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सीनियर खिलाड़ियों के समर्थन में उतरा भारतीय क्रिकेट टीम प्रशासन, गेंदबाजी कोच ने कहा- सिर्फ एक युवा प्रतिभा के आने से रातों-रात नहीं बदला जाएगा शीर्ष क्रम का बल्लेबाजी संतुलन

नई दिल्ली । भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाले दूसरे टी20 मुकाबले से पहले मैनचेस्टर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय टीम के गेंदबाजी कोच मोर्ने मॉर्कल ने टीम के शीर्ष क्रम को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक रुख स्पष्ट किया है। पिछले कुछ समय से 15 वर्षीय युवा बल्लेबाजी सनसनी वैभव सूर्यवंशी के अंतरराष्ट्रीय पदार्पण को लेकर क्रिकेट जगत में भारी उत्सुकता देखी जा रही थी, लेकिन टीम प्रबंधन ने साफ कर दिया है कि किसी एक नई प्रतिभा के आने मात्र से मौजूदा स्थापित ओपनिंग जोड़ी को तुरंत टीम से बाहर नहीं किया जाएगा। टीम प्रशासन का मानना है कि बड़े मंच पर देश को जीत दिलाने वाले खिलाड़ियों को कुछ खराब पारियों के आधार पर टीम से ड्रॉप करना सही रणनीति नहीं है।

वर्तमान दौरे पर भारतीय सलामी जोड़ी के दोनों बल्लेबाजों का प्रदर्शन काफी भिन्न रहा है। जहां एक ओर अभिषेक शर्मा ने अपनी पिछली तीन पारियों में एक अर्धशतक और 49 रनों की उपयोगी पारी खेलकर अपनी फॉर्म का परिचय दिया है, वहीं दूसरी ओर विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन लगातार संघर्ष करते नजर आए हैं। सैमसन के बल्ले से पिछली तीन पारियों में क्रमशः पांच, शून्य और एक रन की बेहद संक्षिप्त पारियां निकली हैं। इस असंतुलित फॉर्म के बावजूद कोचिंग स्टाफ ने स्पष्ट किया है कि प्रबंधन किसी भी खिलाड़ी की योग्यता का आकलन महज तीन मैचों के प्रदर्शन के आधार पर नहीं करता है, बल्कि उनके पिछले योगदान को पूरा महत्व दिया जाता है।

गेंदबाजी कोच ने अनुभवी खिलाड़ियों का बचाव करते हुए कहा कि अभिषेक शर्मा पूर्व में टी20 क्रिकेट के शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों में शुमार रह चुके हैं और संजू सैमसन विश्व कप विजेता टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य रहे हैं। इसके साथ ही सैमसन का पिछला आईपीएल सीजन भी बेहद शानदार रहा था। ऐसी स्थिति में कोचिंग स्टाफ और प्रबंधन की यह सामूहिक जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने खिलाड़ियों के मुश्किल दौर में उनके साथ खड़े रहें और टीम के भीतर एक सुरक्षित तथा सकारात्मक सांस्कृतिक माहौल का निर्माण करें। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि एक अत्यंत युवा खिलाड़ी लगातार टीम का दरवाजा खटखटा रहा है, जो भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिहाज से काफी सुखद पहलू है।

टीम प्रबंधन ने रणनीतिक तौर पर यह भी साफ कर दिया है कि केवल वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में जगह देने के उद्देश्य से अन्य बल्लेबाजों की बल्लेबाजी पोजीशन में कोई फेरबदल नहीं किया जाएगा। कोच के अनुसार, किसी भी खिलाड़ी को उसकी स्वाभाविक भूमिका और पसंदीदा पोजीशन से हटाना पूरी टीम के रणनीतिक संतुलन को बिगाड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कठिन परिस्थितियों में मैच जिताने वाले अनुभवी खिलाड़ियों पर भरोसा बनाए रखना पहली प्राथमिकता है, जिसके बाद ही परिस्थितियों के अनुरूप सर्वश्रेष्ठ शीर्ष क्रम का निर्धारण किया जाएगा।

भले ही मोर्ने मॉर्कल ने वैभव सूर्यवंशी के आधिकारिक डेब्यू की किसी निश्चित तारीख या मैच का खुलासा नहीं किया, लेकिन उन्होंने इस 15 वर्षीय खिलाड़ी की तकनीकी क्षमता और परिपक्वता की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय ड्रेसिंग रूम के दबाव को झेलना और वहां सहज रहना किसी भी खिलाड़ी के लिए एक बड़ी चुनौती होती है। वैभव ने अपने आत्मविश्वास और बेहतरीन व्यवहार से बेहद कम समय में सीनियर खिलाड़ियों के साथ तालमेल बिठा लिया है। अंतरराष्ट्रीय नेट सेशन्स के दौरान इस युवा खिलाड़ी ने अपनी बल्लेबाजी तकनीक से पूरे कोचिंग स्टाफ को बेहद प्रभावित किया है।

शीर्ष क्रम के अलावा गेंदबाजी कोच ने भारतीय टीम के युवा गेंदबाजी संसाधनों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने युवा तेज गेंदबाज प्रिंस यादव की प्रतिभा को रेखांकित करते हुए कहा कि घरेलू क्रिकेट और नेट गेंदबाज के रूप में उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव की परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की प्रिंस की क्षमता टीम के लिए उपयोगी साबित हो रही है। इसके साथ ही चोट के बाद टीम में वापसी करने वाले तेज गेंदबाज हर्षित राणा की रफ्तार और आक्रामकता को भी भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण के लिए एक बेहद सकारात्मक और राहत देने वाला संकेत बताया गया है।

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