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China US summit: शी जिनपिंग की सीट से उठते ही फाइलें देखने लगे ट्रंप! चीन समिट का VIDEO वायरल, सोशल मीडिया पर मचा बवाल

China US summit: नई दिल्ली। डोनाल्ड ट्रम्प एक बार फिर अपने व्यवहार को लेकर अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। चीन दौरे के दौरान उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह कथित तौर पर Xi Jinping के सामने रखे दस्तावेजों और डायरी को देखने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद इंटरनेट पर बहस छिड़ गई है और लोग ट्रंप के व्यवहार पर सवाल उठा रहे हैं। वायरल वीडियो में दिखाई देता है कि अमेरिका-चीन बैठक के दौरान शी जिनपिंग अपनी सीट से कुछ देर के लिए उठते हैं। इसी बीच ट्रंप सामने रखे दस्तावेजों की तरफ झुकते हैं और एक नोटबुक या डायरी जैसी चीज को देखने लगते हैं। वीडियो में मौजूद कुछ अमेरिकी अधिकारी भी इस दौरान असहज दिखाई देते हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप वास्तव में क्या पढ़ रहे थे और वह दस्तावेज निजी थे या बैठक से जुड़े आधिकारिक कागज।   🚨⚡️ SPOTTED: Trump caught sneaking a peek at Xi Jinping’s private notebook during a Beijing banquet while Xi stepped away! 🤣 pic.twitter.com/MLms4D27SC — RussiaNews 🇷🇺 (@mog_russEN) May 15, 2026   सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस वीडियो को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई यूजर्स ने इसे “डिप्लोमैटिक प्रोटोकॉल के खिलाफ” बताया, जबकि कुछ लोगों ने मजाकिया अंदाज में कहा कि ट्रंप “चीन के सीक्रेट” जानने की कोशिश कर रहे थे। कुछ पोस्ट्स में ट्रंप के व्यवहार को लेकर उनकी कार्यशैली और सार्वजनिक आचरण पर भी सवाल उठाए गए। बांग्लादेशी पत्रकार Salah Uddin Shoaib Choudhury ने भी इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इतने संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऐसा व्यवहार कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने इसे कूटनीतिक माहौल के लिहाज से असामान्य बताया। हालांकि अब तक अमेरिका या चीन की ओर से इस वीडियो को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। यह भी साफ नहीं हो पाया है कि वीडियो किस संदर्भ में रिकॉर्ड हुआ और ट्रंप वास्तव में क्या देख रहे थे। बावजूद इसके, यह क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और दुनियाभर में चर्चा का विषय बनी हुई है।

शी जिनपिंग के ‘पतनशील अमेरिका’ वाले बयान पर ट्रंप की मुहर, बोले- बाइडेन ने देश को कमजोर कर दिया

नई दिल्ली। डोनाल्ड ट्रम्प  ने चीन दौरे के दौरान बड़ा बयान देते हुए कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा अमेरिका को “पतनशील राष्ट्र” कहे जाने पर वह कुछ हद तक सहमत हैं। हालांकि ट्रंप ने साफ किया कि यह टिप्पणी मौजूदा अमेरिकी स्थिति पर नहीं, बल्कि पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल की नीतियों पर लागू होती है। नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि उनकी बीजिंग यात्रा बेहद सफल रही और शी जिनपिंग ने कई मुद्दों पर उनकी सराहना भी की। ट्रंप के मुताबिक, चीन के राष्ट्रपति ने अमेरिका की स्थिति को लेकर जो टिप्पणी की, उसका इशारा बाइडेन प्रशासन की आर्थिक और विदेश नीति की ओर था। ट्रंप ने कहा कि बाइडेन सरकार के दौरान अमेरिका को आर्थिक कमजोरी, वैश्विक दबाव और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नेतृत्व संकट का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि गलत नीतियों की वजह से अमेरिका की वैश्विक छवि कमजोर हुई और चीन जैसे देशों को बढ़त मिली। ट्रंप ने दावा किया कि उनकी वापसी के बाद अमेरिका फिर से मजबूत स्थिति में आ रहा है। हालांकि यह साफ नहीं हो पाया कि ट्रंप ने शी जिनपिंग के किस बयान का जिक्र किया। माना जा रहा है कि वह चीन-अमेरिका संबंधों पर हुई बंद कमरे की बातचीत या “थ्यूसीडाइड्स ट्रैप” से जुड़े बयान की ओर इशारा कर रहे थे। अपनी मुलाकात के दौरान शी जिनपिंग ने कहा था कि दुनिया की स्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अमेरिका और चीन के रिश्तों का संतुलित रहना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान अमेरिकी राजनीति में नया विवाद खड़ा कर सकता है, क्योंकि उन्होंने पहली बार सार्वजनिक रूप से चीन की आलोचनात्मक टिप्पणी को सही ठहराने जैसा संकेत दिया है। वहीं रिपब्लिकन खेमे में इसे बाइडेन प्रशासन पर सीधा हमला माना जा रहा है।

