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शिप्रा शुद्धिकरण की मांग को लेकर अनशन: प्रशासन ने कराया समाप्त, आंदोलनकारियों ने दिया 7 दिन का अल्टीमेटम


इंदौर। इंदौर में मंगलवार को शिप्रा नदी के शुद्धिकरण और संरक्षण की मांग को लेकर एक बड़ा आंदोलन शुरू होते-होते टल गया। मालवा रक्षा अनुष्ठान के संयोजक और अधिवक्ता आचार्य सत्यम सत्यनारायण पुरोहित ने नृसिंह घाट पर आमरण अनशन की घोषणा की थी, लेकिन प्रशासनिक हस्तक्षेप और बातचीत के बाद उन्होंने फिलहाल अपना अनशन स्थगित कर दिया।

आचार्य सत्यम मंगलवार सुबह 10 बजे नृसिंह घाट पर अनशन शुरू करने पहुंचे थे। उनकी मांग थी कि शिप्रा नदी के संरक्षण, स्वच्छता और पर्यावरणीय नियमों के पालन को लेकर तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं। जैसे ही इसकी जानकारी प्रशासन और पुलिस को मिली, महाकाल थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई।

थाना प्रभारी गगन बादल और एसआई चंद्रभान सिंह ने आचार्य से बातचीत कर उन्हें शांत करने का प्रयास किया। कुछ ही देर बाद एसडीएम एलेन गर्ग भी मौके पर पहुंचे और आंदोलनकारी की सभी मांगों को गंभीरता से सुना। नगर निगम के उपायुक्त संतोष टैगोर ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और बातचीत की।

लगभग एक घंटे तक चली समझाइश और चर्चा के बाद प्रशासन ने आश्वासन दिया कि आचार्य की मांगों पर शीघ्र कार्रवाई की जाएगी और संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे। इसके बाद आचार्य सत्यम ने अपना अनशन फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया, लेकिन उन्होंने प्रशासन को 7 दिनों का अल्टीमेटम दिया है।

आचार्य ने आरोप लगाया कि शिप्रा नदी के किनारे अब तक पर्याप्त पौधारोपण नहीं किया गया है, जबकि यह कार्य पर्यावरण संतुलन के लिए आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि 29 किलोमीटर घाट निर्माण के दौरान निकली मिट्टी को सीधे नदी में डाल दिया गया, जिससे नदी की स्थिति और खराब हुई है।

इसके अलावा उन्होंने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के नियमों के पालन पर भी सवाल उठाए और कहा कि कई निर्देशों का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है। उनके अनुसार, यदि प्रशासन ने सात दिन के भीतर ठोस कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन फिर से शुरू किया जाएगा।

प्रशासन ने इस मामले में ज्ञापन लेकर कार्रवाई का भरोसा दिलाया है और कहा है कि सभी बिंदुओं पर जांच कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल मौके पर शांति बनी हुई है, लेकिन शिप्रा नदी संरक्षण को लेकर उठे सवाल एक बार फिर चर्चा में हैं।

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