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अजाक्स में वर्चस्व की लड़ाई तेज, मामला RSS प्रमुख Mohan Bhagwat तक पहुंचा


नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ (अजाक्स) के भीतर चल रही वर्चस्व की लड़ाई अब बड़ा विवाद बन चुकी है। यह टकराव इतना बढ़ गया है कि मामला मोहन भागवत तक पहुंच गया है। संगठन के भीतर दो गुट आमने-सामने हैं और एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं।
संघ प्रमुख से हस्तक्षेप की मांग
पूर्व अपर मुख्य सचिव जेएन कंसोटिया के समर्थक गुट ने संघ प्रमुख को लिखित शिकायत भेजी है। संगठन महामंत्री गौतम पाटिल ने आरोप लगाया कि कुछ लोग बाहरी हस्तक्षेप के जरिए अजाक्स पर नियंत्रण करने की कोशिश कर रहे हैं। खासतौर पर सुरेन्द्र मिश्रा और मुकेश मौर्य पर संगठन में दखल देने के आरोप लगाए गए हैं।
सदस्यता और गबन के आरोप
शिकायत में मुकेश मौर्य पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी लगाए गए हैं। दावा किया गया कि करीब ₹17.95 लाख की सदस्यता राशि में गड़बड़ी हुई, जिसमें से ₹12.95 लाख का हिसाब नहीं दिया गया। यह भी कहा गया कि नियमों के अनुसार केवल सरकारी कर्मचारी ही सदस्य बन सकते हैं, जबकि मौर्य एक निजी संस्थान से जुड़े बताए गए हैं।
फर्जी कार्यकारिणी और कब्जे का आरोप
गौतम पाटिल ने आरोप लगाया कि जुलाई 2023 में फर्जी बैठकों के आधार पर एक नकली कार्यकारिणी तैयार कर उसे पंजीयन के लिए पेश किया गया। साथ ही, अजाक्स भवन पर कब्जा करने की कोशिश का भी आरोप लगाया गया है। शिकायत में इसे धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात जैसी गंभीर श्रेणी का मामला बताया गया है।
मौर्य का पलटवार
दूसरी ओर मुकेश मौर्य ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि कंसोटिया और उनके समर्थक ट्रस्ट बनाकर संगठन की संपत्ति हड़पना चाहते हैं। मौर्य के अनुसार, उनके प्रांताध्यक्ष बनने के बाद ही विवाद खड़ा किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि वे विरोधी गुट के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएंगे और आरोप लगाया कि संगठन कार्यालय को घेरकर दबाव बनाया जा रहा है।
बढ़ता विवाद, सियासी रंग
इस पूरे विवाद ने अब राजनीतिक और सामाजिक रंग ले लिया है। अजाक्स जैसे बड़े कर्मचारी संगठन में आंतरिक संघर्ष से न सिर्फ संगठन की साख प्रभावित हो रही है, बल्कि प्रदेश की सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी इसका असर पड़ सकता है।

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