ट्रंप का बड़ा दावा: चीन अब ईरान को नहीं देगा हथियार, शी जिनपिंग से बातचीत में बनी सहमति

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ईरान को सैन्य उपकरण नहीं भेजने पर सहमति जताई है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव बना हुआ है। माना जा रहा है कि यदि चीन हथियारों की सप्लाई रोकता है तो इसका बड़ा रणनीतिक असर पड़ सकता है। बीजिंग बैठक के बाद ट्रंप का बयान13 से 15 मई के बीच चीन दौरे पर पहुंचे ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि बीजिंग में हुई द्विपक्षीय बैठक के दौरान ईरान के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि शी जिनपिंग ने स्पष्ट किया है कि चीन ईरान को सैन्य उपकरण उपलब्ध नहीं कराएगा। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “उन्होंने कहा कि वे ईरान को हथियार या सैन्य उपकरण नहीं देंगे। यह बहुत बड़ा कदम है।” तेल कारोबार जारी रखना चाहता है चीनहालांकि ट्रंप ने यह भी कहा कि चीन ईरान से तेल खरीद जारी रखना चाहता है। उनके मुताबिक चीन ने साफ किया है कि वह ईरानी तेल आयात को बंद नहीं करेगा, क्योंकि उसकी ऊर्जा जरूरतों के लिए यह महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट्स के अनुसार चीन ईरान के तेल निर्यात का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है। अमेरिका-चीन आर्थिक एवं सुरक्षा समीक्षा आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 2025 और 2026 की पहली तिमाही में चीन ने प्रतिदिन करीब 14 लाख बैरल ईरानी तेल खरीदा। यह चीन के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 12 से 15 प्रतिशत हिस्सा रहा। अमेरिका-चीन के बीच तेल पर भी चर्चाव्हाइट हाउस की ओर से जानकारी दी गई कि ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच अमेरिका से तेल खरीद के मुद्दे पर भी बातचीत हुई। इससे पहले ट्रेड वॉर के दौरान चीन ने अमेरिकी कच्चे तेल पर 20 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था, जिसके बाद मई 2025 में उसने अमेरिकी तेल खरीद लगभग बंद कर दी थी। बोइंग को मिल सकता है बड़ा ऑर्डरट्रंप ने बातचीत के दौरान यह दावा भी किया कि चीन अमेरिकी विमान निर्माता बोइंग से 200 विमान खरीदने पर सहमत हो गया है। उन्होंने कहा कि यह डील बोइंग के लिए बड़ी उपलब्धि साबित होगी और इससे अमेरिका में बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। ट्रंप ने कहा, “बोइंग 150 विमानों के ऑर्डर की उम्मीद कर रहा था, लेकिन अब 200 विमानों का ऑर्डर मिलने जा रहा है।” पहले भी मिल चुके थे संकेतइससे पहले अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भी बोइंग को बड़े ऑर्डर मिलने के संकेत दिए थे। वहीं Kelly Ortberg भी ट्रंप के साथ चीन दौरे पर मौजूद हैं, जिससे इस संभावित समझौते को और बल मिला है।

थ्यूसीडाइड्स ट्रैप पर जिनपिंग का बड़ा संदेश, ट्रंप से बातचीत में टकराव टालने की अपील; क्या बदलेंगे अमेरिका-चीन रिश्ते?

