जिससे प्रदेश को युवा, रोजगार और महिला सशक्तिकरण की नई दिशा मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि यह पहला “रोलिंग बजट” है, जिसमें अगले तीन वित्तीय वर्षों के लिए योजनाएं शामिल की गई हैं। बजट पेश करते समय विधानसभा में विपक्ष के कुछ विधायकों ने विधायक निधि नहीं बढ़ाये जाने पर हंगामा भी किया। कांग्रेस विधायकों ने कर्ज बढ़ने की चिंता जताते हुए खाली डिब्बे और गुल्लक लेकर विरोध प्रदर्शन किया और बजट पर सवाल उठाये। कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश का यह बजट शिक्षा, पोषण, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास पर बड़ी योजनाओं के साथ अर्थव्यवस्था तथा सामाजिक कल्याण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वाकांक्षी रूपरेखा पेश करता है।

लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने श्रीमती सरोजिनी नायडू की जयंती पर दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में सम्मान और स्मरण

नई दिल्ली । आज 13 फरवरी 2026 को संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने हमारे देश की महान स्वतंत्रता सेनानी कवयित्री तथा समाज सुधारक श्रीमती सरोजिनी नायडू की जयंती के अवसर पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित कर गहरी श्रद्धा व्यक्त की। इस भावपूर्ण कार्यक्रम में राज्य सभा के उपसभापति श्री हरिवंश कई संसद सदस्य पूर्व सदस्य और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे और उन्होंने भी सरोजिनी नायडू को याद करते हुए उनके योगदान को सम्मान दिया। लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि सरोजिनी नायडू ने न केवल स्वतंत्रता संग्राम में एक प्रखर भूमिका निभाई बल्कि उन्होंने अपनी कविताओं वक्तृत्व और महिला सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य किया। उन्हें भारत कोकिला के नाम से भी संबोधित किया जाता है जो उनकी साहित्यिक प्रतिभा और देशभक्ति की भावना का प्रतीक है। उपस्थित गणमान्य लोगों की मौजूदगी से सजी संविधान सदन की केंद्रीय कक्ष में पुष्पांजलि अर्पण की यह रस्म बेहद गंभीर और सम्मानपूर्वक संपन्न हुई। लोक सभा महासचिव श्री उत्पल कुमार सिंह ने भी श्रीमती सरोजिनी नायडू के चित्र पर श्रद्धांजलि दी जबकि कई सांसदों ने उनके जीवन विचारों और सामाजिक योगदान पर प्रकाश डाला। सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी 1879 को हैदराबाद में हुआ था। वे एक प्रतिभाशाली वक्ता सुप्रसिद्ध कवयित्री और प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थीं जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की। उनके नेतृत्व लेखन और देशप्रेम ने महिलाओं के शिक्षा और सशक्तिकरण को एक नई दिशा प्रदान की। उन्होंने दिल्ली में लेडी इरविन कॉलेज फॉर विमेन की स्थापना की जिससे उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा मिला। स्वतंत्रता के बाद श्रीमती सरोजिनी नायडू ने संयुक्त प्रांत अब उत्तर प्रदेश की पहली महिला राज्यपाल के रूप में भी सेवा की। उनका जीवन देश की सेवा के प्रति समर्पण और समाज की भलाई के लिए निरंतर प्रयास का आदर्श रहा है। वे महिलाओं के अधिकारों और समानता की प्रबल समर्थक थीं जिनके विचार आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। विशेष रूप से यह भी उल्लेखनीय है कि पहले भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 16 दिसंबर 1959 को संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में सरोजिनी नायडू के चित्र का अनावरण किया था जो उनके योगदान और स्मरण को स्थायी रूप से सम्मानित करता है। इस अनुष्ठान में सदन के नेताओं ने उनके साहित्यिक सामाजिक और राजनीतिक योगदान को याद करते हुए कहा कि सरोजिनी नायडू का जीवन और कार्य भारतीय जनता के लिए आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं। इस कार्यक्रम ने न केवल उनके स्मरण को सम्मान दिया बल्कि यह याद दिलाया कि स्वतंत्रता और सामाजिक समानता के प्रति उनके आदर्श आज भी उतने ही प्रासंगिक और प्रेरणादायी हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारत कोकिला सरोजिनी नायडू की जयंती पर दी श्रद्धांजलि देश सेवा, साहित्य और महिला सशक्तिकरण की अद्वितीय प्रतिष्ठा को किया नमन

भोपाल । मध्य प्रदेश स्वतंत्रता सेनानी कवयित्री समाजसेवी और राजनीति की प्रखर हस्ती भारत कोकिला सरोजिनी नायडू की जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज उन्हें गहन श्रद्धा और सम्मान के साथ नमन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरोजिनी नायडू ने अपने जीवन को न केवल भारत की आजादी के संघर्ष के लिए समर्पित किया बल्कि साहित्यिक प्रतिभा और महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में भी अपरिमेय योगदान दिया। मुख्यमंत्री के अनुसार सरोजिनी नायडू न केवल एक बड़ा कवि और स्वतंत्रता सेनानी थीं बल्कि उन्होंने महिलाओं को शिक्षा नेतृत्व और सामाजिक भागीदारी के क्षेत्र में आगे आने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि सरोजिनी नायडू का जीवन आज भी प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है और उनकी कविताएँ तथा विचार सदैव राष्ट्र सेवा की भावना को उज्जवल बनाते रहेंगे। चर्चाओं में आज सरोजिनी नायडू का नाम भारत की कोकिला के रूप में विदित है जिन्होंने अंग्रेज़ों के शासन के विरोध में अहिंसा और सत्याग्रह के मार्ग पर अग्रणी भूमिका निभाई। उन्होंने कांग्रेस के कई महत्वपूर्ण अधिवेशनों में भाग लिया और 1925 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्रथम महिला अध्यक्ष भी बनीं। स्वतंत्रता के पश्चात् वे उत्तर प्रदेश की पहली महिला राज्यपाल भी रहीं और महिला सशक्तिकरण के प्रतीक के रूप में याद की जाती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विशेष रूप से कहा कि सरोजिनी नायडू की कविताओं में देशभक्ति मानवीय संवेदनाओं और महिला अधिकारों की गूढ़ अभिव्यक्ति है जो आज भी युवाओं के हृदय में उमंग भरती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं के उत्थान शिक्षा और समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और सरोजिनी नायडू के आदर्शों को अपनाते हुए हर स्तर पर महिला सशक्तिकरण को और भी व्यापक बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि सरोजिनी नायडू के विचार उनकी लेखनी और मातृभूमि के प्रति उनका समर्पण हम सबके लिए प्रेरणा के अनंत स्रोत हैं। आज हम उनके बलिदान और योगदान को नमन करते हैं और आशा करते हैं कि आने वाली पीढ़ियाँ भी उनके सिद्धांतों से प्रेरित होंगी।