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तेलंगाना ने केंद्र से मांगी 5,000 करोड़ की विशेष वित्तीय सहायता, यंग इंडिया स्कूल परियोजना के लिए दी मांग


नई दिल्ली।
तेलंगाना सरकार ने केंद्र से विशेष सहायता योजना (एसएएससीआई) के तहत अतिरिक्त 5,000 करोड़ रुपए की मांग की है, ताकि राज्य में पूंजीगत निवेश और विकास परियोजनाओं को गति दी जा सके। उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने इस संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्री से नई दिल्ली में मुलाकात की और राज्य की आर्थिक, शैक्षणिक और मानव संसाधन विकास संबंधी जरूरतों पर विस्तार से चर्चा की। इस बैठक में वित्तीय सहायता की आवश्यकता, विशेष रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में किए जा रहे बड़े निवेशों की व्याख्या की गई।

उपमुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री को बताया कि तेलंगाना में शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे निवेश, विशेषकर यंग इंडिया इंटीग्रेटेड रेजिडेंशियल स्कूल्स (वाईआईआईआरएस) परियोजना, राज्य की सामाजिक और शैक्षणिक संरचना में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे। इस परियोजना का कुल बजट 30,000 करोड़ रुपए है और यह लाखों बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पोषण संबंधी सुविधाएं सुनिश्चित करेगी। उन्होंने आर्थिक मामलों के विभाग से इस परियोजना को एफआरबीएम सीमा से छूट देने की अपील भी की, ताकि दीर्घकालिक मानव पूंजी निवेश पर वित्तीय प्रतिबंध न आए।

विक्रमार्क ने कहा कि इस पहल से राज्य के वंचित और पिछड़े वर्गों के बच्चों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा और पौष्टिक भोजन मिलेगा, जो उन्हें सशक्त बनाएगा और राज्य की जनसांख्यिकीय क्षमता को मजबूत करेगा। प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय वित्त मंत्री को ज्ञापन सौंपकर एसएएससीआई योजना के तहत अतिरिक्त वित्तीय सहायता की आवश्यकता और इसके महत्व को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया। उन्होंने यह भी बताया कि तेलंगाना की आबादी में पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोग बहुसंख्यक हैं, और उनके सशक्तिकरण के लिए यह योजना निर्णायक साबित होगी।

केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ हुई इस बैठक में राज्य के कृषि और मानव संसाधन विकास से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। कृषि मंत्री तुम्माला नागेश्वर राव और अन्य प्रतिनिधियों ने राज्य में कृषि, ग्रामीण विकास और शिक्षा से जुड़े बड़े निवेशों के महत्व को रेखांकित करते हुए वित्तीय जिम्मेदारी और बजट प्रबंधन अधिनियम के तहत छूट की मांग की। उन्होंने कहा कि इस अतिरिक्त वित्तीय सहायता के बिना राज्य की दीर्घकालिक विकास योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं और मानव पूंजी में निवेश की गति धीमी पड़ सकती है।

पिछले वर्ष भी इसी प्रकार की बैठक में मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने यंग इंडिया प्रोजेक्ट के लिए विशेष वित्तीय सहायता और एफआरबीएम छूट की मांग की थी, और अब इस मांग को दोबारा केंद्र के समक्ष रखा गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस योजना के कार्यान्वयन से तेलंगाना के पिछड़े और वंचित वर्गों को शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास के क्षेत्र में स्थायी लाभ मिलेगा। इसके साथ ही राज्य की आर्थिक क्षमता बढ़ेगी और दीर्घकालिक मानव संसाधन विकास में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

इस बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री को यह स्पष्ट किया गया कि तेलंगाना की अधिकांश आबादी सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों से आती है। इस आंकड़े के अनुसार, राज्य की आबादी का 56.33 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग, 17.43 प्रतिशत अनुसूचित जाति और 10.45 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति से संबंधित है। इस सामाजिक संरचना को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार ने एसएएससीआई योजना के तहत अतिरिक्त 5,000 करोड़ रुपए की मांग की है, ताकि शैक्षणिक और सामाजिक सुधारों को समय पर लागू किया जा सके और राज्य में समग्र विकास को बढ़ावा दिया जा सके।

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