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बीजिंग में हुई हालिया उच्च स्तरीय बैठक एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में आ गई है। इस मुलाकात में दोनों देशों के बीच व्यापार, सुरक्षा, तकनीक और ताइवान जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। लेकिन इस बैठक का सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला पहलू वह रहा, जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका के साथ संबंधों को लेकर ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ का जिक्र किया और स्पष्ट रूप से टकराव से बचने की अपील की। उनके इस बयान को अमेरिका-चीन रिश्तों की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। शी जिनपिंग ने बातचीत के दौरान सवाल उठाया कि क्या दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अमेरिका और चीन इस ऐतिहासिक “ट्रैप” से बाहर निकलकर सहयोग और स्थिरता का नया मॉडल विकसित कर सकती हैं? उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों देशों का साथ आना आवश्यक है, ताकि दुनिया में शांति और आर्थिक स्थिरता बनी रह सके। उनके बयान का अर्थ यह भी निकाला जा रहा है कि चीन टकराव के बजाय सहयोग की नीति को प्राथमिकता देना चाहता है, हालांकि इसके पीछे वैश्विक शक्ति संतुलन में अपनी भूमिका को मजबूत करने की रणनीति भी देखी जा रही है। ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ शब्द कोई नया राजनीतिक नारा नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है, जिसे हार्वर्ड विश्वविद्यालय के राजनीतिक वैज्ञानिक ग्राहम एलिसन ने आधुनिक राजनीति में लोकप्रिय बनाया था। यह सिद्धांत प्राचीन यूनानी इतिहासकार थ्यूसीडाइड्स के अध्ययन पर आधारित है, जिन्होंने लगभग ढाई हजार साल पहले एथेंस और स्पार्टा के बीच हुए पेलोपोनेसियन युद्ध का विश्लेषण किया था। थ्यूसीडाइड्स का मानना था कि जब कोई उभरती हुई शक्ति किसी स्थापित महाशक्ति को चुनौती देती है, तो दोनों के बीच तनाव बढ़ना लगभग स्वाभाविक हो जाता है और कई बार यह स्थिति युद्ध तक पहुंच जाती है। आधुनिक वैश्विक राजनीति में इस सिद्धांत को अमेरिका और चीन के रिश्तों से जोड़ा जाता है। पिछले कुछ दशकों में चीन ने आर्थिक, सैन्य और तकनीकी क्षेत्रों में तेजी से प्रगति की है, जिससे वैश्विक शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव आया है। दूसरी ओर अमेरिका लंबे समय से वैश्विक सुपरपावर की भूमिका में रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ती गई है। व्यापार युद्ध, टैरिफ विवाद, टेक्नोलॉजी पर प्रतिबंध, साइबर सुरक्षा, ताइवान मुद्दा और दक्षिण चीन सागर में सैन्य गतिविधियों ने इस तनाव को और गहरा किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और चीन के बीच मौजूदा हालात काफी हद तक ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ जैसी स्थिति को दर्शाते हैं, जहां एक उभरती हुई शक्ति और एक स्थापित महाशक्ति के बीच टकराव की संभावना बनी रहती है, भले ही कोई भी पक्ष युद्ध नहीं चाहता हो। इसी कारण शी जिनपिंग का यह बयान बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह केवल चेतावनी नहीं बल्कि कूटनीतिक संदेश भी है कि दोनों देशों को बातचीत और सहयोग का रास्ता अपनाना चाहिए। जिनपिंग ने पहले भी कई मौकों पर इस सिद्धांत का उल्लेख किया है और हमेशा यही संदेश दिया है कि अमेरिका और चीन यदि साझा हितों पर काम करें तो वैश्विक स्थिरता और विकास को बढ़ावा मिल सकता है। वहीं विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान चीन की उस रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है, जिसमें वह खुद को अमेरिका के बराबर एक वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। कुल मिलाकर यह बैठक और ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ पर दिया गया बयान केवल एक राजनीतिक चर्चा नहीं है, बल्कि यह आने वाले समय में अमेरिका-चीन संबंधों की दिशा तय करने वाला संकेत भी माना जा रहा है। दुनिया की दो सबसे बड़ी शक्तियों के बीच संतुलन, प्रतिस्पर्धा और सहयोग—इन तीनों के बीच आगे का रास्ता किस दिशा में जाएगा, यह वैश्विक राजनीति के लिए सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।

होर्मुज रहे हमेशा खुला … ट्रंप-जिनपिंग के बीच बनी सहमति, कई मुद्दों पर हुई विस्तृत चर्चा

बीजिंग। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Chinese President Xi Jinping) के बीच बीजिंग (Beijing) के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में हुई ऐतिहासिक शिखर बैठक में दोनों नेताओं ने वैश्विक स्थिरता और द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने का संकल्प लिया। इस मुलाकात में ताइवान, हॉर्मुज स्ट्रेट, ईरान का परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक साझेदारी जैसे अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। साल 2017 के बाद चीन में दोनों नेताओं की यह पहली आमने-सामने की बैठक थी। बैठक ऐसे समय में हुई जब विश्व युद्ध की आशंकाओं, ऊर्जा संकट और आर्थिक अनिश्चितता से जूझ रहा है। जिनपिंग ने ट्रंप का औपचारिक स्वागत करते हुए ताइवान मुद्दे पर सख्त चेतावनी दी। उन्होंने इसे चीन-अमेरिका संबंधों का सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। जिनपिंग ने चेतावनी देते हुए कहा कि ताइवान पर कोई भी गलत कदम दोनों देशों के बीच टकराव और युद्ध की स्थिति पैदा कर सकता है। उन्होंने पूछा कि क्या चीन और अमेरिका थ्यूसीडाइड्स ट्रैप से बच सकते हैं? और इसके बजाय बड़े देशों के बीच सहयोग का नया मॉडल बनाने का सुझाव दिया। हॉर्मुज और ईरान पर सहमतिदोनों नेताओं ने सहमति जताई कि विश्व के तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हॉर्मुज स्ट्रेट हमेशा खुला और सुरक्षित रहना चाहिए। जिनपिंग ने स्पष्ट किया कि चीन इस मार्ग पर किसी भी प्रकार की सैन्य तैनाती या टोल वसूली का विरोध करता है। दोनों पक्ष इस बात पर भी एकमत हुए कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाए। वहीं, ट्रंप ने बैठक को ‘बेहद सकारात्मक और सफल’ बताया। उन्होंने जिनपिंग को अपना दोस्त और महान नेता करार दिया। वाइट हाउस के अनुसार, दोनों नेताओं ने रिश्तों को और मजबूत बनाने, व्यापार सहयोग बढ़ाने, अमेरिकी कंपनियों के लिए चीनी बाजार खोलने और चीन से अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद बढ़ाने पर जोर दिया। बैठक में उद्योगपतियों ने भी लिया हिस्साजिनपिंग ने कहा कि चीन और अमेरिका को प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि भागीदार बनना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों को मिलकर काम करना चाहिए ताकि 2026 दोनों देशों के संबंधों में नया अध्याय साबित हो। दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाया जाए और रिश्तों को कभी बिगड़ने नहीं दिया जाए। बता दें कि इस बैठक में एलन मस्क, टिम कुक समेत अमेरिका के कई प्रमुख उद्योगपतियों ने भी हिस्सा लिया। बैठक के बाद आयोजित राजकीय भोज में ट्रंप ने जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन को सितंबर में वाइट हाउस आने का निमंत्रण दिया।

बीजिंग पहुंचे ट्रंप, आज शिखर सम्मेलन में होंगे शामिल… जिनपिंग से इन मुद्दों पर होगी चर्चा

बीजिंग। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) बुधवार को चीन (China) की राजधानी बीजिंग (Beijing) पहुंचे। यहां वे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Chinese President Xi Jinping) के साथ ईरान युद्ध, व्यापार और ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री जैसे अहम मुद्दों पर बहुप्रतीक्षित चर्चा करेंगे। शिखर सम्मेलन का मुख्य हिस्सा गुरुवार को होगा, जब दोनों नेता द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और एक औपचारिक भोज में शामिल होंगे। चीनी राजधानी में एयर फोर्स वन के उतरने के बाद चीन की ओर से ट्रंप का भव्य स्वागत किया गया। व्हाइट हाउस के अनुसार, राष्ट्रपति का स्वागत चीनी उपराष्ट्रपति हान झेंग, वॉशिंगटन में चीन के राजदूत शी फेंग, विदेश मंत्रालय के कार्यकारी उप मंत्री मा झाओक्सू और बीजिंग में अमेरिकी दूत डेविड परड्यू द्वारा किया गया। स्वागत समारोह में लगभग 300 चीनी युवा, एक सैन्य सम्मान गार्ड और एक सैन्य बैंड शामिल हुए। ट्रंप की चीन यात्रा के दौरान उनके साथ जाने वाले अमेरिकी व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल में टिम कुक और ऐलन मस्क सहित अमेरिका के 16 प्रमुख कारोबारी शामिल हैं। व्हाइट हाउस ने ट्रंप के वॉशिंगटन से रवाना होने से पहले इन शीर्ष व्यवसायियों की सूची जारी की। यात्रा के दौरान ट्रंप की शी जिनपिंग से मुलाकात होने की संभावना है, जिसमें आर्थिक सहयोग और व्यापारिक पहलों पर चर्चा की जाएगी। सूची जारी होने के कुछ समय बाद सिसको ने पुष्टि की कि उसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी अब इस यात्रा में शामिल नहीं होंगे। मस्क की भागीदारी ट्रंप और अरबपति कारोबारी के बीच संबंधों में फिर से आई नजदीकी को दिखाती है। मस्क पहले ट्रंप प्रशासन में वरिष्ठ सलाहकार रह चुके हैं और उन्होंने संघीय नौकरशाही में सुधार से जुड़े प्रयासों का नेतृत्व भी किया था, लेकिन पिछले वर्ष मतभेदों के बाद उन्होंने पद छोड़ दिया था। हाल के महीनों में दोनों के संबंधों में सुधार की खबरें सामने आई हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप चीन के साथ नये निवेश और व्यापार बोर्डों के गठन की संभावनाओं पर भी चर्चा कर सकते हैं। प्रतिनिधिमंडल में प्रौद्योगिकी, वित्त, एयरोस्पेस और विनिर्माण सहित अमेरिकी उद्योग जगत के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व शामिल है। प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख अधिकारियों में लैरी फिंक, स्टीफन श्वार्ज़मैन, केली ऑर्टबर्ग, ब्रायन साइक्स, जेन फ्रेजर, जिम एंडरसन, लैरी कल्प और डेविड सोलोमन शामिल हैं।

चीन दौरे से पहले ट्रंप का बड़ा बयान, कहा- ईरान संकट सुलझाने में शी जिनपिंग की जरूरत नहीं

नई दिल्ली । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज तीन दिवसीय चीन दौरे पर रवाना हो रहे हैं। इस यात्रा के दौरान उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ कई अहम वैश्विक मुद्दों पर द्विपक्षीय बातचीत होगी। हालांकि बीजिंग रवाना होने से पहले ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान संकट को हल करने के लिए उन्हें शी जिनपिंग की किसी मदद की जरूरत नहीं है। ट्रंप ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि ईरान को अब सही रास्ता चुनना होगा, नहीं तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। चीन दौरे पर हाई-प्रोफाइल डेलिगेशन13 से 15 मई तक चलने वाले इस दौरे में ट्रंप के साथ अमेरिका का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी चीन जा रहा है। इसमें उनके परिवार के सदस्य एरिक ट्रंप और लारा ट्रंप के अलावा कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। डेलिगेशन में विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी पीट हेगसेथ, और अन्य कूटनीतिक व सुरक्षा सलाहकार जैसे जेमीसन ग्रीर, स्टीफन मिलर, स्टीवन चेउंग, जेम्स ब्लेयर और अन्य प्रमुख नाम शामिल हैं। ईरान मुद्दा प्राथमिकता में नहींरॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि चीन में शी जिनपिंग के साथ उनकी बातचीत का मुख्य फोकस ईरान मुद्दा नहीं होगा, हालांकि इस पर चर्चा जरूर होगी। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर हो चुकी है और किसी भी समझौते का उद्देश्य अमेरिका और ईरान दोनों देशों के हित में होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि “हम सिर्फ अच्छी डील करेंगे।” रूस-यूक्रेन युद्ध पर दावाट्रंप ने यह भी दावा किया कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध जल्द ही समाप्त होने की दिशा में है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में वैश्विक हालात में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि चीन दौरे के दौरान ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात से वैश्विक राजनीति और खासकर ईरान संकट पर क्या नई दिशा निकलती है।

ट्रंप-शी जिनपिंग मुलाकात से बदलेगा वैश्विक शक्ति संतुलन? ईरान, रूस और रेयर अर्थ पर टिकी दुनिया की नजर

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा को लेकर वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है, जहां उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होने वाली है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब ईरान, रूस और रेयर अर्थ जैसे मुद्दों पर अमेरिका-चीन के बीच तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस दौरे में ईरान से जुड़ा तेल व्यापार, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और चीन द्वारा रूस को दिए जा रहे समर्थन जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा हो सकती है। इसके साथ ही अमेरिका की नजर चीन के रेयर अर्थ मिनरल्स पर भी है, जो वैश्विक तकनीकी उद्योग के लिए बेहद अहम माने जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और अमेरिका के बीच यह बातचीत केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका असर वैश्विक शक्ति संतुलन पर भी पड़ेगा। खासकर ईरान संकट और यूक्रेन युद्ध जैसे मुद्दे इस बैठक को और जटिल बना रहे हैं। भारत के दृष्टिकोण से यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अमेरिका और चीन दोनों ही उसकी रणनीतिक साझेदारी और सुरक्षा नीति पर अप्रत्यक्ष प्रभाव डालते हैं। दोनों देशों के रिश्तों में किसी भी बदलाव का असर भारत की कूटनीति और क्षेत्रीय रणनीति पर साफ दिखाई दे सकता है। कुल मिलाकर, ट्रंप-जिनपिंग मुलाकात सिर्फ एक कूटनीतिक बैठक नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति के कई बड़े समीकरणों को प्रभावित करने वाला अहम घटनाक्रम माना जा रहा है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।

चीन में भ्रष्टाचार पर ‘ड्रैगन’ का बड़ा वार, दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को मौत की सजा; रिश्वतखोरी ने छीनी सत्ता और सम्मान

नई दिल्ली। चीन में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को बड़ा झटका लगा है। चीनी सैन्य अदालत ने पूर्व रक्षा मंत्री वेई फेंगहे और ली शांगफू को भ्रष्टाचार के मामले में मौत की सजा सुनाई है। हालांकि दोनों को दो साल की मोहलत भी दी गई है। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक वेई फेंगहे को रिश्वत लेने का दोषी पाया गया, जबकि ली शांगफू पर रिश्वत लेने और देने दोनों के आरोप साबित हुए। दोनों नेताओं को पहले ही 2024 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से निष्कासित किया जा चुका था। शी जिनपिंग के करीबी रहे दोनों नेतारिपोर्ट्स के अनुसार दोनों पूर्व मंत्री चीन की शक्तिशाली केंद्रीय सैन्य आयोग के सदस्य रह चुके हैं। वेई फेंगहे ने 2018 से 2023 तक रक्षा मंत्री के तौर पर काम किया था, जबकि ली शांगफू ने उनके बाद यह जिम्मेदारी संभाली थी। दोनों नेताओं का संबंध चीन की रणनीतिक पीपल्स लिबरेशन आर्मी रॉकेट फ़ोर्स से भी रहा है, जिसे राष्ट्रपति जिनपिंग के सैन्य सुधार कार्यक्रम के तहत मजबूत किया गया था। भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार कार्रवाई2012 में सत्ता संभालने के बाद से शी जिनपिंग लगातार भ्रष्टाचार विरोधी अभियान चला रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस अभियान के तहत अब तक लाखों अधिकारियों और कई वरिष्ठ सैन्य अफसरों पर कार्रवाई की जा चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की सेना और कम्युनिस्ट पार्टी में बढ़ते भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए यह कार्रवाई एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।

अमेरिका-चीन हाई-लेवल डिप्लोमेसी पर संकट की छाया: ट्रम्प-जिनपिंग मीटिंग टली, होर्मुज तनाव से वैश्विक कूटनीति पर असर

नई दिल्ली। अमेरिका और चीन के बीच होने वाली संभावित उच्च स्तरीय बैठक को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान-हॉर्मुज संकट के बीच यह अहम मुलाकात फिलहाल टाल दी गई है। यह बैठक पहले अप्रैल में प्रस्तावित थी। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping के बीच यह मुलाकात दोनों देशों के रिश्तों में स्थिरता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही थी, लेकिन हालात बदलने के कारण इसे स्थगित कर दिया गया। चीन के लिए क्यों अहम है यह बैठक?चीन इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण अवसर मान रहा है क्योंकि यह दुनिया की दो सबसे बड़ी आर्थिक और सैन्य शक्तियों के बीच लंबे समय तक स्थिर संबंध बनाने की दिशा तय कर सकती है। लेकिन बीजिंग के अंदर इस पर एकमत नहीं है। सरकार के भीतर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं कि मौजूदा वैश्विक तनाव के बीच आगे रणनीति क्या होनी चाहिए। सबसे बड़ी चिंता: होर्मुज स्ट्रेटसबसे गंभीर मुद्दा Strait of Hormuz को लेकर है। यह वही समुद्री मार्ग है जहां से चीन अपनी लगभग एक-तिहाई तेल और गैस आपूर्ति पूरी करता है।अगर इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है या मार्ग बाधित होता है, तो इसका सीधा असर चीन की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ेगा और अमेरिका-चीन वार्ता भी प्रभावित हो सकती है। ट्रम्प की यात्रा पर भी असरचीनी अधिकारियों के अनुसार, अगर मिडिल ईस्ट संकट जारी रहता है तो ट्रम्प की संभावित चीन यात्रा सामान्य राजनयिक दौरे जैसी नहीं रह जाएगी।एक चीनी अधिकारी के मुताबिक, यह दौरा केवल द्विपक्षीय संबंधों का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन और भविष्य की अंतरराष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है। बड़ा संकेत क्या है?विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बैठक सिर्फ एक डिप्लोमैटिक इवेंट नहीं बल्कि आने वाले वर्षों में अमेरिका-चीन रिश्तों की दिशा तय करने वाला मोड़ हो सकती है—चाहे भविष्य में किसी भी देश में सत्ता परिवर्तन क्यों न हो।